
नाइट शिफ्ट में महिलाओं के काम करने से लैंगिक विविधता बढ़ेगी
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक (एमडी) टीवी नरेन्द्रन ने कहा कि टाटा स्टील की दूसरी तिमाही का रिजल्ट बेहतर आया है. यह बेहतर रिजल्ट न केवल इंडिया के सारे लोकेशनों का आया है बल्कि विदेशी लोकेशनों में भी बेहतर परफार्मेंस रहा है. केवल यूके का रिजल्ट संतोषजनक नहीं रहा है. नरेन्द्रन शनिवार शाम को गोपाल मैदान बिष्टुपुर में जनजातीय महोत्सव संवाद-25 के शुभारंभ के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे.
उन्होंने बताया कि अभी भी स्टील इंडस्ट्री के सामने चुनौतियां काफी है. सबसे बड़ी चुनौती स्टील की कम कीमत है. स्टील की कीमत सबसे नीचे है. उन्होंने कहा कि बाहर के देशों से आ रहे स्टील से उन्हें कोई नहीं परेशानी है, परेशानी स्टील के अनफेयर प्राइस को लेकर है, जो बाजार को प्रतिस्पर्धी नहीं बनाता है.
भारत इस मामले में यूनिक है कि यहां कच्चा माल के साथ बाजार भी है
एमडी ने कहा कि स्टील, कोर इंडस्ट्री है. भारत में स्टील का भविष्य काफी अच्छा है. दुनिया में बहुत कम ऐसे देश हैं, जहां लौह अयस्क के साथ बाजार भी है. आस्ट्रेलिया में कच्चा माल है तो बाजार नहीं और चीन में बाजार है तो कच्चा माल नहीं है. कच्चा माल और बाजार का होने स्टील इंडस्ट्री के लिए भारत को यूनिक बनाता है. उन्होंने बताया कि इस समस्या को सरकार भी एड्रेस कर रही है.
नाइट शिफ्ट में काम करने से लैंगिक विविधता बढ़ेगी
टाटा स्टील में नाइट शिफ्ट में महिलाओं के काम करने को उन्होंने एक ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि कंपनी इस पहल का स्वागत करती है. सरकार ने भी इसे हरी झंडी दे दी है. अगर लैंगिक विविधता को प्रोत्साहित करना है तो महिलाओं को नाइट शिफ्ट में भी काम करना होगा, कंपनी, अपने कार्यबल में महिलाओं की संख्या को बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. हम महिलाओं को बेहतर कार्यस्थल देने के लिए प्रतिबद्ध है. उनकी सेफ्टी और सिक्योरिटी का पूरा इंतजाम किया गया है. यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि महिलाएं बिना ड़र और भय के काम कर सके.
जनजातीय युवाओं को कुशल बना रहे हैं
टीवी नरेन्द्रन ने कहा कि संवाद का सफर 12 साल का हो गया है. इसका देश के जनजातीय समूहों पर काफी असर रहा है. अभी तक हमने 330 जनजातीय समूहों को संवाद के मंच से जोड़ा है. हमारी कोशिश है कि 2030 तक देश के सभी 600 से ज्यादा जनजातीय समूहों को इस मंच से जोड़ा जा सके, ताकि संवाद का व्यापक असर हो. एमडी ने कहा कि संवाद विभिन्न वर्टिकल में काम कर रहा है. संगीत, खानपान, कला, जनजातीय भाषा और उनकी पारम्परिक चिकित्सा पद्धति पर काफी काम हो रहा है. जनजातीय समूहों को रोजगार उपलब्ध कराकर उन्हें मुख्यधारा में शामिल के सवाल पर कहा कि टाटा स्टील पहले से ही कई कोशिश कर रही है.
उनके रोजगार के लिए हम उनके कौशल विकास पर काफी काम कर रहे हैं, ताकि आदिवासी युवा कुशल होकर अपना रोजगार शुरू कर सके. यही नहीं उनमें उद्यमिता को बढ़ावा देने की कोशिश हो रही है. इसका नतीजा है कि कई जनजातीय युवा है, जो अपना स्टार्ट अप और उद्यम शुरू कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि संवाद में शिरकत करने वाले जनजातीय युवाओं से बातचीत में कई ने बताया कि वे उन्होंने अपना उद्यम लगाया है.

