
उदित वाणी, रांची : घाटशिला विधानसभा सीट पर पक्ष-विपक्ष दोनों ओर से सेनापति तैनात कर दिये गए. उपचुनाव में अब दिवंगत शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश सोरेन व पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन ही आमने-सामने होंगे. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पार्टी की केन्द्रीय समिति की बैठक के बाद सोमेश सोरेन को तीर-धनुष थमा दिया. झामुमो की केंद्रीय समिति की बैठक में सोमेश सोरेन को सर्वसम्मति से प्रत्याशी बनाने का निर्णय लिया गया.
वहीं इससे पूर्व भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने बाबूलाल सोरेन को कमल फूल थमाया. इस सीट पर पिछले चुनाव में झामुमो के रामदास सोरेन ने बाबूलाल सोरेन को 22 हजार से अधिक मतों से शिकस्त दी थी. विधानसभा चुनाव में रामदास सोरेन को 98 हजार 356 और बाबूलाल सोरेन को 75 हजार 910 वोट मिले थे. परंतु उपचुनाव में पिछले परिणाम के इतर रोमांचक मुकाबला होने के आसार है.
उपचुनाव में इस बार बाबूलाल सोरेन दिवंगत रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश सोरेन से भिड़ेंगे. उपचुनाव में सोमेश जहां सहानुभूति व परंपरागत वोटों के सहारे वैतरणी पार करने की कोशिश करेंगे. वहीं बाबूलाल सोरेन की ओर से भाजपा राज्य में कथित भ्रष्टाचार, विधि-व्यवस्था और आदिवासी सुरक्षा के मुद्ये पर राज्य सरकार को घेरने की कोशिश करेंगी.
दोनों पक्षों के समक्ष कठिन है चुनौतियां
राज्य की राजनीति में यह सीट न सिर्फ राजनीतिक दृष्टिकोण से अहम है. बल्कि भावनात्मक रूप से भी झामुमो के लिए बेहद संवेदनशील मानी जा रही है. दिवंगत विधायक रामदास सोरेन जनता के बीच लोकप्रिय नेता रहे हैं. उनके निधन के बाद क्षेत्र में सहानुभूति की लहर के आसार है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झामुमो इस लहर को अपने पक्ष में भुनाने की रणनीति बना रही है.
पार्टी पहले से ही बूथ स्तर पर सक्रिय हो चुका है और प्रचार की रूपरेखा तैयार की जा रही है. इधर घाटशिला विधानसभा उपचुनाव मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ-साथ भाजपा के कद्दावर नेताओं के लिए भी अग्नि परीक्षा होगी. झामुमो में जीत-हार का सीधा श्रेय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जाएगा, वहीं भाजपा में इसका असर कई बड़े नेताओं पर डालेगा. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सह प्रतिपक्ष का नेता होने के कारण घाटशिला में बाबूलाल मरांडी यश-अपयश के भागी बनेंगे.
इनके अलावा बाबूलाल सोरेन की जीत-हार कोल्हान टाईगर के रूप में चर्चित चंपाई सोरेन की राजनीति को भी प्रभावित करेगा. जानकारी के मुताबिक अलग राज्य गठन के बाद घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में यह पहला अवसर है जब भाजपा ने किसी नेता को लगातार दूसरी बार प्रत्याशी बनाया है. इसलिए बाबूलाल सोरेन की हार जीत का असर सीधे चंपाई सोरेन की राजनीति पर पड़ेगा.

