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	<title>import Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>import Archives - Udit Vani</title>
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		<title>India crude oil reserves Iran crisis: ईरान संकट के बीच भारत के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार, जानिए कितने दिनों का है स्टॉक</title>
		<link>https://uditvani.in/new-delhi/india-25-days-oil-stock-amid-strait-of-hormuz-crisis/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 12:06:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[new delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Economy]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली: सरकारी सूत्रों के अनुसार, कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी के मामले में भारत फिलहाल काफी हद तक सुरक्षित स्थिति में है। देश के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार और 25 दिनों के पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक मौजूद है। इसमें वह मात्रा भी शामिल है जो जहाजों के [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नई दिल्ली:</span> </strong>सरकारी सूत्रों के अनुसार, कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी के मामले में भारत फिलहाल काफी हद तक सुरक्षित स्थिति में है। देश के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार और 25 दिनों के पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक मौजूद है। इसमें वह मात्रा भी शामिल है जो जहाजों के जरिए भारत के बंदरगाहों की ओर आ रही है।</p>
<p>भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 50 प्रतिशत आपूर्ति मध्य-पूर्वी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के जरिए होती है। ईरान युद्ध के बाद इस मार्ग से तेल प्रवाह प्रभावित हुआ है।</p>
<p>हालांकि, भारत ने अपने तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाई है। अफ्रीका, रूस और अमेरिका से आयात बढ़ाया गया है और रणनीतिक भंडार बनाकर आपूर्ति को सुरक्षित किया गया है।</p>
<p>एक अधिकारी ने बताया कि देश की तेल विपणन कंपनियों (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के पास कई हफ्तों का स्टॉक है और उन्हें अलग-अलग मार्गों से लगातार आपूर्ति मिल रही है।</p>
<p>इसके अलावा, सरकार ने तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं ताकि बफर स्टॉक और मजबूत हो सके।</p>
<p>एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत ने खाड़ी देशों के बाहर से भी बड़े पैमाने पर तेल आयात शुरू किया है, जिससे अब काफी मात्रा में आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर नहीं आती।</p>
<p>भारत के पास पुडुर में 2.25 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) की भंडारण क्षमता है। विशाखापट्टनम में 1.33 एमएमटी और मैंगलुरु में 1.5 एमएमटी कच्चे तेल को स्टोर करने की क्षमता है। इसके अलावा समुद्री तट पर चांदीखोल में एक और रणनीतिक भंडार सुविधा बनाई जा रही है।</p>
<p>आपात स्थिति में देश इन रणनीतिक तेल भंडारों का उपयोग कर सकता है। वैश्विक कीमतों में तेज उछाल आने पर भी इन भंडारों से तेल निकालकर राष्ट्रीय तेल कंपनियों को राहत दी जा सकती है।</p>
<p>हालांकि, तत्काल प्रभाव कीमतों पर दिखाई देगा। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 80 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है, जो ईरान संकट के बाद लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। तेल कीमतों में बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल बढ़ता है और महंगाई दर में इजाफा होता है, जिससे आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है।</p>
<p>31 मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 137 अरब डॉलर खर्च किए थे। वहीं अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच, यानी चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों में, 206.3 मिलियन टन कच्चे तेल के आयात पर 100.4 अरब डॉलर खर्च किए गए।</p>
<p>&#8211;आईएएनएस<br />
Strait of Hormuz oil supply India, India 25 days petroleum stock, India oil buffer 25 days secure</p>
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		<title>Tata Steel ने अपने आयात शिपमेंट को पूरी तरह पेपरलेस किया</title>
		<link>https://uditvani.in/corporate/tata-steel-digital-coal-import-ebl/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Jul 2025 14:51:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Corporate]]></category>
