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	<title>JharkhandHighCourt Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>JharkhandHighCourt Archives - Udit Vani</title>
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		<title>JHARKHAND : CBI की बिशेष अदालत ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष दिलीप प्रसाद के खिलाफ 21 साल पुराने मामले में बड़ा सुनाया फैसला</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/dilip-prasad-jpsc-scam-cbi-court-verdict/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Jul 2025 18:07:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CRIME NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>* पहले मामले में दिलीप प्रसाद के खिलाफ आया फैसला, मेधा घोटाले में भी आरोपी हैं पूर्व अध्यक्ष उदित वाणी, रांची : सीबीआई की बिशेष अदालत द्वारा झारखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष दिलीप प्रसाद के खिलाफ 21 साल पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया. बिशेष न्यायाधीश एसएन तिवारी की अदालत ने ओएमआर स्कैनिंग [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>* पहले मामले में दिलीप प्रसाद के खिलाफ आया फैसला, मेधा घोटाले में भी आरोपी हैं पूर्व अध्यक्ष</strong></p>
<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>सीबीआई की बिशेष अदालत द्वारा झारखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष दिलीप प्रसाद के खिलाफ 21 साल पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया. बिशेष न्यायाधीश एसएन तिवारी की अदालत ने ओएमआर स्कैनिंग मशीन खरीद घोटाला मामले में पूर्व अध्यक्ष दिलीप प्रसाद समेत एसपीएस इंटरनेशनल लिमिटेड के सुधीर जैन और सुरेंद्र जैन को धोखाधड़ी और साजिश रचकर सरकार को 28.66 लाख रूपये का नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया और अदालत ने तीनों को दो-दो साल की सजा सुनाई तथा दिलीप प्रसाद पर एक लाख रुपये तथा अन्य दोनों पर 50-50 हजार रूपये का जुर्माना लगाया.</p>
<p>हालांकि सजा की अवधि तीन साल से कम होने की वजह से फैसला आने के बाद अदालत ने उपरी अदालत में अपील दायर करने के लिए तीनों को जमानत दे दी. गौरतलब है कि जेपीएससी अध्यक्ष दिलीप प्रसाद के खिलाफ इस पहले मामले में अदालत का फैसला आया है. जबकि दिलीप प्रसाद के खिलाफ जेपीएससी अध्यक्ष रहते कई नियुक्तियों में अपने पद का दुरुपयोग कर मेधा घोटाले का बहुचर्चित मामले भी लंबित है. मेधा घोटाले में सीबीआई द्वारा अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है. वहीं जिस मामले में अदालत का फैसला आया है. इसमें दिलीप प्रसाद पर सरकारी पद का दुरुपयोग कर अपने लाभ के लिए ओएमआर स्कैनिंग मशीन खरीदने का टेंडर चहेती कंपनी एसपीएस इंटरनेशनल लिमिटेड का चयन कर लाभ पहुंचाने का दोषी पाया गया है.</p>
<p>जबकि उन्होंने उच्च और बेहतर क्षमता वाली ओएमआर स्कैनिंग मशीन के लिए कम कीमत का टेंडर डालने वाले मेसर्स मेथोडैक्स सिस्टम्स लिमिटेड से मशीन नहीं खरीदी और सरकार को नुकसान पहुचाया. इस मामले में बिशेष अदालत ने 21 जुलाई को ही अंतिम बहस पूरी होने के बाद 26 जुलाई को फैसले की तिथि निर्धारित की थी. जबकि सीबीआई ने मामले में बर्ष 2004 में हुई इस खरीद घोटाले को लेकर बर्ष 2013 में प्राथमिकी दर्ज की थी और जांच अधिकारी ने जांच पूरी करते हुए 34 गवाहों के साथ बर्ष 2014 में ही चार्जशीट दाखिल की थी.</p>
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		<item>
		<title>Jharkhand CGL परीक्षा के रिजल्ट पर हाईकोर्ट ने रोक बरकरार रखी, सरकार ने बहस के लिए मांगा वक्त</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-high-court-maintains-stay/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Jun 2025 11:53:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[JharkhandHighCourt]]></category>
