
उदित वाणी, रांची : झारखंड राज्य क्रिकेट संघ [जेएससीए] में अब नया बखेड़ा शुरू हो गया है. बर्ष 2025-28 सत्र के लिए 18 मई को हुए जेएससीए चुनाव को उपाध्यक्ष के प्रत्याशी रहे नंदू पटेल ने झारखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी है और चुनाव को रद्य करने का अदालत से आग्रह किया है. नंदू पटेल ने याचिका दायर कर आरोप लगाया कि चुनाव में डाले गये 107 वोट अवैध है. उक्त वोट जेएससीए बायलॉज और न्याय के नैसर्गिक सिद्धांतों का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जेएससीए चुनाव में कमिटी ऑफ मैनेजमेंट द्वारा उन 107 सदस्यों को अपने अधिकार क्षेत्र से परे जाकर सदस्यता बहाल की और वोट डालने का अधिकार दिया गया. याचिका में बताया गया कि जेएससीए की धारा 5-ए [3] में यह स्पष्ट किया गया है कि लगातार 5 बार्षिक आमसभा से अनुपस्थित रहनेवाले सदस्य अवैध होंगे और वोट डालने का अधिकार नहीं होगा. परंतु ऐसे 31 सदस्यों को वोट डालने का अधिकार दिया गया है. वहीं धारा-2 [डी] के तहत राज्य के बाहर से निवास करनेवाले सदस्यों को भी अवैध माना गया है. इसके तहत आरोप लगाया गया है कि 15 अगस्त 2004 को जब बिहार क्रिकेट एसोसिएशन [बीसीए] का नाम जेएससीए किया गया उसी वक्त निर्णय हुआ था कि कार्यक्षेत्र झारखंड तक ही सीमित रहेगा. फिर बर्ष 2004 के बाद झारखंड से बाहर रहनेवाले लगभग दो दर्जन लोगों को सदस्यता दी गई.
न्यूनतम उम्र सीमा 18 साल तय की गई थी. लेकिन एक सदस्य 16 साल की उम्र में ही सदस्य बन गया. ऐसे सभी सदस्यों की सदस्यता को चुनौती दी गई है और समस्त चुनावी प्रक्रिया को रद्द करते हुए नियमानुकूल निर्विवाद वोटर लिस्ट तैयार कर फिर से निष्पक्ष चुनाव कराने का आदेश देने का आग्रह किया है. ज्ञात हो कि 18 मई को हुए जेएससीए चुनाव में अजय नाथ शहदेव ग्रुप द्वारा क्लीन स्विप किया गया है. जिसमें अजय नाथ शहदेव अध्यक्ष, संजय पांडेय उपाध्यक्ष, सौरव तिवारी सचिव, अमिताभ घोष कोषाध्यक्ष, शाहबाज नदीम संयुक्त सचिव और अन्य सभी पदों पर भी अजय गुट के प्रत्याशी निर्वाचित घोषित किये गये हैं. जबकि नंदू पटेल विरोधी गुट से उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी थे. उन्होंने याचिका दायर करने के सवाल पर कहा कि जेएससीए में गलत को सुधारने के लिए उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला लिया था. लेकिन जिस तरह से बायलॉज का उल्लंघन कर चुनाव कराया गया. इसे स्वीकार करना गलत को सही बताने जैसा है.

