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	<title>SrijanSamvad Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>SrijanSamvad Archives - Udit Vani</title>
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		<title>सृजन संवाद की संगोष्ठी में ऋत्विक घटक, राज कपूर एवं गुरुदत्त के सिने संसार की चर्चा</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/srijan-samvad-ritwik-ghatak/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Dec 2025 14:13:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर : साहित्य, सिनेमा एवं कला संस्था ‘सृजन संवाद’ ने तीन सिने-निर्देशकों की शताब्दी मनाई. वक्ताओं ने ऋत्विक घटक, राज कपूर एवं गुरुदत्त के सिनेमा पर बात की. ऑस्ट्रेलिया से अनीता बरार, कोचीन से डाल्टन एवं लंदन से तेजेंद्र शर्मा ने राज कपूर पर अपने विचार रखे. डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि सृजन [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर : </span></strong>साहित्य, सिनेमा एवं कला संस्था ‘सृजन संवाद’ ने तीन सिने-निर्देशकों की शताब्दी मनाई. वक्ताओं ने ऋत्विक घटक, राज कपूर एवं गुरुदत्त के सिनेमा पर बात की. ऑस्ट्रेलिया से अनीता बरार, कोचीन से डाल्टन एवं लंदन से तेजेंद्र शर्मा ने राज कपूर पर अपने विचार रखे. डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि सृजन संवाद इन निर्देशकों पर अलग-अलग कार्यक्रम कर चुका है. अनीता बरार ने गुरुदत्त की दो फ़िल्मों ‘बाज़ी’ एवं ‘प्यासा’ के माध्यम से गुरुदत्त के निर्देशीय सूझ-बूझ, कौशल को विस्तार से बताया.</p>
<p>गुरुदत्त के फ़्रेम, उनकी फ़िल्मों के गीत की चर्चा करते हुए बताया कि गुरुदत्त अपनी फ़िल्मों में किरदारों के मनोवैज्ञानिक हालात, कैमरा, छाया द्वारा एक अलग दुनिया में ले जाते हैं. उनकी फ़िल्म के गाने कहानी को आगे बढ़ाते हैं. डॉल्टन ने कहा कि जीनियस घटक अपनी भावनाओं एवं आदर्शों के गुलाम थे. कम्युनिज्म शक्ति का खेल है जिसकी कागज समानता की बात वास्तविकता में न होगी और न ही है.</p>
<p>डॉल्टन ने प्रश्न किया, ‘स्वर्णरेखा’ में कौन प्रोटगनिस्ट है? यह फ़िल्म घटक को दिखाती है. अच्छी-बुरी दो अलग चीजें नहीं हैं. यह निर्देशक अपने पात्रों से अपनी बातें निकालता है. तेजेंद्र शर्मा ने राज कपूर की ‘श्री 420’ पर बोलते हुए कहा, दर्शक राज कपूर की फ़िल्म देखने टिकट खरीद कर जाता है, जबकि ऐसे निर्देशक हुए हैं जिनकी फ़िल्में पैसे देने पर भी सामान्य दर्शक नहीं देखना चाहेगा. उनकी फ़िल्म देख कर गरीब होने की इच्छा होती है न कि गरीबों से घृणा. फ़िल्म के गानों, कहानी पर बोलते हुए उन्होंने निर्देशक की विशेषताओं को रेंखांकित किया. राज कपूर सेंसिबल और सेंसिटिव फ़िल्म बनाते थे इसीलिए दर्शक उनकी फ़िल्मों से कनेक्ट हो पाता था.</p>
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		<title>Jamshedpur: सिरेमिक कला को समर्पित रही सृजन संवाद की 121 वीं गोष्ठी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 31 Jan 2023 16:00:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[Confrence]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर :  ‘सृजन-संवाद’ की 121वीं गोष्ठी सेरेमिक कला ‘माई जर्नी इन क्ले’ पर केंद्रित रही. भोपाल के मृदा कलाकार शंपा शाह ने अपनी यात्रा के अनुभव शेयर किए. डॉ. विजय शर्मा ने वक्ताओं, टिप्पणीकारों, श्रोताओं-दर्शकों का स्वागत किया. अमृता सिन्हा ने सेरेमिक कलाकार शंपा शाह की राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनियों की चर्चा की. उन्होंने कहा कि [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://uditvani.in/"><strong>उदित वाणी, जमशेदपुर :</strong></a>  ‘सृजन-संवाद’ की 121वीं गोष्ठी सेरेमिक कला ‘माई जर्नी इन क्ले’ पर केंद्रित रही. भोपाल के मृदा कलाकार शंपा शाह ने अपनी यात्रा के अनुभव शेयर किए. डॉ. विजय शर्मा ने वक्ताओं, टिप्पणीकारों, श्रोताओं-दर्शकों का स्वागत किया.</p>
