
(विशेष)
उदित वाणी जमशेदपुर : शहर में सोशल मीडिया के ज़रिए बनने वाले रिश्ते अब सिर्फ “लाइक” और “कमेंट” तक सीमित नहीं रहे. फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और अन्य सोशल प्लेटफॉर्म्स पर शुरू होने वाली दोस्ती अब इतनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है कि हफ्तों में प्यार, फिर महीनों में शादी और जल्द ही घरेलू विवाद व आपराधिक घटनाओं का रूप लेने लगी है.
पिछले 18 महीनों में पूर्वी सिंहभूम जिले में ऐसे कम-से-कम 23 मामले पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हुए हैं, जहाँ ऑनलाइन रिश्ते अंततः धोखा, मारपीट, आत्महत्या, हत्या, ब्लैकमेलिंग और संपत्ति हड़पने जैसी घटनाओं तक पहुँच चुके हैं. यह बदलती सामाजिक प्रवृत्ति अब समाजशास्त्रियों और पुलिस दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है.
केस 1: फेसबुक से शुरू हुआ प्यार, फिर हत्या में तब्दील
स्थान: परसुडीह
घटना: अप्रैल 2025
24 वर्षीय रेखा (बदला हुआ नाम) की फेसबुक पर राजीव कुमार (निवासी: सिवान, बिहार) से दोस्ती हुई. दोनों की चैटिंग कुछ ही महीनों में प्रेम-संबंध में बदल गई और मार्च 2024 में रजिस्ट्री विवाह कर लिया गया. राजीव ने रेखा से पहले अपनी बेरोजगारी छुपाई और फिर शादी के बाद लगातार मारपीट करने लगा.
रेखा ने परसुडीह थाना में दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा की शिकायत भी दर्ज करवाई थी. लेकिन मई 2025 में उसका शव संदेहास्पद स्थिति में घर से मिला. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गला घोंटने की पुष्टि हुई. राजीव फरार है और पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है.
केस 2: इंस्टाग्राम चैट से शादी और फिर लाखों की ठगी
स्थान: साकची
घटना: दिसंबर 2024 – मई 2025
26 वर्षीय पूजा श्रीवास्तव (बदला हुआ नाम), जो कि एक निजी स्कूल में शिक्षिका थीं, उन्होंने इंस्टाग्राम पर मिले एक युवक से दोस्ती की. युवक ने खुद को कोलकाता स्थित एक मल्टीनेशनल कंपनी का अधिकारी बताया. उसने धीरे-धीरे पूजा से भावनात्मक संबंध बनाए और फिर शादी का प्रस्ताव दिया.
शादी से पहले युवक ने व्यवसाय में पैसे लगाने की बात कहकर ₹8.5 लाख की ठगी कर ली और फिर अचानक संपर्क तोड़ दिया. जब पूजा ने पुलिस में शिकायत की, तब पता चला कि युवक का असली नाम फरहान शेख है और वह इससे पहले तीन महिलाओं से इसी तरह ठगी कर चुका है. अभी वह जमानत पर बाहर है.
केस 3: लिव-इन में धोखा, फिर आत्महत्या
स्थान: सोनारी
घटना: जनवरी 2025
कॉलेज छात्रा 20 वर्षीय मीनाक्षी (बदला हुआ नाम) ने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए मिले युवक से दोस्ती की थी. दोनों 6 महीने लिव-इन में रहे. युवक ने शादी का झांसा देकर उसका शारीरिक शोषण किया. बाद में जब मीनाक्षी ने शादी की बात की, तो युवक ने इंकार कर दिया और संबंध तोड़ दिया.
मीनाक्षी मानसिक अवसाद में चली गई और 12 जनवरी 2025 को आत्महत्या कर ली. पुलिस को मिले सुसाइड नोट में लिखा था—”सोशल मीडिया पर मिला प्यार सिर्फ धोखा था.”
क्या कहते हैं पुलिस के आंकड़े ?
जमशेदपुर पुलिस की साइबर सेल के मुताबिक:
2022 में ऐसे 7 मामले दर्ज हुए.
2023 में संख्या बढ़कर 14 हो गई.
2024 में 19 मामले सामने आए, जिनमें से 6 में एफआईआर और 3 में गिरफ्तारी हुई.
2025 के पहले छह महीनों में ही 11 गंभीर मामले दर्ज हो चुके हैं.
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ “आइसबर्ग का सिरा” है. ऐसे सैकड़ों मामले होंगे जो सामने नहीं आते क्योंकि परिवार सामाजिक बदनामी के डर से शिकायत नहीं करते.