		<category><![CDATA[JSSC]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रांची:  झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2024 में आयोजित झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (सीजीएल) परीक्षा के रिजल्ट प्रकाशन पर रोक बरकरार रखी है। कोर्ट ने बुधवार को इस परीक्षा में गड़बड़ियों की सीबीआई जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से बहस के लिए [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">रांची: </span> </strong>झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2024 में आयोजित झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (सीजीएल) परीक्षा के रिजल्ट प्रकाशन पर रोक बरकरार रखी है। कोर्ट ने बुधवार को इस परीक्षा में गड़बड़ियों की सीबीआई जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से बहस के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अब इस याचिका पर अगली सुनवाई 26 जून को निर्धारित की गई है।</p>
<p>इस मामले में पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को बताया था कि मामले में सीआईडी की जांच जारी है। परीक्षा के पेपर लीक का अब तक कोई साक्ष्य नहीं मिला है। अनुसंधान की प्रक्रिया एक माह में पूरी कर ली जाने की उम्मीद है। राज्य सरकार की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि था कि परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर कई अभ्यर्थियों से पैसा वसूलने वाले आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है।</p>
<p>राज्य में करीब दो हजार से अधिक पदों पर नियुक्ति के लिए जेएसएससी सीजीएल की परीक्षा 21-22 सितंबर, 2024 को राज्य भर के 823 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित हुई थी। परीक्षा में 3,04,769 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। जेएसएससी ने इस परीक्षा के आधार पर 5 दिसंबर, 2024 को 2145 अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया था। इसी बीच परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर राजेश कुमार एवं अन्य ने झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।</p>
<p>इसपर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर, 2024 को परिणाम प्रकाशित करने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को पेपर लीक की शिकायत पर परीक्षा संचालन अधिनियम 2023 के तहत एफआईआर दर्ज करने और अनुसंधान कर इसकी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। इसके बाद झारखंड के अपराध अनुसंधान विभाग एफआईआर दर्ज कर जांच कर रहा है। बुधवार को जनहित याचिका पर अदालत में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता पीयूष चित्रेश के अलावा जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजॉय पिपरवाल और प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने बहस की।</p>
<p>(IANS)</p>
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		<item>
		<title>Jharkhand High Court का राज्य सरकार को निर्देश, आधुनिक टेक्नोलॉजी के जरिए भूमि सर्वेक्षण का कार्य तेजी से पूरा करें</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/high-court-directs-the-state-government/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Jun 2025 14:01:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Government of Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[JharkhandHighCourt]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रांची:  झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की सरकार को भूमि सर्वेक्षण का कार्य आधुनिक टेक्नोलॉजी के जरिए तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मंगलवार को एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से भूमि सर्वे नई टेक्नोलॉजी के जरिए अपडेट [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">रांची: </span> </strong>झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की सरकार को भूमि सर्वेक्षण का कार्य आधुनिक टेक्नोलॉजी के जरिए तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया है।</p>
<p>चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मंगलवार को एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से भूमि सर्वे नई टेक्नोलॉजी के जरिए अपडेट करने के कार्य की प्रगति पर जानकारी मांगी।</p>
<p>इस पर झारखंड सरकार की ओर से बताया गया कि भूमि सर्वेक्षण की नई टेक्नोलॉजी की जानकारी लेने और इसकी बारीकियां सीखने के लिए तीन टीमों को बिहार, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक भेजा जा रहा है। एक टीम ने हाल में आंध्र प्रदेश में भूमि सर्वे की टेक्नोलॉजी पर कॉन्फ्रेंस में भाग लिया है। इसके बाद झारखंड में भी आधुनिक तकनीक आधारित फॉर्मूले पर काम किया जाएगा।</p>
