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	<title>Santhali Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>Santhali Archives - Udit Vani</title>
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		<title>संताली सिनेमा को मिला पहला साहित्यिक दस्तावेज़, दशरथ हांसदा की सिने-यात्रा अब पुस्तक रूप में</title>
		<link>https://uditvani.in/entertainment/a-pillar-of-santali-cinema-an-untold-story/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 27 May 2025 11:08:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[entertainment]]></category>
		<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर: संताली भाषा, जो भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित है, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी जाती है. पंडित रघुनाथ मुर्मू से लेकर हजारों लेखकों और समाजसेवियों तक, सभी ने इसके संवर्धन में अमूल्य योगदान दिया है. इस भाषा के प्रचार-प्रसार में सिनेमा की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है. [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर:</span></strong> संताली भाषा, जो भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित है, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी जाती है. पंडित रघुनाथ मुर्मू से लेकर हजारों लेखकों और समाजसेवियों तक, सभी ने इसके संवर्धन में अमूल्य योगदान दिया है. इस भाषा के प्रचार-प्रसार में सिनेमा की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है. जैसे हिंदी सिनेमा ने विश्वपटल पर हिंदी को प्रतिष्ठा दिलाई, वैसे ही डिजिटल युग में संताली सिनेमा भी एक सशक्त अभिव्यक्ति बनकर उभरा है.</p>
<p><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="size-medium wp-image-73101 aligncenter" src="https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/05/WhatsApp-Image-2025-05-27-at-4.14.53-PM.jpeg?resize=300%2C233&#038;ssl=1" alt="" width="300" height="233" srcset="https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/05/WhatsApp-Image-2025-05-27-at-4.14.53-PM.jpeg?resize=300%2C233&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/05/WhatsApp-Image-2025-05-27-at-4.14.53-PM.jpeg?resize=150%2C117&amp;ssl=1 150w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/05/WhatsApp-Image-2025-05-27-at-4.14.53-PM.jpeg?resize=450%2C350&amp;ssl=1 450w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/05/WhatsApp-Image-2025-05-27-at-4.14.53-PM.jpeg?w=571&amp;ssl=1 571w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong><span style="color: #800080;">जब फिल्में बनीं बदलाव का जरिया</span></strong><br />
तकनीक ने अब फिल्म निर्माण को सहज बना दिया है, जिससे संताली फिल्मों का दायरा तेजी से विस्तृत हुआ है. लेकिन इसके बावजूद संताली सिनेमा पर केंद्रित गंभीर साहित्य का अभाव महसूस किया जाता रहा है. यूट्यूब, ब्लॉग और अन्य माध्यमों पर सीमित जानकारी ही उपलब्ध है.</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="size-medium wp-image-73102 aligncenter" src="https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/05/WhatsApp-Image-2025-05-27-at-4.14.54-PM-1.jpeg?resize=213%2C300&#038;ssl=1" alt="" width="213" height="300" srcset="https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/05/WhatsApp-Image-2025-05-27-at-4.14.54-PM-1.jpeg?resize=213%2C300&amp;ssl=1 213w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/05/WhatsApp-Image-2025-05-27-at-4.14.54-PM-1.jpeg?resize=150%2C211&amp;ssl=1 150w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/05/WhatsApp-Image-2025-05-27-at-4.14.54-PM-1.jpeg?resize=450%2C634&amp;ssl=1 450w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/05/WhatsApp-Image-2025-05-27-at-4.14.54-PM-1.jpeg?w=571&amp;ssl=1 571w" sizes="(max-width: 213px) 100vw, 213px" /></p>
