
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टीवी नरेंद्रन ने नए साल के पहले दिन सेंटर फॉर एक्सीलेंस जमशेदपुर में केक कटिंग समारोह में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि कंपनी का जमशेदपुर प्लांट अब क्षमता विस्तार के लिए आगे नहीं बढ़ सकता. 1800 एकड़ क्षेत्र में फैले इस प्लांट से वर्तमान में 11 मिलियन टन स्टील का उत्पादन हो रहा है, जिससे आगे वॉल्यूम बढ़ाना संभव नहीं है. नरेंद्रन ने कहा, “जमशेदपुर प्लांट में अब हम नई तकनीकों के जरिए वैल्यू एडिशन पर फोकस करेंगे, ताकि प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता बढ़े और कंपनी अधिक प्रतिस्पर्धी बने.” इसके लिए टाटा स्टील बोर्ड ने जमशेदपुर में 1 मिलियन टन क्षमता वाले डेमोन्सट्रेशन प्लांट को मंजूरी दी है.
यह प्लांट जर्मनी की तकनीक पर आधारित होगा, जिसमें कोक की जगह अन्य विकल्पों का उपयोग कर कोयले की खपत 30-40 फीसदी तक कम की जाएगी. इसके अलावा, नीदरलैंड्स के इज्मुइडेन प्लांट (जिसमें हिसार्ना टेक्नोलॉजी का पायलट चल रहा है) के साथ मिलकर जमशेदपुर में 600-800 टन क्षमता वाला स्केल-अप प्लांट लगाया जाएगा. दोनों प्रोजेक्ट्स में कुल 2000-3000 करोड़ रुपये का निवेश होगा. ये कदम कार्बन उत्सर्जन कम करने और सस्टेनेबल स्टील उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण हैं.
डाउनस्ट्रीम बिजनेस में निवेश
कंपनी लांग प्रोडक्ट्स और डाउनस्ट्रीम बिजनेस को भी बढ़ावा दे रही है. इंडियन स्टील एंड वायर प्रोडक्ट्स में 2000 करोड़ रुपये की लागत से नई कॉम्बी मिल शुरू की जा चुकी है. टिनप्लेट डिवीजन में भी समान निवेश से विस्तार चल रहा है. हाल ही में टाटा स्टील ने ब्लूस्कोप की शेष हिस्सेदारी अधिग्रहित कर ली है, जिससे टाटा ब्लूस्कोप स्टील अब कंपनी की 100% सहायक इकाई बन गई है. इससे कोटेड स्टील सेगमेंट में कंपनी की स्थिति मजबूत होगी.
स्टील की कीमत पांच साल में सबसे कम
नरेंद्रन ने वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि 2025 में स्टील की कीमतें पांच साल के निचले स्तर पर रहीं, मुख्य रूप से चीन की अतिरिक्त आपूर्ति और डंपिंग के कारण. फिर भी, टाटा स्टील की भारतीय इकाइयां मजबूत प्रदर्शन कर रही हैं और कंपनी आगे भी निवेश जारी रखेगी. टाटा स्टील का फोकस अब वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स, डिकार्बनाइजेशन और डाउनस्ट्रीम ग्रोथ पर है, जो कंपनी को भविष्य के लिए तैयार करेगा.

टाटा स्टील ओडिशा प्लांट्स में लगातार विस्तार कर रही, कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर: टीवी नरेंद्रन
टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टीवी नरेंद्रन ने नए साल के पहले दिन कंपनी की ओडिशा इकाइयों में चल रहे विस्तारीकरण की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि कलिंगानगर, मेरामंडली और नीलाचल के तीनों प्लांट्स में लगातार विस्तार कार्य चल रहा है, जो कंपनी की भारत में क्षमता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है. एक सवाल के जवाब में नरेंद्रन ने विस्तारीकरण के साथ आने वाली पर्यावरणीय चुनौतियों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, “विस्तारीकरण के साथ कार्बन उत्सर्जन की चुनौतियां भी हैं. हम सरकार के नियमों के तहत काम करते हैं, क्योंकि किसी भी विस्तार के लिए पर्यावरण मंजूरी (एनवायरनमेंट क्लियरेंस) जरूरी होती है. हमारी कोशिश रहती है कि सरकार के नियमों से आगे बढ़कर हम अधिक पर्यावरण अनुकूल रहें.”
लो कार्बन स्टील के लिए कस्टमर को भी प्रीमियम देने के लिए तैयार रहना चाहिए
नरेंद्रन ने यूरोप में कंपनी के प्लांट्स का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के सख्त मानकों से हम अच्छी तरह वाकिफ हैं. कार्बन टैक्स के संदर्भ में उन्होंने बताया, “यूरोप में हमारा अनुभव है, इसलिए हमें पता है कि ऐसी नीतियों के लिए खुद को कैसे तैयार करना है. भारत में कार्बन टैक्स अभी शुरू हुआ है, इससे कंपनियों पर दबाव बनेगा कि वे उत्सर्जन कम करें. उत्सर्जन कम करने के लिए टैक्स जरूरी है.” उन्होंने आगे कहा कि ग्राहकों को भी लो-कार्बन स्टील के लिए प्रीमियम देने को तैयार रहना चाहिए. “यूरोप में लो-कार्बन स्टील के लिए न केवल ग्राहक प्रीमियम देते हैं, बल्कि सरकारें इंसेंटिव भी प्रदान करती हैं. भारत में अभी ऐसा माहौल उतना नहीं है.”