<p>कोर्ट ने कहा कि सरकार इस प्रक्रिया में तेजी लाए। इस मामले में अगली सुनवाई 16 सितंबर को निर्धारित करते हुए कोर्ट ने कार्य प्रगति से अवगत कराने का निर्देश दिया है। झारखंड में भूमि सर्वेक्षण कराने और इसके रिकॉर्ड को अपडेट करने की मांग को लेकर गोकुल चंद नामक शख्स ने जनहित याचिका दायर की है।</p>
<p>याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1932 में भूमि का सर्वे हुआ था। इसके बाद झारखंड में 1975 से भूमि सर्वे की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो अब तक पूरी नहीं हो पाई है। भूमि का रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने के कारण रैयतों को काफी परेशानी हो रही है और भूमि विवाद के मामले बढ़ रहे हैं।</p>
<p>पिछली सुनवाई में सरकार ने बताया था कि राज्य में सर्वे का काम चल रहा है। दो जिलों लातेहार व लोहरदगा में सर्वे पूरा हो गया है। अमीन के कई पद रिक्त हैं और सर्वे के लिए तकनीकी दक्षता वाले कर्मचारियों की कमी है, इसलिए सर्वेक्षण कार्य पूरा नहीं किया जा सका है।</p>
<p>इस पर कोर्ट ने भूमि राजस्व सुधार विभाग के प्रधान सचिव को शपथ पत्र दाखिल कर बताने को कहा था कि सर्वे का कार्य पूरा करने के लिए अमीन सहित अन्य कर्मियों की कब तक नियुक्ति कर ली जाएगी और इसकी पुरानी टेक्नोलॉजी को कब तक अपडेट किया जाएगा।</p>
<p>(IANS)</p>
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		<item>
		<title>Jharkhand: झारखंड हाईकोर्ट ने DGP पद पर अनुराग गुप्ता की नियुक्ति और सरकार की नियमावली पर किया जवाब तलब</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-high-court-sought-reply/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Jun 2025 12:23:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[dgp]]></category>
		<category><![CDATA[Government of Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[HighCourt]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में डीजीपी के पद पर अनुराग गुप्ता की नियुक्ति के मामले में भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, केंद्र सरकार और यूपीएससी सहित सभी प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का एक और मौका दिया है। मामले की अगली [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">रांची:</span> </strong>झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में डीजीपी के पद पर अनुराग गुप्ता की नियुक्ति के मामले में भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, केंद्र सरकार और यूपीएससी सहित सभी प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का एक और मौका दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की गई है।</p>
<p>चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इसके पहले इस याचिका पर 24 मार्च को सुनवाई की थी और सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए 16 जून तक जवाब देने को कहा था। मरांडी ने अपनी याचिका में कहा है कि डीजीपी के पद पर गुप्ता की नियुक्ति में यूपीएससी की गाइडलाइन्स और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना की गई है।</p>
<p>याचिका में झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी, गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल, डीजीपी अनुराग गुप्ता, डीजीपी चयन समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश रत्नाकर भेंगरा, समिति के सदस्य पूर्व डीजीपी नीरज सिन्हा को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने पिछली सुनवाई के दौरान अदालत को बताया था कि राज्य सरकार ने बिना किसी गंभीर आरोप के आईपीएस अधिकारी अजय कुमार सिंह को कार्यकाल पूरा किए बगैर डीजीपी के पद से हटाकर इस पद पर अनुराग गुप्ता को नियुक्त कर दिया, जबकि उनका कार्यकाल 14 फरवरी 2025 तक था।</p>
<p>मरांडी की ओर से दायर अवमानना याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार डीजीपी के चयन के लिए राज्य सरकार की ओर से भेजे जाने वाले आईपीएस अधिकारियों के पैनल से यूपीएससी तीन बेहतर छवि और कार्यकाल वाले नामों का चयन करता है और इसके बाद राज्य की सरकार इनमें से किसी एक को कम से कम दो वर्ष के लिए डीजीपी पद पर नियुक्त करती है।</p>
