
संजय प्रसाद
उदित वाणी, जमशेदपुर : 2025 जमशेदपुर की विभिन्न टाटा यूनियनों के लिए महत्वपूर्ण बदलावों और उपलब्धियों का वर्ष रहा. इस साल यूनियनों ने संविधान संशोधन, चुनाव, बोनस समझौते और कर्मचारियों के स्थायीकरण जैसे मुद्दों पर फोकस किया, जिससे श्रमिकों के हितों में मजबूती आई. टाटा वर्कर्स यूनियन से लेकर टाटा मोटर्स और टाटा कमिंस तक, कई यूनियनों में नेतृत्व परिवर्तन और नीतिगत बदलाव देखे गए. आइए, इस वर्ष की प्रमुख घटनाओं पर एक नजर डालते हैं.
टाटा वर्कर्स यूनियन: संविधान संशोधन और बोनस की बड़ी जीत
टाटा वर्कर्स यूनियन के लिए 2025 सबसे बड़ा बदलाव संविधान संशोधन का रहा। नवंबर में हुई कमिटी मीटिंग में संविधान संशोधन का प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें कमिटी सदस्यों की संख्या 214 से घटाकर 150-170 करने का सुझाव दिया गया. इसके अलावा, दिसंबर में होने वाली वार्षिक आम बैठक में इन संशोधनों को औपचारिक रूप देने और वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत करने पर जोर दिया गया. यूनियन ने प्रबंधन के साथ विभिन्न मुद्दों पर बातचीत कर समाधान निकाले, जिसमें वेज रिवीजन भी शामिल था. सितंबर में घोषित 18.5 फीसदी बोनस ने कर्मचारियों को राहत दी, जो पिछले साल की दर पर ही जारी रहा. इसके अलावा, टाटा स्टील ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कुल 303.13 करोड़ रुपये का बोनस घोषित किया, जो यूनियन की मजबूत सौदेबाजी का नतीजा था.
टाटा कमिंस श्रमिक यूनियन: चुनाव में वर्तमान टीम की हार
टाटा कमिंस श्रमिक यूनियन के चुनाव इस साल चर्चा का केंद्र रहा. वर्तमान टीम की शर्मनाक हार हुई, जिससे यूनियन में नए नेतृत्व की संभावनाएं खुलीं, यह बदलाव यूनियन की आंतरिक गतिशीलता को दर्शाता है. यूनियन ने प्रबंधन के साथ श्रमिक मुद्दों पर सकारात्मक वार्ता जारी रखी, जिससे कर्मचारियों के हित सुरक्षित रहे.
टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन: नया अध्यक्ष और स्थायीकरण की प्रक्रिया
टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन में अप्रैल में शशि भूषण प्रसाद को नया अध्यक्ष चुना गया, जो एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन था। अगस्त में यूनियन ने प्रबंधन के साथ ऐतिहासिक बोनस समझौता किया, जिसके बाद अध्यक्ष शशि भूषण प्रसाद और महासचिव आरके सिंह का जोरदार स्वागत किया गया. स्थायीकरण की प्रक्रिया पूरे साल जारी रही, और दिसंबर में 225 अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी किया गया. यूनियन का दावा है कि 2026 तक कंपनी के सभी ‘बाई सिक्स’ कर्मचारियों का स्थायीकरण पूरा हो जाएगा, जो श्रमिकों के लिए बड़ी राहत होगी.
अन्य यूनियनों में चुनाव और उपलब्धियां
जमशेदपुर की कई अन्य यूनियनों में भी चुनाव हुए. टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज श्रमिक यूनियन (पूर्व में जुस्को श्रमिक यूनियन) में जून में रघुनाथ पांडे की टीम ने भारी जीत दर्ज की. मई में 13 निर्वाचन क्षेत्रों में 17 कमिटी सदस्यों के लिए चुनाव कराए गए. इसके अलावा, दिसंबर में आयोजित इंटर यूनियन स्पोर्ट्स टूर्नामेंट में टाटा वर्कर्स यूनियन, टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन और ओएमक्यू बी यूनियन विजेता बनीं, जो यूनियनों के बीच एकता को दर्शाता है. टाटा स्टील यूआईएसएल ने 39वें एनसीक्यूसी 2025 में उत्कृष्टता पुरस्कार जीते, जो गुणवत्ता प्रबंधन में यूनियन की भूमिका को रेखांकित करता है.
2026 की ओर नजर
2025 ने जमशेदपुर की टाटा यूनियनों को मजबूत नींव दी, लेकिन चुनौतियां बाकी हैं. स्थायीकरण, वेज रिवीजन और संविधान संशोधन जैसे मुद्दे 2026 में फलित होंगे. कुल मिलाकर, यह साल श्रमिक एकता और प्रबंधन के साथ सकारात्मक संवाद का रहा, जो भविष्य में और बेहतर परिणाम ला सकता है.

