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	<title>USA Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>USA Archives - Udit Vani</title>
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		<title>India-Pak Ceasefire: ट्रंप बने शांतिदूत- भारत की शर्तों पर युद्धविराम लागू, DGMO बैठक में तय होगी अगली दिशा</title>
		<link>https://uditvani.in/politics/ceasefire-implemented/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 May 2025 13:35:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[indian army]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय ने शनिवार शाम पुष्टि की कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम लागू हो गया है. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जानकारी दी कि यह सीजफायर भारत की शर्तों पर हुआ है और 12 मई को दोनों देशों के DGMO के बीच पुनः वार्ता होगी. DGMO स्तर पर हुई सहमति शनिवार [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">नई दिल्ली:</span> </strong>विदेश मंत्रालय ने शनिवार शाम पुष्टि की कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम लागू हो गया है. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जानकारी दी कि यह सीजफायर भारत की शर्तों पर हुआ है और 12 मई को दोनों देशों के DGMO के बीच पुनः वार्ता होगी.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">DGMO स्तर पर हुई सहमति</span></strong><br />
शनिवार दोपहर पाकिस्तान के DGMO द्वारा की गई टेलीफोनिक बातचीत के बाद यह सहमति बनी. भारत ने स्पष्ट किया कि यह फैसला पूरी तरह भारत की शर्तों पर आधारित है और आगे की रणनीति भी उसी अनुरूप तय की जाएगी.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">जयशंकर ने दी जानकारी, भारत का रुख आतंकवाद के प्रति अडिग</span></strong><br />
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि भारत और पाकिस्तान ने सैन्य कार्रवाई और गोलीबारी रोकने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि भारत हर प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ पहले की तरह दृढ़ बना रहेगा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">अमेरिका की भूमिका: ट्रंप की मध्यस्थता से बना रास्ता</span></strong><br />
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की कि भारत और पाकिस्तान पूर्ण युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं. ट्रंप ने ट्रूथ सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि अमेरिका की मध्यस्थता में लंबी रात चली वार्ता के बाद यह सहमति बनी. उन्होंने दोनों देशों की समझदारी की सराहना की.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">48 घंटे की गहन बातचीत में शामिल रहे शीर्ष नेता</span></strong><br />
अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने बताया कि पिछले 48 घंटे से वह, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य अधिकारी भारत और पाकिस्तान के उच्चाधिकारियों के साथ लगातार बातचीत में शामिल रहे. इसमें भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल जबकि पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख असीम मुनीर और एनएसएस असीम मलिक शामिल थे.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">भारत की नई नीति: आतंकी हमला होगा युद्ध की कार्रवाई</span></strong><br />
भारत सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि भविष्य में किसी भी प्रकार की आतंकी घटना को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा. उच्च स्तर के सूत्रों ने कहा कि अब भारत की नीति स्पष्ट है—हर आतंकी हरकत का उत्तर सैन्य जवाब से दिया जाएगा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">&#8216;ऑपरेशन सिंदूर&#8217; के बाद बढ़ा तनाव</span></strong><br />
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई की सुबह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान और पीओके के नौ आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था. इसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू किए, जिनमें से अधिकांश भारतीय सेना ने निष्क्रिय कर दिए.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">अमेरिका को आना पड़ा मध्यस्थता में</span></strong><br />
