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	<title>Order Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>Order Archives - Udit Vani</title>
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		<title>रांची के BIT मेसरा को सुप्रीम कोर्ट का झटका, छात्र की मौत के मामले में माता-पिता को देना होगा 20 लाख का मुआवजा</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/ranchi/supreme-court-upholds-compensation-raja-paswan-bit-mesra/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Mar 2026 17:32:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[रांची]]></category>
		<category><![CDATA[Death]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली/रांची : सुप्रीम कोर्ट ने रांची स्थित शैक्षणिक संस्थान बीआईटी मेसरा को अपने एक छात्र राजा पासवान की मौत के मामले में उसके माता-पिता को 20 लाख रुपए का मुआवजा देने का झारखंड हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा है. शीर्ष अदालत ने बीआईटी मेसरा को इस आदेश के पालन के लिए दो [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नई दिल्ली/रांची :</span></strong> सुप्रीम कोर्ट ने रांची स्थित शैक्षणिक संस्थान बीआईटी मेसरा को अपने एक छात्र राजा पासवान की मौत के मामले में उसके माता-पिता को 20 लाख रुपए का मुआवजा देने का झारखंड हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा है. शीर्ष अदालत ने बीआईटी मेसरा को इस आदेश के पालन के लिए दो सप्ताह का समय दिया है.</p>
<p>जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली बीआईटी मेसरी की विशेष अनुमति याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया. सुनवाई के दौरान संस्थान के वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि यदि कुछ समय दिया जाए तो बीआईटी मेसरा हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए मुआवजा राशि का भुगतान कर देगा.</p>
<p>कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए भुगतान के लिए दो सप्ताह की मोहलत दी और मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 के लिए तय की है. यह पूरा मामला 14 नवंबर 2024 का है, जब बीआईटी मेसरा पॉलिटेक्निक के तीसरे सेमेस्टर के छात्र राजा पासवान के साथ एक &#8216;फ्रेशर पार्टी&#8217; के दौरान कथित तौर पर मारपीट की गई थी.</p>
<p>इस घटना में राजा गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसे बाद में रिम्स में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी. झारखंड हाईकोर्ट ने 12 अगस्त 2025 को अपने फैसले में संस्थान को लापरवाही और संस्थागत खामियों का दोषी पाया था. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि छात्र की मौत के पीछे संस्थान की गंभीर चूक थी.</p>
<p>अदालत ने पाया कि घायल छात्र को समय पर इलाज मुहैया कराने में देरी की गई, पुलिस को सूचना देने में कोताही बरती गई और कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद लचर थी. यहां तक कि परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे भी काम नहीं कर रहे थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उन शुरुआती दावों को भी खारिज कर दिया था जिनमें कहा गया था कि छात्र की हालत शराब के सेवन के कारण बिगड़ी थी. रिपोर्ट में शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे. अदालत ने &#8216;टॉर्टियस लायबिलिटी&#8217; के सिद्धांत के तहत संस्थान को जिम्मेदार ठहराते हुए अंतरिम मुआवजे का आदेश दिया था.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<item>
		<title>घाटशिला के रंगाटांड, बकराकोचा और कनियालुका जंगल में क्वार्ट्ज पत्थर के अवैध खनन और हाथियों की सुरक्षा से जुड़े मामले में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-high-court-hearing-illegal-mining-ghatsila/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Feb 2026 17:24:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Ghatshila]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Illegal Mining]]></category>
		<category><![CDATA[Order]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला के रंगाटांड, बकराकोचा और कनियालुका जंगल में क्वार्ट्ज पत्थर के अवैध खनन और हाथियों की सुरक्षा से जुड़े मामले में सुनवाई की. खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान मामले को गंभीर मानते हुए [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला के रंगाटांड, बकराकोचा और कनियालुका जंगल में क्वार्ट्ज पत्थर के अवैध खनन और हाथियों की सुरक्षा से जुड़े मामले में सुनवाई की. खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार के वन व खान विभाग, पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को जबाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.</p>
