
उदित वाणी, जमशेदपुर : शहर के सबसे भीड़-भाड़ वाले और लोकप्रिय इलाकों में शुमार बिष्टुपुर स्थित खाओ गली में गुरुवार की दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अज्ञात अपराधियों ने दिनदहाड़े फायरिंग कर दी. इस सनसनीखेज वारदात में पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के विधायक सुखराम उरांव के विधायक प्रतिनिधि समरेश सिंह उर्फ गुड्डू (37) को गोली मारी गई. गंभीर रूप से घायल समरेश को स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना बिष्टुपुर के डीएम मदन स्कूल (केएमपीएम वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर) के ठीक सामने उस वक्त घटी जब दो मोटरसाइकिलों पर सवार चार अपराधियों ने अचानक समरेश सिंह पर गोलियां बरसा दीं. हमलावर फायरिंग करते हुए मौके से फरार हो गए. गोली लगते ही समरेश जमीन पर गिर पड़े. घटनास्थल पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. हालांकि हमलावरों के डर से कुछ देर के लिए बाजार में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया.
घटना के बाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही बिष्टुपुर थाना प्रभारी, डीएसपी मुख्यालय-1 और सिटी एसपी समेत कई पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे. पुलिस ने मौके से खोखा बरामद किया है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं. घटनास्थल की घेराबंदी कर तलाशी अभियान भी चलाया गया है.
बिष्टुपुर थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी एंगल से जांच की जा रही है. गोली कितनी बार चलाई गई, किस हथियार का प्रयोग हुआ और हमला किन कारणों से किया गया—इसकी जांच जारी है. पुलिस ने इलाके के दुकानदारों और प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ शुरू कर दी है.
राजनीतिक हलकों में हलचल, बढ़ाई गई सुरक्षा
घटना की जानकारी मिलते ही विधायक सुखराम उरांव के करीबी और झामुमो नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर समरेश सिंह की स्थिति का जायजा लिया. पार्टी नेताओं ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और प्रशासन से अविलंब कार्रवाई की मांग की है. विधायक सुखराम उरांव ने एक बयान में कहा कि समरेश सिंह पार्टी के एक सक्रिय कार्यकर्ता हैं और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया है. यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं बल्कि लोकतंत्र पर हमला है.
स्थानीय लोगों में डर का माहौल
खाओ गली, जो कि बिष्टुपुर का एक प्रमुख खान-पान और व्यावसायिक इलाका है, आमतौर पर देर रात तक गुलजार रहता है. दिनदहाड़े गोली चलने की घटना ने यहां के दुकानदारों और आम नागरिकों को सकते में डाल दिया है. स्थानीय दुकानदार रवि अग्रवाल ने बताया कि “हम रोज़ की तरह दुकान चला रहे थे कि अचानक गोलियों की आवाज़ आई. सब कुछ चंद सेकेंड में हुआ. लोग इधर-उधर भागने लगे. ऐसा लगता है जैसे अपराधियों को किसी का डर ही नहीं रह गया.”
सवालों के घेरे में कानून व्यवस्था
घटना ने एक बार फिर जमशेदपुर की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में अगर दिनदहाड़े इस तरह फायरिंग हो सकती है तो आम लोगों की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगना लाजिमी है. सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी आलोचना शुरू हो गई है.
पूर्व में मिल चुकी थी धमकी?
सूत्रों की मानें तो समरेश सिंह को पिछले कुछ दिनों से अज्ञात नंबरों से धमकी भरे कॉल आ रहे थे. हालांकि इस बारे में उन्होंने पुलिस को कोई लिखित सूचना नहीं दी थी. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं यह हमला किसी पुरानी रंजिश या राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का नतीजा तो नहीं है.
एसएसपी ने क्या कहा
पूर्वी सिंहभूम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पियूष पांडे ने बताया, “घटना गंभीर है. हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है. सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और तकनीकी विश्लेषण के जरिए हम जल्द ही अपराधियों को पकड़ लेंगे.”
पुलिस के लिए चुनौती बनती वारदातें
इस वर्ष शहर में इस प्रकार की यह तीसरी बड़ी फायरिंग की घटना है, जब व्यस्त इलाकों में अपराधियों ने खुलेआम फायरिंग की है. इससे पहले भी सोनारी और कदमा क्षेत्रों में दो व्यापारियों पर हमले हो चुके हैं. बावजूद इसके पुलिस अब तक अपराधियों तक नहीं पहुंच सकी है, जो प्रशासन के लिए चिंता का विषय है.
दिनदहाड़े हुए इस हमले ने जमशेदपुर की जनता और पुलिस दोनों को झकझोर कर रख दिया है. जहां एक ओर यह घटना राजनीतिक प्रतिनिधियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है, वहीं दूसरी ओर यह पुलिस के लिए भी एक चुनौती बन चुकी है. शहर में अपराध पर लगाम कसना और आम नागरिकों में भरोसा कायम रखना अब पुलिस के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए.