		<category><![CDATA[Coal]]></category>
		<category><![CDATA[import]]></category>
		<category><![CDATA[Tata Steel]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर : वैश्विक कारोबार को पूरी तरह डिजिटल और सस्टेनेबल बनानेकी दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए टाटा स्टील ने कोयले के अपने पहले आयात शिपमेंट को इलेक्ट्रॉनिक बिल ऑफ लैडिंग के माध्यम से सफलतापूर्वक संपन्न किया है. यह पारंपरिक कागजी दस्तावेज़ का डिजिटल संस्करण है, जो वैश्विक शिपिंग में उपयोग होता [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर :</span> </strong>वैश्विक कारोबार को पूरी तरह डिजिटल और सस्टेनेबल बनानेकी दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए टाटा स्टील ने कोयले के अपने पहले आयात शिपमेंट को इलेक्ट्रॉनिक बिल ऑफ लैडिंग के माध्यम से सफलतापूर्वक संपन्न किया है. यह पारंपरिक कागजी दस्तावेज़ का डिजिटल संस्करण है, जो वैश्विक शिपिंग में उपयोग होता है और इसे बैंक से पूरी तरह जोड़ा गया है.इस महत्वपूर्ण ट्रांजेक्शन के तहत ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड से ओडिशा के धामरा पोर्ट, भारत तक कोयले का आयात किया गया. यह टाटा स्टील का पहला पेपरलेस आयात लेन-देन है, जो पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रियाओं द्वारा समर्थित लेटर ऑफ क्रेडिट के अंतर्गत किया गया है. इस सफल लेन-देन में टाटा स्टील इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, टीएस ग्लोबल प्रोक्योरमेंट, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक (सिंगापुर) और डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदाता आईसीई डिजिटल ट्रेड के ईबीएल समाधान के बीच उत्कृष्ट समन्वय रहा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">स्मार्ट और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में कदम-गुप्ता</span></strong><br />
टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (टीक्यूएम, जीएसपी और सप्लाई चेन) पीयूष गुप्ता ने कहा कि यह हमारी सप्लाई चेन को अधिक स्मार्ट और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. ई बिल को अपनाकर हम पारंपरिक बाधाओं को दूर कर रहे हैं और वैश्विक स्तर पर माल परिवहन के एक नए मानक की स्थापना कर रहे हैं. यह हमारी उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें हम एक ऐसी सप्लाई चेन बनाना चाहते हैं जो न केवल कुशल और सुरक्षित हो, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार भी हो.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">महत्वपूर्ण उपलब्धि-संदीप भट्‌टाचार्या</span></strong><br />
टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (फाइनेंशियल कंट्रोल एवं बिज़नेस एनालिटिक्स) संदीप भट्टाचार्य ने कहा कि बैंकों और डिजिटल दस्तावेज़ों का यह सफल एकीकरण ट्रेड फाइनेंस के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इससे दस्तावेजों तक तेज़ पहुंच संभव होती है, कार्यकुशलता बढ़ती है और अनुपालन का स्तर भी ऊंचा होता है, जो किसी आधुनिक वित्तीय प्रणाली के लिए आवश्यक है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">इससे दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया तेज होगी</span></strong><br />
भौतिक कूरियर सेवाओं और कागजी कार्यवाही की आवश्यकता को समाप्त करके यह नई प्रणाली दस्तावेज़ीकरण की प्रक्रिया को काफी तेज कर देती है, जोखिमों को कम करती है औरटाटा स्टील की डिजिटलीकरण एवं पर्यावरणीय सस्टेनेबिलिटी की दिशा में की जा रही पहल को सशक्त बनाती है.सस्टेनेबल सप्लाई चेन की दिशा में अग्रणी रहते हुए टाटा स्टील पहले से ही कम उत्सर्जन वाले जहाजों का उपयोग कर रही है और आयात शिपमेंट के लिए बायोफ्यूल एवं एलएनजी संचालित जहाजों का उपयोग लगातार बढ़ा रही है. अब ईबिल की शुरुआत कंपनी के पर्यावरण जागरूक और भविष्य के लिए तैयार बिजनेस के तौर-तरीकों को और मजबूती देती है. उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2021 में टाटा स्टील ने वैश्विक इस्पात उद्योग में पहला ब्लॉकचेन-सक्षम पेपरलेस कारोबार लेन-देन सफलतापूर्वक संपन्न किया था, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात के एक ग्राहक को इस्पात का निर्यात किया गया था. उसी वर्ष नवंबर में कंपनी ने बांग्लादेश की एक प्रमुख मेटल कंपनी के साथ भी एक ब्लॉकचेन-सक्षम पेपरलेस निर्यात ऑर्डर को सफलतापूर्वक अंजाम दिया.</p>
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		<item>
		<title>भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक, अंतर्देशीय उत्पादन बढ़कर 147 लाख टन हुआ</title>
