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	<title>god Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>god Archives - Udit Vani</title>
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		<title>अयोध्या: राम मंदिर निर्माण कार्य हुआ पूरा, गोस्वामी तुलसीदास जी की मूर्ति का लोकार्पण, मंदिर के मुख्य शिखर पर कलश स्थापित, देखे Video</title>
		<link>https://uditvani.in/events/ram-mandir-murals-based-on-lord-rams-life/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Apr 2025 08:51:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Events]]></category>
		<category><![CDATA[god]]></category>
		<category><![CDATA[inaugration]]></category>
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		<category><![CDATA[The Symbol of Purity]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का काम 99 प्रतिशत पूरा हो चुका है.  मंदिर के शिखर पर कलश की स्थापना संपन्न हो चुकी है, और अब जल्द ही वहां ध्वज दंड भी स्थापित किया जाएगा जिससे मंदिर की भव्यता और धार्मिक ऊर्जा में और वृद्धि होगी. मंदिर की दीवारों पर भगवान राम के [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>उदित वाणी: </strong>अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का काम 99 प्रतिशत पूरा हो चुका है.  मंदिर के शिखर पर कलश की स्थापना संपन्न हो चुकी है, और अब जल्द ही वहां ध्वज दंड भी स्थापित किया जाएगा जिससे मंदिर की भव्यता और धार्मिक ऊर्जा में और वृद्धि होगी. मंदिर की दीवारों पर भगवान राम के जीवन प्रसंगों को दर्शाने वाले 88 आकर्षक म्यूरल्स (चित्रफलक) लगाए जा रहे हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव को और भी गहरा बनाएंगे. माना जा रहा है कि जून के पहले सप्ताह से श्रद्धालु मंदिर के परकोटे और मुख्य गर्भगृह के प्रथम तल पर प्रतिष्ठित राम दरबार के दिव्य दर्शन कर सकेंगे.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रथम तल, द्वितीय तल और भूतल सब पूर्ण हो चुका है. प्रथम तल में रामदरबार मई माह में विराजमान हो जाएगा. उसके बारे में न्यास कार्यक्रम तय करेगा. 2000 क्यूबिक पत्थर मंदिर के अगल-बगल लगना है. मुख्य मंदिर में कोई पत्थर नहीं लगना है.</p>
<p><strong> </strong></p>
<p><strong>दिसंबर में पूरा हो जाएगा मंदिर निर्माण कार्य<br />
</strong></p>
<p>श्री मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि हमारा ध्यान मंदिर के साथ परकोटा में गति देने का है. कुछ नए निर्माण कार्य हैं जिन्हें पूर्ण करना है. उत्तरी तरफ अस्थाई कार्यालय के हिस्से को तोड़कर योजना के अनुसार हॉर्टिकल्चर का काम किया जाएगा. नॉर्दर्न गेट भी लगभग पूर्ण हो गया है. 15 मई तक वह पूरा हो जाएगा. दिसंबर 2025 में मंदिर निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>सातों मंदिर पूर्ण, मूर्तियां पहुंची</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>समिति के अध्यक्ष ने कहा कि जो सामाजिक समरसता मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने सभी के समक्ष प्रस्तुत की थी, उसी के अनुसार सातों मंदिर, महर्षि वाल्मीकि से लेकर निषाद राज, शबरी, अहिल्या, अगस्त मुनि, वशिष्ठ जी, इन सब के मंदिर पूर्ण हो गए हैं और मूर्तियां पहुंच गई हैं. सातों मंदिर के बीच में एक जलताल पुष्कर्णी का निर्माण कार्य पूरा हो गया है, जो अपने आप में अनोखा था. जब देखा गया तो उसमें बंदर समूह स्नान कर रहे थे. शिखर का निर्माण भी 99 फीसदी पूरा हो गया है. शिखर के ऊपर कलश रखने का कार्य भी हो गया है.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>गोस्वामी तुलसीदास जी की मूर्ति का लोकार्पण</strong></p>
<p>गोस्वामी तुलसीदास की मूर्ति का अनावरण आज लोकार्पण कर दिया गया. अयोध्या राम नगरी आने वाले श्रद्धालु अब संत तुलसीदास जी का भी दर्शन कर सकेंगे.</p>
<p>मिश्रा ने बताया कि परकोटा में जो मंदिर है, उसमें कलश रखना है, उसकी भी पूजा हो गई है. अब से 30 अप्रैल के बीच में वहां भी कलश रख दिया जाएगा. उन मंदिरों में जिन देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी जानी हैं, वे भी रख दी जाएंगी. कल हम सबने मिलकर संग्रहालय में आगे का कार्य बढ़ाने के लिए चर्चा की है. उसमें बहुत सा निर्माण और विस्तार का काम किया जाना था. अगले तीन माह में पांच गैलरी का कार्य पूर्ण कर पाए तो श्रद्धालुओं को वहां जाने की एक सुविधा मिल सकेगी.</p>
