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	<title>LPG Cylinder Price Hike Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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		<title>पश्चिम एशिया संकट के बीच घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई कॉस्ट हुई 1,600 रुपये से ज्यादा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Jun 2026 07:18:14 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><b data-path-to-node="3" data-index-in-node="0"><span style="color: #800080;">उदित वाणी नई दिल्ली: </span></b> वेस्ट एशिया संकट के बीच 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की सप्लाई की लागत बढ़कर 1,600 रुपए से ज्यादा हो गई है। अब हर घरेलू सिलेंडर पर लगभग 700 रुपए का नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ रहा है। साथ ही, घरेलू कुकिंग गैस की कीमतों में प्रति सिलेंडर 29 रुपए की बढ़ोतरी की गई। सरकार ने रविवार को यह जानकारी दी। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, इसका असर पूरी तरह से मार्केट-प्राइस वाले कमर्शियल सिलेंडर पर साफ दिखता है।</p>
<p>वेस्ट एशिया संकट के दौरान पांच बार दाम बढ़ने के बाद, होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाला 19 किलो का सिलेंडर दिल्ली में 3,113.50 रुपए (लगभग 164 रुपये प्रति किलो) में बिकता है। इसके उलट, घरेलू इस्तेमाल के लिए दाम में बदलाव के बाद कीमत लगभग 66 रुपए प्रति किलो है। कमर्शियल गैस पर टैक्स की दर और मार्जिन ज्यादा होता है, इसलिए इसकी कीमत घरेलू गैस की लागत-आधारित कीमत से ज्यादा होती है। फिर भी, मंत्रालय ने बताया कि घरेलू सिलेंडर की इंपोर्ट-लिंक्ड लागत 1,600 रुपए से ज्यादा बैठती है। जब संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात मुश्किल हो गए तो इस रास्ते से होने वाला ज़्यादातर कमर्शियल ट्रैफिक लगभग रुक गया। भारत की एलपीजी खपत का लगभग 54 प्रतिशत हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से आता था, जिससे खाना पकाने वाली गैस की सप्लाई पर रुकावट का सीधा असर पड़ने का खतरा पैदा हो गया।</p>
<p>भारत उन कुछ देशों में से एक था जिसने अपने एनर्जी कार्गो की आवाजाही जारी रखी। लगातार तालमेल बिठाकर, भारतीय झंडे वाले टैंकरों ने स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) से गुजरना और भारतीय बंदरगाहों पर कच्चा तेल और एलपीजी की लगातार खेप उतारना जारी रखा। मंत्रालय ने कहा कि किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कोई कमी नहीं हुई और पूरे नेटवर्क में बॉटलिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का काम सामान्य रूप से चलता रहा। रुकावट के बावजूद सप्लाई बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए गए। सप्लाई के मोर्चे पर, आयात में आई कमी की भरपाई के लिए घरेलू एलपीजी उत्पादन को लगभग 32 टीएमटी से बढ़ाकर लगभग 52 टीएमटी कर दिया गया, यानी इसमें 60 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई।</p>
<p>लगातार तालमेल की वजह से एलपीजी ले जाने वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलते रहे। भारत ने किसी भी दूसरे देश के मुकाबले ऐसे सबसे ज्यादा जहाज बाहर निकाले और ऐसा बिना कोई टोल दिए किया। सरकारी बयान के मुताबिक, दुनिया भर के सप्लायर्स से एलपीजी मंगाने का दायरा बढ़ाया गया, जिनमें वे देश भी शामिल थे जिनके जहाज इस जलडमरूमध्य से नहीं गुजरते (जैसे अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया) और उपलब्ध एलपीजी को घरों तथा अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों जैसे प्राथमिकता वाले उपभोक्ताओं तक पहुंचाया गया। मांग के नजरिए से ग्राहकों को जहां भी सुविधा हो, वहां पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे सिलेंडरों पर दबाव कम हुआ।</p>
<p>घरेलू स्तर पर सीमित सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए, राज्य सरकारों और इंडस्ट्री एसोसिएशन के साथ मिलकर सप्लाई के गलत इस्तेमाल को रोकने के उपाय कड़े किए गए: ओटीपी-आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन को लगभग 90 प्रतिशत तक बढ़ाया गया, जिससे सब्सिडी वाली घरेलू एलपीजी का कमर्शियल मार्केट में गलत इस्तेमाल रोका जा सका। पिछले फाइनेंशियल ईयर के आखिर तक, घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी 60 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जो उससे पिछले साल 41,338 करोड़ रुपए थी। यूनियन कैबिनेट ने इस मद में मार्केटिंग कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपए का मुआवजा देने को मंजूरी दी है। मंत्रालय ने कहा कि सब्सिडी इसके अलावा है: उज्ज्वला ग्राहकों को प्रति सिलेंडर 300 रुपए अतिरिक्त मिलते हैं जो सीधे उनके बैंक अकाउंट में जमा किए जाते हैं। यह सुविधा 10.58 करोड़ से ज्यादा कनेक्शन तक पहुंचती है।</p>
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