
उदित वाणी,कांड्रा: सरकार एक ओर जहां कह रही है कि योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाई जाएगी और इसके लिए सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर स्थानीय जनप्रतिनिधि योजनाओं का शिलान्यास कर रहे हैं.
सरकारी गाइडलाइन के अनुसार योजनाओं एवं स्थल का चयन गांव में आम सभा कर सर्वसम्मति से करना है. परंतु स्थानीय ग्रामीणों की माने तो बिना आमसभा के जनप्रतिनिधियों के कुछ कार्यकर्ता के इशारे पर योजना का चयन एवं शिलान्यास हो रहा है.
इसका उदाहरण खरसावां विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत गम्हरिया प्रखंड के जामबेड़ा में मुड़िया एवं वीरबांस पंचायत के सीमा पर स्थित नाला में बनाए जा रहे 55 लाख की लागत से चेक डैम है. जिसका शिलान्यास पिछले दिन स्थानीय विधायक ने किया। जिसको लेकर स्थानीय ग्रामीणों में काफी नाराजगी देखी जा रही है.
ग्रामीणों का कहना है कि जहां चेक डैम बनाया जा रहा है वहां पर नाला में जलजमाव होता है और ना ही आसपास में खेती होती है. जहां पर शिलान्यास किया गया वहां से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर चेक डैम का निर्माण कार्य किया जा रहा है.
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया की बिना ग्रामसभा किए ही इस योजना के स्थल का चयन हुआ है. उन्होंने कहा कि योजना अच्छी है परंतु निर्माण जहां किया जा रहा है वह अस्सल चेक डैम के लिए उपयुक्त नहीं है. यहां अगर चेक डेम बन गया तो ना तो किसानों का भला होने वाला है और ना ही आम जनता लाभान्वित हो सकते हैं. स्थानीय ग्रामीण इसके विरुद्ध आंदोलन के लिए गोलबंद होने का मन बना रहे हैं.
अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रविंद्र मंडल एवं सुषेण मार्डी ने जामबाड़ा में बन रहे उक्त चेक डैम निर्माण को लेकर बताया कि गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत वीरबास एवं मुड़िया पंचायत के बीचो-बीच कोलाबीरा एवं जामबेड़ा के डोडा नाला पर लघु सिंचाई प्रमंडल सरायकेला के द्वारा 55 लाख रुपए का चेक डैम निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जिसका ना तो उचित स्थल का चयन किया गया और ना ही निर्माण स्थल के अगल बगल खेती करने की जमीन दिख रही है, इससे स्पष्ट हो रहा है कि सरकारी पैसा का दुरुपयोग हो रहा है.
चंद दलालों के साथ एजेंसी मिलकर पैसा को बंदर वांट करने की मंशा साफ झलक रही है. उन्होंने बताया कि विभाग अगर इस पर उचित कदम नहीं उठाता है तो इसकी शिकायत संबंधित विभाग के मुख्य सचिव झारखंड सरकार सै की जाएगी.
इस संबंध में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मिलकर बात की जाएगी के विकास के नाम पर सरकारी योजनाओं का किस तरह से खेला हो रहा है. सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि कि अगर इस तरह कार्य करें तो झारखंड का विकास कैसे आगे बढ़ेगा.