तेजी से बढ़ते तनाव और सैन्य टकराव की आशंका को देखते हुए अमेरिका को मध्यस्थता करनी पड़ी. इसके बाद ही यह युद्धविराम संभव हो सका.</p>
<p>(IANS)</p>
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		<title>India-Pak: भारत-पाक के बीच की आग अब बुझे, शांतिदूत बनने को तैयार ट्रंप</title>
		<link>https://uditvani.in/politics/trump-is-ready-to-become-peacemaker/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 May 2025 05:14:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[fight]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
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		<category><![CDATA[terrorist]]></category>
		<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: भारत द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर के तहत किए गए हमले के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है. इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए मध्यस्थता की पेशकश की है. &#8220;अगर [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">नई दिल्ली:</span> </strong>भारत द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर के तहत किए गए हमले के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है. इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए मध्यस्थता की पेशकश की है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">&#8220;अगर मदद कर सकता हूं, तो मैं तैयार हूं&#8221;: ट्रंप</span></strong><br />
ट्रंप ने कहा, &#8220;यह बहुत दुखद है. मेरी स्थिति यह है कि मैं दोनों देशों के साथ काम करता हूं. मैं भारत और पाकिस्तान को बहुत अच्छी तरह जानता हूं. वे एक-दूसरे को जवाब दे चुके हैं, लेकिन अब यह बंद होना चाहिए. अगर मैं कुछ मदद कर सकता हूं, तो मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार हूं.&#8221; उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका दोनों देशों के साथ बेहतर संबंध रखता है और यह आवश्यक है कि भारत और पाकिस्तान आपसी विवादों को शांति से सुलझाएं.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी की अपील</span></strong><br />
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#8216;एक्स&#8217; पर पोस्ट कर कहा कि अमेरिका इस तनावपूर्ण स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है. उन्होंने ट्रंप की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिका शांति वार्ता के लिए दोनों देशों से निरंतर संवाद करता रहेगा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">&#8220;लड़ाई बंद होनी चाहिए&#8221;: ट्रंप की सीधी अपील</span></strong><br />
मंगलवार को हुए भारतीय सैन्य ऑपरेशन पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने बुधवार को कहा, &#8220;मुझे इस संघर्ष की जानकारी तब मिली जब मैं ऑफिस जा रहा था. यह बेहद अफसोसजनक है. भारत और पाकिस्तान का दशकों, बल्कि सदियों पुराना संघर्ष रहा है. लेकिन अब समय आ गया है कि यह लड़ाई खत्म हो.&#8221;</p>
<p>जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उनके पास दोनों देशों के लिए कोई विशेष संदेश है, तो उन्होंने कहा, &#8220;नहीं, मेरा एक ही संदेश है – यह लड़ाई जल्दी खत्म हो.&#8221;</p>
<p>(IANS)</p>
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		<item>
		<title>Corona Virus: व्हाइट हाउस की नई वेबसाइट से बढ़ी हलचल &#8211; कोविड की उत्पत्ति पर अमेरिका ने चीन को ठहराया जिम्मेदार</title>
		<link>https://uditvani.in/kam-ki-baat/america-held-china-responsible/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Apr 2025 10:10:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[काम की बात]]></category>
		<category><![CDATA[America]]></category>
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		<category><![CDATA[Covid]]></category>
		<category><![CDATA[Covid-19]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: अमेरिकी व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को एक नई कोविड-19 वेबसाइट लॉन्च की है, जिसमें यह दावा किया गया है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति वुहान की एक प्रयोगशाला से हुई. इस वेबसाइट में चीन को सीधे तौर पर वायरस के रिसाव के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है. यह वेबसाइट पहले कोविड-19 वैक्सीनेशन के [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">नई दिल्ली:</span> </strong>अमेरिकी व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को एक नई कोविड-19 वेबसाइट लॉन्च की है, जिसमें यह दावा किया गया है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति वुहान की एक प्रयोगशाला से हुई. इस वेबसाइट में चीन को सीधे तौर पर वायरस के रिसाव के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है.</p>