<div style="width: 480px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-66980-1" width="480" height="848" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="https://uditvani.in/wp-content/uploads/2025/04/auodhaya.mp4?_=1" /><a href="https://uditvani.in/wp-content/uploads/2025/04/auodhaya.mp4">https://uditvani.in/wp-content/uploads/2025/04/auodhaya.mp4</a></video></div>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="size-medium wp-image-66982 aligncenter" src="https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/04/1200-675-23964251-thumbnail-16x9-news-12.jpg?resize=300%2C165&#038;ssl=1" alt="" width="300" height="165" srcset="https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/04/1200-675-23964251-thumbnail-16x9-news-12.jpg?resize=300%2C165&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/04/1200-675-23964251-thumbnail-16x9-news-12.jpg?resize=1024%2C563&amp;ssl=1 1024w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/04/1200-675-23964251-thumbnail-16x9-news-12.jpg?resize=768%2C423&amp;ssl=1 768w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/04/1200-675-23964251-thumbnail-16x9-news-12.jpg?resize=150%2C83&amp;ssl=1 150w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/04/1200-675-23964251-thumbnail-16x9-news-12.jpg?resize=450%2C248&amp;ssl=1 450w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/04/1200-675-23964251-thumbnail-16x9-news-12.jpg?w=1067&amp;ssl=1 1067w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
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		<title>Vasant Panchami: पीले रंग में रंगा बाजार, बसंत पंचमी की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार &#8211; जानिए कब है पूजा का शुभ मुहूर्त?</title>
		<link>https://uditvani.in/events/vasant-panchami-2025/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jan 2025 09:14:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Events]]></category>
		<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर: वसंत पंचमी के अवसर पर विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के लिए शहर के कलाकार मूर्ति निर्माण को अंतिम रूप देने जुट गए हैं. शैक्षणिक संस्थानों सहित कई स्थानों पर उनकी भव्य आराधना की जाएगी. विद्यार्थियों में इस पर्व को लेकर विशेष उत्सुकता देखी जा रही है. सुंदर और आकर्षक [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर:</span> </strong>वसंत पंचमी के अवसर पर विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के लिए शहर के कलाकार मूर्ति निर्माण को अंतिम रूप देने जुट गए हैं. शैक्षणिक संस्थानों सहित कई स्थानों पर उनकी भव्य आराधना की जाएगी. विद्यार्थियों में इस पर्व को लेकर विशेष उत्सुकता देखी जा रही है. सुंदर और आकर्षक मूर्तियों के लिए युवा एवं छात्र कारीगरों के पास पहुंच रहे हैं. कई श्रद्धालु अपनी पसंद के अनुसार मूर्तियां बनवाने के लिए सुझाव भी दे रहे हैं और अग्रिम बुकिंग करवा रहे हैं.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">मूर्तिकारों की बढ़ी व्यस्तता</span></strong><br />
स्थानीय मूर्तिकारों का कहना है कि कई श्रद्धालु पहले ही बुकिंग करा चुके हैं. प्रतिमा गढ़ रहे मूर्तिकारों का कहना है कि बढ़ती महंगाई का असर मूर्ति निर्माण पर पड़ा है. लोग किफायती मूर्तियां खरीदना चाहते हैं. 1500 रुपये से लेकर 5500 रुपये तक की मूर्तियां उपलब्ध हैं. प्रतिमा निर्माण चार चरणों में पूरा किया जाता है—पहले चरण में लकड़ी और पुआल का ढांचा तैयार होता है, दूसरे में मिट्टी से आकार और भाव-भंगिमा उकेरी जाती है, तीसरे में रंग-रोगन किया जाता है, और चौथे में साज-सज्जा की जाती है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">ज्ञान की देवी को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ अवसर</span></strong><br />
माघ शुक्ल पंचमी को मनाई जाने वाली वसंत पंचमी को श्रीपंचमी भी कहा जाता है. इस दिन को विद्या और कला के नए आरंभ के लिए शुभ माना जाता है. ऐसा विश्वास है कि इसी दिन वेदों की देवी प्रकट हुई थीं. इसी दिन शिशुओं का अक्षरारंभ भी किया जाएगा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">बाजार में पूजन सामग्री की धूम</span></strong><br />
सरस्वती पूजा में अब कुछ ही दिन शेष हैं, जिससे बाजारों में रौनक बढ़ गई है. मां शारदे की विभिन्न मूर्तियां, पूजन सामग्री, रंगीन चुनरी, मोती, माला और मुकुट बाजार में उपलब्ध हैं. श्रद्धालु भीड़ से बचने के लिए अभी से खरीदारी कर रहे हैं. विशेष रूप से कलम-दवात की मांग अधिक है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">पूजा के शुभ मुहूर्त</span></strong><br />
<strong><span style="color: #800080;">रेवती नक्षत्र:</span></strong> 2 फरवरी, रात 2:14 बजे<br />
<strong><span style="color: #800080;">लाभ-अमृत मुहूर्त:</span> </strong>सुबह 6:36 से 9:19 बजे तक<br />
<strong><span style="color: #800080;">शुभ योग:</span> </strong>सुबह 10:41 से दोपहर 12:03 बजे तक<br />
<strong><span style="color: #800080;">अभिजित मुहूर्त:</span> </strong>दोपहर 11:41 से 12:25 बजे तक<br />