<p><strong><span style="color: #800080;">दशरथ हांसदा पर केंद्रित पुस्तक की घोषणा</span></strong><br />
इसी कमी को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है रमेश हांसदा ने. दशकों से संताली सिनेमा से जुड़े रमेश हांसदा ने प्रसिद्ध फिल्मकार दशरथ हांसदा के योगदान को केंद्र में रखकर एक पुस्तक तैयार की है. यह पुस्तक तीन भाषाओं—हिंदी, संताली (ओलचिकी लिपि) और अंग्रेजी—में प्रकाशित होने जा रही है.<br />
पुस्तक के नाम हैं:<br />
संताली सिनेमा और दशरथ हांसदा: एक अनकही कहानी (हिंदी)<br />
संताड़ी सिनेमा आर दशरथ हांसदा: हाक जियोंन काहनी (संताली)<br />
Dashrath Hansda: A Pillar of Santali Cinema &#8211; An Untold Story (अंग्रेजी)</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">संताली सिनेमा की यात्रा का क्रमबद्ध दस्तावेज</span></strong><br />
लगभग 100 पृष्ठों की इस पुस्तक में लेखक ने अपने अनुभव, शोध और दस्तावेजों के माध्यम से संताली सिनेमा की विकास यात्रा को रेखांकित किया है. गंगाधर हेम्ब्रम की वीडियो फिल्म &#8216;सारथी नाचार&#8217; से लेकर पहली सेल्यूलाइड फिल्म &#8216;चांदो लिखोन&#8217; तक की विस्तृत जानकारी पुस्तक में दी गई है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">फिल्में, राजनीति और जनसंपर्क</span></strong><br />
दशरथ हांसदा की प्रमुख फिल्मों—सगुना एना सुहाग दुलड, सीता नाला रे सागुन सुपारी—के निर्माण के पीछे की कहानियों के साथ-साथ झारखंड के नेताओं जैसे रामदास सोरेन, हेमंत सोरेन, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास की भूमिका का भी विश्लेषण किया गया है. पुस्तक यह भी बताती है कि कैसे इन नेताओं ने सिनेमा को सामाजिक संवाद और जनसंपर्क के प्रभावी माध्यम के रूप में उपयोग किया.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">संघर्ष, सपने और प्रेरणा</span></strong><br />
पुस्तक में दशरथ हांसदा के व्यक्तिगत जीवन के संघर्षों, सपनों और उपलब्धियों को भी आत्मीयता से चित्रित किया गया है. यह केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि उस सृजनशीलता की कहानी है जिसने संताली सिनेमा को नई दिशा दी.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">शोधार्थियों और फिल्मप्रेमियों के लिए अमूल्य स्रोत</span></strong><br />
इस पुस्तक के प्रकाशन से यह उम्मीद की जा रही है कि यह संताली सिनेमा पर शोध करने वाले छात्रों, फिल्मप्रेमियों और भाषा-संस्कृति के अध्येताओं के लिए एक मील का पत्थर बनेगी. यह सिर्फ एक पुस्तक नहीं, बल्कि संताली सिनेमा के इतिहास को सहेजने और प्रेरित करने का माध्यम सिद्ध हो सकती है.</p>
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		<item>
		<title>Jharkhand: भागलपुर विस्तार से छिन जाएगी संथाल परगना की रेल पहचान, सांसद को सौंपा गया भावनाओं का संदेश</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/santhal-pargana/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Apr 2025 07:01:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Railway news]]></category>
		<category><![CDATA[Santhali]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, राँची: झारखंड रेल यूजर्स एसोसिएशन ने संथाल परगना के यात्रियों की ओर से सांसद निशिकांत दुबे को पत्र भेजा है. सोशल मीडिया के माध्यम से भी उन्होंने क्षेत्रीय भावना को उजागर करते हुए 13427/13428 साहिबगंज-हावड़ा इंटरसिटी एक्सप्रेस के भागलपुर तक विस्तार के प्रस्ताव का विरोध किया है. वर्षों की प्रतीक्षा के बाद मिली [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, राँची:</span> </strong>झारखंड रेल यूजर्स एसोसिएशन ने संथाल परगना के यात्रियों की ओर से सांसद निशिकांत दुबे को पत्र भेजा है. सोशल मीडिया के माध्यम से भी उन्होंने क्षेत्रीय भावना को उजागर करते हुए 13427/13428 साहिबगंज-हावड़ा इंटरसिटी एक्सप्रेस के भागलपुर तक विस्तार के प्रस्ताव का विरोध किया है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">वर्षों की प्रतीक्षा के बाद मिली सुविधा पर संकट?</span></strong><br />
