
उदित वाणी, जमशेदपुर : बिष्टुपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत हिंदू पीठ के पीछे सरकी सड़क इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. यह कोई पक्की सड़क नहीं, बल्कि मिट्टी और मलबे का ढेर है, जिसे कुछ दोपहिया वाहन चालक वैकल्पिक रास्ते के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. कारण साफ है-हेलमेट चेकिंग से बचना. महज 100 कदम की दूरी पर रोजाना चल रही हेलमेट जांच से बचने के लिए लोग इस खतरनाक रास्ते को चुन रहे हैं, जहां फिसलन, गड्ढे और असमतल जमीन हर पल दुर्घटना को न्योता दे रही है.
स्थानीय लोगों के अनुसार, बिष्टुपुर हिंदू पीठ के पास ट्रैफिक पुलिस द्वारा नियमित रूप से हेलमेट चेकिंग की जाती है. नियमों का पालन न करने वाले दोपहिया चालकों पर 1000 रुपये का चालान काटा जाता है. इसी चालान से बचने के लिए कई लोग जान जोखिम में डालकर इस मिट्टी के ढेर से गुजर रहे हैं. यह रास्ता न तो सड़क मानकों पर खरा उतरता है और न ही यहां किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था है. बावजूद इसके, रोजाना दर्जनों वाहन चालक इस पर आवाजाही करते देखे जा सकते हैं.
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बारिश के दिनों में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है. मिट्टी गीली होने से वाहन फिसलते हैं, कई बार बाइक सवार संतुलन खो बैठते हैं. स्थानीय दुकानदार बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों में यहां कई छोटे-मोटे हादसे हो चुके हैं, हालांकि गंभीर चोट की सूचना अब तक सामने नहीं आई है. लेकिन जिस तरह से लोग लापरवाही बरत रहे हैं, वह किसी बड़े हादसे की आशंका को जन्म दे रहा है.
स्थानीय निवासी रवि कुमार कहते हैं, “यहां से गुजरना खुद को खतरे में डालने जैसा है. लेकिन लोग सोचते हैं कि हेलमेट नहीं पहनने पर 1000 रुपये चालान देने से बेहतर है कि इस रास्ते से निकल जाएं. कोई यह नहीं सोचता कि अगर गिर गए तो इलाज का खर्च और जान का खतरा कितना बड़ा होगा.” वहीं एक अन्य स्थानीय महिला ने बताया कि कई बार बच्चों और पैदल राहगीरों को भी इस अवैध रास्ते से गुजरने वाले वाहनों से डर लगता है.
इस पूरे मामले पर उदित वाणी के संवाददाता दीप पॉल चौधरी ने ट्रैफिक विभाग का पक्ष जानने के लिए डीएसपी ट्रैफिक श्री नीरज कुमार के आलोक में मामले की जानकारी दी. इस पर डीएसपी नीरज कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह गंभीर मामला है और इसकी जांच कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में नियमों से बचने के लिए इस तरह के खतरनाक रास्तों का उपयोग स्वीकार्य नहीं है.
डीएसपी नीरज कुमार ने बताया, “हमारे संज्ञान में यह बात आई है कि कुछ लोग हेलमेट चेकिंग से बचने के लिए उस मिट्टी के ढेर को सड़क की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. यह न केवल गैरकानूनी है, बल्कि बेहद खतरनाक भी है. इस मामले की जांच की जाएगी और संबंधित स्थान को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा, ताकि कोई भी वहां से आवाजाही न कर सके.”
उन्होंने यह भी कहा कि ट्रैफिक नियम लोगों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं, न कि उन्हें परेशान करने के लिए. हेलमेट पहनना दोपहिया वाहन चालकों के लिए अनिवार्य है, क्योंकि यह दुर्घटना की स्थिति में सिर को गंभीर चोट से बचाता है. “1000 रुपये का चालान लोगों को भारी लगता है, लेकिन अगर दुर्घटना हो जाए तो जान की कीमत कोई नहीं चुका सकता,” डीएसपी ने कहा.
ट्रैफिक विभाग का मानना है कि इस तरह के अवैध रास्तों को बंद करना बेहद जरूरी है, ताकि लोग नियमों का पालन करने के लिए मजबूर हों और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन से भी समन्वय स्थापित कर उस स्थान पर बैरिकेडिंग या अन्य भौतिक अवरोध लगाने की योजना बनाई जा रही है.
शहर में लगातार बढ़ती ट्रैफिक व्यवस्था और सख्ती के बावजूद कुछ लोग नियमों से बचने के नए-नए तरीके खोज लेते हैं. यह मामला उसी मानसिकता को दर्शाता है, जहां लोग थोड़ी सी सुविधा या पैसे बचाने के लिए अपनी और दूसरों की जान खतरे में डालने से भी नहीं हिचकते. लोगों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी नहीं आएगी, तब तक ऐसे मामले सामने आते रहेंगे.
फिलहाल, डीएसपी नीरज कुमार के आश्वासन दिया है कि मामले की जांच की जाएगी और उचित कार्यवाही होगी ताकि किसी भी बड़े दुर्घटना को रोक जा सके लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे हेलमेट पहनकर ही वाहन चलाएं और ट्रैफिक नियमों का पालन करें. क्योंकि नियमों से बचकर कुछ पैसे तो बचाए जा सकते हैं, लेकिन जान बचाना सिर्फ नियमों के पालन से ही संभव है.