		<link>https://uditvani.in/politics/worlds-second-largest-fish-producer/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Jun 2025 07:03:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[Business]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जहां 2013-14 से अंतर्देशीय उत्पादन 142 प्रतिशत बढ़कर 147 लाख टन हो गया है। उन्होंने &#8216;अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि सम्मेलन 2025&#8217; कार्यक्रम के दौरान कहा कि मत्स्य पालन [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">नई दिल्ली:</span> </strong>केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जहां 2013-14 से अंतर्देशीय उत्पादन 142 प्रतिशत बढ़कर 147 लाख टन हो गया है। उन्होंने &#8216;अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि सम्मेलन 2025&#8217; कार्यक्रम के दौरान कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर 9 प्रतिशत है, जो सभी कृषि से जुड़े क्षेत्रों में सबसे अधिक है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने नीली क्रांति, मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (एफआईडीएफ), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, पीएम-मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला।</p>
<p>कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन ने राज्यों से एफआईडीएफ का बेहतर उपयोग करने, आईसीएआर के साथ मिलकर कार्यान्वयन कैलेंडर की योजना बनाने और शीतजल मत्स्य पालन, सजावटी मत्स्य पालन और खारे जलीय कृषि का विस्तार कर निर्यात बढ़ाने का आग्रह किया।</p>
<p>उन्होंने पोषण में सुधार, उत्पादन को बढ़ावा देने और विकसित भारत के दृष्टिकोण में योगदान देने के लिए अंतर्देशीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित किया।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री सिंह ने मत्स्य पालन क्षेत्र में अंतर्देशीय राज्यों द्वारा की गई सराहनीय प्रगति की सराहना की और उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।</p>
<p>मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने कहा कि मत्स्य पालन किसानों की आय दोगुनी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सभी हितधारकों के प्रयासों की प्रशंसा की।</p>
<p>कार्यक्रम में डिजिटल टूल, वैल्यू एडिशन और मछली पकड़ने के बाद की गतिविधियों में काम करने वाले 300 से अधिक मत्स्य पालन स्टार्ट-अप के लिए भी समर्थन को प्रोत्साहित किया गया।</p>
<p>मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने पोषण सुरक्षा, ग्रामीण समृद्धि और स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने में अंतर्देशीय मत्स्य पालन की परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर दिया।</p>
<p>उन्होंने पारंपरिक ज्ञान को इनोवेशन के साथ इंटीग्रेट करने, देशी प्रजातियों को बढ़ावा देने और सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से समुदायों को सशक्त बनाने के महत्व को रेखांकित किया।</p>
<p>मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने क्षेत्र की उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए आईसीएआर के सहयोग से गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और ब्रूड बैंक विकसित करने की जरूरत पर बल दिया।</p>
<p>(IANS)</p>
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		<item>
		<title>Ban on Bangladesh: भारत का नीतिगत बदलाव, रोका गया बांग्लादेश से गारमेंट्स और फूड का आयात</title>
		<link>https://uditvani.in/politics/ban-on-import/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 May 2025 07:16:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[bangladesh]]></category>
		<category><![CDATA[export]]></category>
		<category><![CDATA[import]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: भारत सरकार ने बांग्लादेश से रेडीमेड गारमेंट्स, प्रोसेस्ड फूड और कुछ अन्य वस्तुओं के भूमि मार्ग से आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है. किन वस्तुओं [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">नई दिल्ली:</span> </strong>भारत सरकार ने बांग्लादेश से रेडीमेड गारमेंट्स, प्रोसेस्ड फूड और कुछ अन्य वस्तुओं के भूमि मार्ग से आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">किन वस्तुओं पर लगा प्रतिबंध</span></strong><br />
अधिसूचना के अनुसार, बांग्लादेश से निम्न वस्तुएं अब किसी भी भूमि बंदरगाह से भारत में नहीं लाई जा सकेंगी:<br />
रेडीमेड गारमेंट्स<br />
प्रोसेस्ड फूड<br />
फल या फल-स्वाद युक्त और कार्बोनेटेड पेय<br />
कपास व सूती धागे का वेस्ट<br />
प्लास्टिक और पीवीसी तैयार माल<br />