एसोसिएशन ने अपने पत्र में बताया कि संथाल परगना के लोग वर्षों से हावड़ा के लिए सीधी ट्रेन की मांग कर रहे थे. अब जब यह ट्रेन सेवा नियमित रूप से चल रही है और यात्रियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है, ऐसे में इसका भागलपुर तक विस्तार करने का प्रस्ताव यात्रियों की सुविधा को प्रभावित करेगा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">क्या भागलपुर को मिलेगी सुविधा और संथाल को असुविधा?</span></strong><br />
संघ की ओर से कहा गया कि यह विस्तार भले ही भागलपुर के यात्रियों के लिए लाभकारी हो, लेकिन संथाल परगना के यात्रियों की अस्मिता और सुविधा की कीमत पर नहीं. उन्होंने आग्रह किया कि माननीय सांसद इस विषय को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के समक्ष रखें और यह सुनिश्चित करें कि संथाल परगना के यात्रियों के हितों की अनदेखी न हो.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">नई ट्रेन का प्रस्ताव, समाधान की राह?</span></strong><br />
रेल यूजर्स एसोसिएशन ने हावड़ा के लिए एक अलग इंटरसिटी ट्रेन शुरू करने की मांग भी रखी है. उनका कहना है कि इससे न केवल संथाल परगना को सीधी और निर्बाध रेल सेवा मिलेगी, बल्कि यह निर्णय क्षेत्रीय विकास में भी सहायक सिद्ध होगा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">स्थानीय समर्थन और उभरता जनमत</span></strong><br />
एसोसिएशन की इस पहल को स्थानीय लोगों का व्यापक समर्थन मिला है. सोशल मीडिया और जन चर्चाओं में लोग इस मुद्दे पर मुखर हो रहे हैं. क्षेत्रवासियों का कहना है कि विकास का रास्ता सहभागिता से होकर गुजरता है, न कि सुविधाओं की कटौती से.</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>JAMSHEDPUR: संथाली फिल्म &#8220;होक रेयाक लड़ाई&#8221; का ग्रैंड प्रीमियर 13 अप्रैल को जमशेदपुर में</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/santali-movie-premiere-in-jamshedpur/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 29 Mar 2025 08:53:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[actor]]></category>
		<category><![CDATA[director]]></category>
		<category><![CDATA[Movie]]></category>
		<category><![CDATA[Santhali]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर: लंबे समय बाद संथाली सिनेमा के ग्रैंड प्रीमियर का आयोजन किया जा रहा है। चुनु फिल्म के बैनर तले बनी &#8220;होक रेयाक लड़ाई&#8221; का प्रीमियर 13 अप्रैल को सुबह 11 बजे सुंदरनगर के पटेल बगान स्थित विकास भारती में होगा। इस अवसर पर एक प्रतिष्ठित सामाजिक व्यक्तित्व को मुख्य अतिथि के रूप [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="" data-start="104" data-end="422"><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी,</span> <span style="color: #800080;">जमशेदपुर:</span></strong> लंबे समय बाद संथाली सिनेमा के ग्रैंड प्रीमियर का आयोजन किया जा रहा है। चुनु फिल्म के बैनर तले बनी <strong data-start="215" data-end="236">&#8220;होक रेयाक लड़ाई&#8221;</strong> का प्रीमियर 13 अप्रैल को सुबह 11 बजे सुंदरनगर के पटेल बगान स्थित विकास भारती में होगा। इस अवसर पर एक प्रतिष्ठित सामाजिक व्यक्तित्व को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने की योजना है।</p>
<p class="" data-start="424" data-end="708">फिल्म के निर्देशक दशरथ हांसदा हैं, जो इसमें अभिनय भी कर रहे हैं। मुख्य भूमिकाओं में दुमका के परितोष सोरेन और उड़ीसा की उर्मिला मारंडी नजर आएंगे। यह फिल्म संथाली सिनेमा को नई पहचान दिलाने और जमशेदपुर में फिल्म संस्कृति को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</p>
<p class="" data-start="710" data-end="1018">फिल्म के सह-निर्माता रमेश हांसदा ने एक संवाददाता सम्मेलन में झारखंड सरकार द्वारा संथाली और झारखंडी सिनेमा की उपेक्षा पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माता अपने स्तर पर ही फिल्मों का निर्माण और प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि सरकार का सहयोग न मिलने से सिनेमा कलाकारों को भारी संघर्ष करना पड़ रहा है।</p>
