
* कंपनी की बैंक गारंटी 41 लाख व 2.90 करोड़ के बिल 7 प्रतिशत ब्याज के साथ 4 सप्ताह में देने का भी दिया आदेश
उदित वाणी, रांची : झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने जेएसएससी के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है. खंडपीठ द्वारा झारखंड डिप्लोमा स्तरीय संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा के पेपरलीक के मामले में आरोपी कंपनी विंसेस टेक्नोलॉजी को ब्लैक लिस्ट करने के जेएसएससी के आदेश को रद्य कर दिया. इसके साथ ही खंडपीठ ने जेएसएससी पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. अदालत ने कंपनी की बैंक गारंटी 41 लाख और 2.90 करोड़ के बिल को भी सात प्रतिशत ब्याज के साथ चार सप्ताह में देने का आदेश दिया है.
ज्ञात हो कि यह परीक्षा 3 जुलाई 2022 को रांची, बोकारो और पूर्वी सिंहभूम जिले में आयोजित की गई थी और पेपरलीक होने की पुलिस जांच के बाद 25 जुलाई 2022 को परीक्षा रद्य कर दी गई थी. मामले में परीक्षा आयोजित करनेवाली एजेंसी विंसेंस टेक्नोलॉजी ने हाईकोर्ट के डबल बेंच में अपील याचिका दायर की थी और जेएसएससी द्वारा डिप्लोमा संयुक्त परीक्षा 2020-21 को आयोजित परीक्षा में पेपरलीक होने का हवाला देकर कंपनी को डिबार घोषित करने और काली सूची में डालने के आदेश को चुनौती दी गई थी. अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि सिर्फ पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर किसी कंपनी को आजीवन ब्लैक लिस्ट नहीं किया जा सकता है.
जबकि जेएसएससी द्वारा सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया था कि पुलिस रिपोर्ट को देखते हुए कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया गया है. पुलिस रिपोर्ट में कंपनी की संलिप्तता की आशंका जताई गई थी. जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार सिंह द्वारा कहा गया कि कंपनी ने जो परीक्षा आयोजित किया था. उसे पेपरलीक की वजह से आयोग को रद्य करना पड़ा है. इसलिए कंपनी के बिल का भुगतान नहीं किया जा सकता है.
इस पर कंपनी की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार और विकल्प गुप्ता ने अदालत को बताया कि एजेंसी ने सीलबंद पेपर सभी परीक्षा केन्द्रों पर पहुंचाया था. ऐसे में पेपरलीक मामले में कंपनी की किसी तरह की कोई संलिप्तता नहीं है. मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी. लेकिन अभी तक चार्जशीट भी दाखिल नहीं किया गया है. पुलिस ने 2024 में रिपोर्ट दी थी. जिसमें यह लिखा है कि कंपनी के खिलाफ जो आरोप लगा था. उसमें सत्यता नहीं है. इसके बावजूद जेएसएससी की ओर से कंपनी के बिल का भुगतान नहीं किया जा रहा है.