लकड़ी के फर्नीचर<br />
इन वस्तुओं का आयात केवल समुद्री मार्ग से न्हावा शेवा और कोलकाता बंदरगाहों के माध्यम से ही संभव होगा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">किन राज्यों में नहीं होगी अनुमति</span></strong><br />
असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में किसी भी लैंड कस्टम स्टेशन (एलसीएस) या इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) से इन वस्तुओं का आयात प्रतिबंधित कर दिया गया है. साथ ही पश्चिम बंगाल के चंगराबांधा और फुलबारी एलसीएस से भी यह प्रतिबंध लागू होगा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">किन वस्तुओं को मिली छूट</span></strong><br />
अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध मछली, एलपीजी, खाद्य तेल और क्रश्ड स्टोन पर लागू नहीं होगा. अप्रैल में बांग्लादेश सरकार ने भारत से यार्न के आयात पर भूमि मार्ग से प्रतिबंध लगा दिया था. भारत की यह नई नीति उसी के जवाब में देखी जा रही है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">ट्रांस-शिपमेंट सुविधा भी बंद</span></strong><br />
भारत ने बांग्लादेश के लिए अपनी ट्रांस-शिपमेंट सुविधा को भी समाप्त कर दिया है, जिससे उसे व्यापारिक दृष्टिकोण से एक और झटका लगा है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">भारत-बांग्लादेश व्यापार संबंध</span></strong><br />
भारत, चीन के बाद बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. वित्त वर्ष 2022-23 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग 16 अरब डॉलर का रहा. इसमें बांग्लादेश ने भारत से 14 अरब डॉलर मूल्य का सामान आयात किया, जबकि भारत को केवल 2 अरब डॉलर का निर्यात किया.</p>
<p>(IANS)</p>
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		<item>
		<title>Pahalgam Terror Attack: व्यापारिक युद्ध की शुरुआत, भारत ने पाकिस्तान से सभी आयात पर लगाई रोक</title>
		<link>https://uditvani.in/kam-ki-baat/trade-war-begins/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 May 2025 08:53:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[काम की बात]]></category>
		<category><![CDATA[export]]></category>
		<category><![CDATA[import]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[ModiGovernment]]></category>
		<category><![CDATA[pakistan]]></category>
		<category><![CDATA[Pm modi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सभी प्रकार के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है. यह प्रतिबंध वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के माध्यम से लागू किया गया. अब न होगा कोई व्यापारिक आदान-प्रदान अधिसूचना के अनुसार, पाकिस्तान [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">नई दिल्ली:</span> </strong>जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सभी प्रकार के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है. यह प्रतिबंध वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के माध्यम से लागू किया गया.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">अब न होगा कोई व्यापारिक आदान-प्रदान</span></strong><br />
अधिसूचना के अनुसार, पाकिस्तान में उत्पन्न या वहां से निर्यात की गई सभी वस्तुओं का आयात और पारगमन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा. इसमें किसी भी प्रकार की छूट केवल भारत सरकार की पूर्व स्वीकृति से ही दी जा सकेगी. मंत्रालय ने यह कदम ‘राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक नीति के हित’ में उठाया है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">विदेश व्यापार नीति में शामिल किया गया नया प्रावधान</span></strong><br />
2 मई को जारी अधिसूचना में विदेश व्यापार नीति 2023 में एक नया प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत पाकिस्तान से या उसके माध्यम से आने वाले सभी सामानों के व्यापार पर रोक लगाई गई है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">पहले ही गिर चुका है पाकिस्तान को भारत का निर्यात</span></strong><br />
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 के बीच भारत का पाकिस्तान को निर्यात 56.91 प्रतिशत घटकर 491 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया. इस दौरान पाकिस्तान से कोई भी आयात नहीं हुआ. वर्तमान वित्त वर्ष में भारत से पाकिस्तान को प्रमुख रूप से ड्रग फॉर्मूलेशन, चीनी, थोक दवाएं, रसायन और ऑटो कलपुर्जे निर्यात किए गए थे.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">कूटनीतिक मोर्चे पर भी भारत आक्रामक</span></strong><br />