<strong><span style="color: #800080;">चर-लाभ मुहूर्त:</span> </strong>अपराह्न 2:46 से शाम 5:30 बजे तक</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">पीले वस्त्रों की बढ़ी मांग</span></strong><br />
वसंत पंचमी पर महिलाएं विशेष रूप से पीली साड़ी व सूट पहनना पसंद करती हैं, जिससे कपड़ा बाजार में इनकी मांग बढ़ गई है. पीला रंग मां सरस्वती का प्रिय रंग माना जाता है, जो सकारात्मकता और ऊर्जा का प्रतीक है. इसी कारण इस दिन पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है.</p>
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		<item>
		<title>Mahakumbh में बॉलीवुड सिंगर Guru Randhawa ने लगायी डुबकी- देखें वीडियो</title>
		<link>https://uditvani.in/entertainment/guru-randhawa-at-mahakumbh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Jan 2025 07:32:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[entertainment]]></category>
		<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
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		<category><![CDATA[mahakumbh 2025]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, प्रयागराज: प्रयागराज के महाकुंभ मेले में मशहूर सिंगर गुरु रंधावा ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई. इस पवित्र यात्रा का वीडियो उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर साझा किया है. वीडियो के साथ कैप्शन में उन्होंने लिखा, &#8220;प्रयागराज में मां गंगा में पवित्र डुबकी लगाने का सौभाग्य मिला, जहां आस्था बहती है और आध्यात्मिकता पनपती [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, प्रयागराज:</span> </strong>प्रयागराज के महाकुंभ मेले में मशहूर सिंगर गुरु रंधावा ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई. इस पवित्र यात्रा का वीडियो उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर साझा किया है. वीडियो के साथ कैप्शन में उन्होंने लिखा, &#8220;प्रयागराज में मां गंगा में पवित्र डुबकी लगाने का सौभाग्य मिला, जहां आस्था बहती है और आध्यात्मिकता पनपती है. भगवान के आशीर्वाद से अपनी नई यात्रा शुरू कर रहा हूं. हर हर गंगे.&#8221;</p>
<blockquote class="instagram-media" style="background: #FFF; border: 0; border-radius: 3px; box-shadow: 0 0 1px 0 rgba(0,0,0,0.5),0 1px 10px 0 rgba(0,0,0,0.15); margin: 1px; max-width: 540px; min-width: 326px; padding: 0; width: calc(100% - 2px);" data-instgrm-captioned="" data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/reel/DFNX1zTAcEI/?utm_source=ig_embed&amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14">
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<p>&nbsp;</p>
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<p>&nbsp;</p>
<p style="color: #c9c8cd; font-family: Arial,sans-serif; font-size: 14px; line-height: 17px; margin-bottom: 0; margin-top: 8px; overflow: hidden; padding: 8px 0 7px; text-align: center; text-overflow: ellipsis; white-space: nowrap;"><a style="color: #c9c8cd; font-family: Arial,sans-serif; font-size: 14px; font-style: normal; font-weight: normal; line-height: 17px; text-decoration: none;" href="https://www.instagram.com/reel/DFNX1zTAcEI/?utm_source=ig_embed&amp;utm_campaign=loading" target="_blank" rel="noopener">A post shared by Guru Randhawa (@gururandhawa)</a></p>
</div>
</blockquote>
<p><script async src="//www.instagram.com/embed.js"></script></p>
<p><strong><span style="color: #800080;">फैंस की प्रतिक्रियाएं: नई शुरुआत की शुभकामनाएं</span></strong><br />
गुरु रंधावा के इस वीडियो पर फैंस अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, &#8220;मां गंगा के आशीर्वाद के साथ नई शुरुआत.&#8221; दूसरे ने कहा, &#8220;हर हर महादेव.&#8221; वहीं, एक यूजर ने लिखा, &#8220;राधा रानी करे कि आप जल्दी अपने पुराने अंदाज में वापसी करें.&#8221; फैंस उनकी नई शुरुआत को लेकर उत्साहित हैं और शुभकामनाएं दे रहे हैं.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">संगीत में गुरु रंधावा का सफर</span></strong><br />
गुरु रंधावा, जिनका असली नाम गुरशरणजोत सिंह रंधावा है, ने यूट्यूब पर अपना पहला म्यूजिक वीडियो ‘सेम गर्ल’ रिलीज किया था, जो बेहद सफल रहा. उन्होंने बॉलीवुड में फिल्म ‘हिंदी मीडियम’ के गाने ‘सूट सूट’ से डेब्यू किया और इसके बाद से कई हिट गाने दिए हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने पिटबुल के साथ ‘स्लोली स्लोली’ गाने में काम किया है, जो काफी चर्चित रहा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">महाकुंभ से नई प्रेरणा</span></strong><br />
