
आईआईटीएफ 2025 में झारखंड का माइनिंग टूरिज्म मॉडल बना राष्ट्रीय आकर्षण
उदित वाणी, नई दिल्ली : 44वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले (आईआईटीएफ) 2025 में इस बार झारखंड पवेलियन केंद्रबिंदु बना रहा, जहाँ राज्य की अनूठी “माइनिंग टूरिज्म” पहल को दर्शकों ने अत्यंत सराहा. देशभर से आए आगंतुकों ने झारखंड की खनन, प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन स्थलों के मॉडल व वर्चुअल रियलिटी प्रस्तुतियों का जीवंत अनुभव लिया. झारखंड सरकार और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के संयुक्त प्रयास से शुरू हुई माइनिंग टूरिज्म योजना के तहत अब उत्तर उरीमारी ओपनकास्ट माइंस जैसे खदानों में सुरक्षित भ्रमण संभव है, जिसमें प्रशिक्षित गाइड खनन क्षेत्र, मशीनों और पर्यावरणीय प्रबंधन की जानकारी देते हैं. यह पहल देश में पहली बार किसी राज्य द्वारा शुरू की गई है, जिससे पर्यटक को कोयला खदानों, खनन तकनीक और राज्य की औद्योगिक ताकत देखने का अवसर मिल रहा है.

झारखंड टूरिज्म पवेलियन में स्थापित वर्चुअल रियलिटी सर्किल के माध्यम से पतरातू वैली, नेतरहाट, सारंडा फॉरेस्ट, बेतला नेशनल पार्क, चांडिल डैम और पारसनाथ के पर्यटन स्थलों की दृश्य प्रस्तुति दर्शकों को बेहद पसंद आई. राज्य की आध्यात्मिक विरासत भी विशेष आकर्षण रही, जिसमें बैद्यनाथ धाम, शक्तिपीठ हृदयपीठ और श्री बंशीधर मंदिर में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की स्वर्ण प्रतिमा को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया.
पतरातू वैली की हरियाली, झील, बांध और वहां की नाव विहार जैसी गतिविधियाँ दर्शको को झारखंड के प्राकृतिक पर्यटन गंतव्यों की ओर आकर्षित कर रही हैं. राज्य में विकसित हो रहे नए व्यू पॉइंट, कैफेटेरिया और मनोरंजन सुविधाएँ इस क्षेत्र को परिवार और साहसिक पर्यटन के लिए सर्वोत्तम बनाती हैं. आईआईटीएफ में पहली बार दर्शकों को झारखंड के खनन पर्यटन के साथ धार्मिक व प्रकृति पर्यटन का अद्वितीय संगम देखने को मिला, जिससे झारखंड की एक नई सकारात्मक पहचान राष्ट्रीय मंच पर स्थापित हो रही है.