भारत में 2070 तक नेट जीरो
भारत के नेट जीरो लक्ष्य पर नरेंद्रन ने कहा कि भारत ने 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य रखा है, जबकि कई अन्य देशों में यह 2050 तक है. “भारत में अभी थोड़ा अधिक समय है, लेकिन हम इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं.” टाटा स्टील पहले से ही डिकार्बनाइजेशन पर फोकस कर रही है, जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन, स्क्रैप-बेस्ड प्रोडक्शन और नई तकनीकों का उपयोग शामिल है. कंपनी का लक्ष्य 2045 तक महत्वपूर्ण कमी हासिल करना है, जो वैश्विक मानकों से आगे है. यह बयान टाटा स्टील की सस्टेनेबल ग्रोथ और ग्रीन स्टील उत्पादन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो वैश्विक जलवायु चुनौतियों के बीच कंपनी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

नरेंद्रन ने जमशेदपुर नागरिकों से सड़क अनुशासन की अपील की, कहा-आदत में बदलाव लाएं
टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टीवी नरेंद्रन ने नए साल के पहले दिन शहरवासियों को संबोधित करते हुए जमशेदपुर को विश्व स्तरीय स्टील उत्पादन का केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई, लेकिन साथ ही नागरिकों के व्यवहार पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि शहर की सड़कों पर गलत दिशा से वाहन चलाना और ट्रैफिक नियमों की अवहेलना बेहद शर्मनाक है. नरेंद्रन ने कहा, “हम जमशेदपुर में वर्ल्ड क्लास स्टील बनाने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन शहर के नागरिकों का व्यवहार कई बार निराशाजनक होता है. सड़क पर चलते समय हम देखते हैं कि लोग रॉंग साइड या विपरीत दिशा से वाहन चलाते हैं. हम ऐसे व्यवहार की अपेक्षा नहीं करते. इससे आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं और सेफ्टी एक बड़ा मुद्दा बन गया है.” उन्होंने शहर को बेहतर बनाने के लिए नागरिकों से मिलकर काम करने की अपील की. “टाटा स्टील भविष्य में भी शहर की सुविधाओं और विकास के लिए काम करती रहेगी, लेकिन जमशेदपुर तभी सचमुच बेहतर बनेगा जब नागरिकों का पूरा समर्थन और सहयोग हो.”
नंबर वन क्यों नहीं?
स्वच्छता सर्वेक्षण का जिक्र करते हुए नरेंद्रन ने कहा कि हाल ही में जमशेदपुर ने 3-10 लाख आबादी वाली श्रेणी में तीसरा स्थान हासिल किया है. “सवाल यह है कि हम नंबर-1 क्यों नहीं बन सकते? इसके लिए पब्लिक को मदद करनी होगी. अपनी आदतों में बदलाव लाना होगा, ट्रैफिक नियमों का पालन करना होगा और शहर को स्वच्छ व सुरक्षित रखने में योगदान देना होगा.” टाटा स्टील की ओर से शहर के विकास में निरंतर योगदान की प्रतिबद्धता दोहराते हुए नरेंद्रन ने उम्मीद जताई कि नए साल में नागरिक बेहतर व्यवहार अपनाकर जमशेदपुर को आदर्श शहर बनाएंगे.
लीज की मियाद खत्म होने का मतलब लीज समाप्त नहीं, नवीनीकरण प्रक्रिया जारी-सुंदरा रामम
टाटा स्टील के वाइस प्रेसीडेंट (कॉर्पोरेट सर्विसेज) डीबी सुंदरा रामम ने नए साल के अवसर पर मीडिया को संबोधित करते हुए कंपनी की जमशेदपुर लीज के नवीनीकरण पर स्पष्ट जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर को टाटा लीज की मियाद खत्म हो गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि लीज समाप्त हो गई है. रामम ने कहा, “माइनिंग लीज हो या लैंड लीज, जब तक सरकार इसके बारे में कोई अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक लीज का मालिकाना हक टाटा स्टील के पास ही रहता है. हमने नवीनीकरण के लिए सर्वे पूरा करके अपना प्रस्ताव प्रशासन को सौंप दिया है. यह प्रस्ताव रांची पहुंच गया है और जल्द ही सरकार की कमेटी इसकी जांच करके फैसला लेगी.” उन्होंने कहा कि कंपनी लीज में कोई क्षेत्र जोड़ या घटा नहीं रही है. “पिछली लीज की सभी शर्तें ही लागू हैं. जो क्षेत्र पिछली लीज में बाहर हो गए थे, उनमें भी हम पानी-बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराते रहेंगे. अगर सरकार चाहे कि उन क्षेत्रों को फिर से लीज में शामिल किया जाए, तो हमें कोई आपत्ति नहीं है.” यह बयान ऐसे समय में आया है जब जमशेदपुर लीज का नवीनीकरण 1 जनवरी 2026 से अगले 30 वर्षों के लिए प्रभावी होने वाला है.
कीनन स्टेडियम में इंटरनेशनल मैच की वापसी की कोशिश जारी
कीनन स्टेडियम में अंतर्राष्ट्रीय मैचों की वापसी पर रामम ने कहा कि इस संबंध में बातचीत चल रही है. टाटा स्टील स्टेडियम के नवीनीकरण और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर लाने की दिशा में प्रयासरत है, ताकि यहां फिर से बड़े क्रिकेट मैच आयोजित हो सकें.
सुरक्षा के मद्देनजर एयरपोर्ट का विस्तार
एयरपोर्ट के बारे में कहा कि सुरक्षा की वजह से सोनारी एयरपोर्ट की चौड़ाई बढ़ाई जा रही है. लंबाई बढ़ाने के लिए जगह नहीं है. इस विस्तारीकरण से कोई नई सेवा नहीं शुरू होगी. यह केवल सुरक्षा के मद्देनदजर किया जा रहा है.