त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने के साथ, गुरु रंधावा ने अपनी नई आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत की है. उनका यह कदम उनकी गहरी आध्यात्मिकता और धार्मिक आस्था को दर्शाता है. फैंस को उम्मीद है कि वे अपने संगीत में भी इस अनुभव की झलक लाएंगे.</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Mahakumbh 2025: मौनी अमावस्या स्नान पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए मेला प्रशासन की पुख्ता तैयारियां</title>
		<link>https://uditvani.in/events/mahakumbh-2025-mauni-amavasya-snan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Jan 2025 11:17:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, प्रयागराज: महाकुंभ के सबसे प्रमुख पर्व मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं के सुगम यातायात और सुरक्षित स्नान को लेकर मेला प्रशासन ने कमर कस ली है. संगम नोज और अन्य घाटों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. मेला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने के [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, प्रयागराज:</span> </strong>महाकुंभ के सबसे प्रमुख पर्व मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं के सुगम यातायात और सुरक्षित स्नान को लेकर मेला प्रशासन ने कमर कस ली है. संगम नोज और अन्य घाटों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. मेला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए सेक्टर और जोन स्तर पर योजनाएं बनाई हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">सेक्टर और जोन में नियंत्रित मूवमेंट</span></strong><br />
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि श्रद्धालु जिस सेक्टर या जोन में स्नान के लिए पहुंचें, वहीं से उनकी वापसी सुनिश्चित की जाए. 27 से 29 जनवरी के बीच संगम नोज और अन्य महत्वपूर्ण जोन में भीड़ को कम से कम रखने के निर्देश दिए गए हैं. 12 किमी लंबे घाटों का निर्माण किया गया है, ताकि श्रद्धालु सुगमता से स्नान कर सकें. घाटों पर भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने के लिए &#8216;इवैक्युएशन गैंग&#8217; की तैनाती की जाएगी.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">सुरक्षा और संसाधन व्यवस्था</span></strong><br />
मेला प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं पर जोर दिया है. घाटों पर हार्ड बैरिकेटिंग, रस्सों का प्रबंध, लाउड हेलर, सीटी और उड़न दस्तों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी. वॉच टावर और जल पुलिस को भी सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया गया है. साथ ही, होल्डिंग एरिया और अस्थाई पार्किंग के लिए संस्थानों को तैयार रखा जाएगा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">स्वच्छता और सुविधाएं</span></strong><br />
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाटों पर अवस्थापना सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं. इसमें कासा, पुआल, बोरे, जल बैरिकेडिंग, शौचालय, चेंजिंग रूम, लाइटिंग और साइनेज की व्यवस्था की जा रही है. सफाई और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">श्रद्धालुओं को प्रोत्साहित करने के निर्देश</span></strong><br />
श्रद्धालुओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि जिस घाट पर वे स्नान करें, वहीं से वापसी करें. संगम नोज पर भीड़ को नियंत्रित रखने और अन्य घाटों का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.</p>
<p>मौनी अमावस्या के इस अमृत स्नान पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति संभावित है. ऐसे में मेला प्रशासन की ये तैयारियां न केवल भीड़ नियंत्रण बल्कि सुरक्षित और सुखद अनुभव सुनिश्चित करने में सहायक होंगी.</p>
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		<title>MAHAKUMBH 2025: कैसे तय होता हैं कुंभ मेले का स्थान, जानिए खगोलीय रहस्य</title>
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		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Jan 2025 06:24:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर: हिंदू संस्कृति और परंपराओं में कुंभ मेले का अत्यधिक महत्व है. यह न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि खगोलीय घटनाओं का भी गहरा प्रभाव इस पर पड़ता है. महाकुंभ का आयोजन भारत के चार पवित्र स्थानों—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में होता है. इनमें से प्रयागराज में 2025 में महाकुंभ आयोजित [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>उदित वाणी, जमशेदपुर:</strong> हिंदू संस्कृति और परंपराओं में कुंभ मेले का अत्यधिक महत्व है. यह न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि खगोलीय घटनाओं का भी गहरा प्रभाव इस पर पड़ता है. महाकुंभ का आयोजन भारत के चार पवित्र स्थानों—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में होता है. इनमें से प्रयागराज में 2025 में महाकुंभ आयोजित होने जा रहा है, जो 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी 2025 तक चलेगा. यह मेला 45 दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें लाखों श्रद्धालु आकर आस्था की डुबकी लगाएंगे.</p>
