
उदित वाणी, चाईबासा : चाईबासा ब्लड बैंक से थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव रक्त चढ़ाने के गंभीर आरोप के बाद लोगों में रक्तदान को लेकर उदासीनता फैल गई है, जिससे ब्लड बैंक में रक्त की गंभीर कमी हो गई है. शनिवार को ब्लड बैंक में केवल 7 यूनिट रक्त उपलब्ध था, जिसमें A पॉजिटिव, AB पॉजिटिव और AB नेगेटिव रक्त बिल्कुल भी नहीं था. B पॉजिटिव तीन यूनिट, O पॉजिटिव एक यूनिट और A नेगेटिव, B नेगेटिव तथा O नेगेटिव ग्रुप का रक्त मात्र एक-एक यूनिट था.
इस स्थिति को देखते हुए, लोगों में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए रोटरी क्लब और वॉलेंट्री ब्लड डोनर एसोसिएशन ने गुरुद्वारा परिसर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया. मौके पर जिले के उपायुक्त चन्दन कुमार भी मौजूद थे, जिन्होंने स्वयं रक्तदान करते हुए लोगों से अपील की कि वे रक्तदान करें और इस गंभीर समस्या से निपटने में मदद करें.
स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया है कि चाईबासा ब्लड बैंक का लाइसेंस नवीनीकरण लंबित था और कई चुनौतियां थीं, जिसके कारण थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को संक्रमित रक्त की आपूर्ति हुई. इस मामले की उच्च स्तरीय जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
उपायुक्त ने कहा कि रक्तदान जीवन बचाने का बहुमूल्य कार्य है और सभी नागरिकों को इस नेक काम में आगे आना चाहिए. उन्होंने रक्तदान की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि रक्त की कमी गंभीर स्थिति उत्पन्न कर सकती है, जिसे केवल सामूहिक प्रयास से ही रोका जा सकता है.
रोटरी क्लब के रक्तदान शिविर और रक्तदान गतिविधियाँ जिला प्रशासन की इसी दिशा में प्रयास हैं ताकि रक्त बैंक में पर्याप्त रक्त का भंडार बना रहे और जरूरतमंदों को समय पर रक्त उपलब्ध हो सके.

