
पेसा सिर्फ एक कानून नहीं, इसके साथ हमारी भावनाएं
उदित वाणी, रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि पेसा नियमावली के तहत पंचायतों को जो अधिकार प्राप्त होंगे. उसका ईमानदारी से पालन और क्रियान्वयन होगा, तभी यह सफल होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि जल, जंगल व जमीन की रक्षा अपनी सभ्यता-संस्कृति और पहचान को बरकरार रखने एवं पारंपरिक स्थानीय स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करना हमारी सरकार की शुरू से प्राथमिकता रही है. उन्होंने कहा कि अब हमारे पारंपरिक ग्राम प्रधानों और प्रमुखों को उनका हक-अधिकार मिलने जा रहा है.
यह अनुसूचित जनजातीय क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगा. उन्होंने कहा कि पेसा सिर्फ एक कानून नहीं है. इसके साथ हमारी भावनाएं जुड़ी हुई है. लंबे समय से पेसा कानून की मांग हो रही थी. इसमें अड़चनें भी आती रही, लेकिन जन प्रतिनिधियों, आमजनों तथा सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों से प्राप्त विचारों एवं सुझावों के आधार पर इसका ड्राफ्ट तैयार किया गया. मुख्यमंत्री पेसा नियमावली को राज्य मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद बुधवार को राज्य के अनुसूचित जनजातीय क्षेत्र से आए पारंपरिक प्रधानों, प्रमुखों व मुखिया के साथ-साथ सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात के दौरान उक्त बातें कही.
वहीं सीएम आवासीय परिसर में जनजातीय समाज के लोगों ने जमकर जश्न मनाया तथा मुख्यमंत्री सोरेन को पेसा नियमावली लागू करने की दिशा में लिए गए निर्णायक फैसले के लिए उनके प्रति आभार जताया. मुख्यमंत्री ने भी नगाड़ा बजाकर अपनी खुशियां व्यक्त किया. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज पेसा दिवस भी मना रहे हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पेसा नियमावली को अंतिम मुकाम तक पहुंचाने का जो लक्ष्य निर्धारित किया था. वह साकार हो रहा है.
पेसा कानून धरातल पर उतरने के लिए तैयार है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार जो नियम-कानून बनाती है. उसमें विसंगतियां नहीं होती है. लेकिन उसके क्रियान्वयन में गड़बड़ी होने से सुखद परिणाम नहीं मिल पाता है. उन्होंने कहा कि झारखंड का पेसा नियमावली पूरे देश के लिए नजीर बनेगा. उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्र में पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को सशक्त बनाने का हमारा जो लक्ष्य था. वह पूरा होने जा रहा है.
अब जनजातीय समुदायों को अपनी परंपराओं, संस्कृति, भूमि, जल और प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल का हक-अधिकार मिल सकेगा. इस नियमावली के लागू होने से अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभायें शक्तिशाली होंगी और निर्णय लेने का अधिकार भी प्राप्त होगा. मुख्यमंत्री ने पेसा नियमावली का ड्राफ्ट तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वालों को धन्यवाद भी दिया. सरायकेला-खरसावां जिले के मुखिया दिवाकर सोरेन, पूर्वी सिंहभूम जिले के केराडूंगरी पंचायत के प्रधान कान्हू मुर्मू समेत कई ग्राम प्रधानों प्रमुखों, व मुखिया ने भी अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि पेसा नियमावली से राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था को एक नया मुकाम मिलेगा.
इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय, विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन, पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार और पंचायती राज निदेशक श्रीमती राजेश्वरी बी के अलावा राज्य के अलग-अलग क्षेत्र से ग्राम प्रधान, प्रमुख, मुखिया और पेसा मोबलाइजर्स मौजूद थे.

