
उदित वाणी, जमशेदपुरः झारखंड उच्च न्यायालय में शुक्रवार 11 नवम्बर को केबुल मामले में सुनवाई हुई. माननीय न्यायाधीश गौतम चौधरी की बेंच में इंकैब कर्मचारियों के प्रतिनिधि भगवती सिंह द्वारा एडजुटिकेटिंग ऑथोरिटी, एनसीएलटी, कोलकाता द्वारा अपने 07.02.2020 के आदेश द्वारा इंकैब की जमीन को टाटा स्टील की लीज करार देने के खिलाफ दायर रिव्यू पेटिशन पर सुनवाई की गई.
कर्मचारियों के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि टाटा स्टील ने इंकैब को एक पत्र के माध्यम से पहली बार यह दावा किया कि इंकैब की जमशेदपुर की 177 एकड़ जमीन टाटा स्टील की सबलीज है जो 1920 से 1924 के एक डीड द्वारा दी गयी थी.
99 वर्ष 2019 में समाप्त हो गया. अतः इंकैब, टाटा स्टील की तथाकथित जमीन वापस कर दें. टाटा स्टील की इस चिठ्ठी से यह स्पष्ट था कि एक तो टाटा स्टील माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 06.01.2016 में दिए गये आदेश और माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 01.07.2016 को दिए गये आदेश को दरकिनार कर इंकैब का अधिग्रहण करने से मुकर गयी थी जबकि टाटा स्टील खुद ही वायफर में बीडर बनी और अब इंकैब की 177 एकड़ जमीन हड़पने की कोशिश कर रही है.टाटा स्टील इंकैब के पुनर्रूद्धार में बाधा न डालें.
इसके लिए भगवती सिंह ने एडजुटिकेटिंग अथॉरिटी, एनसीएलटी, कोलकाता में एक आवेदन देकर यह प्रार्थना की कि वे झारखंड सरकार को रिजोल्यूशन प्रक्रिया में अभियोग चलाकर उससे इंकैब की जमीन की कानूनी स्थिति के बारे में बताने के लिए हलफनामा दायर करने को कहा जाय.
अधिवक्ता ने बताया कि उनके इस आवेदन का टाटा स्टील ने यह कहते हुए प्रतिवाद किया कि एडजुटिकेटिंग अथॉरिटी, एनसीएलटी, कोलकाता का यह क्षेत्राधिकार नहीं है कि वह जमीन की विवाद का निर्णय करे. अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने अदालत का ध्यानाकर्षण कराते हुए बताया कि माननीय एडजुटिकेटिंग अथॉरिटी, एनसीएलटी, कोलकाता ने अपने आदेश के पारा 7 में टाटा स्टील की उपरोक्त दलील स्वीकारते हुए कहा कि जमीन का मामला उनके क्षेत्राधिकार में नहीं है.
टाटा स्टील के साथ मिले हुए हैं आरपी पंकज टिबरेवाल
अधिवक्ता अखिलेश ने अदालत को बताया कि माननीय एपीलेट अधॉरिटी, एनसीएलएटी, दिल्ली ने हलांकि 07.02.2020 के एडजुटिकेटिंग अथॉरिटी, एनसीएलटी, कोलकाता के आदेश को निरस्त कर दिया है.
पर इंकैब के 177 एकड़ जमीन को टाटा स्टील का लीज घोषित करने के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है. अधिवक्ता ने माननीय अदालत को आगे बताया कि टाटा स्टील इसका फायदा उठाना चाहती है और इसलिए रिजोल्यूशन प्रोफेशनल ने फर्जीवाड़ा करते हुए एडजुटिकेटिंग अथॉरिटी, एनसीएलटी, कोलकाता के पास एक आवेदन दायर किया है जिसमें प्रार्थना की है कि माननीय एडजुटिकेटिंग अथॉरिटी, एनसीएलटी, कोलकाता टाटा स्टील को यह निर्देश दे कि वह लीज को विस्तार दे ताकि इंकैब का पुनर्रूद्धार हो सके.
अधिवक्ता अखिलेश ने माननीय अदालत को बताया कि यह टाटा स्टील और रिजोल्यूशन प्रोफेशनल पंकज टिबरेवाल द्वारा षड्यंत्र कर किया जाने वाला फ्रॉड है ताकि टाटा स्टील उस जमीन को ले सकें.
अधिवक्ता अखिलेश ने अपने उन तर्कों के आधार पर माननीय एडजुटिकेटिंग अथॉरिटी, एनसीएलटी, कोलकाता के 07.02.2020 के आदेश में इंकैब की जमीन पर दिए गये फैसले को निरस्त करने की मांग की. माननीय अदालत ने उसके बाद टाटा स्टील और रिजोल्यूशन प्रोफेशनल पंकज टिबरेवाल के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद उन्हें हलफनामा दायर करने की इजाजत दे दी.
अगली सुनवाई 09.12.2022 को होगी. मजदूरों की तरफ से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव, रोहित सिन्हा और निर्मल घोष ने हिस्सा लिया.