<p>अदालत ने संबंधित अधिकारियों से पूछा है कि अवैध खनन रोकने के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं. इस मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को निर्धारित की गई है. वहीं अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि इस अवधि में अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लगाई जाती है, तो खंडपीठ की ओर से स्वयं कड़े कदम उठाये जायेंगे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी हाल में अवैध खनन पर रोक लगाई जाय.</p>
<p>प्रार्थी के अधिवक्ता जितेश कुमार ने अदालत को बताया कि सरकार द्वारा दाखिल जबाब में भी यह स्वीकार किया गया है कि संबंधित क्षेत्र में अवैध खनन हो रहा है. लेकिन इसके रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है. इससे राज्य सरकार को राजस्व की भारी क्षति हो रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से खनन माफिया को खुली छूट मिली हुई है और वे बेखौफ होकर अवैध खनन कर रहे हैं और अवैध खनन से न केवल पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि क्षेत्र में विचरण करने वाले हाथियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है. इसको लेकर निरमा देवगम ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है.</p>
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		<item>
		<title>JNAC एरिया में 24 भवनों के अवैध निर्माण के मामले में झारखंड हाईकोर्ट का रूख बेहद सख्त</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jnac-illegal-construction-demolition-order/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 17:27:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Construction]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[illegal]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[JNAC]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति [जेएनएसी] एरिया में 24 भवनों के अवैध निर्माण के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रूख अपनाया है. झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए जेएनसी एरिया में किये गये सभी 24 अवैध निर्माण [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span></strong> जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति [जेएनएसी] एरिया में 24 भवनों के अवैध निर्माण के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रूख अपनाया है. झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए जेएनसी एरिया में किये गये सभी 24 अवैध निर्माण को नौ मार्च तक ध्वस्त कर अदालत के समक्ष शपथ पत्र दाखिल करने के कड़े आदेश दिया है तथा अदालत ने मामले में अगली सुनवाई की तिथि नौ मार्च निर्धारित कर दी.</p>
<p>मामले में अदालत द्वारा पूर्व में दिये गये आदेश के खिलाफ 10 भवन मालिकों की ओर से याचिका दाखिल की गई थी. खंडपीठ ने सुनवाई के बाद अवैध निर्माण करनेवाले लोगों द्वारा दाखिल किये गये सभी 10 याचिकाओं को खारिज करते हुए उन्हें कड़ी फटकार लगाई तथा अदालत ने कहा कि अगर अब से अवैध निर्माण करने वाला कोई भी व्यक्ति कोर्ट में याचिका दाखिल करता है, तो उसपर जुर्माना लगाया जाएगा. खंडपीठ ने कहा कि किसी भी याचिकाकर्ता ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया है. जिससे यह पता चल सके कि उन्होंने नियमानुसार निर्माण किया है.</p>
<p>खंडपीठ ने पूछा कि अवैध निर्माण को बचाने का अधिकार क्यों चाहिए. इनके चलते किसी को पानी और किसी को सूर्य की रोशनी नहीं मिली रही है. ईमानदार लोगों का जीवन बर्बाद हो रहा है. अदालत इन्हें राहत नहीं दे सकती है. अदालत ने यह भी कहा कि पूर्व का आदेश हाईकोर्ट की बनाई अधिवक्ताओं की कमिटी, प्रार्थी और प्रतिवादियों का पक्ष सुनने के बाद ही दिया गया है. वकीलों की कमिटी द्वारा साफतौर पर कहा गया है कि शहर में हुए अवैध निर्माण को तोड़ना ही एक मात्र विकल्प है. साथ ही खंडपीठ ने जेएनएसी की सांठगांठ पर भी फिर फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसा करने के लिए जेएनएसी की भरपूर सांठगांठ रही है.</p>
<p>ज्ञात हो कि जमशेदपुर में अवैध निर्माण हटाने की मांग को लेकर राकेश कुमार झा की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. उनकी ओर से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने पक्ष रखा. पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने जेएनएसी क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माण को एक माह में ध्वस्त करने का निर्देश दिया था. साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए जेएनएसी को हर संभव सहयोग प्रदान करे. वहीं अदालत ने नगर विकास सचिव के अलावा जमशेदपुर के उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक को भी जेएनएसी को सहयोग देने में किसी भी प्रकार की कमी के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">अवैध निर्माणों के प्रति किसी प्रकार की दया नहीं</span></strong><br />