<p class="" data-start="1020" data-end="1183">इस अवसर पर फिल्म निर्माता और कलाकारों ने आम जनता से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में फिल्म देखने आएं और झारखंड में सिनेमा कला को बढ़ावा देने में योगदान दें।</p>
<p class="" data-start="1185" data-end="1322">संवाददाता सम्मेलन में दशरथ हांसदा, गंगा रानी थापा, राखल सोरेन, श्रीचंद बके, मार्शल हांसदा और चंपई मुर्मू सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।</p>
<p>The post <a href="https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/santali-movie-premiere-in-jamshedpur/">JAMSHEDPUR: संथाली फिल्म &#8220;होक रेयाक लड़ाई&#8221; का ग्रैंड प्रीमियर 13 अप्रैल को जमशेदपुर में</a> appeared first on <a href="https://uditvani.in">Udit Vani</a>.</p>
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		<item>
		<title>हेमन्त सोरेन की नेतृत्व वाली अबुआ सरकार ओल चिकि लिपि को कर रही है दरकिनार: बाबूराम</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/saraikela/santhali-language-ol-chiki-script/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Feb 2025 16:23:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[सरायकेला]]></category>
		<category><![CDATA[Hemant soren]]></category>
		<category><![CDATA[Santhali]]></category>
		<category><![CDATA[TribalLanguages]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, चांडिल: बुधवार को चांडिल प्रखंड के सालगाडीह स्थित निर्माणाधीन सिदो-कान्हू पब्लिक स्कूल में संथाली शिक्षा देवी बिदु चानदान पूजा के अवसर पर एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई. इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता बाबूराम सोरेन ने झारखंड सरकार पर संथाली भाषा और उसकी ओल चिकि लिपि की उपेक्षा का आरोप लगाया. ओल चिकि लिपि का [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, चांडिल:</span> </strong>बुधवार को चांडिल प्रखंड के सालगाडीह स्थित निर्माणाधीन सिदो-कान्हू पब्लिक स्कूल में संथाली शिक्षा देवी बिदु चानदान पूजा के अवसर पर एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई. इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता बाबूराम सोरेन ने झारखंड सरकार पर संथाली भाषा और उसकी ओल चिकि लिपि की उपेक्षा का आरोप लगाया.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">ओल चिकि लिपि का ऐतिहासिक महत्व</span></strong><br />
बाबूराम सोरेन ने बताया कि संथाली भाषा के लिए ओल चिकि लिपि का आविष्कार गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू ने 1925 में किया था. 2004 में इसे भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान मिला, जिससे यह आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त भाषा बनी. लेकिन सौ वर्ष पूरे होने के बावजूद सरकारें संथाली भाषा और इसकी लिपि को बढ़ावा देने में असफल रही हैं, जो आदिवासी समाज के लिए चिंता का विषय है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">सरकार की नीति पर नाराजगी</span></strong><br />
बाबूराम सोरेन ने हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली अबुआ सरकार पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह कैसा आदिवासी सरकार है जो अपने ही समुदाय की भाषा और संस्कृति को दरकिनार कर रही है. उन्होंने बताया कि रघुबर दास के नेतृत्व में पूर्ववर्ती सरकार ने संथाली भाषा को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए थे. सरकारी शिक्षण संस्थानों में ओल चिकि लिपि में पठन-पाठन शुरू कराया गया था और सरकारी कार्यालयों में संथाली भाषा के प्रयोग के लिए अधिसूचना जारी की गई थी. आंगनबाड़ी केंद्रों में भी बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा संथाली भाषा में देने का निर्देश दिया गया था.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">संथाली भाषा की शिक्षा पर कुठाराघात?</span></strong><br />