<p><strong>महाकुंभ 2025 का समय और स्थान</strong><br />
महाकुंभ 2025, 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा से प्रारंभ होगा और 26 फरवरी, महाशिवरात्रि के दिन इसका समापन होगा. प्रयागराज में पहले भी महाकुंभ (2013) और अर्धकुंभ (2019) आयोजित हो चुके हैं. इस बार महाकुंभ का आयोजन विशेष रूप से अहम है क्योंकि यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के जागरण का अवसर भी प्रदान करता है.</p>
<p><strong>महाकुंभ के समय और स्थान का निर्धारण कैसे होता है?</strong><br />
महाकुंभ का आयोजन चार पवित्र स्थानों पर होता है, और इसका निर्धारण ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होता है. ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार, गुरु (बृहस्पति) और सूर्य की राशियाँ तय करती हैं कि महाकुंभ कहां आयोजित होगा.</p>
<p><strong>• प्रयागराज महाकुंभ</strong><br />
गुरु जब वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में होते हैं, तब महाकुंभ प्रयागराज में आयोजित होता है. 2025 में यह स्थिति होने के कारण महाकुंभ का आयोजन प्रयागराज में होगा.</p>
<p><strong>• नासिक महाकुंभ</strong><br />
जब गुरु और सूर्य सिंह राशि में होते हैं, तब महाकुंभ नासिक में आयोजित होता है. अगला नासिक महाकुंभ 2027 में होगा.</p>
<p><strong>• हरिद्वार महाकुंभ</strong><br />
गुरु कुंभ राशि में और सूर्य मेष राशि में होते हैं, तो महाकुंभ हरिद्वार में लगता है. अगला हरिद्वार महाकुंभ 2033 में होगा.</p>
<p><strong>• उज्जैन महाकुंभ</strong><br />
जब सूर्य मेष राशि में और गुरु सिंह राशि में होते हैं, तो महाकुंभ उज्जैन में आयोजित होता है. अगला उज्जैन महाकुंभ 2028 में होगा.</p>
<p><strong>महाकुंभ का आयोजन 12 वर्षों के अंतराल पर क्यों होता है?</strong><br />
महाकुंभ के आयोजन में 12 वर्षों का अंतराल होता है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, गुरु बृहस्पति को अपनी सभी राशियों का चक्र पूरा करने में 12 वर्ष लगते हैं. इसके अतिरिक्त, पौराणिक कथाओं में यह कहा गया है कि समुद्र मंथन से अमृत कलश प्राप्त हुआ था, और इस कलश को लेकर देवताओं और दानवों के बीच 12 दिवसीय युद्ध हुआ था, जो पृथ्वी पर 12 वर्षों के बराबर माना जाता है. इस कारण महाकुंभ का आयोजन हर 12 वर्ष में एक बार होता है.</p>
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		<title>Mahakumbh 2025: एप्पल की मालकिन के महाकुंभ में कल्पवास की है चर्चा, जानिए आखिर क्या है कल्पवास</title>
		<link>https://uditvani.in/events/what-is-kalpvas/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Jan 2025 07:19:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, प्रयागराज: दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन, महाकुंभ का आगाज 13 जनवरी 2025 से प्रयागराज में होगा और यह आयोजन 26 फरवरी तक चलेगा. इस बार महाकुंभ में देश-विदेश से करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है. इन्हीं श्रद्धालुओं में एप्पल के सह-संस्थापक दिवंगत स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ol>
<li><strong>उदित वाणी, प्रयागराज: </strong>दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन, महाकुंभ का आगाज 13 जनवरी 2025 से प्रयागराज में होगा और यह आयोजन 26 फरवरी तक चलेगा. इस बार महाकुंभ में देश-विदेश से करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है. इन्हीं श्रद्धालुओं में एप्पल के सह-संस्थापक दिवंगत स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स का नाम विशेष रूप से चर्चा में है. लॉरेन साध्वी का रूप धारण कर महाकुंभ के दौरान दो सप्ताह तक कल्पवास करेंगी.</li>
</ol>
<p><strong>साध्वी बनेंगी लॉरेन पॉवेल जॉब्स</strong></p>
<p>लॉरेन पॉवेल जॉब्स का ठहराव निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद के शिविर में होगा. यहां से वह महाकुंभ के विभिन्न अनुष्ठानों में भाग लेंगी और संगम में पवित्र स्नान करेंगी. उनका प्रवास 13 जनवरी से 29 जनवरी तक तय किया गया है.</p>
<p><strong>कल्पवास: सनातन परंपरा का विशेष तप</strong></p>
<p>कल्पवास सनातन धर्म की एक प्राचीन परंपरा है, जिसका उल्लेख रामायण, महाभारत और अनेक धार्मिक ग्रंथों में मिलता है. मान्यता है कि कल्पवास करने से व्यक्ति अपनी इच्छाओं की पूर्ति कर सकता है और जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति पा सकता है.</p>