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर कहा है कि अब अवैध निर्माणों के प्रति किसी भी प्रकार की दया दिखाने का समय नहीं है. इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण संबंधित वैधानिक प्राधिकरणों की मिलीभगत या कम से कम उनकी घोर निष्क्रियता के बिना संभव नहीं है. कुछ निर्णयों में यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों में उन नगर निकायों या प्राधिकरणों के विरुद्ध भी आदेश पारित किया जाना चाहिए. जिन्हें इस तरह के अवैध निर्माणों को रोकने का दायित्व सौंपा गया है. गौरतलब है कि इस मामले में हाईकोर्ट ने जांच के लिए पूर्व में तीन अधिवक्ताओं की एक समिति गठित की थी. समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि निजी प्रतिवादियों द्वारा किए गए निर्माण कानून के अनुरूप नहीं है. समिति ने यह भी पाया कि भवन उपनियमों का पालन नहीं किया जाना और संबंधित अधिकारियों की प्रभावी निगरानी नहीं होना ही इस स्थिति के मुख्य कारण है. जिसके कारण ईमानदार और कानून का पालन करने वाले नागरिक पीड़ित हो रहे हैं.</p>
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		<item>
		<title>महिला सुपरवाइजर नियुक्ति में शत-प्रतिशत आरक्षण पर अब खंडपीठ में होगा फैसला</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-high-court-women-supervisor/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Dec 2025 16:22:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Order]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची:  झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने महिला सुपरवाइजर की नियुक्ति को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई की और याचिका में उठाए गए संवैधानिक मामले को देखते हुए इसे चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया. अदालत ने खंडपीठ को याचिका स्थानांतरित [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची:</span>  </strong>झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने महिला सुपरवाइजर की नियुक्ति को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई की और याचिका में उठाए गए संवैधानिक मामले को देखते हुए इसे चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया. अदालत ने खंडपीठ को याचिका स्थानांतरित करते हुए कहा कि महिलाओं के लिए कोई पद शत-प्रतिशत आरक्षित किया जा सकता है या नहीं, इसपर खंडपीठ द्वारा फैसला लिया जायेगा.</p>
<p>यद्यपि अदालत ने पूर्व में इस मामले में सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. इसके साथ ही अदालत ने नियुक्ति प्रक्रिया पर लगाई गई रोक को अगले आदेश तक जारी रखने का भी निर्देश दिया था. वहीं पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया था कि महिला सुपरवाइजर का पद केवल महिला कैडर के लिए ही सृजित किया गया है. क्योंकि यह पद लक्षित समूह जैसे गर्भवती महिलाएं और नवजात शिशु की माताओं से सीधा जुड़ा है.</p>
<p>उन्होंने कहा था कि महिला सुपरवाइजरों का कार्य महिलाओं से संबंधित होता है. इसलिए यह पद महिलाओं के लिए ही रखा गया है और देश के अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार की व्यवस्था है. जबकि मामले में प्रार्थी आकांक्षा कुमारी एवं अन्य की ओर से दलील दी गई थी कि किसी भी नियुक्ति में किसी वर्ग बिशेष को शत-प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया जा सकता है. उनका कहना था कि इस भर्ती में केवल महिलाओं से ही आवेदन आमंत्रित किए गए हैं. जो संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है.</p>
<p>गौरतलब है कि जेएसएससी ने महिला एवं बाल विकास विभाग में महिला सुपरवाइजर के 421 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई है. याचिकाकर्ता भी इस परीक्षा में शामिल हुए थे. लेकिन जेएसएससी द्वारा प्रार्थियों का चयन यह कहते हुए नहीं किया कि इनकी शैक्षणिक योग्यता विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप नहीं है. प्रार्थियों के पास विज्ञापन में निर्धारित मुख्य बिषय के बजाय सहायक बिषयों की डिग्री है. जबकि नियुक्ति नियमावली में ऐसा नहीं है.</p>
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		<item>
		<title>Jharkhand News : High Court ने दिया राज्य के सभी 334 थानों में 5 जनवरी तक CCTV कैमरा लगाने का अहम आदेश</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-high-court-orders-cctv-installation-police-stations/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 16:44:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[CCTVCameras]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Order]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के सभी 334 थानों में 5 जनवरी तक सीसीटीवी कैमरा लगाने का अहम आदेश दिया है. अदालत ने निर्देश दिया है कि इस कार्य के लिए डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने और टेंडर प्रक्रिया को 31 दिसंबर तक पूरी कर ली जाए. साथ ही अदालत ने [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के सभी 334 थानों में 5 जनवरी तक सीसीटीवी कैमरा लगाने का अहम आदेश दिया है. अदालत ने निर्देश दिया है कि इस कार्य के लिए डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने और टेंडर प्रक्रिया को 31 दिसंबर तक पूरी कर ली जाए. साथ ही अदालत ने 5 जनवरी तक आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है.</p>