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने इन सभी नीतियों से ध्यान हटा लिया है, जिससे संथाली भाषा और ओल चिकि लिपि के संरक्षण को खतरा पैदा हो गया है. बाबूराम सोरेन ने सरकार से मांग की कि पूर्ववर्ती सरकार के आदेशों पर पुनः विचार किया जाए और उन्हें फिर से लागू किया जाए. इसके साथ ही, झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET), झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) जैसी परीक्षाओं में संथाली विषय के प्रश्नपत्रों में ओल चिकि लिपि का समावेश सुनिश्चित किया जाए.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">मांगों के समर्थन में उपस्थित लोग</span></strong><br />
इस प्रेस वार्ता में बनमाली हांसदा, सुदन टुडू, मोहन हांसदा, सुनिल मार्डी समेत कई अन्य लोग उपस्थित थे, जिन्होंने एकस्वर में संथाली भाषा के संरक्षण की मांग की.</p>
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		<item>
		<title>संथाली ओलचिकी परीक्षा का शुभारंभ, 55 परीक्षार्थियों ने लिया हिस्सा</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/santhali-olchiki-examination-started/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Dec 2024 12:29:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[Examination]]></category>
		<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[Santhali]]></category>
		<category><![CDATA[students]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर: संथाली ओलचिकी भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, असेका द्वारा आयोजित तीन दिवसीय संथाली ओलचिकी बोर्ड परीक्षा का शुभारंभ 27 दिसंबर से हुआ. यह परीक्षा नरवापहाड़ स्थित सीटीसी में आयोजित की जा रही है, जिसमें 55 परीक्षार्थियों ने भाग लिया. इस परीक्षा में पोटका, गालूडीह, राजनगर, और नरवा पहाड़ से महिला-पुरुष [...]</p>
<p>The post <a href="https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/santhali-olchiki-examination-started/">संथाली ओलचिकी परीक्षा का शुभारंभ, 55 परीक्षार्थियों ने लिया हिस्सा</a> appeared first on <a href="https://uditvani.in">Udit Vani</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर:</span></strong> संथाली ओलचिकी भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, असेका द्वारा आयोजित तीन दिवसीय संथाली ओलचिकी बोर्ड परीक्षा का शुभारंभ 27 दिसंबर से हुआ. यह परीक्षा नरवापहाड़ स्थित सीटीसी में आयोजित की जा रही है, जिसमें 55 परीक्षार्थियों ने भाग लिया. इस परीक्षा में पोटका, गालूडीह, राजनगर, और नरवा पहाड़ से महिला-पुरुष परीक्षार्थी शामिल हुए हैं. पूरे प्रदेश से लगभग 700 परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे हैं.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">विद्या की देवी की प्रार्थना से शुभारंभ</span></strong><br />
परीक्षा की शुरुआत आदिवासी समुदाय की विद्या की देवी, विदु चदान की प्रार्थना से की गई. इस पवित्र अवसर पर परीक्षार्थियों ने शिक्षा की देवी से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा की. यह एक परंपरा रही है, जो परीक्षा के आयोजन को शुभ और मंगलमय बनाती है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">परीक्षाओं का आयोजन</span></strong><br />
परीक्षा के पहले दिन शुक्रवार को पहली पारी में साहित्य की परीक्षा आयोजित की गई. दूसरी पारी में सामान्य ज्ञान की परीक्षा ली गई. अगले दिन, शनिवार को पहली पारी में सामाजिक विज्ञान और दूसरी पारी में विज्ञान की परीक्षा होगी. यह परीक्षा प्राइमरी, मिडिल और मैट्रिक स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिससे संथाली ओलचिकी भाषा की शिक्षा को विभिन्न स्तरों पर विस्तार मिल सके.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">संथाली अकादमी की मांग</span></strong><br />
इस परीक्षा के आयोजन के बाद, संथाली ओलचिकी भाषा के प्रचार-प्रसार में सक्रिय योगदान देने वाले माझी बाबा वीरेन टुडू ने झारखंड सरकार से संथाली अकादमी के गठन की मांग की. उनका कहना था कि यदि राज्य सरकार संथाली अकादमी का गठन करती है, तो केजी से लेकर पीजी तक संथाली ओलचिकी की शिक्षा शुरू हो सकेगी, जिससे इस भाषा को और मजबूती मिलेगी. इसके अलावा, संथाली ओलचिकी शिक्षकों की बहाली का मार्ग भी प्रशस्त होगा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">कार्यक्रम की सफलता में योगदान</span></strong><br />