<p>इसी नियम के तहत राज्य सरकार ने 14 फरवरी 2023 को अजय कुमार सिंह को डीजीपी बनाया था, लेकिन उन्हें बिना किसी आरोप के कार्यकाल पूरा होने के पहले ही पद से हटा दिया गया। याचिका में प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से पारित आदेश को दरकिनार करने और कोर्ट के आदेश की अवमानना का आरोप लगाया गया है। यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए जो चयन समिति बनाई है, उसमें एक संघ लोक सेवा आयोग और एक झारखंड लोक सेवा आयोग का नामित सदस्य रखना अनिवार्य है, लेकिन सरकार ने अपने ही इस नियम का अनुपालन नहीं किया। जिस चयन समिति ने डीजीपी पद पर नियुक्ति के लिए अनुराग गुप्ता के नाम की अनुशंसा की, उसकी बैठक में यूपीएससी और जेपीएससी का कोई सदस्य नहीं था।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>(IANS)</p>
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		<item>
		<title>Ranchi: BIT छात्र की मौत की जांच पर हाईकोर्ट नाराज, डीजीपी, कुलपति समेत अन्य अधिकारी तलब</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/high-court-angry-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Jun 2025 13:30:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[Death]]></category>
		<category><![CDATA[JharkhandHighCourt]]></category>
		<category><![CDATA[Student]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के मेसरा स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) में मारपीट में राजा पासवान नामक छात्र की मौत की घटना में पुलिस की धीमी जांच पर नाराजगी जताई है। घटना को रोकने में प्रबंधन की विफलता पर भी कोर्ट ने सवाल उठाया। इस मामले में शुक्रवार को कोर्ट के आदेश पर [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">रांची:</span> </strong>झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के मेसरा स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) में मारपीट में राजा पासवान नामक छात्र की मौत की घटना में पुलिस की धीमी जांच पर नाराजगी जताई है। घटना को रोकने में प्रबंधन की विफलता पर भी कोर्ट ने सवाल उठाया।</p>
<p>इस मामले में शुक्रवार को कोर्ट के आदेश पर राज्य के डीजीपी अनुराग गुप्ता, बीआईटी मेसरा के कुलपति इंद्रनील मन्ना के अलावा डीन और रजिस्ट्रार अदालत में सशरीर उपस्थित हुए।</p>
<p>सुनवाई के दौरान अदालत ने डीजीपी को निर्देश दिया कि शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा के लिए एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार करें, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।</p>
<p>कोर्ट ने कुलपति और संस्थान के अन्य अधिकारियों से जानना चाहा कि इस घटना में संस्थान की ओर से कोई जांच की गई या नहीं और इसका क्या नतीजा निकला? अगली सुनवाई के दौरान इस संबंध में संस्थान की ओर से रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 24 जून को निर्धारित की गई है।</p>
<p>बीआईटी मेसरा के पॉलिटेक्निक कॉलेज में 14 नवंबर, 2024 को &#8216;फ्रेशर्स डे&#8217; के आयोजन के दौरान किसी बात को लेकर विवाद के बाद छात्रों के एक समूह ने डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग के द्वितीय वर्ष के छात्र राजा कुमार पासवान (19 वर्ष) की पिटाई कर दी थी। इसमें उसे गंभीर चोटें आई थीं।</p>
<p>घटना की जानकारी मिलने पर रांची के कोकर में रहने वाले उसके परिजन मौके पर पहुंचे थे और इसके बाद उसे इलाज के लिए रिम्स में दाखिल कराया था, जहां दो दिन बाद उसकी मौत हो गई थी।</p>
<p>इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राजा पासवान के शरीर पर 10 से अधिक गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे। इससे संबंधित केस में सुनवाई के दौरान गुरुवार को कोर्ट को सूचित किया गया था कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के नियम 7 का उल्लंघन करते हुए इस मामले की जांच पुलिस उप-निरीक्षक ने की, जबकि ऐसे मामलों में डीएसपी रैंक के अधिकारी द्वारा अनुसंधान किया जाना चाहिए था।</p>
<p>कोर्ट ने जांच में गंभीरता की कमी पर नाराजगी जताते हुए डीजीपी और संस्थान के कुलपति सहित अन्य को शुक्रवार को सशरीर हाजिर होने का आदेश दिया था।</p>
<p>(IANS)</p>
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		<item>
