
उदित वाणी, जमशेदपुर : एनसीएलएटी ने इंकैब के कर्मचारियों द्वारा एनसीएलटी के तमाम आदेशों के खिलाफ दायर अपील को गुरुवार को दिल्ली में हुई सुनवाई के बाद स्वीकृत कर लिया. सुनवाई के दौरान इंकैब कर्मचारियों के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने माननीय अपीलेट ट्राइब्यूनल, एनसीएलएटी को बताया कि कर्मचारियों की अपील तीन न्यायायिक आदेशों पर आधारित है, जिसकी रिजोल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) पंकज टिबरेवाल ने अवहेलना की है. अधिवक्ता ने बताया कि पहला न्यायायिक आदेश है दिल्ली हाई कोर्ट का है, जिसमें माननीय अदालत ने व्यवस्था दी कि आरआर केबल्स और पेगाशस एसेट रिकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड का उद्देश्य जमीन कब्जा करने का है जबकि आरपी पंकज टिबरेवाल ने रमेश घमंडीराम गोवानी की कंपनियों आरआर केबल्स, कमला मिल्स और फस्क्वा इन्वेस्टमेंट के साथ पेगाशस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों को इंकैब कंपनी का वित्तीय लेनदार बना दिया.
उन्होंने आगे बताया कि माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने बैंकों और डिबेंचर होल्डर्स की कुल देनदारी 21.63 करोड़ तय की थी, पर कोई भी बैंक और डिबेंचर होल्डर्स एनसीएलटी नहीं आए और रिजोल्यूशन प्रोफेशनल पंकज टिबरेवाल ने गलत तरीके से रमेश घमंडीराम गोवानी, पेगाशस एसेट रिकंस्ट्रक्शन और ट्रॉपिकल वेंचर्स को वित्तीय लेनदार घोषित कर उनका कुल 4000 करोड़ का दावा मंजूर कर लिया. जबकि इंकैब कंपनी की कोई भी देनदारी नहीं है और सारी वित्तीय और अन्य देनदारियां अवधि बाधित होने के कारण समाप्त हो गयी है.
टाटा स्टील ने एनसीएलटी में पेटीशन दायर नहीं किया-श्रीवास्तव
श्रीवास्तव ने आगे बताया कि माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने टाटा स्टील को इंकैब कंपनी का अधिग्रहण करने को कहा था, पर टाटा स्टील माननीय सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर कर कमला मिल्स, पेगाशस और ट्रॉपिकल वेंचर्स को बैंकों द्वारा बेचे गये समय बाधित एनपीए को रद्द करने को कहा, पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने टाटा स्टील के एनसीएलटी में वह मामला ले जाने को कहा. पर टाटा स्टील ने माननीय एनसीएलटी में कोई पिटीशन दायर नहीं किया. तब इंकैब के कर्मचारियों ने एनसीएलटी में सेक्शन 9 का पिटीशन दायर कर इंकैब कंपनी के उद्धार की प्रार्थना की.
एनसीएलटी ने पहले मोराटोरियम जारी किया, फिर उसके परिसमापन की घोषणा कर दी. कर्मचारियों ने माननीय एनसीएलएटी में अपील दायर किया और माननीय एनसीएलएटी ने न केवल उक्त परिसमापन आदेश को रद्द किया बल्कि रिजोल्यूशन प्रक्रिया और लेनदारों की समिति को अवैध घोषित करते हुए रिजोल्यूशन प्रोफेशनल शशि अग्रवाल को उनके कार्यों से हटा दिया. बाद में आईबीबीआई ने जांच के बाद रिजोल्यूशन प्रोफेशनल बनने की अर्हता समाप्त कर दी.
कर्मचारियों को अपील दायर करने का हक नहीं-आरपी अधिवक्ता
रिजोल्यूशन प्रोफेशनल के अधिवक्ता ने दावा किया कि कर्मचारियों को ये अपील दायर करने का हक नहीं है, जिसे माननीय अदालत ने खारिज करते हुए तीन सप्ताह में हलफनामा दायर करने का आदेश दिया और पिटीशनर को दो सप्ताह का वक्त रिज्वांइंडर दायर करने के लिए दिया गया.अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी. कर्मचारियों की ओर से श्रीवास्तव, आकाश शर्मा और रिशभ रंजन ने सुनवाई में हिस्सा लिया.