<p>अमृता सिन्हा ने सेरेमिक कलाकार शंपा शाह की राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनियों की चर्चा की. उन्होंने कहा कि शंपा शाह न केवल मृदा कलाकार हैं वरन वह एक बहुत सम्मानित लेखिका भी हैं. उन्होंने भारत की विभिन्न कलाओं पर लेख लिखे हैं. वे भारत भवन भोपाल से एक लंबे समय से जुड़ी रही हैं. प्रसिद्ध साहित्यकार रमेशचंद्र शाह तथा ज्योत्स्ना मिलन की बड़ी पुत्री शंपा शाह का बचपन कला, साहित्य और संगीत के परिवेश में पलते हुए बहुत समृद्ध हुआ.</p>
<p>वह विज्ञान की छात्रा रहते हुए सेरेमिक कला से जुड़ी और राह बदल कर सफ़ेद मिट्टी की कलाकारी करने लगीं. अपने बचपन और किशोरावस्था को स्मरण करते हुए उन्होंने अपने कई अनुभव साझा किए. उनका पोटरी प्रशिक्षण प्रसिद्ध कलाकार पी. आर. दारोज़ की देखरेख में हुआ. उनकी टी पॉट सीरिज, भीमटेक सीरिज काफ़ी पसंद की गई है. कोलकता से जयदेव दास ने धन्यवाद ज्ञापन किया.</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Jamshedpur: सृजन संवाद की गोष्ठी में सीरज सक्सेना की कला यात्रा पर चर्चा</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/discussion-on-siraj-saxenas-art-journey-in-srijan-samvads-seminar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Nov 2022 15:08:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[KalaYatra]]></category>
		<category><![CDATA[SirajSaxena]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर : सृजन-संवाद 119वीं गोष्ठी ‘कला यात्रा’ पर केंद्रित रही. दिल्ली से सेरेमिक कलाकार सीरज सक्सेना ने अपनी कला यात्रा साझा की. डॉ. विजय शर्मा ने वक्ताओं, टिप्पणीकारों और श्रोताओं-दर्शकों का स्वागत किया. सीरज सक्सेना ने बचपन में परिवार की महिलाओं खासकर अपनी माँ के घरेलू कामकाज से कलात्मक रूचि प्राप्त की. माँ के [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800080;"><strong>उदित वाणी, जमशेदपुर :</strong> </span>सृजन-संवाद 119वीं गोष्ठी ‘कला यात्रा’ पर केंद्रित रही. दिल्ली से सेरेमिक कलाकार सीरज सक्सेना ने अपनी कला यात्रा साझा की. डॉ. विजय शर्मा ने वक्ताओं, टिप्पणीकारों और श्रोताओं-दर्शकों का स्वागत किया. सीरज सक्सेना ने बचपन में परिवार की महिलाओं खासकर अपनी माँ के घरेलू कामकाज से कलात्मक रूचि प्राप्त की.</p>
<p>माँ के साथ आटा गूँथते, रोटी बेलते, पूरी तलते, गुजिया बनाते उनके भीतर कला का प्रस्फ़ुटन हुआ. उन्होंने बताया कि थोड़ा बड़ा होने पर उन्होंने इंदौर से कला की विधिवत शिक्षा ली और जापानी कलाकार ईदा सोईची के आमंत्रण पर जापान गए. भारतीय संस्कृति में रचे-बसे सीरज की कलाकृतियाँ विश्व के विभिन्न देशों में प्रदर्शित हैं.</p>
<p>पूरी दुनिया में उनकी एकल व सामूहिक प्रदर्शनियां आयोजित होती रही हैं. हर्बल तथा इनडोर प्लांट्स के लिए समर्पित दिल्ली यूनिवर्सिटी की पोलिटिकल साइंस की प्राध्यापिका इलाभूषण जैन ने कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग की तथा कार्यक्रम का संचालन किया. लखनऊ की डॉ. मंजुला मुरारी ने सीरज सक्सेना के वक्तव्य पर टिप्पणी करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया.</p>