		<title>Jharkhand High Court ने विद्युतीकरण घोटाले के आरोपी पूर्व CM मधु कोड़ा पर चौथी बार लगाया जुर्माना</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/fine-for-the-fourth-time/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Jun 2025 10:04:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[fines]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[JharkhandHighCourt]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में घोटाले के आरोपी राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पर आठ हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। कोड़ा ने इस घोटाले में निचली अदालत में आरोप गठित किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, लेकिन इस पर सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता ने चौथी [...]</p>
<p>The post <a href="https://uditvani.in/jharkhand/fine-for-the-fourth-time/">Jharkhand High Court ने विद्युतीकरण घोटाले के आरोपी पूर्व CM मधु कोड़ा पर चौथी बार लगाया जुर्माना</a> appeared first on <a href="https://uditvani.in">Udit Vani</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">रांची:</span> </strong>झारखंड हाईकोर्ट ने राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में घोटाले के आरोपी राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पर आठ हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।</p>
<p>कोड़ा ने इस घोटाले में निचली अदालत में आरोप गठित किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, लेकिन इस पर सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता ने चौथी बार वक्त मांगा। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए उन पर जुर्माना लगाया है।</p>
<p>मामले की अगली सुनवाई आठ हफ्ते बाद निर्धारित की गई है। इस मामले में मधु कोड़ा पर पूर्व में भी तीन बार जुर्माना लग चुका है। अदालत ने एक मार्च 2025 को इस केस में तीसरी बार समय मांगे जाने पर उन पर 4,000 रुपए, 17 जनवरी 2025 को 2,000 रुपए और 13 दिसंबर 2024 को 1,000 रुपए का जुर्माना लगाया था।</p>
<p>जुर्माने की रकम झारखंड लीगल सर्विस अथॉरिटी (झालसा) में जमा करने का निर्देश दिया गया है। मधु कोड़ा पर आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए हैदराबाद की बिजली कंपनी आईवीआरसीएल के निदेशक डीके श्रीवास्तव से मुंबई में 11.40 करोड़ रुपए की रिश्वत ली थी। इसके एवज में ब्लैक लिस्टेड कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए झारखंड के लातेहार, गढ़वा और पलामू सहित छह जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण करने का टेंडर दे दिया। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।</p>
<p>मधु कोड़ा इसमें ढाई साल तक जेल में रहे थे। उन्हें 30 जुलाई 2013 को जमानत मिली थी। वर्ष 2006 में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण परियोजना के लिए झारखंड को केंद्र से 467.76 करोड़ रुपए मिले थे। इस परियोजना के तहत झारखंड के छह जिलों के 27,359 गांवों का विद्युतीकरण किया जाना था। इससे 29.26 लाख परिवारों को सीधे तौर पर लाभ मिलता।</p>
<p>इस केस में सीबीआई की ओर से दायर चार्जशीट के आधार पर मधु कोड़ा के खिलाफ आरोप गठित किया गया है, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। शुक्रवार को अदालत में हुई सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अधिवक्ता प्रशांत पल्लव ने पक्ष रखा।</p>
<p>(IANS)</p>
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		<title>Jharkhand High Court ने असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति से जुड़े केस में JPSC पर लगाया एक लाख का जुर्माना</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-high-court-imposed-a-fine/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Jun 2025 10:00:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[JharkhandHighCourt]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रांची: झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली डबल बेंच ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति से जुड़े एक मामले में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की अपील याचिका (एलपीए) खारिज करते हुए उस पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने इस मामले में सिंगल बेंच द्वारा अभ्यर्थी [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">रांची:</span> </strong><span style="font-size: 14px;">झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली डबल बेंच ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति से जुड़े एक मामले में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की अपील याचिका (एलपीए) खारिज करते हुए उस पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।</span></p>
