
उदित वाणी, आदित्यपुर : वॉर्ड संख्या-17 क्षेत्र में स्थित प्रभात पॉर्क के आस_पास स्थित फुटपाथी और अस्थाई दुकानदारों को अपनी दुकान हटाने का आदेश दिया है. आज प्रभात पॉर्क के पास पहुंची नगर निगम की टीम के द्वारा ध्वनि विस्तारक यंत्र के माध्यम से दुकानदारों अपनी दुकान हटाने का मौखिक आदेश दिया.
वहीं, नगर निगम का आदेश मिलने के बाद दुकानदारों ने पूर्व पार्षद रंजन सिंह सहित अन्य पार्षदों से मुलाकात कर उन्हें मामले की जानकारी दी. तत्पश्चात पूर्व पार्षद रंजन सिंह के नेतृत्व में दुकानदार आज नगर निगम कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने उप नगर आयुक्त पारुल सिंह से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा.
दुकानदारों का कहना है कि वे वर्षों से प्रभात पॉर्क के पास छोटे स्तर पर दुकानें एवं ठेले लगाकर अपनी आजीविका चला रहे हैं. परन्तु नगर निगम द्वारा अचानक की गई इस कार्रवाई से सैकड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है. दुकानदारों के अनुसार, प्रभात पार्क के आसपास करीब आधा दर्जन अस्पताल —मेडिटरीना, सिद्धेश, मगध, मेडिनोवा, न्यू लाइफ और संजीवनी — संचालित हैं. इन अस्पतालों में दूरदराज इलाकों से मरीज और उनके परिजन आते हैं, जिन्हें ये दुकानदार सस्ते दामों पर नाश्ता और भोजन उपलब्ध कराते हैं.
वहीं, आस-पास के कई किरायेदार, विद्यार्थी और नौकरीपेशा लोग भी नियमित रूप से इन्हीं दुकानों से भोजन ग्रहण करते हैं. दुकानदारों ने बताया कि उन्हें नगर निगम द्वारा फुटपाथ दुकानदार का लाइसेंस जारी किया गया है और वे नियमित रूप से कचरा उठाने का शुल्क भी निगम को जमा करते हैं. जबकि कई दुकानदारों ने नगर निगम के द्वारा बैंक से ऋण लेकर अपना व्यापार खड़ा किया है. परन्तु अचानक से नोटिस मिलने की वजह से वे आर्थिक संकट में पड़ गए हैं.
दुकानदारों ने आरोप लगाया कि “विक्कटा टेंट हाउस” नामक व्यक्ति ने उनसे दुकान बसाने के एवज में ₹7–8 हजार रुपये की मांग की है. उनका कहना है कि यह कोई भ्रष्टाचार या साजिश का हिस्सा हो सकता है. क्योंकि पहले दुकानों को हटाया जा रहा है, फिर पैसों की मांग कर पुनः बसाने की योजना बनाई जा रही है.
स्थानीय दुकानदारों ने नगर निगम प्रशासन से अपील की है कि जब_तक वैकल्पिक स्थान या दुकान आवंटन की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब_तक विस्थापन की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए. उन्होंने कहा कि नगर निगम के कई वार्डों में आवास बोर्ड द्वारा दुकानों का आवंटन किया गया है, परंतु वार्ड संख्या 17 में अब तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है.

