
उदित वाणी, रांची: रांची के भगवान बिरसा बायोलॉजिकल पार्क में दो एशियाई शेर — 14 वर्षीय नर ‘अभय’ और 4 वर्षीय मादा ‘शबरी’ — छत्तीसगढ़ के नंदनवन चिड़ियाघर से आये हैं. पार्क में इनकी पुर्नस्थापना एक संरक्षित जंतु आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत की गई है
मगरमच्छों की चुप्पी भी तोड़ी गई
शेरों के साथ ही एक जोड़ा मगरमच्छ (तीन-चार वर्ष की आयु वर्ग) भी लाया गया है, जो स्वास्थ्य परीक्षण के बाद जनता के दर्शन के लिए इनके आवास में रखे गए हैं .
पार्क को मिली नई पहचान
इन जानवरों के आगमन से पार्क की ‘बिग कैट’ प्रदर्शनी पुनः सजीव हुई है. अप्रैल-मई 2025 में शेर-शेरिन की मृत्यु के बाद यह कदम विशेष मायने रखता है. अभय और शबरी की उपस्थिति ने पार्क के प्रकृतिक परिदृश्य में नई जान डाली है .
समारोह में क्या हुआ
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जैसे पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ सहित ज़ू निदेशक जबार सिंह ने नए आगंतुकों का स्वागत किया. ये कार्यक्रम प्रवास की सुरक्षित व्यवस्था और अनुकूलन की मॉनीटरिंग के साथ संपन्न कराई गई .
आदान-प्रदान का बेहतरी पहलू
भविष्य में पार्क से नंदनवन चिड़ियाघर को हिमालयी भालू, मगरमच्छ और साही भेजने की योजना बनी है — यह संवर्धन, शिक्षा और प्रजाति संरक्षण हेतु उपयोगी आदान-प्रदान का हिस्सा है .
पर्यटकों में उत्साह की लहर
नए शेर-शेरिन और मगरमच्छों को देखने के लिए पार्क में भीड़ बढ़ी है. बच्चों और परिवारों में रोमांच व उत्साह का माहौल है. अधिकारी आशा जताते हैं कि पार्क का यह पुनरुद्धार जैव विविधता शिक्षा केंद्र के रूप में इसकी प्रतिष्ठा को और बढ़ाएगा .
पार्क की जानकारी
104 हेक्टेयर में फैला यह पार्क लगभग 91 प्रजातियों का घर है और हर साल लगभग 8–10 लाख आगंतुक आते हैं यहाँ बैटरी संचालित गाड़ियाँ, बोटिंग व सुविधाजनक मार्ग उपलब्ध हैं, जिससे पूरे परिवार के साथ आसानी से घूमा जा सकता है . अभय और शबरी की गर्जना से रांची के बिरसा पार्क को एक नयापन मिला है. आदान-प्रदान का यह कदम न सिर्फ जैव विविधता बढ़ाएगा बल्कि संरक्षित प्रजातियों के प्रति पर्यटकों और छात्रों में जनचेतना जगाएगा.

