
उदित वाणी, जमशेदपुर : हमेशा से विवादों में रही टाटा कमिंस कर्मचारी यूनियन इस बार अपनी अलोकतांत्रिक गतिविधियों के लिए चर्चा में है. येन केन प्रकारेण सत्ता में बने रहने के लिए वर्तमान यूनियन न केवल विरोधियों का बाहर का रास्ता दिखा रही है बल्कि उन्हें नहीं जीतने देने के लिए गैर संवैधानिक तरीके से निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव कर रही है ताकि वर्तमान यूनियन फिर से सत्ता में आ सके. यूनियन के वर्तमान नेताओं की इस निरंकुश कार्रवाई को लेकर यूनियन के कुछ नेताओं ने न केवल डीएलसी से शिकायत की है बल्कि मंगलवार को प्लांट हेड अजितेश मोजा से मिलकर यूनियन में चल रही इस असंवैधानिक कार्रवाई को रोकने की मांग की.
मगर सूत्रों का कहना है कि पर्दे के पीछे से प्रबंधन ही वैसे नेताओं को कंपनी और यूनियन से बाहर का रास्ता दिखा रही है, जो बाद में प्रबंधन के लिए परेशानी को सबब बन सकते है. वर्तमान यूनियन को बनाने में प्रबंधन की अहम भूमिका रही थी. अब उसकी कोशिश है कि इसी यूनियन को आगे भी जारी रखी जाय, ताकि वह अपनी बातों को आसानी से मंगवा सके.
प्रबंधन की पिछलग्गू है वर्तमान यूनियन
कंपनी के कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान यूनियन पूरी तरह से प्रबंधन की पिछलग्गू है और उसे कर्मचारियों के हित से कोई मतलब नहीं है. अब जब यूनियन का चुनाव होने वाला है तो यूनियन के कई पदाधिकारियों और कमेटी मेंबरों को हार का डर सताने लगा है, क्योंकि अगर सही चुनाव हुआ तो उनका हारना तय है. इसे लेकर बड़े पैमाने पर निर्वाचन क्षेत्रों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है, ताकि उनकी सत्ता बरकरार रह सके.
कमेटी मीटिंग में यूनियन का विरोध
बताया जाता है कि निर्वाचन क्षेत्रों में की जा रही छेड़खानी को लेकर कमेटी मीटिंग में रंजन पांडेय, सुमित पॉल और प्रकाश महतो ने विरोध भी जताया है. उनका कहना है कि अब तक यूनियन का चुनाव पारदर्शी तरीके से होता रहा है, लेकिन अब जान बुझकर निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव किया जा रहा है.
विरोधी नेताओं को बाहर का रास्ता
यूनियन चुनाव के पहले ही विरोधी खेमे के नेताओं को एक-एक कर यूनियन ने बाहर का रास्ता दिखा दिया. इसमें रमाकांत करूआ, मनोज कुमार सिंह और धीरज कुमार सिंह शामिल है, जिन्हें यूनियन से ही बर्खास्त कर दिया गया, ताकि वे चुनाव नहीं लड़ सके. इसके पहले चन्द्रभूषण पांडेय को कंपनी ने बर्खास्त कर दिया था.
31 जुलाई को हो सकता है चुनाव
टाटा कमिंस कर्मचारी यूनियन का चुनाव 31 जुलाई को हो सकता है. इसे लेकर यूनियन की तैयारियां जारी है और चुनाव का नोटिस कभी भी लग सकता है. लेकिन यूनियन, चुनाव के विरोध को देखते हुए सोच विचार कर कदम उठाना चाहती है, ताकि लेने के देने नहीं पड़ जाय.
