
उदित वाणी, घाटशिला : घाटशिला विधानसभा क्षेत्र के गुड़ाबांदा प्रखंड के तीन ग्रामीण क्षेत्र -राजाबासा, पावडाडीह और मूटकामकोचा-के निवासियों ने आगामी 11 नवंबर को होने वाले उपचुनाव में सामूहिक वोट बहिष्कार का निर्णय लिया है. ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र से नक्सल समस्या समाप्त हुए वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण आज भी वे बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं.
गांव के रास्ते, स्वास्थ्य और जल आपूर्ति जैसी सुविधाओं का बेहद अभाव है. चिरुगोड़ा से पावडाडीह तक 4 किलोमीटर सड़क नहीं है और मार्ग में पाँच पहाड़ी नाले जानलेवा साबित हो चुके हैं. बारिश के दिनों में इन नालों को पार करना लोगों के लिए जान जोखिम में डालना होता है, जिससे अब तक तीन ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके हैं. इसी प्रकार, विद्यालय में बच्चों के लिए पेयजल की व्यवस्था नहीं है—एक मात्र जलमीनार पिछले डेढ़ साल से बंद पड़ा है. बच्चों को खेत के बहते पानी का सहारा लेना पड़ता है. स्वास्थ्य से लेकर आवास योजनाओं तक स्थानीय प्रशासन की लापरवाही दिखती है, जिससे 250 से 300 वोटर अब भी विकास की मुख्यधारा से दूर हैं.

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार और नेता हर चुनाव से पहले वादे करते हैं, परन्तु चुनाव के बाद स्थिति जस की तस रहती है. जंगल से उपज मिलने पर ही चूल्हा जलता है और सरकारी राशन बहुत दूर जाकर लाना पड़ता है, जो जरूरत के अनुसार पूरा नहीं पड़ता. कई बार शिकायत के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ.

राजाबासा, पावडाडीह और मूटकामकोचा के ग्रामीणों ने ‘विकास नहीं तो वोट नहीं’ की तख्ती लेकर सरकार, मंत्री, सांसद और विधायकों के प्रति नाराजगी जताई है. ग्रामीण प्रधानों एवं स्थानीय लोगों ने स्पष्ट कहा कि जब तक रोड, पुल, पानी जैसी सुविधाएँ नहीं मिलेंगी, वे वोट नहीं देंगे.

