
नई दिल्ली: गर्भावस्था के दौरान वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कणों के संपर्क में आने से महिलाओं की चयापचय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. इससे जैविक क्रियाओं में गड़बड़ी उत्पन्न होती है, जो समयपूर्व प्रसव के जोखिम को बढ़ा देती है. एटलांटा स्थित एमोरी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ये बदलाव न केवल प्रसव के समय को प्रभावित करते हैं, बल्कि गर्भावस्था की संपूर्ण गुणवत्ता पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं.
नवजात शिशुओं पर गंभीर दुष्प्रभाव
समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में सेरेब्रल पाल्सी, श्वसन संकट सिंड्रोम जैसी स्थितियों का खतरा रहता है. यहां तक कि यदि जन्म 37 से 39 सप्ताह के भीतर भी हो, तो भी नवजात को विकास व प्रतिरक्षा से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
प्रदूषण के कारण हर दसवां प्रसव असमय
ग्लोबल रिसर्च में यह सामने आया है कि विश्वभर में लगभग 10 प्रतिशत समयपूर्व प्रसव वायु में मौजूद सूक्ष्म कणों के कारण होते हैं. ये कण शरीर के अंदर अदृश्य रूप से क्रियाशील रहकर जैविक संतुलन को बिगाड़ देते हैं.
शोध ने खोले वायु प्रदूषण के अदृश्य प्रभाव
रोलिंस स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, एमोरी विश्वविद्यालय में पर्यावरण स्वास्थ्य विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डोंगहाई लियांग के अनुसार, “हमने पहली बार यह समझने का प्रयास किया कि विशेष प्रकार के सूक्ष्म कण शरीर को कैसे प्रभावित करते हैं और प्रसव को समय से पहले क्यों और कैसे घटित करते हैं.” लियांग ने स्पष्ट किया कि इन प्रक्रियाओं को समझना इसलिए आवश्यक है ताकि भावी उपचार या निवारक रणनीतियों का विकास हो सके.
330 महिलाओं पर आधारित अध्ययन: दो प्रमुख जैव-चिन्ह मिले
अध्ययन में 330 गर्भवती महिलाओं के रक्त के नमूनों का विश्लेषण किया गया. इसमें ‘कॉर्टेक्सोलोन’ और ‘लाइसोपीई’ नामक दो जैव-चिन्ह पाए गए, जो अल्पकालिक प्रदूषण के संपर्क और समयपूर्व जन्म के बीच सीधा संबंध दर्शाते हैं. ये अणु संभावित कारणों की ओर संकेत करते हैं कि कैसे प्रदूषण शिशु जन्म को प्रभावित करता है.
भ्रूण विकास व प्रतिरक्षा प्रणाली भी प्रभावित
अध्ययन में यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रदूषण शरीर में प्रोटीन के पाचन और अवशोषण की प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न करता है, जो भ्रूण के विकास और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए अत्यंत आवश्यक है.
सामान्य से अधिक समयपूर्व प्रसव की दर
शोध में शामिल 330 महिलाओं में से 66 (20 प्रतिशत) ने समय से पहले प्रसव किया, जो सामान्य अमेरिकी औसत की तुलना में अधिक है. यह संकेत करता है कि प्रदूषण का प्रभाव कहीं अधिक गहरा और व्यापक है. शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि इन विशेष जैव-अणुओं को लक्षित कर चिकित्सा उपाय विकसित किए जाएं, तो समयपूर्व प्रसव से जुड़े स्वास्थ्य खतरों को कम किया जा सकता है.
(IANS)