<p>यह निर्देश पश्चिम बंगाल की प्रॉपर्टी रिएल्टी प्राइवेट लिमिटेड के शौभिक बनर्जी और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को दिया गया. इस सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और आईटी विभाग के सचिव सशरीर अदालत में उपस्थित हुए.</p>
<p>याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि चेक बाउंस के एक मामले में वे धनबाद कोर्ट में जमानत लेने पहुंचे थे, लेकिन धनबाद पुलिस ने उन्हें दो दिनों तक अवैध रूप से थाना परिसर में रोके रखा और दूसरे पक्ष के हित में दबाव बनाया. उन्होंने कहा कि पूरी घटना बैंक मोड़ थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई थी.</p>
<p>जब अदालत ने थाने के सीसीटीवी फुटेज को प्रस्तुत करने का आदेश दिया, तो पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी में केवल दो दिनों का ही बैकअप उपलब्ध है. इस पर न्यायालय ने अप्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि धनबाद जैसे अपराध-प्रवण शहर में सीसीटीवी डेटा का उचित संरक्षण न होना बेहद चिंताजनक है.</p>
<p>अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य पुलिस प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया था. सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की समयसीमा तय करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आदेश का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए.</p>
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		<item>
		<title>Jharkhand News : Supreme Court Upholds Full Sanctuary Status for Saranda: Jharkhand Directed to Notify 31,468 Hectares Within Four Weeks</title>
		<link>https://uditvani.in/english-news/supreme-court-saranda-forest-wildlife-sanctuary-jharkhand/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 16:17:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[English News]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Order]]></category>
		<category><![CDATA[SupremeCourt]]></category>
		<category><![CDATA[Wildlife]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>UditVani, New Delhi / Jamshedpur: In a major boost to forest conservation, the Supreme Court of India has directed the Jharkhand government to declare 31,468.25 hectares of the Saranda forest as a Wildlife Sanctuary, rejecting the state’s request to reduce the protected area. The order, delivered by a bench comprising Justice B.R. Gavai and Justice [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">UditVani, New Delhi / Jamshedpur:</span> </strong>In a major boost to forest conservation, the Supreme Court of India has directed the Jharkhand government to declare 31,468.25 hectares of the Saranda forest as a Wildlife Sanctuary, rejecting the state’s request to reduce the protected area.</p>
<p>The order, delivered by a bench comprising Justice B.R. Gavai and Justice K. Vinod Chandran, gives the state government four weeks to issue the official notification.</p>
<p>Earlier, during the hearing on October 27, the Jharkhand government had proposed to limit the sanctuary to 24,941.68 hectares, arguing that the larger area could affect local livelihoods, lead to the displacement of tribal families, and hinder operations of SAIL’s mining projects and related industrial activities in the region.</p>
<p>The apex court, however, dismissed the plea, emphasizing that ecological preservation cannot be compromised. The court further instructed the state to conduct public outreach initiatives to clarify that the declaration of the sanctuary would not adversely affect the rights and welfare of tribal and forest-dwelling communities.</p>
<p>Reassuring local concerns, the bench noted that all rights guaranteed under the Forest Rights Act (FRA) will remain fully protected.</p>
<p>Home to lush sal forests, elephants, and diverse flora and fauna, Saranda—often referred to as the “Land of Seven Hundred Hills”—is one of India’s most ecologically significant landscapes.</p>