<p>यह वेबसाइट पहले कोविड-19 वैक्सीनेशन के लिए बनाई गई थी. अब इसमें एक नया पेज जोड़ा गया है, जिसका शीर्षक है: “लैब लीक: द ट्रू ओरिजिन्स ऑफ कोविड-19”. इस बैनर में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर है और पूर्व चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथनी फाउसी और मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन पर आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने वायरस की उत्पत्ति को छुपाने का प्रयास किया.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">फाउसी और WHO पर भी उठे सवाल</span></strong><br />
वेबसाइट के अनुसार, पिछली सरकार ने सच्चाई को छिपाने के लिए वर्षों तक भ्रम, देरी और गैर-जवाबदेही का सहारा लिया. इसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">CIA की रिपोर्ट के बाद आया यह कदम</span></strong><br />
व्हाइट हाउस का यह कदम सीआईए की हालिया रिपोर्ट के कुछ सप्ताह बाद सामने आया है, जिसमें वुहान लैब से वायरस के रिसाव की आशंका जताई गई थी. हालांकि, एजेंसी ने यह भी कहा था कि उसके पास निर्णायक सबूत नहीं हैं.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">प्राकृतिक उत्पत्ति के सिद्धांत को बताया कमजोर</span></strong><br />
वेबसाइट में पांच ऐसे वैज्ञानिक आधार दिए गए हैं, जिनके अनुसार वायरस की उत्पत्ति प्राकृतिक नहीं थी:<br />
वायरस में ऐसी जैविक विशेषताएं हैं, जो प्रकृति में नहीं पाई जातीं.<br />
कोविड संक्रमण केवल एक बार मनुष्यों में आया, जबकि सामान्यतः कई बार ऐसा होता है.<br />
वुहान लैब में बिना पर्याप्त जैव-सुरक्षा के ‘गेन ऑफ फंक्शन’ रिसर्च का इतिहास है.<br />
वहां के वैज्ञानिक 2019 के अंत में कोविड जैसे लक्षणों से बीमार हुए थे, जब वायरस की खोज भी नहीं हुई थी.<br />
यदि वायरस की प्राकृतिक उत्पत्ति होती, तो अब तक कोई स्पष्ट सबूत मिल चुका होता.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">राजनीतिक आरोपों का भी समावेश</span></strong><br />
वेबसाइट में यह भी कहा गया है कि डेमोक्रेट्स और कुछ मीडिया संस्थानों ने न केवल वैकल्पिक उपचारों को बदनाम किया, बल्कि लैब लीक थ्योरी को भी साजिश बताकर नकारा.</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>Trade War: कई देशों के शेयर बाजार धड़ाम, ट्रंप के &#8216;टैरिफ बम&#8217; से जुड़ी वो बातें जो जानना है जरूरी</title>
		<link>https://uditvani.in/kam-ki-baat/trade-war/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Apr 2025 11:33:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[काम की बात]]></category>
		<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणाओं के बाद सोमवार सुबह दुनियाभर के शेयर बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला. कई देशों के शेयर बाजार धड़ाम हो गए. हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज सोमवार को 13.22% की गिरावट के साथ बंद हुआ, जो 1997 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद से एक दिन [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नई दिल्ली:</span> </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणाओं के बाद सोमवार सुबह दुनियाभर के शेयर बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला. कई देशों के शेयर बाजार धड़ाम हो गए.</p>
<p>हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज सोमवार को 13.22% की गिरावट के साथ बंद हुआ, जो 1997 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद से एक दिन में सबसे खराब गिरावट है. सोमवार की सुबह शेयर बाजार खुलने के साथ ही जर्मन डीएएक्स सूचकांक में लगभग 10% की गिरावट आई, लेकिन कारोबार जारी रहने के साथ इसमें थोड़ा सुधार हुआ और यह 7% के आसपास लाल निशान पर आ गया.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">आखिर आर्थिक जगत में उथल-पुथल की शुरुआत कैसे हुए:</span></strong><br />
