उदित वाणी, आदित्यपुर: झारखंड इलेक्ट्रिसिटी कन्ज़्यूमर्स एसोसिएशन ने शुक्रवार को विद्युत संशोधन विधेयक-2022 के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. संगठन का कहना है कि यह विधेयक बिजली क्षेत्र के निजीकरण का रास्ता साफ करता है और आम उपभोक्ताओं के हितों के विरुद्ध है.
कार्यपालक अभियंता को सौंपा गया माँग-पत्र
एसोसिएशन की एक प्रतिनिधि टीम ने जेबीवीएनएल आदित्यपुर प्रमंडल के विद्युत कार्यपालक अभियंता से मुलाकात की और उन्हें केंद्रीय विद्युत मंत्री को संबोधित चार सूत्रीय माँग-पत्र सौंपा. इस पत्र के माध्यम से विधेयक को तत्काल निरस्त करने की अपील की गई.
चार प्रमुख माँगें रखीं गईं
संगठन द्वारा प्रस्तुत माँगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल थे:
- बिजली क्षेत्र के निजीकरण की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए.
- प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की योजना को रद्द किया जाए.
- समय आधारित टैरिफ प्रणाली (Time of Day – TOD) को स्थगित किया जाए.
- बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए पारदर्शी नीति लागू की जाए.
महिला नेत्रियों की सक्रिय भागीदारी
इस विरोध प्रदर्शन में महिला नेत्री लीली दास, विष्णुदेव गिरी, अंजना भारती सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे. सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि विधेयक वापस नहीं लिया गया, तो राज्यव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी.
एसोसिएशन का मानना है कि इस विधेयक के लागू होने से न केवल बिजली महंगी होगी, बल्कि गरीब और ग्रामीण उपभोक्ताओं को सेवा से वंचित होना पड़ेगा. उन्होंने आशंका जताई कि निजी कंपनियाँ लाभ आधारित सोच के चलते सामाजिक जिम्मेदारियों से बचेंगी.
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