<p>वर्चुअल गोष्ठी में जमशेदपुर से गीता दुबे, आभा विश्वकर्मा, राँची से डॉ. कनक ऋद्धि, दिल्ली से डॉ. इलाभूषण जैन, डॉ. प्रज्ञा पांडेय, ओमा शर्मा, सुधीर नाइब, स्नेहल सिन्हा, राज ठाकुर, तेजस शाह, दिवाकर जोशी, गौरव शाह, धनन्जय कुमार द्विवेदी, लखनऊ से डॉ. मंजुला मुरारी, डॉ. राकेश पांडेय, बैंगलोर से पत्रकार अनघा, गुजरात से उमा सिंह ‘किसलय’, राँची से वैभवमणि त्रिपाठी, डॉ. क्षमा त्रिपाठी आदि बहुत सारे दर्शक जुड़े.</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Jamshedpur : हँसी भी क्रूर हो सकती है….  सृजन संवाद की गोष्ठी में पंकज मित्र की कहानी पर चर्चा</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/jamshedpur-laughter-can-also-be-cruel/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 16 Oct 2022 13:57:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[PankajMishra]]></category>
		<category><![CDATA[SrijanSamvad]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर: सृजन संवाद की 118वीं संगोष्ठी में कथाकार पंकज मित्र की कहानी पर चर्चा हुई. वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर आयोजित इस गोष्ठी में पंकज मित्र ने भावपूर्ण तरीके से अपनी कहानी ‘एक हँसोड़ का हलफ़नामा’ का पाठ किया. कहानी पाठ के बाद करीम सिटी कॉलेज के मास कॉम विभाग की अध्यक्ष डॉ. नेहा तिवारी ने कहा कि [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800080;"><strong>उदित वाणी, जमशेदपुर: </strong></span>सृजन संवाद की 118वीं संगोष्ठी में कथाकार पंकज मित्र की कहानी पर चर्चा हुई. वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर आयोजित इस गोष्ठी में पंकज मित्र ने भावपूर्ण तरीके से अपनी कहानी ‘एक हँसोड़ का हलफ़नामा’ का पाठ किया.</p>
<p>कहानी पाठ के बाद करीम सिटी कॉलेज के मास कॉम विभाग की अध्यक्ष डॉ. नेहा तिवारी ने कहा कि कहानी हमारे शक-शुबहे की आदत पर अपनी बात रखती है. समसामयिक कहानी दिखाती है कि हम किसी रिश्ते को लेकर सहज भाव से नहीं सोच पाते हैं.</p>
<p>एक समय लोग हास्य को सहज भाव से ग्रहण करते थे और जरूरत पड़ने पर माफ़ी माँग लेते थे एवं माफ़ी मिल भी जाती थी. कहानी एक सकारात्माक सोच का संकेत और उसकी आवश्यकता पर बल देती है.</p>
<p>डॉ. शांति नायर ने कहानी का गहराई से विश्लेषण करते हुए उसमें प्रदर्शित विडम्बना को उजागर किया. उन्होंने कहा कि हर बात के विभिन्न मायने होते हैं. हँसी भी क्रूर हो सकती है, जैसे इस कहानी में एक पात्र की हँसी है, जो सत्ता और वर्चस्व का प्रतीक है. डॉ. विजय शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा धन्यवाद भी दिया.</p>
<p>वर्चुअल गोष्ठी में जमशेदपुर से डॉ. नेहा तिवारी, गीता दुबे, आभा विश्वकर्मा, डॉ. विजय शर्मा, अरविंद कुमार, रांची से डॉ. कनक ऋद्धि, पंकज मित्र, कहानीकार कमलेश, वैभव मणि त्रिपाठी, केरल से डॉ. शांति नायर, दिल्ली से डॉ. रमेश कुमार सिंह, मुंबई से कहानीकार ओमा शर्मा, रक्षा गीता, वर्धा से डॉ अमरेंद्र कुमार शर्मा, लखनऊ से डॉ. मंजुला मुरारी, डॉ. राकेश पांडेय, गोमिया से डॉ. प्रमोद कुमार बर्णवाल, गोड्डा से बिनय सौरभ, बनारस से नाटककार जयदेव, चेन्नई से महेंद्र कुमार जुड़ें. ‘सृजन संवाद’ की नवम्बर माह की गोष्ठी सिनेमा पर होगी.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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