
अगर एनएमएल के वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को ईजाद कर लिया तो नोबेल प्राइज मिलना तय- डीजी
उदित वाणी, जमशेदपुर : वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की महानिदेशक (डायरेक्टर जेनरल) डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) जमशेदपुर की अहम भूमिका हो सकती है. उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों को देश को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने में अपना योगदान देने का आह्वान किया. डीजी ने संस्थान के वैज्ञानिकों से कहा कि अगले 25 साल में जब यह संस्थान अपना शताब्दी समारोह मना रहा होगा, उस वक्त तक इस संस्थान के एक वैज्ञानिक को नोबेल पुरस्कार मिल जाना चाहिए. डॉ.कलैसेल्वी, एनएमएल जमशेदपुर के प्लैटिनम जुबिली समारोह को संबोधित कर रही थी.
मिशन मोड में काम करने की अपील
उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों को देश को आगे ले जाने के लिए मिशन मोड में काम करने की चुनौती दी. वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में वैसी धातुओं को विकसित करने पर जोर दिया, जिसके लिए हम दूसरे देशों पर निर्भर है. सप्लाई चेन डिसरप्शन को देखते हुए देश को क्रिटिकल और स्ट्रेटजिक मेटेरियल्स के मामले में आत्मनिर्भर बनने को कहा.
एनएमएल को तीन क्षेत्र में काम करने को कहा
सीएसआईआर की महानिदेशक ने एनएमएल के वैज्ञानिकों को तीन क्षेत्रों में काम करने के लिए अपनी जिम्मेवारी लेने को कहा. ये क्षेत्र हैं-
1. नन कूकिंग कोल को कूकिंग कोल बनाना-उन्होंने कहा कि झारखंड में कोयला भरपूर है. हमें ऐसी तकनीक विकसित करनी होगी कि नन कूकिंग कोल को हम कूकिंग कोल बना सके. अगर ऐसा हुआ तो भारत कोयले के क्षेत्र में दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाएगा और संभव हो इस तकनीक को विकसित करने के लिए संस्थान के वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार भी मिल जाय.
2. मैग्नेशियम का उत्पादन-डॉ.एन कलैसेल्वी ने कहा कि भारत मैग्नेशियम को दूसरे देशों से आयात करता है. एनएमएल में पहले से ही मैग्नेशियम का पायलट प्लांट है. अगर यह प्रयोगशाला, मैग्नेशियम को कमर्शियल उत्पादन की तकनीक विकसित कर लेती है तो देश के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि मैग्नस का इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण क्षेत्र में होता है.
3. स्काई रूट एयरस्पेस के लिए मेटालिक पाउडर को बनाना-डीजी ने बताया कि हैदराबाद की प्राइवेट कंपनी स्काइ रूट एयरस्पेस, थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक से रॉकेट बनाती है. रॉकेट के क्राओजेनिक इंजन को बनाने में पहले जो सालों लगते हैं, अब यह कंपनी कुछ दिनों में बना देती है. डीजी ने कहा कि अगर एनएमएल रॉकेट में इस्तेमाल होने वाले मेटालिक पाउडर को बनाता है तो वह इस कंपनी को सप्लाई कर सकता है. उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों को हैदराबाद स्थित इस कंपनी को देखने और उसके संस्थापकों से मिलने की सलाह दी. उल्लेखनीय है कि यह भारत की पहली प्राइवेट कंपनी है, जिसने अपना रॉकेट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में लांच किया. इसकी स्थापना हैदराबाद के दो युवा इंजीनियरों ने की है.

न्यू बैटरी और मैग्नेट की तकनीक पर काम करें
डीजी ने एनएमएल के वैज्ञानिकों को आह्वान किया कि वे न्यू बैटरी और मैग्नेट की तकनीक को विकसित करने पर काम करें. इसके लिए उन्होंने सामूहिक जिम्मेवारी लेने को कहा. उन्होंने कहा कि अभी तक एनएमएल रिसाइक्लिंग के जरिए कीमती धातुओं का निष्कर्षण कर रहा है. उन्होंने इसके इलेक्ट्रोड्स बनाने को कहा और इस क्षेत्र में लीडर बनने का आह्वान किया.
टेक्नीकल डेनाइल युग नहीं रहा
डीजी ने कहा कि एक दौर था, जब भारत तकनीक को अस्वीकार करते रहा था, लेकिन यह दौर तकनीक का दौर है और दुनिया में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करने के लिए तकनीक रूप से हमें सम्पन्न बनना होगा. उन्होंने कहा कि आज की भू राजनीतिक स्थिति में जब सप्लाई चेन डिसरप्शन की चुनौतियां बढ़ गई है, वैसी स्थिति में हमें परमाणु ऊर्जा समेत रक्षा, अंतरिक्ष और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्र में अग्रणी बनना होगा. यह तभी होगा, जब हम वैसे मेटेरियल्स और मेटल में आत्मनिर्भर बनेंगे, जो इंडस्ट्री में इस्तेमाल होता है. उन्होंने स्वदेशी मैग्नेशियम को भारत की लाइफलाइन करार दिया.
एलॉय (मिश्र धातु) के क्षेत्र में डीजी ने कहा कि एलॉय क्षेत्र में एनएमएल की अहम भूमिका हो सकती है. आज स्पेस से लेकर डिफेंस तक में इसका इस्तेमाल होता है.