<p>कोर्ट ने इस मामले में सिंगल बेंच द्वारा अभ्यर्थी मनोज कुमार कच्छप को असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त करने के फैसले को भी बरकरार रखा है।</p>
<p>2018 में जेपीएससी की ओर से नागपुरी भाषा के असिस्टेंट प्रोफेसर के चार पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था। मनोज कुमार कच्छप ने इसके लिए आवेदन किया था। आवेदकों के दस्तावेजों की स्क्रूटनी हुई तो कुल निर्धारित 85 प्वाइंट्स में से मनोज को 72.10 प्वाइंट्स प्राप्त हुए थे, लेकिन इसके बाद जब साक्षात्कार आयोजित हुआ तो अभ्यर्थियों की लिस्ट में उनका नाम नहीं था। उसने कारण जानना चाहा तो पता चला कि आवेदन करते हुए उसने जो ऑनलाइन फीस जमा की थी, वह तकनीकी कारणों से जेपीएससी के अकाउंट में क्रेडिट नहीं हुई थी।</p>
<p>जेपीएससी ने फीस की राशि जमा नहीं होने की वजह से उनकी उम्मीदवारी को अमान्य कर दिया था। इस पर मनोज कुमार कच्छप ने हाईकोर्ट में रिट दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट के सिंगल बेंच ने जेपीएससी से उसे इंटरव्यू में शामिल कराने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा था कि उसका निर्णय अंतिम आदेश से प्रभावित होगा।</p>
<p>आदेश के अनुसार, जेपीएससी ने मनोज को इंटरव्यू में शामिल कराया। 23 दिसंबर 2021 को इंटरव्यू का रिजल्ट जारी किया गया, लेकिन कोर्ट के आदेश के आलोक में आयोग ने एक पद पर रिजल्ट रोक दिया था। बाद में कोर्ट ने जेपीएससी से मनोज का मार्क्सशीट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने का आदेश दिया। इससे पता चला कि वह उस पूरी परीक्षा में सबसे ज्यादा नंबर लाने वाला अभ्यर्थी है।</p>
<p>इसके बाद कोर्ट ने उसे रिक्त पद पर चार हफ्ते में नियुक्त करने का आदेश देते हुए कहा कि तकनीकी खामी की वजह से फीस भले नहीं जमा हो पाई, लेकिन इस वजह से योग्य अभ्यर्थी की नियुक्ति का अधिकार नहीं छीना जा सकता।</p>
<p>कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कुछ परीक्षाओं में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के अभ्यर्थियों से परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाता। जेपीएससी ने सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ डबल बेंच में अपील की थी। इस पर सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से दलील दी गई कि परीक्षा में सभी उम्मीदवारों के लिए फीस जमा करना अनिवार्य है। मनोज कुमार कच्छप की फीस जेपीएससी के अकाउंट में नहीं आई, इसलिए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई।</p>
<p>दूसरी तरफ, मनोज कुमार कच्छप की ओर से उनके अधिवक्ता सव्यसाची ने कहा कि जेपीएससी की रिजेक्शन लिस्ट में उसका नाम नहीं था, ऐसे में वह कहां से जान पाता कि उसकी फीस जेपीएससी के पास जमा नहीं हो पाई है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डबल बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा।</p>
<p>(IANS)</p>
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		<title>Jharkhand: झारखंड हाईकोर्ट ने सिविल सर्विस परीक्षा की मेरिट लिस्ट पर JPSC को जारी किया नोटिस, गड़बड़ियों को लेकर जवाब मांगा</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-high-court-issues-notice-to-jpsc/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jun 2025 13:53:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[JharkhandHighCourt]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा मुख्य परीक्षा की मेरिट लिस्ट को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। राजेश प्रसाद एवं 53 अन्य अभ्यर्थियों की ओर से इस संबंध में दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने जेपीएससी को नोटिस जारी [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">रांची:</span> </strong>झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा मुख्य परीक्षा की मेरिट लिस्ट को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। राजेश प्रसाद एवं 53 अन्य अभ्यर्थियों की ओर से इस संबंध में दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने जेपीएससी को नोटिस जारी कर कई बिंदुओं पर जवाब दाखिल करने को कहा है।</p>
