
उदित वाणी, आदित्यपुर : कर्मचारी महासंघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शशांक कुमार गांगूली ने आठवें वेतन आयोग से वास्तविक महंगाई को ध्यान में रखते हुए ‘फिटमेंट फैक्टर’ निर्धारित करने की मांग की है. उन्होंने आयोग से आग्रह किया कि कर्मचारियों के परिवार की यूनिट संख्या पाँच मानकर उसमें माता-पिता को भी शामिल किया जाए.
गांगूली ने बताया कि केंद्र सरकार ने जनवरी 2025 में आठवें वेतन आयोग के गठन की स्वीकृति दी थी, लेकिन समिति गठित होने में दस माह का समय लग गया. अब रिपोर्ट आने में डेढ़ वर्ष का समय और लगेगा. ऐसे में यह रिपोर्ट वर्ष 2027 के मध्य तक ही आ सकेगी. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार द्वारा इसे लागू करने तथा राज्यों द्वारा स्वीकृति की प्रक्रिया में कम से कम वर्ष 2028 तक का समय लग सकता है.
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, वर्तमान में देश और राज्यों में चुनावी माहौल को देखते हुए इस विषय पर निर्णय और भी विलंबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि महंगाई जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उस अनुपात में महंगाई भत्ता नहीं बढ़ रहा. पिछले दस वर्षों में महंगाई भत्ता मात्र 58 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि वास्तविक महंगाई का आकलन किया जाए तो यह वृद्धि कई गुना अधिक होनी चाहिए थी.
गांगूली ने मांग की कि फिटमेंट फैक्टर तय करने से पूर्व कर्मचारियों के परिवार की चिकित्सा, शिक्षा, राशन, यात्रा, तथा बाजार के वास्तविक भाव को ध्यान में रखा जाए. साथ ही सरकार से तत्काल राहत के रूप में सातवें वेतन आयोग की स्वीकृति के अनुरूप *बेसिक पे* और *महंगाई भत्ता* को मर्ज करने का निर्णय लेने की अपील की.
उन्होंने आशा व्यक्त की कि आयोग और केंद्र सरकार कर्मचारियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगे तथा राज्य कर्मियों को भी समान लाभ सुनिश्चित किया जाएगा. यह भी उल्लेखनीय है कि देश व राज्यों में सरकारी कर्मचारियों की संख्या करोड़ों में है, जो न केवल सरकार को नियमित कर देते हैं, बल्कि एक बड़ा मतदाता वर्ग भी हैं.