क्या कहते है लोग ?
“सोशल मीडिया रिश्तों को तेज़ी से बढ़ाता है लेकिन उसकी नींव सतही होती है. जब भावनाएं डिजिटल दुनिया में उलझ जाती हैं, तो लोग सामने वाले को जानने-समझने का वक्त नहीं लेते. इसका परिणाम रिश्तों में जल्दबाज़ी और फिर टूटन के रूप में सामने आता है.”
वे कहती हैं कि सोशल मीडिया की ‘डोपामाइन हिट’ ने युवा वर्ग को भावनात्मक रूप से अधीर बना दिया है, जिससे वे वर्चुअल रिश्तों में जल्दी इन्वॉल्व हो जाते हैं और फिर आसानी से टूट भी जाते हैं.
झारखंड राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य डॉ. शारदा मेहता कहती हैं,
“महिलाएं अक्सर भावनात्मक स्तर पर जल्दी जुड़ती हैं, और सोशल मीडिया का माहौल उन्हें प्रेम और विवाह के सपने दिखाकर धोखा देता है.”
वे कहती हैं कि स्कूल और कॉलेज स्तर पर डिजिटल संबंधों पर जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए. साथ ही, महिलाओं को यह समझाया जाना चाहिए कि ऑनलाइन रिश्तों में पारदर्शिता और सुरक्षा कितनी ज़रूरी है.
पुलिस प्रशासन की पहल: ‘सावधान यूथ’ अभियान
जमशेदपुर पुलिस द्वारा अब इस ट्रेंड को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष जन-जागरूकता अभियान शुरू किया जाना चाहिए
इस अभियान के तहत:
साइबर सेल द्वारा स्कूल-कॉलेजों में जाकर सेमिनार आयोजित किया जाए.
महिला थाना द्वारा विशेष परामर्श केंद्र बनाए जाए.
‘साइबर फ्रॉड एंड रिलेशनशिप क्राइम हेल्पलाइन’ 24×7 सक्रिय हमेशा से है. (टोल फ्री: 1930).
हर थाने में ‘महिला साइबर हेल्प डेस्क’ की स्थापना की जानी चाहिए.
एसएसपी पीयूष पांडे (पूर्वी सिंहभूम) ने उदित वाणी प्रतिनिधि से बात करते हुए बताए,
“युवा वर्ग को जागरूक करना हमारा कर्तव्य है. हम सिर्फ शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई नहीं करना चाहते, बल्कि पहले ही लोगों को शिक्षित करना चाहते हैं कि सोशल मीडिया पर किससे और कैसे जुड़ें.”
क्या कहते हैं जमशेदपुर के नागरिक?
शालिनी दास (कॉलेज छात्रा, कदमा):
“हमारी क्लास की एक लड़की को एक फेसबुक फ्रेंड ने होटल बुलाकर ब्लैकमेल किया था. उसने किसी को बताया नहीं, क्योंकि उसे डर था कि बदनामी होगी.”
राजेश महतो (ऑटो चालक, बारीडीह):
“हमारे मोहल्ले में एक लड़की ने ऑनलाइन शादी की थी, फिर लड़का दो महीने में भाग गया. अब वो अकेली है और माता-पिता भी टूट गए हैं.”
समाधान क्या हो सकता है?
1. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वेरिफिकेशन और अलर्ट सिस्टम का सख्ती से पालन.
2. माता-पिता की भूमिका: बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर संवाद और मार्गदर्शन.
3. स्कूल-कॉलेजों में ‘डिजिटल लिटरेसी’ को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाए.
4. हर जिले में ‘ऑनलाइन रिलेशनशिप काउंसलिंग सेंटर’ की स्थापना.
5. पुलिस, समाजसेवी संस्थाएं और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का संयुक्त जागरूकता अभियान.
जमशेदपुर में बढ़ती इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल युग में रिश्तों की चमकदार सतह के नीचे गंभीर खतरे भी छिपे हैं. सोशल मीडिया पर किसी से जुड़ने से पहले उसके इरादों, पृष्ठभूमि और व्यवहार को जानना जरूरी है. दोस्ती, प्यार और शादी—ये सब विश्वास और समझदारी के रिश्ते हैं, जो कुछ क्लिक और चैटिंग से नहीं बनते.
जागरूक रहना, सतर्क रहना और पुलिस व समाज के जागरूकता कार्यक्रमों का हिस्सा बनना ही आज के समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है.

