
उदित वाणी, जमशेदपुर : हिंदी सप्ताह समारोह के शुभ अवसर पर राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला के प्रेक्षागृह में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया. इस अवसर पर प्रयोगशाला के निदेशक डॉ संदीप घोष चौधरी ने कहा कि हम सब एकत्रित हुए हैं एक भव्य कवि सम्मेलन के लिए. यह अवसर केवल कवियों और श्रोताओं का संवाद नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव है. उन्होंने कहा कि कविता, मनुष्य की आत्मा की अनिवार्य अभिव्यक्ति है. जब शब्द भाव से जुड़ते हैं, तो वे केवल भाषा नहीं रहते, वे लोक-जीवन के दर्पण बन जाते हैं. लोकमानस की पीड़ा, उसकी आशा, उसका उल्लास, उसकी संवेदना—सबसे सीधा और सशक्त माध्यम कविता ही रही है. इस अवसर पर प्रयोगशाला के सभी कार्मिकों के साथ-साथ संगीता घोष चौधरी भी उपस्थित थीं जिन्होंने अपनी उपस्थिति के द्वारा सभी कार्मिकों को प्रेरणा प्रदान की.