<p>कोर्ट ने मेरिट लिस्ट पर उठाई गई आपत्तियों पर बिंदुवार शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।</p>
<p>प्रार्थियों की ओर से दायर याचिका में परीक्षा को लेकर 2024 में जारी विज्ञापन और नियमों का उल्लेख करते हुए मेरिट लिस्ट पर कई आपत्तियां उठाई गई हैं।</p>
<p>याचिका में बताया गया है कि इस सिविल सेवा परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन कराया गया, जबकि इसका कोई प्रावधान नियमावली में नहीं है। मूल्यांकन में थर्ड पार्टी एजेंसी की सेवा ली गई, लेकिन यह थर्ड पार्टी एजेंसी कौन है और उसे यह काम किस टेंडर के आधार पर सौंपा गया, इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।</p>
<p>याचिका में कहा गया है कि नियमों के अनुसार उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन विश्वविद्यालयों से संबंधित कॉलेजों में कार्य 10 साल से अधिक अनुभव वाले शिक्षकों या पांच साल से अधिक अनुभव वाले पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री होल्डर शिक्षकों से कराया जाना चाहिए था, लेकिन उन्हें जानकारी मिली है कि मात्र दो साल अनुभव वाले गेस्ट फैकल्टी से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कराई गई।</p>
<p>प्रार्थियों ने मुख्य परीक्षा की मेरिट लिस्ट को खारिज करते हुए उत्तर पुस्तिकाओं का फिर से मूल्यांकन कराने की मांग की है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की है।</p>
<p>जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा की परीक्षा का विज्ञापन वर्ष 2024 के जनवरी में जारी हुआ था। इसकी प्रारंभिक परीक्षा मार्च में ली गई थी, जिसमें साढ़े तीन लाख से भी ज्यादा परीक्षार्थी शामिल हुए थे।</p>
<p>इसका रिजल्ट 22 अप्रैल को जारी किया गया था। रिजल्ट के आधार पर 7,011 परीक्षार्थी मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए चयनित हुए थे। इसके बाद मुख्य परीक्षा 22 से 24 जून, 2024 तक विभिन्न केंद्रों में आयोजित हुई थी, जिसका परिणाम 20 मई, 2025 को जारी किया गया है।</p>
<p>मुख्य परीक्षा में सफल परीक्षार्थियों के साक्षात्कार की प्रक्रिया आयोग ने शुरू कर दी है। इस परीक्षा के जरिए कुल 342 पदों पर नियुक्ति की जानी है।</p>
<p>(IANS)</p>
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		<title>Jharkhand High Court Seeks JPSC’s Clarification on Petition Demanding Cancellation of 11th JPSC Merit List</title>
		<link>https://uditvani.in/english-news/jpscs-clarification/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jun 2025 08:29:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[English News]]></category>
		<category><![CDATA[JharkhandHighCourt]]></category>
		<category><![CDATA[jpsc]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Udit Vani Jamshedpur : The Jharkhand High Court has sought a detailed response from the Jharkhand Public Service Commission (JPSC) on a writ petition filed against the merit list of the 11th JPSC Combined Civil Services Examination. The petition challenges the validity of the final merit list and alleges irregularities in the selection process, demanding [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">Udit Vani Jamshedpur :</span> </strong>The Jharkhand High Court has sought a detailed response from the Jharkhand Public Service Commission (JPSC) on a writ petition filed against the merit list of the 11th JPSC Combined Civil Services Examination.</p>
<p>The petition challenges the validity of the final merit list and alleges irregularities in the selection process, demanding its cancellation.</p>
<p>The court’s directive came after the petitioner highlighted several discrepancies in the recruitment procedure, including alleged violations of reservation policies, inconsistencies in the interview process, and a lack of transparency in the evaluation of candidates.</p>
<p>The petitioner has argued that these irregularities have led to unfair selection and have deprived many deserving candidates of their rightful place.</p>
<p>The High Court, taking the petition seriously, has asked the JPSC to file a detailed affidavit explaining the methodology used for preparing the merit list, including the weightage given to written exams and interviews, and how reservation norms were implemented.</p>
