
उदित वाणी, पूर्वी सिंहभूम : अतिवृष्टि के कारण धान की फसल बर्बाद होने से परेशान किसानों ने अब वैकल्पिक खेती की ओर कदम बढ़ाया है. कृषि विज्ञान केंद्र, दरभिन-गालूडीह के मार्गदर्शन में घाटशिला प्रखंड के पांच गांवों में अरहर की खेती की शुरुआत की गई है. कुल 140 एकड़ भूमि पर यह नई पहल लागू की जा रही है.
पांच गांवों में एक साथ हुई अरहर की बुआई
गालूडीह के बड़ाखुर्शी, बड़ाबेड़ा, पटमदा के बोडीसोल, चांडिल के घाटीगोड़ा और आदर्श ग्राम दहलन को इस परियोजना में शामिल किया गया है. विशेष रूप से दहलन को अरहर उत्पादन का मॉडल गांव घोषित किया गया है, जहां व्यापक स्तर पर तकनीकी प्रशिक्षण और खेत तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है.
किसानों को मिला निःशुल्क बीज और तकनीकी जानकारी
दहलन गांव में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें किसानों को बीज चयन, भूमि की तैयारी, समय पर बुआई, कीट एवं रोग प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, कटाई और विपणन जैसी जरूरी जानकारियां दी गईं. अरहर की तीन उन्नत किस्मों – पीयूष, वीर और आशीर्वाद – के बारे में जानकारी दी गई और इनके बीज किसानों को निःशुल्क वितरित किए गए.
उत्पादन और आय बढ़ाने की संभावना
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि यदि निर्धारित तरीकों से खेती की जाए तो प्रति एकड़ लगभग 3 क्विंटल अरहर का उत्पादन संभव है. इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और कृषि में विविधता आएगी. यह पहल किसानों को एक नई आर्थिक दिशा देने का प्रयास है.
कृषि चौपाल में सीधा संवाद
दहलन गांव में आयोजित कृषि चौपाल के माध्यम से कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद हुआ. इसमें किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया और वैकल्पिक खेती के लाभों के बारे में विस्तार से बताया गया.
अधिकारी और महिला किसानों की रही सक्रिय भागीदारी
इस मौके पर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. टीएस रिंकू, वैज्ञानिक डॉ. जावेद, वरिष्ठ तकनीकी सहायक जितेंद्र महतो, बड़ाबेड़ा पंचायत की मुखिया समेत बड़ी संख्या में महिला किसान भी मौजूद रहीं.
बदलते मौसम में बदल रही है खेती की सोच
यह पहल यह साबित करती है कि जलवायु परिवर्तन और मौसम की अनिश्चितता के बीच किसानों को टिकाऊ समाधान की आवश्यकता है. कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा अरहर की खेती को बढ़ावा देने की यह कोशिश आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है. यदि यह प्रयोग सफल होता है तो अन्य गांवों में भी इसका विस्तार किया जाएगा.

