
उदित वाणी, जमशेदपुर : बैंक ऑफ इंडिया की कदमा उलियान और गोहलाडांग शाखा से 9.56 करोड़ रुपये के गबन मामले में मुख्य आरोपी सीनियर ब्रांच मैनेजर धीरज कुमार झा को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिल सकी। अग्रिम जमानत के लिए दाखिल उनकी याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने 13 मई को खारिज कर दिया।
इस फैसले के बाद अब धीरज कुमार झा सहित 17 नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है। हालांकि, मामले के उजागर होने के 22 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
अधिवक्ता मनोज कुमार के अनुसार, यह मामला 18 जुलाई 2023 को बैंक ऑफ इंडिया के अंचल कार्यालय के अधिकारी सत्य प्रकाश द्वारा कदमा थाना में दर्ज कराया गया था। प्राथमिकी में कहा गया था कि धीरज कुमार झा और गोहलाडांग शाखा के मैनेजर नीतिश कुमार ने अपने पद का दुरुपयोग कर खाताधारकों के साथ मिलीभगत की और फर्जी तरीके से लोन स्वीकृत कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की।
बताया गया कि 9 सितंबर 2020 से 3 अगस्त 2023 के बीच 33 बैंक खातों का उपयोग कर टीडीआर के विरुद्ध लोन और ओवरड्राफ्ट लोन के माध्यम से कुल 9.56 करोड़ रुपये का गबन किया गया। पुलिस की 22 माह लंबी जांच में आरोपों की पुष्टि हुई है।
मुख्य आरोपी धीरज कुमार झा ने अग्रिम जमानत के लिए पहले स्थानीय अदालत, फिर उच्च न्यायालय और अंत में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन हर स्तर पर उन्हें झटका ही मिला। यदि उन्हें अग्रिम जमानत मिल जाती, तो अन्य 17 आरोपियों को भी राहत मिल सकती थी, पर अब सभी की गिरफ्तारी लगभग तय मानी जा रही है।
यह मामला बैंकिंग प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है और प्रशासन से अब सख्त कार्रवाई की अपेक्षा जताई जा रही है।
