
उदित वाणी, रांची : शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों जिन 20 बच्चों को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से नवाजा गया, उनमें एक नाम रांची के ओरमांझी प्रखंड की मुंडा टोली की रहने वाली 14 वर्षीया अनुष्का का भी है.
यह वही लड़की है, जिसने भूटान में आयोजित सैफ अंडर-17 महिला फुटबॉल चैंपियनशिप में छह मैचों में आठ गोल दागकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था. सैफ गेम्स से लेकर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाली इस बेटी का यहां तक पहुंचने का संघर्ष बेमिसाल है.
मिट्टी के घर में रहने वाली अनुष्का के पिता, दिलेश मुंडा, लंबे समय से गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और काम करने में असमर्थ हैं. परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां के कंधों पर है, जो खेती-बाड़ी करने के साथ-साथ सब्जी बेचकर किसी तरह घर चलाती हैं.
दो भाइयों और एक बहन के बीच पली-बढ़ी अनुष्का ने बहुत कम उम्र में हालात को समझ लिया था. उसने जान लिया था कि सपने देखना आसान है, लेकिन उन्हें जिंदा रखने के लिए संघर्षों के बीच राह बनानी होगी. गांव में जब दूसरे बच्चे यूं ही खेलते थे, तब अनुष्का फुटबॉल के पीछे दौड़ा करती थीं. उनके पैरों में हमेशा गेंद रहती थी. महज 11 साल की उम्र में उनकी जिंदगी ने बड़ा मोड़ लिया, जब हजारीबाग के रेजिडेंशियल गर्ल्स फुटबॉल ट्रेनिंग सेंटर में उनका चयन हुआ.
घर से दूर जाना आसान नहीं था. मां की आंखें भर आई थीं, लेकिन उन्होंने बेटी के सपने पर भरोसा किया. हजारीबाग के ट्रेनिंग सेंटर में अनुष्का की दिनचर्या सुबह चार बजे से शुरू होती है. घंटों अभ्यास, फिर पढ़ाई और फिर सख्त अनुशासन. यही उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बन गई. कई बार शरीर जवाब देने लगा. चोटें आईं. थकान हावी हुई. मन भी डगमगाया. लेकिन अनुष्का मैदान पर डटी रहीं और पीछे मुड़कर नहीं देखा.
धीरे-धीरे वह एक तेजतर्रार स्ट्राइकर के रूप में पहचानी जाने लगीं. वह क्रिस्टियानो रोनाल्डो को अपना आदर्श मानती हैं, लेकिन मैदान पर उनकी अपनी अलग पहचान है. उनकी मेहनत रंग लाई. स्कूल गेम्स में उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया. एशियाई स्तर की प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने खुद को साबित किया.
साल 2025 में भूटान में आयोजित सैफ अंडर-17 महिला फुटबॉल चैंपियनशिप उनके करियर का बड़ा अध्याय बनी. छह मैचों में आठ गोल दागकर अनुष्का ने टूर्नामेंट की टॉप स्कोरर का खिताब हासिल किया. इससे पहले वह इंडियन एरोज वुमेन जूनियर्स टीम का भी हिस्सा रह चुकी हैं.
जब प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिलने की खबर शुक्रवार को हजारीबाग पहुंची, तो प्रशिक्षण केंद्र में खुशी की लहर दौड़ गई. कोच और साथी खिलाड़ियों ने इसे अनुष्का की मेहनत, संघर्ष और अनुशासन की जीत बताया.
(आईएएनएस)