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में असेका के महासचिव शंकर सोरेन, आसड़ा स्कूल के प्राचार्य दुर्गा प्रसाद मुर्मू, लोबो मुर्मू और सुराई मुर्मू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इनके योगदान के कारण यह परीक्षा आयोजन एक बेहतरीन सफलता का रूप ले सका.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">संथाली भाषा का भविष्य</span></strong><br />
संथाली ओलचिकी परीक्षा का आयोजन न केवल इस भाषा की महत्वता को मान्यता देता है, बल्कि आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को भी संरक्षित करने का एक कदम है. यह परीक्षा आने वाले समय में संथाली भाषा को अधिक ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक साबित होगी.</p>
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		<title>Patamda: बाबा तिलका माँझी पार्क, बेलटाँड़ में 22 दिसम्बर को मनाया जाएगा 22वां संथाली भाषा दिवस</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/patamda/patamda-baba-tilka-manjhi-park/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Dec 2024 16:41:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पटमदा]]></category>
		<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[PATAMDA]]></category>
		<category><![CDATA[Santhali]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर: आज दिनांक 16 दिसम्बर, सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें संथाली भाषा दिवस की तैयारियों पर चर्चा की गई. बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बाबा तिलका माँझी पार्क, बेलटाँड़ में 22 दिसम्बर को 22वां संथाली भाषा दिवस मनाया जाएगा. कार्यक्रम का विवरण कार्यक्रम की रूपरेखा निम्नलिखित होगी: [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर:</span> </strong>आज दिनांक 16 दिसम्बर, सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें संथाली भाषा दिवस की तैयारियों पर चर्चा की गई. बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बाबा तिलका माँझी पार्क, बेलटाँड़ में 22 दिसम्बर को 22वां संथाली भाषा दिवस मनाया जाएगा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">कार्यक्रम का विवरण</span></strong><br />
कार्यक्रम की रूपरेखा निम्नलिखित होगी:<br />
1. सुबह की पूजा अर्चना &#8211; सुबह 9:00 से 9:30 बजे तक.<br />
2. माल्यार्पण &#8211; 10:00 से 10:30 बजे तक.<br />
3. कविता पाठ &#8211; 11:30 बजे से 12:30 बजे तक.<br />
4. अतिथि स्वागत &#8211; दोपहर 12:30 से 1:30 बजे तक.<br />
5. मुख्य अतिथि का संबोधन &#8211; 1:30 से 2:30 बजे तक.<br />
6. सांस्कृतिक कार्यक्रम &#8211; 2:30 से 4:00 बजे तक.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">संथाली लिपि की पहल</span></strong><br />
संथाली भाषा दिवस के उपलक्ष्य में, एक विशेष ओलचीको बोर्ड लगाया जाएगा. यह बोर्ड 22 दिसम्बर से 7 जनवरी 2025 तक प्रत्येक गांव में स्थापित किया जाएगा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">बैठक में उपस्थित सदस्य</span></strong><br />
बैठक की अध्यक्षता वसंत कुमार मुर्मू ने की. इस बैठक में जीतुलाल मुर्मू, बारहा दिसोम गोडेत दिवाकर टुडू,, हरिहर टुडू, अजय मुर्मू, शंकर माण्डी, सागर माण्डी, सुकदेब हेंब्रम, हाराधन माण्डी, सुनील हांसदा, दशरथ बेसरा, बलराम सोरेन जीतेन्द्र नाथ मुर्मू, धनंजय मुर्मू, नगेने वास्के भरत बास्के, मंटु बास्के सूर्यनारायण हाँसदा, शारदा हेम्ब्रम, लखीराम माझी, चुनाराम बास्के, कृष्ण पद हेम्ब्रम, सुभाष हेम्ब्रम, सुनील माझी, हरिपद सोरेन, हलधर टुडू, जलधर टुडू , कालीपद बेसरा, आदी चालीस गांव के मांझी बाबा उपस्थित थे</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">संथाली भाषा के उत्थान में योगदान</span></strong><br />
इस बैठक में विशेष रूप से संथाली भाषा के संरक्षण और प्रचार पर बल दिया गया. ओलचीको बोर्ड की स्थापना और संथाली भाषा दिवस के आयोजन से क्षेत्रीय भाषा के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य है.</p>
