
रांची: हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में झारखंड सरकार द्वारा उठाए गए मुद्दों पर केंद्र सरकार उचित निर्णय लेगी। यह प्रतिक्रिया झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यपाल रघुवर दास ने दी है। उन्होंने कहा कि भारत के संघीय ढांचे में नीति आयोग वह मंच है जहां राज्यों को अपनी समस्याएं रखने का अवसर मिलता है। केंद्र सरकार सभी पहलुओं पर विचार कर तर्कसंगत निर्णय लेती है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत मांगों की प्रासंगिकता और गंभीरता का मूल्यांकन कर केंद्र उचित निर्णय लेगा।
झारखंड के हिस्से की 1.40 लाख करोड़ की राशि बकाया
24 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की 10वीं बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक महत्वपूर्ण विषय उठाया। उन्होंने कहा कि झारखंड की भूमि पर खनन कार्य करने वाली केंद्रीय कंपनियों के पास राज्य का लगभग 1,40,435 करोड़ रुपये बकाया है। यह राशि यदि शीघ्र प्राप्त हो सके, तो राज्य की विकास योजनाओं को नया जीवन मिल सकता है।
कोल बियरिंग एक्ट में संशोधन की मांग
बैठक में मुख्यमंत्री ने कोल बियरिंग एक्ट में संशोधन का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जिन जमीनों पर खनन कार्य पूरा हो चुका है, उन्हें राज्य सरकार को पुनः सौंपने की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अनधिकृत खनन पर कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने और इसके लिए स्पष्ट नीति बनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
पर्यावरण और विस्थापन पर जताई चिंता
मुख्यमंत्री सोरेन ने खनन के दौरान होने वाले प्रदूषण और स्थानीय निवासियों के विस्थापन को गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में कोयले के अलावा अन्य खनिजों की भी प्रचुरता है, लेकिन खनन से उत्पन्न सामाजिक व पर्यावरणीय संकट को अनदेखा नहीं किया जा सकता। इस दिशा में सकारात्मक हस्तक्षेप जरूरी है।
विकसित भारत 2047 पर दिए सुझाव
‘विकसित भारत 2047’ की अवधारणा पर चर्चा के दौरान झारखंड सरकार ने नीति आयोग और केंद्र सरकार को कई सुझाव भी दिए। मुख्यमंत्री सोरेन ने राज्य के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि झारखंड की समस्याएं राष्ट्रीय एजेंडे में स्थान पा सकें।
(IANS)