मेडिकल इक्विपमेंट के क्षेत्र में
डीजी ने कहा कि एनएमएल मेडिकल एक्विपमेंट के क्षेत्र में काम कर सकता है. आज देश में मेडिकल इम्प्लांट में लगने वाले सामान बाहर से आयात होकर आते है. अगर इसे हम अपने देश में ही बनाए, तो इसका मेडिकल क्षेत्र पर बहुत बड़ा असर होगा. उन्होंने पोटाश आधारित फर्टिलाइजर बनाने की बात भी कही.
हाइड्रोजन मिशन की आधारशिला
डॉ. एन. कलैसेल्वी ने भारत सरकार के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत परीक्षण सुविधाओं और अवसंरचना की आधारशिला रखी. इस मिशन का उद्देश्य देश में स्वदेशी हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देना है. ये परीक्षण सुविधाएं अपने प्रकार की देश में पहली होंगी. 26 नवंबर को भारत में संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि 26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने संविधान को अंगीकृत किया था. इस अवसर पर डॉ. कलैसेल्वी ने संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया.

निदेशक ने एनएमएल की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला
सीएसआईआर–एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया. अपने स्वागत भाषण में निदेशक ने कहा कि सीएसआईआर–एनएमएल की स्थापना का उद्देश्य भारत की धातुकर्म अनुसंधान क्षमताओं को सुदृढ़ करना, औद्योगिक विकास को समर्थन देना और राष्ट्र महत्व की वैज्ञानिक चुनौतियों का समाधान प्रदान करना था. पिछले पचहत्तर वर्षों में एनएमएल ने इस उद्देश्य को उत्कृष्टता के साथ निभाया है. हमारे वैज्ञानिकों, तकनीशियनों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने खनन, इस्पात, एल्यूमिनियम, एयरोस्पेस, सामरिक धातुओं, ऊर्जा, पर्यावरणीय स्थिरता और सर्कुलर इकोनोमी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. ये उपलब्धियां एनएमएल के अनुसंधान के व्यापक दायरे को दर्शाती हैं. संसाधन निष्कर्षण से लेकर उन्नत सामग्री तक, रीसाइक्लिंग तकनीक से लेकर सामरिक धातुकर्म तक—जो उभरती राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में हमारी निरंतर प्रासंगिकता को सुदृढ़ करती हैं.
निदेशक ने बताया कि एनएमएल की प्रमुख वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीय उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
1. एडवांस्ड अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट सामग्री
2. बैटरी-से-बैटरी रीसाइक्लिंग तकनीक
3. मैग्नीशियम उत्पादन तकनीक
4. नए स्टील ग्रेड का विकास
5. नए एल्यूमिनियम मिश्रधातु
6. रेड मड उपयोगीकरण तकनीक
7. जिंक ड्रॉस से सिल्वर निष्कर्षण
8. पुनर्चक्रित पदार्थों से रेयर अर्थ तत्वों का निष्कर्षण
लैब से पायलट स्तर पर तकनीक को ले जाती है यह प्रयोगशाला
एसके झा ने प्रयोगशाला को बधाई देते हुए कहा कि सीएसआईआर–एनएमएल उन चुनिंदा प्रयोगशालाओं में से एक है, जो तकनीकों को न केवल प्रयोगशाला स्तर पर विकसित करती है, बल्कि पायलट स्तर पर उनका प्रदर्शन भी करती है, जिससे उद्योगों का भरोसा बढ़ता है. डॉ. एन. मुर्मू ने सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के बीच सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया, जो देश के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है.
एनएमएल का कई उद्योगों के साथ एमओयू हुआ
इस अवसर पर सीएसआईआर–एनएमएल ने उद्योगों के साथ कई समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया तथा एसीएसआईआर के पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया. सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र, सर्वश्रेष्ठ विकसित तकनीक तथा सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी के लिए इन-हाउस पुरस्कार प्रदान किए गए. कर्मचारियों के प्रतिभाशाली बच्चों को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए सीएसआईआर के महानिदेशक द्वारा छात्रवृत्ति पुरस्कार भी प्रदान किए गए. सीएसआईआर-एनएमएल के जयशंकर शरण प्रशासन नियंत्रक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और मुख्य अतिथि सहित सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया.

