
उदित वाणी, रांची : विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने समापन पर बोलते हुए केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखे हमले किए. उन्होंने छात्रवृति, कोविड वैक्सीन, इंडिगो संकट, दिल्ली ब्लास्ट, आर्थिक हालात और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर केंद्र को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की. साथ ही उन्होंने कहा कि झारखंड 25 साल का युवा हो गया है. अब इसे कोई डरा या डिगा नहीं सकता है. गैर भाजपा शसित राज्यों के साथ कैसा व्यवहार होता है.
यह कोई नई बात नहीं है. सोरेन ने कहा कि फेलोशिप और छात्रवृत्ति में 90 प्रतिशत की कटौती की है. विदेश छात्रवृत्ति योजना में 95 प्रतिशत कमी दर्ज की गई. अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति आवंटन में 40 से 63 प्रतिशत की कटौती और मेधा आधारित छात्रवृत्ति में 75 प्रतिशत की कमी हुई है. तकनीकी शिक्षा संस्थानों के अनुदान में भी 61 प्रतिशत कटौती की गई. उन्होंने कहा कि फिर भी विपक्ष पूछता है कि छात्रवृत्ति क्यों नहीं मिल रही है.
इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा व छात्रों के लिए राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि देश में महंगाई और आर्थिक संकट की चर्चा नदारद है. रेलवे को झारखंड से सर्वाधिक राजस्व मिलता है. बदले में राज्य को पलायन और प्रदूषण मिलता है. सोरेन ने दावा किया कि हाल ही में पता चला है कि कोविड वैक्सीन के कारण कई बीमारियां बढ़ी है. उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य सिर्फ सुर्खियां बटोरना है. अगर सदन में सार्थक प्रश्न उठाए जाते, तो सरकार जबाब देने के लिए पूरी तरह तैयार रहती.
नेता प्रतिपक्ष केंद्र से दिलायें राज्य का बकाया 1.36 लाख करोड़
इधर वित सह संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि कोयला मंत्री ने आश्वासन देकर भी बकाये राशि की बकाया 1.36 लाख करोड़ की वास्तविक गणना के लिए केन्द्रीय अधिकारियों को नहीं भेजा. उन्होंने कहा कि जबकि राज्य की और से कई बार पत्राचार किया गया. लेकिन बकाये राषि का भुगतान नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस मामले में नेता प्रतिपक्ष को राज्य सरकार को सहयोग करना चाहिए. वहीं ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने आरोप लगाया कि केन्द्रीय मंत्री मुलाकात के लिए समय नहीं दे रहे है. वे छह माह से समय मांग रहे हैं. अब तो मिलने के लिए धरना देना पड़ेगा.

