
उदित वाणी, राँची : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष श्री बाबूलाल मरांडी ने रिम्स परिसर स्थित DIG ग्राउंड पर हुए अवैध निर्माण और झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उसे तोड़े जाने की प्रक्रिया पर मुख्यमंत्री से गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए कहा कि यह पूरा प्रकरण सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार का परिणाम है.
मरांडी ने अपने पत्र में लिखा कि उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि रिम्स की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराकर संस्थान को वापस सौंपा जाए. उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश का पालन होना चाहिए, लेकिन यह भी जांच जरूरी है कि ऐसी स्थिति क्यों आई — आखिर जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को कैसे होने दिया और फर्जी कागजात बनाकर जमीन की बिक्री कैसे संभव हुई.
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीनों के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उन्हें बिल्डरों को बेच दिया गया, जिससे आम नागरिकों को भारी नुकसान झेलना पड़ा. मरांडी ने कहा कि निर्दोष फ्लैट खरीदारों को कानूनी जानकारी तथा संसाधनों की कमी के कारण ठगा गया है, इसलिए उनकी भरपाई सरकार को करनी चाहिए.
मरांडी ने मुख्यमंत्री से तीन प्रमुख माँगें की हैं –
1. रजिस्ट्रार, अंचल अधिकारी (सीओ) और राँची नगर निगम के संबंधित अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर निलंबन व कानूनी कार्रवाई की जाए.
2. अवैध निर्माण वाले अपार्टमेंट्स में निर्दोष फ्लैट खरीदारों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए.
3. यदि यह संभव न हो, तो खरीदारों को उनकी खरीद राशि का मुआवजा सरकार के द्वारा दिया जाए.
उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन, रजिस्ट्री कार्यालय, नगर निगम और रेरा तक की लापरवाही इस पूरे घोटाले का हिस्सा रही है. बाबूलाल मरांडी ने इसे झारखंड के प्रशासनिक तंत्र में फैले भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण बताया और कहा कि दोषियों पर त्वरित तथा कठोर कार्रवाई से ही जनता का विश्वास बहाल किया जा सकता है.

