
उदित वाणी, रांची : शहर की सुखदेवनगर थाना की पुलिस ने नकली नोटों के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है तथा जाली नोटों का जखीरा बरामद किया है. पुलिस ने दो करोड़ रुपये के जाली नोटों के साथ गिरोह के दो सदस्यों हरमू के मो साबिर और साहिल को गिरफ्तार किया है. चंद्रलोक ट्रेवल्स की बस से तीन बड़े कार्टून में जाली नोट पटना से रांची भेजी गई थी. जिसमें पाया गया कि 500-500 रुपए के नकली नोटों के बंडल हैं. एक कार्टून में 42 बंडल थे. इनमें से 20 बंडल में 300 नोट और 22 बंडल में 350 नोट रखे थे. दिल्ली में जाली नोटों की छपाई के बाद बिहार-झारखंड समेत कई राज्यों में सप्लाई की जा रही थी.
पुलिस द्वारा प्रेस ब्रीफिंग कर बताया गया कि रांची के एसएसपी चंदन कुमार सिन्हा को सूचना मिली थी कि पटना से बस के जरिए नकली नोटों की खेप रांची आने वाली है. उन्होंने बिशेष टीम गठित कर रातू रोड बस स्टैंड पर घेराबंदी करायी. पुलिस निरीक्षक सह सुखदेवनगर थाना प्रभारी की अगुवाई में कार्रवाई के लिए रातू रोड स्थित न्यू मार्केट चौक के पास सुलभ शौचालय के करीब चंद्रलोक बस रूकी. सारे पैसेंजर उतरने के कुछ देर बाद उसी जगह एक सफेद रंग की हुंडई कार आकर रूकी और बस से 3 कार्टून निकालकर हुंडई कार में रखा. कार में जैसे ही तीनों कार्टून रखे गए.
छापामारी दल ने कार सवार को रोककर कार्टून की चेकिंग की. जिसमें दो करोड़ रूपये के जाली नोट मिले. इसकी डिलीवरी लेने आये मो साबिर और साहिल कुमार को हिरासत में लेकर पुलिस ने उनसे पूछताछ शुरू की, तो पता चला कि यह एक संगठित आपराधिक गिरोह है. जिसका संचालन दिल्ली का सरगना नीरज कुमार चौधरी करता है. वह फोन पर लोगों को निर्देश देता है. उसके द्वारा फोन और वॉट्सऐप के माध्यम से आरोपी मोहम्मद साबिर और साहिल कुमार के पास ग्राहकों को भेजा जाता है.
साहिल और साबिर ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि ग्राहकों को झांसा देने के लिए नकली बंडलों के ऊपर नीचे एक-एक असली नोट रखे जाते थे. शहरों में पकड़े जाने के डर से ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में जाली नोटों को खपाया जाता था. इसके बदले ग्राहकों से 40 से 50 हजार रुपए लिये जाते थे. जाली नोट के कारोबार में उन्हें 20 से 30 प्रतिशत कमीशन मिल था. गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है.