2 अप्रैल को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोस्तों और दुश्मनों दोनों के खिलाफ कई नए टैरिफ लगाने की घोषणा की.</p>
<p>इनमें अमेरिका में लगभग सभी आयातों पर 10% का बेसलाइन टैक्स और उन देशों पर कस्टम &#8216;रेसिप्रोक्ल टैरिफ&#8217; शामिल था, जिन्हें ट्रम्प अमेरिका के साथ अनुचित व्यापार नीतियों का पालन करने वाला मानते हैं. रेसिप्रोकल/पारस्परिक टैरिफ का मतलब है कि देशों पर वही शुल्क लगाया जाएगा जो वे अमेरिका पर लगाते हैं.</p>
<p>इसमें यूरोपीय संघ के खिलाफ 20% टैरिफ और चीनी उत्पादों पर 34% टैरिफ (पहले के 20% टैरिफ के अलावा, यानी कुल मिलाकर 54 फीसदी) शामिल हैं. सबसे ज्यादा 50% टैरिफ छोटे दक्षिणी अफ़्रीकी देश लेसोथो पर लगाया गया.</p>
<p>टैरिफ से छूट वाले देशों की सूची में रूस और बेलारूस शामिल हैं, लेकिन यूक्रेन नहीं.</p>
<p>बेसलाइन 10% टैरिफ शनिवार (5 अप्रैल) को लागू हुए, जबकि कस्टम &#8216;रेसिप्रोक्ल टैरिफ&#8217; बुधवार (9 अप्रैल) से शुरू होने वाले हैं. प्रभावित देशों इससे मुकाबले के लिए बहुत कम समय मिलेगा.</p>
<p>टैरिफ ने पहले ही दुनिया भर के शेयर बाजारों को गिरा दिया, जिनमें से कुछ ने वैश्विक कोविड महामारी के बाद से सबसे खराब नुकसान देखा.</p>
<p>कुछ देशों ने टैरिफ कम करने के लिए ट्रंप प्रशासन से बातचीत की कोशिश की. रविवार को, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि 50 से अधिक देशों ने बातचीत शुरू कर दी है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">अमेरिका को जवाब देने की तैयारी :</span></strong></p>
<p>कई देश अमेरिका को जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन ने पिछले सप्ताह अमेरिका के 34% टैरिफ के बराबर अपने स्वयं के पारस्परिक उपायों की घोषणा की. चीन के खिलाफ उच्च दरें चीनी बाजारों पर अपना असर डाल रही हैं, बीजिंग को उम्मीद है कि उथल-पुथल अंततः इसे निवेश और व्यापार के लिए अधिक विश्वसनीय विकल्प के रूप में छोड़ देगी.</p>
<p>अधिकांश अर्थशास्त्री इस बात पर सहमत हैं कि टैरिफ का अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे कीमतें और बेरोजगारी बढ़ेगी और संभवतः मंदी की शुरुआत होगी.</p>
<p>फिर भी, ट्रंप ने दिखाया कि वह हुए नुकसान और व्यापक अलोकप्रियता को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं. वह अपने टैरिफ उपायों पर अड़ हैं उन्होंने इसे अनुचित व्यापार असंतुलन को ठीक करने के लिए एक आवश्यक &#8216;दवा&#8217; कहा. उन्होंने कहा, &#8220;कभी-कभी आपको किसी चीज को ठीक करने के लिए दवा लेनी पड़ती है.&#8221;</p>
<p>टैरिफ विदेश से आयातित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला कर है, और यह आमतौर पर उत्पाद के मूल्य का एक प्रतिशत होता है. विदेशी सामान खरीदने वाली कंपनियों को कर का भुगतान करना पड़ता है.</p>
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		<item>
		<title>America में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संकट, भारतीय PhD छात्रा रंजनी श्रीनिवासन का भविष्य दांव पर, मजबूरन किया Self Deport</title>
		<link>https://uditvani.in/kam-ki-baat/forced-to-self-deport/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 07:52:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[काम की बात]]></category>
		<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[deport]]></category>
		<category><![CDATA[Student]]></category>
		<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली: कोलंबिया विश्वविद्यालय में शहरी योजना की पीएचडी की छात्रा रंजनी श्रीनिवासन ने अमेरिका में अपने वीजा के रद्द होने के बाद उस देश को छोड़ने का कठिन निर्णय लिया. उनका यह कदम उस समय उठाना पड़ा, जब अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंटों ने पहली बार उनके अपार्टमेंट के दरवाजे पर दस्तक दी, जो [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नई दिल्ली:</span> </strong>कोलंबिया विश्वविद्यालय में शहरी योजना की पीएचडी की छात्रा रंजनी श्रीनिवासन ने अमेरिका में अपने वीजा के रद्द होने के बाद उस देश को छोड़ने का कठिन निर्णय लिया. उनका यह कदम उस समय उठाना पड़ा, जब अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंटों ने पहली बार उनके अपार्टमेंट के दरवाजे पर दस्तक दी, जो उनके लिए एक भयावह और चौंकाने वाला अनुभव था. रंजनी ने इस भयावह अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उनके दरवाजे पर तीन इमिग्रेशन एजेंटों के दस्तक देने के बाद उन्होंने दरवाजा नहीं खोला.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">वीजा रद्द होने का कारण</span></strong><br />
