
उदित वाणी, जमशेदपुर : एमजीएम थाना क्षेत्र के गोकुल नगर निवासी 22 वर्षीय जीत महतो की संदिग्ध मौत के मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गंभीरता से लेते हुए रजिस्टर्ड कर लिया है. आयोग ने इस मामले में डायरी नंबर 372/आईएन/2026 दर्ज किया है और इसकी सूचना मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज मिश्रा को ई-मेल के माध्यम से दी है. एनएचआरसी में दर्ज शिकायत के बाद यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर जांच के दायरे में आ गया है.
मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज मिश्रा ने आयोग को दी गई शिकायत में बताया है कि 29 दिसंबर को एमजीएम थाना पुलिस ने जीत महतो को मोबाइल चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था. परिजनों का आरोप है कि गिरफ्तारी के समय ही उन्होंने पुलिस को जीत की खराब स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी दी थी. साथ ही यह भी बताया गया था कि उसकी पत्नी नौ माह की गर्भवती है. इसके बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और जीत को लगातार दो दिनों तक थाना में रखकर पूछताछ करती रही.
परिजनों के अनुसार इस दौरान उन्हें जीत से मिलने की अनुमति भी नहीं दी गई. दो दिनों बाद जब जीत की हालत अत्यंत नाजुक हो गई, तब पुलिस द्वारा उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इसी दिन जीत की पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसने जन्म लेते ही अपने पिता को खो दिया.
परिजनों का यह भी आरोप है कि मौत के बाद पुलिस ने पीड़ित परिवार को दो लाख रुपये की राशि दी और मामले में यूडी केस दर्ज कर औपचारिकता पूरी कर ली. हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह राशि किस मद से और किन परिस्थितियों में दी गई, जिससे पूरे मामले पर संदेह गहराता है.
वहीं, जमशेदपुर के एसएसपी ने पुलिसकर्मियों का बचाव करते हुए कहा है कि अस्पताल ले जाने से पूर्व जीत महतो को पीआर बांड पर रिहा कर दिया गया था और मानवता के आधार पर पुलिस की गाड़ी से उसे अस्पताल पहुंचाया गया.
मनोज मिश्रा ने आयोग को बताया है कि इस घटना को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है. सभी वर्ग पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच, पीड़ित परिवार को उचित सरकारी मुआवजा, दोषियों पर सख्त कार्रवाई तथा सभी थानों में थर्ड डिग्री रोकने के लिए लाइव सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग एनएचआरसी से की है.