<p>With this ruling, the Supreme Court has reaffirmed Saranda’s rightful place as a vital conservation zone, marking a historic step toward balancing tribal welfare and environmental protection in Jharkhand.</p>
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		<item>
		<title>Jharkhand News : सुप्रीम कोर्ट का आदेश, सारंडा वन के 314 वर्ग किमी क्षेत्र को वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी घोषित करे झारखंड सरकार</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/supreme-court-declares-saranda-forest-wildlife-sanctuary/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 15:24:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Order]]></category>
		<category><![CDATA[SupremeCourt]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची/नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के सारंडा वन के 31,468 हेक्टेयर यानी 314 वर्ग किमी क्षेत्र को &#8216;वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी&#8217; (वन्यप्राणी अभयारण्य) घोषित करने का आदेश दिया है. चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की पीठ ने गुरुवार को इससे संबंधित मामले में सुनवाई के बाद फैसला सुनाया. कोर्ट ने [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची/नई दिल्ली :</span> </strong>सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के सारंडा वन के 31,468 हेक्टेयर यानी 314 वर्ग किमी क्षेत्र को &#8216;वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी&#8217; (वन्यप्राणी अभयारण्य) घोषित करने का आदेश दिया है. चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की पीठ ने गुरुवार को इससे संबंधित मामले में सुनवाई के बाद फैसला सुनाया. कोर्ट ने राज्य सरकार को चार हफ्ते के अंदर इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है.</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सारंडा क्षेत्र देश के सबसे समृद्ध वनों में से एक है और यहां की जैव विविधता तथा हाथियों के आवागमन के प्राकृतिक मार्गों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार से कहा कि वह वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 के तहत तय प्रक्रिया के अनुसार सैंक्चुअरी की अधिसूचना जारी करे. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से 31468.25 हेक्टेयर के बदले 24941.68 हेक्टेयर के सैंक्चुअरी घोषित करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया.</p>
<p>अदालत ने वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सारंडा क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और यहां खनन गतिविधियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है. यदि इस क्षेत्र को संरक्षित नहीं किया गया तो इसका दीर्घकालिक प्रभाव राज्य और देश दोनों के पर्यावरण पर पड़ेगा. राज्य सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि प्रस्तावित सैंक्चुअरी क्षेत्र में कई गांव और खनन पट्टे मौजूद हैं, जिससे अधिसूचना जारी करने में व्यावहारिक कठिनाई आ रही है.</p>
<p>इस पर कोर्ट ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के तहत आदिवासी और स्थानीय समुदायों के मौजूदा अधिकार पहले से ही सुरक्षित हैं, इसलिए सैंक्चुअरी की घोषणा से उनके अधिकारों पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि राज्य चाहे तो वन्यजीव बोर्ड की सिफारिश के आधार पर अतिरिक्त क्षेत्र शामिल कर सकता है, लेकिन पहले से निर्धारित 31,468 हेक्टेयर क्षेत्र की अधिसूचना में और देरी नहीं होनी चाहिए.</p>
<p>अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को इस संबंध में शीघ्र कार्रवाई करने का निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि देश के किसी भी राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभयारण्य के भीतर तथा ऐसे उद्यान या अभयारण्य की सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि नहीं की जाएगी.</p>
<p>अदालत ने कहा कि यह प्रतिबंध पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है. इस क्षेत्र को &#8216;इको-सेंसिटिव जोन&#8217; माना जाएगा, और इसके भीतर किसी भी खनन कार्य, निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक कि इसके लिए केंद्र और संबंधित राज्य सरकार से पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त न हो. सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय देशभर के सभी राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों पर समान रूप से लागू होगा.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<item>