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		<title>संताली महिला लेखिका एवं साहित्य सम्मेलन का हुआ आयोजन, इन विषयों पर हुई चर्चा</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/santali-writers-gathering/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 01 Dec 2024 15:35:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Santhali]]></category>
		<category><![CDATA[Writers]]></category>
		<category><![CDATA[Writers gathered]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; &#160; &#160; &#160; उदित वाणी, जमशेदपुर: ऑल इण्डिया संताली लेखक संघ (AISWA) की महिला शाखा और झारग्राम जनजातीय परिषद (जेटीसी) द्वारा आयोजित द्वितीय अखिल भारतीय संताली महिला लेखिका सम्मेलन एवं संताली साहित्य सम्मेलन आज शानदार सफलता के साथ सम्पन्न हुआ. यह सम्मेलन संताली साहित्य और संस्कृति के प्रचार-प्रसार एवं संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण [...]</p>
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<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर:</span></strong> ऑल इण्डिया संताली लेखक संघ (AISWA) की महिला शाखा और झारग्राम जनजातीय परिषद (जेटीसी) द्वारा आयोजित द्वितीय अखिल भारतीय संताली महिला लेखिका सम्मेलन एवं संताली साहित्य सम्मेलन आज शानदार सफलता के साथ सम्पन्न हुआ. यह सम्मेलन संताली साहित्य और संस्कृति के प्रचार-प्रसार एवं संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ.</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-48107" src="https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-01-at-4.45.09-PM-1.jpeg?resize=300%2C169&#038;ssl=1" alt="" width="300" height="169" srcset="https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-01-at-4.45.09-PM-1.jpeg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-01-at-4.45.09-PM-1.jpeg?resize=1024%2C576&amp;ssl=1 1024w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-01-at-4.45.09-PM-1.jpeg?resize=768%2C432&amp;ssl=1 768w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-01-at-4.45.09-PM-1.jpeg?resize=1536%2C864&amp;ssl=1 1536w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-01-at-4.45.09-PM-1.jpeg?resize=150%2C84&amp;ssl=1 150w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-01-at-4.45.09-PM-1.jpeg?resize=450%2C253&amp;ssl=1 450w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-01-at-4.45.09-PM-1.jpeg?resize=1200%2C675&amp;ssl=1 1200w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-01-at-4.45.09-PM-1.jpeg?w=1600&amp;ssl=1 1600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
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<p><strong><span style="color: #800080;">सम्मेलन का उद्देश्य और उद्घाटन</span></strong><br />
इस सम्मेलन में पूरे भारत से संताली महिला लेखिकाओं, कवियों और विद्वानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. सम्मेलन का उद्देश्य संताली साहित्यिक विरासत की समृद्धि का जश्न मनाना और क्षेत्र में महिलाओं के सामने आने वाली समकालीन चुनौतियों का समाधान करना था.<br />
सम्मेलन की शुरुआत पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ हुई, जिसमें दीप प्रज्वलन और प्रार्थना समारोह शामिल थे. इसके बाद संताली साहित्य के महान विभूतियों और सांस्कृतिक प्रतीकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए चित्रों पर माल्यार्पण किया गया.<br />