अमेरिकी सरकार ने रंजनी श्रीनिवासन का वीजा 5 मार्च 2025 को रद्द कर दिया था. गृह सुरक्षा विभाग के मुताबिक, रंजनी को 11 मार्च को &#8220;स्वयं निर्वासन&#8221; करते हुए देखा गया था. अमेरिका सरकार ने उन पर यह आरोप लगाया कि वह हिंसा और आतंकवाद का समर्थन करती हैं और फलस्तीनी उग्रवादी समूह हमास से जुड़े गतिविधियों में शामिल थीं.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">रंजनी श्रीनिवासन पर आरोप</span></strong><br />
श्रीनिवासन कोलंबिया विश्वविद्यालय में शहरी योजना की पीएचडी छात्रा थीं और उनका वीजा F-1 श्रेणी के तहत था. गृह सुरक्षा विभाग ने आरोप लगाया कि उन्होंने हमास समर्थक गतिविधियों में भाग लिया और इसलिए उनका वीजा रद्द कर दिया गया.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">राजनीतिक विरोध और प्रशासन की प्रतिक्रिया</span></strong><br />
रंजनी श्रीनिवासन, जो एक फुलब्राइट स्कॉलर भी हैं, अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों द्वारा फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों पर की जा रही सख्ती का शिकार हो गईं. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, वह उन कुछ विदेशी नागरिकों में शामिल हैं, जिन्हें हाल के दिनों में कोलंबिया विश्वविद्यालय में आव्रजन एजेंसी ने निशाना बनाया. उनका कहना था कि उनका वीजा रद्द होने के बाद उन्हें अब यह भी नहीं पता कि वह अपनी पांच साल की पढ़ाई पूरी कर पाएंगी या नहीं.<br />
श्रीनिवासन ने सीएनएन को दिए एक बयान में कहा, &#8220;मेरा वीजा रद्द कर दिया गया, मेरा छात्र दर्जा खत्म कर दिया गया और मेरा भविष्य दांव पर लगा दिया – सिर्फ इसलिए कि मैंने अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग किया.&#8221;</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">स्वयं निर्वासन पर अमेरिकी सरकार की प्रतिक्रिया</span></strong><br />
कोलंबिया विश्वविद्यालय ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की. हालांकि, अमेरिकी गृह सुरक्षा मंत्री क्रिस्टी नोएम ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें श्रीनिवासन को लागार्डिया हवाई अड्डे पर सूटकेस के साथ देखा जा सकता है. उन्होंने इसे &#8220;स्वयं निर्वासन&#8221; बताते हुए सराहा और कहा कि अमेरिका में रहना एक विशेषाधिकार है, जो हिंसा और आतंकवाद का समर्थन करने वाले व्यक्तियों से छीन लिया जाना चाहिए.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">वकीलों की प्रतिक्रिया</span></strong><br />
श्रीनिवासन के वकील इस आरोप को सख्त तरीके से खारिज कर चुके हैं और ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनका वीजा &#8220;संरक्षित राजनीतिक अभिव्यक्ति&#8221; के कारण रद्द किया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि श्रीनिवासन को इस फैसले को चुनौती देने का कोई उचित मौका नहीं दिया गया. वकील नाज अहमद ने कहा, &#8220;नोएम की पोस्ट न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि यह अमेरिका के मूल्यों के खिलाफ भी है.&#8221;</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">राजनीतिक बयान और अमेरिकी सरकार की नीति</span></strong><br />
गृह सुरक्षा विभाग ने दावा किया कि श्रीनिवासन ने पिछले साल अपना वीजा नवीनीकरण करते वक्त कोलंबिया विश्वविद्यालय में हुए दो विरोध प्रदर्शनों से जुड़े समन का खुलासा नहीं किया. हालांकि, विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन समनों से वह आतंकवाद का समर्थन कैसे कर सकती हैं.<br />
श्रीनिवासन ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, &#8220;अब मुझे डर लग रहा है कि अगर कोई भी राजनीतिक बयान दिया जाए या सोशल मीडिया पर कोई टिप्पणी की जाए, तो सरकार किसी को भी आतंकवाद समर्थक ठहरा सकती है और उसकी जिंदगी बर्बाद कर सकती है.&#8221;</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">नए तरीके से निर्वासन की नीति</span></strong><br />
ट्रंप प्रशासन ने विश्वविद्यालय में वीजा धारकों को निशाना बनाकर नए तरीके से निर्वासन की नीति अपनाई है. इसके तहत विश्वविद्यालयों को यह आरोपित किया गया कि उन्होंने यहूदी छात्रों की सुरक्षा करने में विफलता दिखाई है, जिसके कारण विश्वविद्यालय को 400 मिलियन डॉलर के अनुदान से वंचित कर दिया गया है.</p>