<p><strong>कल्पवास के नियम और कठिन तप</strong></p>
<p>कल्पवास के नियम अत्यंत कठोर हैं और इनका पालन करना अनुशासन की पराकाष्ठा है:</p>
<ol>
<li>सत्य वचन का पालन.</li>
<li>हिंसा का परित्याग.</li>
<li>इंद्रियों पर नियंत्रण.</li>
<li>सभी जीवों के प्रति दया भाव.</li>
<li>ब्रह्मचर्य का निर्वाह.</li>
<li>बुरी आदतों का त्याग.</li>
<li>ब्रह्म मुहूर्त में जागरण.</li>
<li>दिन में तीन बार पवित्र नदी में स्नान.</li>
<li>दान देना और पितरों का पिंडदान.</li>
<li>एक समय भोजन और जमीन पर शयन.</li>
<li>साधु के वस्त्र धारण करना.</li>
<li>निंदा का परित्याग और तप करना.</li>
</ol>
<p><strong>कल्पवास की अवधि और मान्यता</strong></p>
<p>कल्पवास की अवधि एक रात से लेकर संपूर्ण जीवन तक हो सकती है. इसकी न्यूनतम अवधि एक रात है और अधिकतम पूरी जीवन यात्रा तक बढ़ाई जा सकती है. मान्यता है कि कल्पवास का फल 100 वर्षों तक तप किए गए अन्न-त्याग के बराबर होता है.</p>
<p><strong>कौन हैं लॉरेन पॉवेल जॉब्स</strong></p>
<p>लॉरेन पॉवेल जॉब्स का जन्म 6 नवंबर 1963 को वेस्ट मिलफोर्ड, न्यू जर्सी में हुआ था. मात्र तीन वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने पिता को एक विमान दुर्घटना में खो दिया. उनके पिता पायलट थे. लॉरेन ने पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में डबल डिग्री हासिल की. 1985 में स्नातक होने के बाद, उन्होंने वॉल स्ट्रीट में गोल्डमैन सैक्स के लिए ट्रेडिंग स्ट्रेटेजिस्ट के रूप में तीन साल काम किया और मेरिल लिंच एसेट मैनेजमेंट में भी सेवाएं दीं. 1991 में उन्होंने स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए की डिग्री प्राप्त की, जहां उनकी मुलाकात एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स से हुई.</p>
<p><strong>स्टीव जॉब्स से शादी और परिवार</strong></p>
<p>लॉरेन और स्टीव जॉब्स की पहली मुलाकात स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुई थी. कुछ मुलाकातों के बाद दोनों करीब आए और दो साल डेट करने के बाद 18 मार्च 1991 को शादी कर ली. उनके तीन बच्चे हैं—रीड (जन्म 1991), एरिन (जन्म 1995), और ईव (जन्म 1998).</p>
<p><strong>दुनिया की सबसे अमीर महिलाओं में शामिल</strong></p>
<p>स्टीव जॉब्स की मृत्यु के बाद, लॉरेन पॉवेल जॉब्स को उनकी संपत्ति विरासत में मिली, जिसमें एप्पल के 5.5 मिलियन शेयर और वॉल्ट डिज़नी कंपनी में 7.3 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है. वह अमेरिका की तीसरी सबसे अमीर महिला और दुनिया की पांचवीं सबसे अमीर महिला बन गईं. जनवरी 2025 में उनकी कुल संपत्ति 15.5 बिलियन डॉलर आंकी गई है (फोर्ब्स के अनुसार).</p>
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		<title>MAHAKUMBH 2025: आखिर क्यों 12 वर्षों में आयोजित होता है अद्वितीय पर्व कुंभ</title>
		<link>https://uditvani.in/events/why-mahakumbh-organised-in-12-yrs/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Jan 2025 07:08:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर: कुंभ मेला भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण और अद्वितीय धार्मिक आयोजन है. यह आयोजन हर 12 वर्षों में विशेष रूप से चार पवित्र स्थानों—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है. इसे केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा भी माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>उदित वाणी, जमशेदपुर:</strong> कुंभ मेला भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण और अद्वितीय धार्मिक आयोजन है. यह आयोजन हर 12 वर्षों में विशेष रूप से चार पवित्र स्थानों—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है. इसे केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा भी माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मेले में पवित्र नदियों में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आयोजन हर 12 वर्ष में ही क्यों होता है?</p>
<p><strong>कुंभ मेला हर 12 वर्ष में क्यों होता है?</strong><br />
कुंभ मेले का आयोजन हर 12 वर्ष में होने के पीछे गहरी पौराणिक मान्यताएं और खगोलीय गणनाएं हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और असुरों के बीच अमृत कलश को लेकर 12 दिवसीय संघर्ष हुआ था. इन 12 दिव्य दिनों को पृथ्वी पर 12 वर्षों के बराबर माना गया. इस दौरान अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी के चार पवित्र स्थानों—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक पर गिरीं, जिनके कारण इन स्थानों पर कुंभ मेला आयोजित होता है.<br />
इसके अलावा, ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो बृहस्पति ग्रह हर 12 वर्षों में 12 राशियों का चक्र पूरा करता है. इस समय बृहस्पति की विशेष स्थिति में कुंभ मेला का आयोजन होता है, जब वह किसी खास राशि में स्थित होते हैं.</p>
