
उदित वाणी, जमशेदपुर : अदाणी पोर्टफोलियो की सीमेंट और निर्माण सामग्री कंपनी एसीसी ने अदाणी फाउंडेशन के साथ मिलकर सिंदरी संयंत्र के पास छोटे और सीमांत किसानों को जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने में सहायता कर रही है. नाबार्ड और रिएक्ट के सहयोग से क्रियान्वित समलापुर वाटरशेड परियोजना के माध्यम से यह पहल झारखंड के समलापुर और छत्ताटांड गांवों के किसानों के बीच उपज बढ़ाने, जल संरक्षण और ग्रामीण आय बढ़ाने के लिए ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और ट्रेलिस खेती जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देती है.
21 एकड़ कृषि भूमि को कवर करते हुए और 84 किसानों तक पहुंचते हुए इस परियोजना ने दो अलग-अलग मॉडल पेश किए. मिर्च, टमाटर और बैंगन जैसी सब्जियों के लिए ड्रिप-आधारित मल्च खेती एवं करेला और लौकी जैसी लता वाली फसलों के लिए ट्रेलिस खेती. किसानों को प्लास्टिक मल्च और ऊर्ध्वाधर कृषि संरचनाओं का उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे नमी बनाए रखने, स्थान का बेहतर उपयोग करने और कीट नियंत्रण संभव हुआ। इन परिवर्तनों ने मिलकर उपज की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार किया.