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		<title>Donald Trump Reciprocal Tariff: डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को दिया तगड़ा झटका, 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ लागू &#8211; जानिए क्यों लगाया जाता है रेसिप्रोकल टैरिफ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Mar 2025 06:58:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[Tax]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक बड़ा बयान देते हुए भारत को एक झटका दिया. अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के जॉइंट सेशन में संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत हमसे 100 फीसदी से ज्यादा टैरिफ वसूलता है और अब हम भी अगले महीने से ऐसी ही नीति अपनाने [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नई दिल्ली:</span> </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक बड़ा बयान देते हुए भारत को एक झटका दिया. अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के जॉइंट सेशन में संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत हमसे 100 फीसदी से ज्यादा टैरिफ वसूलता है और अब हम भी अगले महीने से ऐसी ही नीति अपनाने जा रहे हैं. इसका मतलब यह है कि 2 अप्रैल से डोनाल्ड ट्रंप भारतीय उत्पादों पर रेसिप्रोकल टैरिफ नीति लागू करेंगे.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">रेसिप्रोकल टैरिफ नीति क्या है?</span></strong><br />
रेसिप्रोकल टैरिफ का मतलब होता है प्रतिशोधात्मक टैरिफ या &#8216;जैसे को तैसा&#8217; नीति. इसे सरल शब्दों में समझें तो यह एक प्रकार का व्यापार प्रतिबंध है, जो एक देश दूसरे देश पर तब लगाता है, जब वह देश भी उसी तरह का प्रतिबंध पहले देश पर लगाता है. उदाहरण के लिए, अगर एक देश दूसरे देश के उत्पादों पर 100 फीसदी टैक्स लगा रहा है, तो दूसरा देश भी अपने उत्पादों पर उसी तरह का टैक्स लगा सकता है. इस नीति का मुख्य उद्देश्य व्यापार में संतुलन बनाए रखना होता है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">रेसिप्रोकल टैरिफ का उद्देश्य</span></strong><br />
1. व्यापार संतुलन बनाए रखना: यह सुनिश्चित करना कि कोई देश दूसरे देश के सामान पर अत्यधिक टैक्स न लगाए.<br />
2. स्थानीय उद्योगों की सुरक्षा: विदेशी सामान महंगा होने से स्थानीय उद्योगों को फायदा होता है.<br />
3. व्यापार वार्ता का हिस्सा: कई बार इसे एक दबाव के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, ताकि दूसरा देश अपने टैक्स कम करे.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">रेसिप्रोकल टैरिफ के नुकसान</span></strong><br />
1. व्यापार युद्ध: अगर दोनों देश एक-दूसरे पर टैक्स लगाते रहें, तो यह व्यापार युद्ध में बदल सकता है.<br />
2. महंगाई: विदेशी सामान महंगे हो जाने से उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है.<br />
3. आपूर्ति श्रृंखला में बाधा: व्यापार युद्ध से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">रेसिप्रोकल टैरिफ का इतिहास</span></strong><br />
रेसिप्रोकल टैरिफ नीति की शुरुआत 19वीं सदी में हुई थी. 1860 में ब्रिटेन और फ्रांस के बीच कोबडेन-शेवेलियर संधि हुई, जिसमें दोनों देशों ने अपने टैरिफ कम किए. इसके बाद, 1930 में अमेरिका ने स्मूट-हॉले टैरिफ एक्ट लागू किया, जिसने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया और महामंदी का कारण बना. हाल के वर्षों में, ट्रंप प्रशासन ने चीन, यूरोपीय संघ और अन्य देशों पर टैरिफ लगाए, जिसके जवाब में उन देशों ने भी अमेरिकी उत्पादों पर टैक्स लगाया.</p>
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		<title>Donald Trump loses bid to put off his sentencing</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/donald-trump-loses-bid/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jan 2025 11:51:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[President]]></category>
		<category><![CDATA[trump]]></category>
		<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>UditVani, NewsDesk : U.S. President-elect Donald Trump lost a bid on to delay his sentencing set for January 10 regarding his criminal conviction linked to hush money paid to an adult film star. Trump&#8217;s lawyers requested Judge Merchan to postpone the sentencing while the appeals process continues. However, Judge Merchan declined the request in a ruling [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="font-weight: 400;"><strong>UditVani, NewsDesk : </strong>U.S. President-elect Donald Trump lost a bid on to delay his sentencing set for January 10 regarding his criminal conviction linked to hush money paid to an adult film star.</p>
