
उदित वाणी, चाईबासा: झारखंड सरकार ने राज्य के महाविद्यालयों में प्लस 2 की पढ़ाई को बंद कर दिया है। सरकार के फैसले से पूरे राज्य के विद्यार्थियों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। हर जिले में सरकार के इस फैसले के खिलाफ छात्र और छात्र संगठन आंदोलन कर रहे हैं। पश्चिमी सिंहभूम जिले में भी छात्रों और छात्र संगठनों द्वारा लगातार विरोध जताया जा रहा है। अब छात्र संगठनों ने सरकार के फैसले के खिलाफ न्याय यात्रा निकालने की तैयारी की है। छात्र नेताओं ने आज टाटा कॉलेज मैदान में पत्रकारों से बात किया और अपनी रणनीति को साझा किया।
झामुमो के छात्र मोर्चा के जिला अध्यक्ष सनातन पिंगुवा, टाटा कॉलेज के छात्र नेता पिपुन बारिक और एनएसयूआई के छात्र नेता वीर सिंह बालमुचू ने कहा कि 1 जुलाई को चाईबासा में न्याय यात्रा निकाली जाएगी जिसमें पूरे जिले के विद्यार्थी और उनके अभिभावक हिस्सा लेंगे। छात्र नेताओं ने कहा कि पिछले दिनों उपाय के माध्यम से राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सोपा गया था। इंटर के छात्रों की समस्याओं को देखते हुए उसके समाधान के लिए पहल करने की मांग की गई थी, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक प्रयास नहीं किया गया है। छात्र नेताओं ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम में जितने छात्र हैं उसके अनुपात में विद्यालयों की संख्या कम है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थी शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। इस विषय पर सरकार को एक बार फिर से सोचना चाहिए। यदि सरकार कोई समाधान नहीं करती है तो हमारा आंदोलन जारी रहेगा।
झारखंड सरकार के इस फैसले का पश्चिमी सिंहभूम जिले की शिक्षा व्यवस्था पर विपरीत असर पड़ रहा है। ऐसा इंटर के विद्यार्थियों का कहना है। टाटा कॉलेज में इंटर में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें दूसरे विद्यालय में शिफ्ट किया जा रहा है। जबकि वहां पहले से जितनी सीट है उतने विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। दूसरी समस्या यह है कि उन विद्यालयों में परसेंटेज के आधार पर एडमिशन हो रहा है। जिन विद्यार्थियों के नंबर काम है उन्हें नामांकन नहीं मिल पा रहा है। ऐसी हालत में कम नंबर लाने वाले विद्यार्थी अब कहां जाएं। तीसरी समस्या आया है कि टाटा कॉलेज में हॉस्टल में रहकर वह पढ़ाई करते हैं। उनका गांव चाईबासा मुख्यालय से काफी दूर है। जिन विद्यालयों में यहां के विद्यार्थियों को शिफ्ट किया जा रहा है वहां हॉस्टल की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में गांव से आना-जाना करके पढ़ाई कर पाना संभव नहीं है। कहीं बाहर रहकर पढ़ाई करना काफी खर्चीला होगा। सरकार को विद्यार्थियों की इन मौलिक समस्याओं को भी ध्यान में रखना होगा और क्षेत्र विशेष के आधार पर बुनियादी सुविधाओं को देखते हुए ही कोई निर्णय लेना होगा।