सिर्फ व्यापार ही नहीं, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक स्तर पर भी कई कठोर कदम उठाए हैं. इनमें अटारी-वाघा सीमा से व्यापार बंद करना, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीज़ा सेवाओं को तत्काल निलंबित करना और सिंधु जल संधि को रोकने जैसे निर्णय शामिल हैं.साथ ही, भारत ने बहुपक्षीय एजेंसियों से पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता और ऋण की समीक्षा की मांग करने की योजना बनाई है. इनमें IMF, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक जैसे संस्थान शामिल हैं.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">FATF में फिर ‘ग्रे लिस्ट’ की तैयारी?</span></strong><br />
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत जल्द ही FATF से पाकिस्तान को पुनः &#8216;ग्रे लिस्ट&#8217; में डालने की मांग कर सकता है. यह कदम पाकिस्तान की आर्थिक गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय कर्ज तक पहुंच को सीमित करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">आतंकी हमले के बाद तेजी से बदला घटनाक्रम</span></strong><br />
बता दें कि 22 अप्रैल को आतंकियों ने पहलगाम की प्रसिद्ध बैसरन घाटी में पर्यटकों पर हमला किया था. इस हमले में 26 लोग मारे गए और कई घायल हुए. आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े टीआरएफ ने इस वारदात की जिम्मेदारी ली थी.<br />
इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ एक के बाद एक कई कठोर निर्णय लिए, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध अभूतपूर्व तनाव की स्थिति में पहुंच चुके हैं.</p>
<p>(IANS)</p>
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		<title>सिंहभूम चैम्बर ने चीन आयातित इस्पात पर एंटी डंपिंग शुल्क लगाने की मांग की</title>
		<link>https://uditvani.in/corporate/singhbhum-chamber-anti-dumping-duty-chinese-steel/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Jan 2025 15:30:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Corporate]]></category>
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		<category><![CDATA[PSinghbhum]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर: सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने आगामी केन्द्रीय बजट में स्टील के आयात पर एंटी डंपिंग शुल्क लगाने की मांग की है. चैंबर अध्यक्ष विजय आनंद मूनका ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को स्वदेशी इस्पात उद्योग के हित को ध्यान में रखते हुए चीन से अधिकाधिक मात्रा में आयातित इस्पात पर एंटी [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर: </span></strong>सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने आगामी केन्द्रीय बजट में स्टील के आयात पर एंटी डंपिंग शुल्क लगाने की मांग की है. चैंबर अध्यक्ष विजय आनंद मूनका ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को स्वदेशी इस्पात उद्योग के हित को ध्यान में रखते हुए चीन से अधिकाधिक मात्रा में आयातित इस्पात पर एंटी डंपिंग शुल्क लगाने को लेकर पत्र लिखा है. मूनका ने वित्त मंत्री से आग्रह किया है कि देश की घरेलू इस्पात कंपनियां वर्तमान में सस्ते चीनी इस्पात के कारण अपने अस्तित्व की गंभीर समस्या से जूझ रही हैं और उनके उत्पादों का विदेश के साथ ही अपने देश में भी बिक्री कम होती जा रही है.</p>
<p>अध्यक्ष ने कहा कि चीनी कंपनियों के पास बहुतायात में तैयार इस्पात स्टॉक में पड़ा हुआ है और उनकी घरेलू कमजोर अर्थव्वस्था के कारण चीनी कंपनियों को अपने देश में भी अच्छा बाजार नहीं मिल पा रहा है.  इसलिए वे अपने तैयार इस्पात को सस्ते दामों में विश्व के दूसरे देशों में बेच रहे हैं. भारत भी एक बड़ा बाजार है और चीनी कंपनियां इसे एक अवसर के रूप में देखकर अपने इस्पात को हमारे देश में सस्ते दामों में बेच कर अपना स्टॉक कम कर रही हैं. इससे हमारे देश की इस्पात कंपनियों के समक्ष संकट उत्पन्न हो गया है क्योंकि ये अपने उत्पादों को इतने सस्ते दामों पर उपलब्ध कराने में असमर्थ हैं.</p>
<p>चीनी इस्पात को देश की जरूरतमंद कंपनियां ज्यादा खरीदने में दिलचस्पी दिखा रही हैं  और भारत की कंपनियों को अपना उत्पादन घटाना पड़ रहा है.  यहां तक कि जो छोटे इस्पात उद्योग हैं वे बंद होने के कगार पर आ सकते हैं.  अध्यक्ष विजय आनंद मूनका ने कहा कि चैम्बर ने इन परिस्थितियों को देखते हुए वित्त मंत्री को आगामी बजट में चीनी इस्पातों पर एंटी डंपिंग शुल्क लगाने का आग्रह किया है ताकि देशी स्टील कंपनियों का अस्तित्व बचा सकें.</p>