<p style="font-weight: 400;">Trump&#8217;s lawyers requested Judge Merchan to postpone the sentencing while the appeals process continues. However, Judge Merchan declined the request in a ruling later on Monday.</p>
<p style="font-weight: 400;">The judge had previously indicated he was not inclined to send Trump to jail. In scheduling the sentencing, he suggested an unconditional discharge, which would place a guilty judgment on Trump’s record without a fine or probation, considering his upcoming inauguration. The sentence would nevertheless see Trump entering the White House as a convicted felon.</p>
<p style="font-weight: 400;">Trump may appear at his sentencing either in person or virtually. The case stemmed from a $130,000 payment made by Trump&#8217;s former lawyer, Michael Cohen, to adult film actor Stormy Daniels, to silence her about an alleged sexual encounter, which Trump denies.</p>
<p style="font-weight: 400;">Following a six-week trial, Trump was found guilty on 34 felony counts of falsifying records to conceal the payment before the 2016 election. This marks the first time a U.S. president has been charged and convicted of a crime. Trump’s lawyers have made two unsuccessful attempts to have the case dismissed.</p>
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		<title>अमेरिका की गैब्रिएल के सिर सजा मिस यूनिवर्स का ताज</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/americas-gabrielle-crowned-miss-universe/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Jan 2023 14:11:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[MissUniverse]]></category>
		<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत की दिविता का सपना टूटा उदित वाणी, नई दिल्ली:  मिस यूनिवर्स 2022 का एलान कर दिया गया है. अमेरिका की गैब्रिएल मिस यूनिवर्स बन गई हैं. भारत की हरनाज संधू ने विश्व सुंदरी को अपने हाथों से ताज पहनाया है. 71वां मिस यूनिवर्स खिताब आर बोनी गैब्रिएल को मिला है. फस्र्ट रनर अप वेनेजुएला [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #800080;"><strong>भारत की दिविता का सपना टूटा</strong></span></li>
</ul>
<p><a href="https://uditvani.in/"><strong>उदित वाणी, नई दिल्ली:</strong></a>  मिस यूनिवर्स 2022 का एलान कर दिया गया है. अमेरिका की गैब्रिएल मिस यूनिवर्स बन गई हैं. भारत की हरनाज संधू ने विश्व सुंदरी को अपने हाथों से ताज पहनाया है. 71वां मिस यूनिवर्स खिताब आर बोनी गैब्रिएल को मिला है. फस्र्ट रनर अप वेनेजुएला की डियाना सिल्वा और सेकेंड रनर अप डोमिनिकन रिपब्लिक की एमी पेना रहीं.यह पेजेंट अमेरिका के न्यू ऑर्लेअंस शहर में हुआ.दुनियाभर की 84 कंटेस्टेंट्स को मात देते हुए आर बॉनी ग्रेब्रिएल ने यह ताज अपने नाम किया.</p>
<p>टॉप 3 कन्टेस्टेंट की इस लिस्ट में वेनेजुएला की अमांडा डुडामेल न्यूमेन, यूएस की आर बॉनी ग्रेब्रिएल और डोमिनिकन रिपब्लिक की एंड्रीना मार्टिनेज को जगह मिली थी. वहीं भारत की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहीं दिविता राय ने टॉप 16 में तो अपनी जगह बनाई लेकिन टॉप 5 में बाहर हो गईं.भारत की दिविता राय सेमीफाइनल तक पहुंचने के बाद बाहर हो गईं.</p>
<p>नेशनल कॉस्ट्यूम राउंड में दिविता ने ‘सोन चिरैया’ बन सभी का ध्यान खींचा था. दरअसल, एक समय भारत को ‘सोने की चिडिय़ा’ कहा जाता था. दिविता की गोल्डन कलर की इस ड्रेस ने इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर भारत की उसी इमेज को दिखाने की प्रयास किया.2021 में भारत की हरनाज संधू ने मिस यूनिवर्स का खिताब जीता था. इस साल मिस यूनिवर्स को एक नया ताज पहनाया जाएगा. इस नए ताज को फेमस लग्जरी ज्वेलर मोवाड ने डिजाइन किया है. इस ताज की कीमत लगभग 46 करोड़ रुपए है और इसमें हीरे और नीलम जड़े हुए हैं.</p>
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