
उदित वाणी, रांची : बड़े पैमाने पर फर्जी जीएसटी बिल के जरिये लगभग 800 करोड़ से अधिक की इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाला मामले में ईडी द्वारा शुक्रवार को महाराष्ट्र के नवी मुंबई निवासी अंकेश जैन उर्फ मल्लिक के नए ठिकाने पर छापेमारी की. वहीं जीएसटी घोटाले में मनी लांड्रिंग के तहत जांच में जुटी ईडी को जीएसटी फ्रॉड मामले में चौंकाने वाली जानकारी हाथ लगी है. ईडी को इस घोटाले में बहुचर्चित चारा घोटाले की याद ताजा कर दी. ईडी को मामले में जांच के क्रम में पता चला कि जिस तरह चारा घोटाले में स्कूटर व बाइक से गाय-भैंस व पशुचारा सप्लाई करने के बिल के आधार पर भुगतान लिया गया था.
उसी तरह जीएसटी के फर्जी इंवॉयस पर इनपुट टैक्स क्रेेडिट लिया गया है. बताया गया कि घोटालेबाजों ने जिन ट्रकों से 25 से 30 टन स्क्रैप ढोने की जानकारी अपने बिल में दी है. उन ट्रकों के नंबर बाइक व स्कूटर के हैं यानी घोटालेबाजों ने बाइक व स्कूटर से 25 से 30 टन स्क्रैप ढोया था. साथ ही हवाला से करोड़ों रूपये के लेनदेन से जुड़े सबूत, कागजी कंपनियां बनाकर उनके नाम पर हजारों फर्जी बिल तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने से संबंधित कई सबूत मिले हैं.
बरामद सभी सबूतों का ईडी की ओर से अध्ययन किया जा रहा है. आरोपियों ने बिना ई-वे बिल के ही लोहा, कोयला सहित अन्य सामग्री को एक राज्य से दूसरे राज्य में बिक्री दिखाया है. कमीशन लेकर फर्जी जीएसटी बिल बेचा और इसके माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया. ईडी ने अनुसंधान में पाया कि मेसर्स पूजाशी इंटरप्राइजेज ने मेसर्स तिरूमाला इंटरप्राइजेज को स्क्रैप की बिक्री दिखाने के लिए तैयार कागज में काफी फर्जीवाड़ा किया है. स्क्रैप की ढुलाई के लिए इस्तेमाल किए गए जिन ट्रकों का नंबर दिया गया था वह बाइक का निकला. तैयार कागजात में एक नंबर टीएन28एएम 9803 और दूसरा यूपी21बीएम9302 था.
इसकी जांच की तो पता चला कि 9803 नंबर वाली गाड़ी ट्रक का नहीं बल्कि तमिलनाडू में ही पंजीकृत एक हीरो होंडा सीडी डान मोटरसाइकिल की है. जबकि 9302 नंबर वाले ट्रक की जांच में पाया गया कि वह यूपी के मुरादाबाद में पंजीकृत एक मोटरसाइकिल का नंबर है. दोनों कंपनियों के बीच जिन सामग्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया गया उसके लिए ई-वे बिल का उपयोग किया गया सभी बिल फर्जी मिले. ऐसे बिल जेनरेट ही नहीं हुए थे. मेसर्स पूजाशी से जुड़े इ-वे बिल संख्या 711196176269 की जांच में पाया गया कि उक्त बिल के जरिए दिल्ली से हावड़ा स्क्रैप की ढुलाई हुई है.
इसके लिए जिस ट्रक एचआर37ई7267 का इस्तेमाल किया गया उसकी जांच में पाया गया कि दिल्ली से हावड़ा के बीच एक भी टोल प्लाजा से उक्त ट्रक नहीं गुजरा था. टोल प्लाजा से लिए गए ब्योरे में ट्रक का मूवमेंट सिर्फ हरियाणा से उत्तर प्रदेश के बीच मिला. वह ट्रक कभी दिल्ली गया ही नहीं. गौरतलब है कि ई-वे बिल माल की आवाजाही को ट्रैक करने और जीएसटी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है. यह एक तरह का इलेक्ट्रानिक बिल होता है जो जीएसटी पोर्टल पर आनलाइन जेनरेट होता है. यह जीएसटी व्यवस्था के तहत 50 हजार रुपये से अधिक मूल्य के माल की आवाजाही के लिए अनिवार्य होता है. इसमें माल के परिवहन का पूरा विवरण होता है. इसमें आपूर्तिकर्ता, प्राप्तकर्ता और ट्रांसपोर्टर की जानकारी के अलावा उक्त माल के मूल्य का पूरा ब्यौरा रहता है.