<p>उपाध्यक्ष पुनीत कांवटिया एवं सचिव बिनोद शर्मा ने कहा कि इससे घरेलू इस्पात उद्योग बंद होने के कगार पर आ जाएंगे और बेरोजगारी भी में बढ़ेगी.  चैम्बर पदाधिकारियों में उपाध्यक्ष अनिल मोदी, अधिवक्ता राजीव अग्रवाल, अभिषेक अग्रवाल गोल्डी, सचिव भरत मकानी, अंशुल रिंगसिया, सुरेश शर्मा लिपु, कोषाध्यक्ष सीए अनिल रिंगसिया ने भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आग्रह किया है इन परिस्थितियों से बचने के लिए चीनी इस्पातों पर एंटी डंपिंग शुल्क लगाना अनिवार्य हो गया है.</p>
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		<title>Indian Coffee की विश्व में बढ़ी मांग, निर्यात में हो रही है लगातार बढ़ोतरी</title>
		<link>https://uditvani.in/kam-ki-baat/indian-coffee-demands-increasing/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jan 2025 07:16:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[काम की बात]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली: भारत में कॉफी की शुरुआत 1600 ईस्वी में हुई, जब संत बाबा बुदन ने कर्नाटक की पहाड़ियों में सात मोचा बीज लगाए. यह साधारण कदम भारत को दुनिया के शीर्ष कॉफी उत्पादकों में से एक बनाने का आधार बना. बाबा बुदन गिरि की पहाड़ियों से शुरू हुई यह यात्रा अब भारत [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नई दिल्ली:</span> </strong>भारत में कॉफी की शुरुआत 1600 ईस्वी में हुई, जब संत बाबा बुदन ने कर्नाटक की पहाड़ियों में सात मोचा बीज लगाए. यह साधारण कदम भारत को दुनिया के शीर्ष कॉफी उत्पादकों में से एक बनाने का आधार बना. बाबा बुदन गिरि की पहाड़ियों से शुरू हुई यह यात्रा अब भारत को वैश्विक स्तर पर कॉफी का सातवां सबसे बड़ा उत्पादक बना चुकी है. वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 1.29 बिलियन डॉलर का कॉफी निर्यात किया, जो 2020-21 के 719.42 मिलियन डॉलर के मुकाबले दोगुना है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">वैश्विक स्तर पर भारतीय कॉफी की मांग</span></strong><br />
भारतीय कॉफी अपने अनूठे स्वाद और गुणवत्ता के कारण दुनिया भर में लोकप्रिय है. जनवरी 2025 की पहली छमाही में भारत ने इटली, बेल्जियम और रूस सहित कई देशों में 9,300 टन से अधिक कॉफी निर्यात की. भारत में अरेबिका और रोबस्टा किस्मों की कॉफी का उत्पादन मुख्य रूप से किया जाता है, जिनका तीन-चौथाई हिस्सा बिना भुने बीन्स के रूप में निर्यात होता है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">घरेलू खपत में वृद्धि: शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में रुझान</span></strong><br />
कैफे संस्कृति के प्रसार और बढ़ती आय के कारण भारत में कॉफी की खपत में लगातार वृद्धि हो रही है. 2012 में 84,000 टन की खपत से यह आंकड़ा 2023 में 91,000 टन तक पहुंच गया. यह कॉफी के प्रति बढ़ते प्रेम और इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की प्रवृत्ति को दर्शाता है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">कर्नाटक: भारत की कॉफी राजधानी</span></strong><br />
भारत की कॉफी मुख्य रूप से पश्चिमी और पूर्वी घाटों में उगाई जाती है. कर्नाटक 2022-23 में 248,020 टन कॉफी उत्पादन के साथ सबसे आगे है. इसके बाद केरल और तमिलनाडु का स्थान है. छायादार बागानों में उगाई जाने वाली यह कॉफी न केवल भारतीय उद्योग को सहारा देती है, बल्कि जैव विविधता को संरक्षित करने में भी मदद करती है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">अराकू घाटी: आदिवासी समुदायों की सफलता की मिसाल</span></strong><br />
अराकू घाटी में कॉफी उत्पादन में 20% वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें लगभग 150,000 आदिवासी परिवार शामिल हैं. यह सफलता कॉफी बोर्ड और आईटीडीए के सहयोग से संभव हुई है. गिरिजन सहकारी निगम (जीसीसी) द्वारा ऋण सहायता ने इन समुदायों को आत्मनिर्भर बनने में मदद की है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">कॉफी उद्योग को बढ़ावा देने की पहल</span></strong><br />
भारतीय कॉफी बोर्ड ने एकीकृत कॉफी विकास परियोजना (आईसीडीपी) के माध्यम से खेती की विधियों में सुधार, नए क्षेत्रों में विस्तार और स्थिरता सुनिश्चित करने पर काम किया है. ये प्रयास न केवल घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी मजबूत बनाते हैं.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">भारत: वैश्विक कॉफी बाजार में एक मजबूत दावेदार</span></strong><br />
निर्यात प्रोत्साहन और आधुनिक पहल ने भारतीय कॉफी उद्योग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है. यह न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान देता है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को भी सशक्त बनाता है.</p>
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