
उदित वाणी, चाईबासा : गुवा के कुख्यात मजदूर नेता और अपराधकर्मी रामाशंकर पांडेय उर्फ रामा पांडेय को जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त चंदन कुमार के न्यायालय ने झारखंड अपराध नियंत्रण अधिनियम 2002 के तहत जिले से निष्कासित (डिस्ट्रिक्ट बदर) कर दिया है. आदेश के अनुसार, रामा पांडेय को 24 घंटे के भीतर पश्चिमी सिंहभूम जिले की सीमा छोड़नी होगी.
6 महीने तक नहीं कर सकेंगे जिला में प्रवेश
अदालत ने स्पष्ट किया है कि आगामी 6 महीने तक रामा पांडेय जिले में प्रवेश नहीं कर सकते. यदि न्यायालय में किसी पेशी के लिए उपस्थित होना आवश्यक हो, तो अभियुक्त को केवल उसी उद्देश्य से सामान्य कार्यालय अवधि में संबंधित थाना को सूचना देकर जिला में प्रवेश की अनुमति होगी.
अवैध हथियारों पर भी सख्ती
यदि रामा पांडेय के पास किसी प्रकार का लाइसेंसी या गैर-लाइसेंसी हथियार है, तो उसे तुरंत स्थानीय थाना में जमा कराने का निर्देश दिया गया है. इस अवधि में उन्हें किसी भी स्थिति में शस्त्र रखने की अनुमति नहीं दी गई है. आदेश का उल्लंघन धारा 25 सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत दंडनीय होगा.
क्यों लिया गया जिला बदर का निर्णय?
सीसीए वाद संख्या-5/2024-25 के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में रामा पांडेय को झारखंड अपराध नियंत्रण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत जिला बदर करने की अनुशंसा की गई थी. प्रस्ताव पर विचार करते हुए जिला प्रशासन ने यह निर्णय लिया.
कौन हैं रामा पांडेय?
रामा पांडेय पिछले एक दशक से जिले के अपराध जगत में सक्रिय रहे हैं. उनके खिलाफ सदर थाना, मुफस्सिल थाना, गुवा थाना, मनोहरपुर थाना और चक्रधरपुर थाना में गंभीर आरोप हैं. उन पर नक्सलियों से गठजोड़, सरकारी योजनाओं में बाधा डालने, व्यवसायियों और अधिकारियों से रंगदारी मांगने, हथियार रखने, मारपीट और हत्या जैसे संगीन आरोप हैं.
उन पर अब तक 6 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 10 मामलों में सनहा दर्ज है. इन सनहाओं में ठेकेदारों और व्यापारियों को धमकाने तथा अवैध वसूली करने की घटनाएं शामिल हैं.
अंत में:
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और इसका उल्लंघन करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जिला प्रशासन की यह सख्ती जिले में कानून-व्यवस्था बहाल रखने के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है.