<p><strong>शाही स्नान का महत्व</strong><br />
कुंभ मेला में शाही स्नान का विशेष महत्व है. माना जाता है कि इस दौरान पवित्र नदियों का जल अमृत के समान पवित्र हो जाता है. यही कारण है कि देश-विदेश से श्रद्धालु इन नदियों में स्नान करने के लिए आते हैं. प्रयागराज का संगम स्थल, जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन होता है, इसे अत्यधिक धार्मिक महत्व प्राप्त है. श्रद्धालु यहां स्नान कर अपने पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.</p>
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		<title>MAHAKUMBH 2025: कुंभ मेला के दौरान नदियों का जल क्यों हो जाता है अमृत के समान?</title>
		<link>https://uditvani.in/events/rivers-gets-pure-during-kumbh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Jan 2025 07:05:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Events]]></category>
		<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर: कुंभ मेला भारत के चार प्रमुख पवित्र स्थानों – प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है. 13 जनवरी 2025 से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेला शुरू होने जा रहा है, जो 26 फरवरी 2025 तक चलेगा. इस दौरान साधु-संतों और लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ इन पवित्र स्थलों पर [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>उदित वाणी, जमशेदपुर:</strong> कुंभ मेला भारत के चार प्रमुख पवित्र स्थानों – प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है. 13 जनवरी 2025 से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेला शुरू होने जा रहा है, जो 26 फरवरी 2025 तक चलेगा. इस दौरान साधु-संतों और लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ इन पवित्र स्थलों पर आकर त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाएगी और आत्मा की शुद्धि की प्राप्ति करेगी.</p>
<p><strong>कुंभ मेला की शुरुआत और धार्मिक मान्यता</strong><br />
कुंभ मेला का आयोजन सदियों से होता आ रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत कैसे हुई? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुंभ मेला समुद्र मंथन से जुड़े अमृत कलश से उत्पन्न हुआ है. आइये, जानते हैं कैसे समुद्र मंथन से निकला अमृत कलश कुंभ के आयोजन का कारण बना.</p>
<p><strong>समुद्र मंथन और अमृत कलश की कथा</strong><br />
कुंभ मेला की शुरुआत समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ी है. कथा के अनुसार, जब देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तो इससे 14 बहुमूल्य रत्नों की प्राप्ति हुई, जिनमें अमृत कलश भी शामिल था. इस अमृत कलश के लिए ही समुद्र मंथन किया गया था. अंत में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर बाहर निकले.</p>
<p><strong>दानवों से बचाने के लिए अमृत कलश का पलायन</strong><br />
अमृत कलश के निकलने के बाद देवताओं और दानवों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया. इस संघर्ष से बचाने के लिए इंद्र के पुत्र जयंत अमृत कलश लेकर भागने लगे. दानवों ने उनका पीछा किया और जब जयंत अमृत कलश लेकर दौड़ रहे थे, तब कलश से अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी के चार स्थानों पर गिर गईं. ये चार स्थान थे – प्रयागराज, उज्जैन, हरिद्वार और नासिक. तभी से इन स्थानों को धरती के सबसे पवित्र स्थान माना जाता है.</p>
<p><strong>धार्मिक मान्यता और कुंभ मेला</strong><br />
मान्यता है कि कुंभ मेला आयोजित होने के दौरान इन चार स्थानों की नदियाँ अमृत के समान हो जाती हैं. इसी कारण लाखों लोग इन स्थानों पर आकर पवित्र स्नान करते हैं और अपने पापों से मुक्ति प्राप्त करने का विश्वास रखते हैं.</p>
<p>कुंभ मेला धार्मिक आस्था और मान्यता का एक प्रतीक है, जो सदियों से भारत में मनाया जा रहा है. इसकी शुरुआत समुद्र मंथन से जुड़ी एक पौराणिक कथा से हुई, जो आज भी लोगों की श्रद्धा और आस्था को जीवित रखे हुए है.</p>
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		<title>Jamshedpur: श्याम बाबा का मासिक एकादशी जागरण 10 जनवरी को, भक्ति में लहराएंगे भजन</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/jagran-on-10-jan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jan 2025 12:22:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
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		<category><![CDATA[goddess]]></category>