		<title>Jharkhand News : खाद्य पदार्थों में मिलावट पर हाईकोर्ट सख्त, फूड सेफ्टी ऑफिसर के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति का निर्देश</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-high-court-orders-food-safety-officer-recruitment/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Oct 2025 13:56:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Order]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में दूध और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामलों पर स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को फूड सेफ्टी ऑफिसर सहित संबंधित पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने यह आदेश गुरुवार को मामले [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में दूध और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामलों पर स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को फूड सेफ्टी ऑफिसर सहित संबंधित पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने यह आदेश गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान दिया.</p>
<p>चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान जेपीएससी (झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन) के सचिव को तलब किया और पूछा कि फूड सेफ्टी ऑफिसर्स के रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया लंबे समय से क्यों लंबित है?</p>
<p>इस पर सचिव ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट पेश की. राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि फूड सेफ्टी ऑफिसर, फूड एनालिस्ट और लेब टेक्नीशियन समेत अन्य रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए अधिकांश औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और जल्द ही परिणाम प्रकाशित कर दिया जाएगा.</p>
<p>हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता का पक्ष सुनने के बाद जनहित याचिका को निष्पादित कर दिया, लेकिन सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि लंबित नियुक्तियों को अब और देर नहीं होनी चाहिए. अदालत ने टिप्पणी की कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े पदों को वर्षों तक रिक्त रखना जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर लापरवाही है.</p>
<p>इससे पहले की सुनवाई में कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूछा था कि वर्ष 2023 में जेपीएससी द्वारा परीक्षा आयोजित किए जाने के बावजूद अब तक परिणाम प्रकाशित क्यों नहीं किया गया? अदालत ने इस पर असंतोष जताया था और जेपीएससी सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था. मामले में एमीकस क्यूरी पीयूष पोद्दार और जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने बहस की.</p>
<p>बता दें कि मीडिया में दूध में मिलावट की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उसे जनहित याचिका में परिवर्तित किया था. तब से यह मामला खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने से जुड़े एक महत्वपूर्ण जनहित के रूप में अदालत की निगरानी में रहा है.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<item>
		<title>Jharkhand News : दीपावली पर रात 8 से 10 बजे तक ही चलेंगे पटाखे, छठ और गुरु पर्व पर भी दो घंटे आतिशबाजी की इजाजत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Oct 2025 11:46:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[काम की बात]]></category>
		<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Dipawali]]></category>
		<category><![CDATA[Firecrackers]]></category>
		<category><![CDATA[Government]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : झारखंड में दीपावली पर रात के आठ से दस बजे तक ही पटाखे चलाए जाएंगे. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय एवं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों का हवाला देते हुए दीपावली सहित अन्य त्योहारों में आतिशबाजी और पटाखे चलाने को लेकर विस्तृत गाइडलाइन जारी की है. बोर्ड की ओर [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची : </span></strong>झारखंड में दीपावली पर रात के आठ से दस बजे तक ही पटाखे चलाए जाएंगे. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय एवं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों का हवाला देते हुए दीपावली सहित अन्य त्योहारों में आतिशबाजी और पटाखे चलाने को लेकर विस्तृत गाइडलाइन जारी की है.</p>
<p>बोर्ड की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, दीपावली के अलावा छठ और गुरु पर्व पर भी सिर्फ दो-दो घंटे पटाखे चलाने की इजाजत दी जाएगी. क्रिसमस और न्यू ईयर पर पटाखे चलाने के लिए मात्र 35 मिनट का समय निर्धारित किया गया है. छठ के दिन सुबह छह से आठ बजे तक, गुरुपर्व पर रात्रि आठ से दस बजे तक तथा क्रिसमस एवं नववर्ष पर 31 दिसंबर की रात 11 बजकर 55 मिनट से 12.30 बजे तक पटाखों की अनुमति दी जाएगी.</p>
<p>प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि झारखंड के उन शहरों में जहां वायु गुणवत्ता का स्तर अच्छा या संतोषप्रद है, वहां निर्धारित समय पर ही पटाखे चलाए जा सकेंगे. ऐसे शहरों में 125 डेसिबल से कम क्षमता वाले पटाखों की ही बिक्री की जा सकेगी.</p>
