
उदित वाणी, रांची : केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने झारखंड की राजधानी रांची में पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27वीं बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कल्पना के तहत राज्यों के विकास से भारत का विकास और 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए सभी को साथ मिलकर आगे बढ़ने की जरूरत है. मोदी सरकार में क्षेत्रीय परिषदों की बैठकों में 83 प्रतिशत मुद्दों का समाधान इन बैठकों की सार्थकता को दर्शाता है. बैठक में बांसजोर बांध तैयबपुर बराज और इंद्रपुरी जलाशय से संबंधित मुद्दों और बिहार के विभाजन के समय से लंबित पीएसयू की संपत्तियों व देनदारियों से संबंधित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई.
केन्द्रीय गृहमंत्री ने तीन नए आपराधिक कानूनों पर जल्द से जल्द पूर्ण अमल की दिशा में पूर्वी राज्यों को और अधिक प्रयास करने की जरूरत बताया. उन्होंने कहा कि इन राज्यों में नार्कोटिक्स पर नकेल कसने की दिशा में भी अधिक कार्य करने की जरूरत है. उन्होंने नक्सलवाद के विरुद्ध सभी राज्यों की एकजुटता और सुरक्षा बलों की बहादुरी का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को नक्सलवाद से मुक्त करके रहेंगे. उन्होंने कहा कि हमारे संघीय ढांचे को मज़बूत करने के लिए अंतरराज्यीय परिषद और क्षेत्रीय परिषद को संविधान और कानून में आधार दिया गया है और उसी के तहत क्षेत्रीय परिषदों की बैठकें आयोजित होती है.
केन्द्र के साथ राज्यों के बीच के आपसी मुद्दों को काफी हद तक हल करने में सफल हुए हैं. शाह ने यह भी कहा कि पूर्वी क्षेत्र के चारों राज्यों को कौशल प्रशिक्षण के क्षेत्र में परंपरागत और स्ट्रक्चरल ढांचे से बाहर निकल कर आवश्यकता के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए. अपने संबोधन में शाह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में हमारी सेनाओं ने अपनी वीरता, सटीकता और जांबाजी का अनुभव पूरी दुनिया को कराया है और उनके साहस और पराक्रम के लिए पूर्वी क्षेत्रीय परिषद सेनाओं की वीरता के लिए सर्वसम्मति से धन्यवाद प्रस्ताव पारित करती है. उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में झारखंड की भूमि का बहुत बड़ा योगदान रहा है और इस भूमि से भगवान बिरसा मुंडा समेत कई महान स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आज़ादी के आंदोलनों का नेतृत्व किया है.
उन्होंने कहा कि पूरा पूर्वी भारत भक्ति, ज्ञान, संगीत, वैज्ञानिक अनुसंधान और क्रांति की भूमि रहा है. शिक्षा के मूल आदर्श स्थापित करने में पूर्वी भारत का बहुत बड़ा योगदान रहा है. बैठक के दौरान कुल 20 मुद्यों पर चर्चा की गई. 10 दिसंबर 2023 को हुई पिछली बैठक की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर चर्चा की गई. बैठक में झारख्ंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी व उपमुख्यनत्री पार्वती परीदा और मंत्री मुकेश म्हालिंग, बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मंत्री विजय चौधरी, पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य के अलावा झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, भूराजस्व मंत्री दीपक बिरूवा, मुख्य सचिव अलका तिवारी, गृह विभाग की प्रधान सचित्र वंदना दादेल और डीजीपी अनुराग गुप्ता समेत कुल 58 प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया.