		<category><![CDATA[Mango]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर: मानगो डिमना रोड स्थित श्री राजस्थान भवन में नव वर्ष के उपलक्ष्य में आगामी 10 जनवरी, शुक्रवार की रात को श्याम बाबा का मासिक एकादशी जागरण (संकीर्तन) आयोजित किया जाएगा. इस भव्य आयोजन में भक्तों द्वारा बाबा श्याम का दरबार सजाया जाएगा. यह धार्मिक अनुष्ठान श्याम प्रेमियों द्वारा आयोजित किया जा रहा [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>उदित वाणी, जमशेदपुर: </strong>मानगो डिमना रोड स्थित श्री राजस्थान भवन में नव वर्ष के उपलक्ष्य में आगामी 10 जनवरी, शुक्रवार की रात को श्याम बाबा का मासिक एकादशी जागरण (संकीर्तन) आयोजित किया जाएगा. इस भव्य आयोजन में भक्तों द्वारा बाबा श्याम का दरबार सजाया जाएगा. यह धार्मिक अनुष्ठान श्याम प्रेमियों द्वारा आयोजित किया जा रहा है, और इसकी तैयारियां जोरों-शोरों से चल रही हैं.</p>
<p><strong>धार्मिक अनुष्ठान की विशेषताएँ</strong><br />
धार्मिक संस्था श्री श्याम मित्र मंडल मानगो के सदस्य शंकर लाल अग्रवाल ने मंगलवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस कार्यक्रम की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि शुक्रवार की संध्या 08:30 बजे से बाबा श्याम की पूजा अर्चना का आयोजन होगा. इसके बाद, ज्योत प्रज्जवलन और श्री गणेश वंदना से भजनों की शुरुआत की जाएगी, जो प्रभु की इच्छा से देर रात तक चलेगी. इस दौरान स्थानीय भजन गायकों द्वारा श्याम बाबा के चरणों में भजन प्रस्तुत किए जाएंगे.</p>
<p><strong>भजन गायकों की सूची</strong><br />
इस कार्यक्रम में भजन गायकों के रूप में रोहित गुलाटी, पंकज अग्रवाल, नेहा कौर और लाला जोशी शामिल होंगे. ये गायकों की टोली बाबा श्याम के चरणों में भजनों की अमृत वर्षा करेगी और भक्तों को आनंदित करेगी. आयोजकों ने सभी श्याम प्रेमियों से बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने की अपील की है.</p>
<p><strong>आमंत्रण और समापन</strong><br />
यह कार्यक्रम न केवल श्याम प्रेमियों के लिए एक भव्य धार्मिक अवसर होगा, बल्कि इसे आयोजन में शामिल होने वाले सभी के लिए एक यादगार अनुभव भी होगा. श्याम भक्तों से निवेदन किया गया है कि वे इस आयोजन में अपनी उपस्थिति से इसे और भी भव्य बनाएं.</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Jamshedpur: श्री श्याम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव पर होगा पांच दिवसीय भव्य आयोजन, जानें पूरा कार्यक्रम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jan 2025 08:19:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[bistupur]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर:  15 जनवरी से 19 जनवरी तक पांच दिवसीय श्री श्याम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन श्री सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर, बिष्टुपुर में किया जा रहा है. यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र अवसर है. कार्यक्रमों का विवरण 15 जनवरी, बुधवार समय: संध्या 4.11 बजे से कार्यक्रम: श्री [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>उदित वाणी, जमशेदपुर:</strong>  15 जनवरी से 19 जनवरी तक पांच दिवसीय श्री श्याम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन श्री सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर, बिष्टुपुर में किया जा रहा है. यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र अवसर है.</p>
<p><strong>कार्यक्रमों का विवरण</strong></p>
<ol>
<li><strong>15 </strong><strong>जनवरी, </strong><strong>बुधवार</strong><br />
समय: संध्या 4.11 बजे से<br />
कार्यक्रम: श्री राधा रानी मंडली, जमशेदपुर द्वारा संगीतमय भजन संध्या</li>
<li><strong>16 </strong><strong>जनवरी, </strong><strong>गुरुवार</strong><br />
समय: संध्या 4.11 बजे से<br />
कार्यक्रम: श्री पंकज जी जोशी, कोलकाता द्वारा श्री रानीसती दादी का मंगलपाठ</li>
<li><strong>17 </strong><strong>जनवरी, </strong><strong>शुक्रवार</strong><br />
समय: संध्या 4.11 बजे से<br />
कार्यक्रम: श्री अमित शर्मा और श्रीमती शीतल चांडक, चक्रधरपुर द्वारा संगीतमय सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ</li>
<li><strong>18 </strong><strong>जनवरी, </strong><strong>शनिवार</strong><br />
समय: संध्या 4.11 बजे से<br />
कार्यक्रम: श्री श्याम प्रभु के शीश का नगर भ्रमण और गाजे-बाजे के साथ भव्य निशान पद यात्रा, जो मंदिर से निकल कर बिष्टुपुर मैन रोड का भ्रमण करेगी और पुनः मंदिर लौटेगी</li>
<li><strong>19 </strong><strong>जनवरी, </strong><strong>रविवार</strong><br />
समय:</p>
<ul>
<li>सुबह 11.25 बजे: श्री श्याम प्रभु का प्रथम श्रृंगार और आरती के दर्शन</li>
<li>संध्या 7.31 बजे: भव्य कीर्तन और प्रसाद वितरण</li>
</ul>
</li>
</ol>
<p><strong>सादर निमंत्रण</strong><br />
इन सभी कार्यक्रमों में आप सभी की गरिमामय उपस्थिति सादर प्रार्थनीय है. यह महोत्सव हम सभी के जीवन में आशीर्वाद और सुख-समृद्धि लाए, ऐसी कामना के साथ सभी श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया जाता है.</p>
<p>&nbsp;</p>
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