मुख्य अतिथि मंत्री और पश्चिम बंगाल संताली अकादमी की अध्यक्ष बीरबाहा हंसदा ने आदिवासी पहचान को मजबूत करने और महिलाओं को सशक्त बनाने में साहित्य की भूमिका पर जोर देते हुए उद्घाटन भाषण दिया. विशेष अतिथि चिन्मयी हंसदा मरांडी, और पद्मश्री डॉ. दमयंती बेशरा भी उपस्थित थे. AISWA के महासचिव श्री रवींद्र नाथ मुर्मू ने अपने मुख्य भाषण में संताली महिला लेखकों के सांस्कृतिक लोकाचार की रक्षा में योगदान पर प्रकाश डाला. उन्होंने युवा पीढ़ी से अपनी भाषाई और साहित्यिक विरासत पर गर्व करने का आह्वान किया. उद्घाटन सत्र में गंगाधर हांसदा, मदन मोहन सोरेन, निरंजन हांसदा, लक्ष्मण किस्कू, डिजापदा हांसदा और कई अन्य प्रमुख साहित्यकार उपस्थित थे.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">पैनल चर्चा और पेपर प्रस्तुतियाँ</span></strong><br />
संताली साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में संताली महिला लेखकों की भूमिका पर एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसका संचालन AISWA (महिला विंग) की सचिव सुचित्रा हंसदा ने किया. इस सत्र में अंजली किस्कू, पबित्रा हेम्ब्रम, बालिका हेम्ब्रम, और पापिया माण्डी जैसे पैनलिस्टों ने साहित्य, लिंग और पहचान के प्रतिच्छेदन पर विचार-विमर्श किया.<br />
इसके साथ ही विद्वानों ने संताली साहित्य में लिंग दृष्टिकोण, डिजिटल परिवर्तन, आदिवासी इतिहास और लोक परंपराओं से जुड़े शोध पत्र प्रस्तुत किए.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">कवि सम्मेलन</span></strong><br />
कवि सम्मेलन ने रचनात्मकता के लिए एक जीवंत मंच प्रदान किया, जिसमें कई कवित्रियों ने संताली समुदाय की सांस्कृतिक और सामाजिक कथाओं को उजागर करने वाली रचनाएँ प्रस्तुत कीं. इस सत्र की अध्यक्षता शोभा हांसदा ने की. अतिथि के रूप में मानिक हंसदा, वीर प्रताप मुर्मू, सारदा मुर्मू, सरस्वाति हांसदा और जलेश्वर किस्कू उपस्थित थे.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">सम्मेलन का समापन और महत्व</span></strong><br />
सम्मेलन का समापन प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह वितरित करने के साथ हुआ. इसके बाद एक समूह फोटोग्राफ लिया गया, जिससे इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की यादें संजोई गईं. AISWA और जाहेर थान कमिटी ने सभी प्रतिभागियों और प्रायोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने संताली लेखकों के लिए मंचों को बढ़ावा देने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए उनकी विरासत को संरक्षित करने का संकल्प लिया.</p>
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		<title>Jamshedpur: एलबीएसएम में मनाया गया संताली दिवस</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/santali-day-celebrated-in-lbsm/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Dec 2022 18:57:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[LBSM]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर:  एलबीएसएम महाविद्यालय जमशेदपुर मे संताली विभाग के द्वारा गुरुवार को संताली भाषा दिवस मनाया गया। इस अवसर पर गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं प्रार्थना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रभारी प्राचार्य विनय कुमार गुप्ता, विशिष्ट अतिथि विनोद कुमार उपस्थित थे। विनय कुमार [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://uditvani.in/"><strong>उदित वाणी, जमशेदपुर:</strong></a>  एलबीएसएम महाविद्यालय जमशेदपुर मे संताली विभाग के द्वारा गुरुवार को संताली भाषा दिवस मनाया गया। इस अवसर पर गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं प्रार्थना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रभारी प्राचार्य विनय कुमार गुप्ता, विशिष्ट अतिथि विनोद कुमार उपस्थित थे।</p>
<p>विनय कुमार गुप्ता ने कहा कि संताली एक समृद्ध भाषा है। इसका एक अपनी ओलचिकी लिपि है। इसकी समाज में एक अलग पहचान है। पंडित रघुनाथ मुर्मू ने समाज को हमेशा संजोये रखा। कहा कि हमें संथाल समाज से सीखने की जरूरत है। कार्यक्रम में बाबूराम सोरेन ने स्वागत भाषण दिया।</p>
<p>संजीव कुमार मुर्मू ने कहा कि युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी भाषा के विकास के साथ-साथ सहित्य का विकास करना है। इस अवसर पर सीता मुर्मू, रूपय मार्डी, कल्याण मार्डी, देविलाल टुडू, दिनेश बेसरा, सालु मुर्मू , शीवानी मुरमू समेत कई लोग मौजूद थे।</p>
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