<p>उच्च ध्वनि वाले या अवैध पटाखों की बिक्री और प्रयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा. इन निर्देशों का उल्लंघन करने वालों पर आईपीसी की धारा 188 और वायु प्रदूषण निवारण नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी.</p>
<p>इसे लेकर राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को भी पत्र लिखा गया है. राज्य के शहरी इलाकों में पटाखों की दुकानें लगाने के लिए शहरों में खुली जगहों पर क्लस्टर बनाए जा रहे हैं. खुदरा विक्रेता उन्हीं क्लस्टरों में दुकान लगा सकें.</p>
<p>झारखंड की राजधानी रांची में चार से पांच क्लस्टर बनाए गए हैं. इनके अलावा पटाखा बिक्री के लिए प्रशासन ने कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं. सभी विक्रेताओं को इसका पालन करना होगा. पटाखों की बिक्री के लिए लाइसेंस लेना होगा.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<item>
		<title>Supreme Court ने दिवाली के दौरान पटाखों पर प्रतिबंध हटाने का संकेत दिया, ग्रीन क्रैकर्स पर फैसला सुरक्षित</title>
		<link>https://uditvani.in/kam-ki-baat/karwa-chauth-gold-price-drop-silver-price-rise/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Oct 2025 14:06:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[काम की बात]]></category>
		<category><![CDATA[Firecrackers]]></category>
		<category><![CDATA[Order]]></category>
		<category><![CDATA[SupremeCourt]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में दिवाली मनाने के लिए प्रमाणित ग्रीन क्रैकर्स के इस्तेमाल की अनुमति मांगी गई थी. भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने त्योहारों के [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नई दिल्ली :</span></strong> सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में दिवाली मनाने के लिए प्रमाणित ग्रीन क्रैकर्स के इस्तेमाल की अनुमति मांगी गई थी.</p>
<p>भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने त्योहारों के लिए अस्थायी रूप से प्रतिबंध हटाने का संकेत दिया. पीठ ने कहा कि फिलहाल, हम दिवाली के दौरान प्रतिबंध हटाने की अनुमति देंगे.</p>
<p>सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय को कई सुरक्षा उपायों का आश्वासन दिया, जिसमें यह भी शामिल है कि लाइसेंस प्राप्त व्यापारियों के माध्यम से पटाखों की बिक्री की जाएगी और केवल अनुमति प्राप्त निर्माताओं को ही बिक्री करने की अनुमति होगी.</p>
<p>26 सितंबर को, मुख्य न्यायाधीश गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली-एनसीआर में उन प्रमाणित निर्माताओं को अस्थायी रूप से हरी पटाखे बनाने की अनुमति दी, जिनके पास राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) और पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) से परमिट हैं.</p>
<p>हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने निर्माताओं को स्पष्ट किया कि अगले आदेश तक वे इन ग्रीन क्रैकर्स को निषिद्ध क्षेत्रों में नहीं बेच सकते.</p>
<p>इस वर्ष अप्रैल में न्यायमूर्ति अभय एस ओका (अब सेवानिवृत्त) और न्यायमूर्ति उज्जल भुयान की पीठ ने कहा था कि हर साल केवल 3-4 महीने की अवधि के लिए पटाखों पर प्रतिबंध लगाना प्रभावी नहीं है, और हरित पटाखों के लिए भी कोई अपवाद नहीं होना चाहिए.</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हवा में प्रदूषण का स्तर लंबे समय से खतरनाक बना हुआ है. कोर्ट ने कहा कि जब तक यह साबित नहीं होता कि हरे पटाखों (ग्रीन क्रैकर्स) से प्रदूषण बहुत कम होता है, तब तक इन्हें कोई छूट नहीं दी जाएगी.</p>
<p>कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वस्थ जीवन और प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार शामिल है.</p>
<p>इससे पहले, जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकारों द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के आदेश को और बढ़ा दिया.</p>
<p>कोर्ट ने कहा था कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा में 17 जनवरी तक लागू प्रतिबंध को अगले आदेश तक जारी रखा जाए.</p>
<p>इससे पहले, शीर्ष अदालत ने कहा था कि दिल्ली और राजस्थान सरकारों द्वारा पहले से लगाया गया प्रतिबंध तभी प्रभावी होगा जब शेष राज्य भी इसी तरह के उपाय लागू करेंगे.</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकारों को दिल्ली की तरह एनसीआर में पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है. यह आदेश तब आया जब कोर्ट को बताया गया कि हरियाणा ने ग्रीन पटाखों की अनुमति दी थी, जबकि राजस्थान ने एनसीआर में सभी तरह के पटाखों पर प्रतिबंध लगाया था.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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