<p>The court also indicated that it would closely examine whether the selection process was conducted in line with constitutional and procedural norms.</p>
<p>The case has gained attention across the state, particularly among aspirants who appeared in the 11th JPSC exam. Many of them have expressed concerns over the credibility of the recruitment process. Several student organizations and civil service aspirant groups have also come forward in support of the petition, demanding a fair and transparent inquiry.</p>
<p>The next hearing is expected to be scheduled soon, during which the JPSC’s official response will be evaluated. The outcome of this case could have significant implications on the current list of selected candidates and future recruitment procedures conducted by the commission.</p>
<p>The 11th JPSC exam was conducted to fill various administrative posts under the Jharkhand state government, and its merit list had been released recently. The ongoing legal scrutiny has now cast uncertainty over the final appointments.</p>
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		<item>
		<title>Jharkhand: सिरमटोली फ्लाईओवर से जुड़े विवाद में गीताश्री उरांव सहित पांच लोगों की अग्रिम जमानत याचिका सुनवाई टली</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/hearing-of-anticipatory-bail-petition/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Jun 2025 11:36:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Hearing]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[JharkhandHighCourt]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रांची: राजधानी रांची के सिरमटोली फ्लाईओवर रैंप निर्माण से जुड़े विवाद में आरोपी बनाई गईं पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव और चार अन्य व्यक्तियों की अग्रिम जमानत याचिका पर अब 30 जून को सुनवाई होगी. पहले यह सुनवाई न्यायायुक्त की अदालत में 7 जून को प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसकी तारीख स्थगित कर दी गई है. [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">रांची:</span> </strong>राजधानी रांची के सिरमटोली फ्लाईओवर रैंप निर्माण से जुड़े विवाद में आरोपी बनाई गईं पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव और चार अन्य व्यक्तियों की अग्रिम जमानत याचिका पर अब 30 जून को सुनवाई होगी. पहले यह सुनवाई न्यायायुक्त की अदालत में 7 जून को प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसकी तारीख स्थगित कर दी गई है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">इन लोगों ने दाखिल की है याचिका</span></strong><br />
गीताश्री उरांव के साथ जिन चार अन्य लोगों ने अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की है, उनमें कुंद्रसी मुंडा, निरंजन हेरेंज टोप्पो, सुनीता मुंडा और राहुल तिर्की शामिल हैं. इन सभी ने 26 अप्रैल को जमानत याचिका दायर की थी.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">फिलहाल राहत नहीं, अब इंतज़ार 30 जून तक</span></strong><br />
सिरमटोली फ्लाईओवर से जुड़ी इस जांच में आरोपियों को गिरफ्तारी की आशंका है. ऐसे में अग्रिम जमानत याचिका के माध्यम से वे न्यायालय से संरक्षण की उम्मीद लगाए बैठे हैं. मगर तारीख आगे बढ़ने से इनकी चिंता बढ़ गई है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">क्या है मामला?</span></strong><br />
फ्लाईओवर निर्माण की प्रक्रिया और उससे जुड़ी भूमि संबंधी विवादों को लेकर यह मामला चर्चा में आया था. जांच एजेंसियों ने कई लोगों को संदेह के घेरे में रखा है, जिसमें पूर्व मंत्री सहित कुछ अन्य सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां भी शामिल हैं.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">अब आगे क्या?</span></strong><br />
30 जून को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि क्या इन आरोपियों को अग्रिम जमानत मिल पाएगी या नहीं. तब तक सभी की निगाहें अदालत की अगली कार्यवाही पर टिकी रहेंगी.</p>
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