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	<title>Forest Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>Forest Archives - Udit Vani</title>
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		<title>JHARKHAND : वन विभाग की अतिक्रमित भूमि से हटाई जायेगी अवैध कब्जा</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/forest-land-encroachment-investigation-nh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 17:04:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Encroachment]]></category>
		<category><![CDATA[Forest]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग वन भूमि के अवैध हस्तांतरण, खेती के लिए जंगल उजाड़ने व सड़क किनारे दुकान खोलने की वजह से अतिक्रमण के मामले में जांच कर कार्रवाई करेगी. सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक राज्य में करीब 50 हजार एकड़ वन भूमि पर अतिक्रमण कर अवैध कब्जा किया गया [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग वन भूमि के अवैध हस्तांतरण, खेती के लिए जंगल उजाड़ने व सड़क किनारे दुकान खोलने की वजह से अतिक्रमण के मामले में जांच कर कार्रवाई करेगी. सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक राज्य में करीब 50 हजार एकड़ वन भूमि पर अतिक्रमण कर अवैध कब्जा किया गया है.</p>
<p>यद्यपि वन विभाग का 32 हजार एकड़ जमीन पर ही अतिक्रमण का दावा है. नेशनल हाइवे पर हाल ही में बने कई रिसोर्ट और दुकानों द्वारा भी वन भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत मिली है. अब वन विभाग ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों से अतिक्रमित भूमि की रिपोर्ट मांगी है. विभाग द्वारा वन प्रबंधन समिति को मजबूत कर अतिक्रमण रोकने का भी निर्णय लिया गया है.</p>
<p>इसके लिए वन एवं पर्यावरण विभाग ने स्थानीय स्तर पर प्रबंधन समिति में सदस्यों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है. इसमें वन क्षेत्र के गावों में रहने वाले निवासियों को शामिल किया जाएगा. वन प्रबंधन समिति को पौधरोपण और इसके संरक्षण से जोड़कर रोजगार के अवसर भी दिये जायेंगे.</p>
<p>इसके अलावा वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा अपना लैंडबैंक बनाया जायेगा. इसके लिए भी वन भूमि के अभिलेखों की सहायता ली जाएगी और इसका रिकॉर्ड रखा जाएगा. लैंडबैंक का उपयोग पौधरोपण के साथ संरचनात्मक विकास के लिए करने की योजना है.</p>
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		<title>SARANDA BLAST : सारंडा जंगल में IED Blast, एक युवती की मौत, दो महिलाएं घायल</title>
		<link>https://uditvani.in/crime/saranda-forest-ied-blast-west-singhbhum/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Nov 2025 16:52:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Chaibasa]]></category>
		<category><![CDATA[Crime]]></category>
		<category><![CDATA[पश्चिमी सिंहभूम]]></category>
		<category><![CDATA[Death]]></category>
		<category><![CDATA[Forest]]></category>
		<category><![CDATA[IEDBlast]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, चाईबासा : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल क्षेत्र में शुक्रवार को नक्सलियों द्वारा जमीन के नीचे लगाए गए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) के विस्फोट से एक युवती की मौत हो गई, जबकि दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं. घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, चाईबासा :</span> </strong>झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल क्षेत्र में शुक्रवार को नक्सलियों द्वारा जमीन के नीचे लगाए गए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) के विस्फोट से एक युवती की मौत हो गई, जबकि दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं.</p>
<p>घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना की पुष्टि जिले के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने की है. विस्फोट के बाद इलाके में दहशत का माहौल है. पुलिस और अर्धसैनिक बलों की टीमें मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र को सील कर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं.</p>
<p>प्रारंभिक आशंका है कि आईईडी नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के उद्देश्य से लगाया गया था, लेकिन ग्रामीणों के उस पर पैर पड़ जाने से विस्फोट हो गया.</p>
<p>प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जराईकेला थाना क्षेत्र के कोलभोंगा जंगल में ग्रामीण लकड़ी और पत्ता संग्रह के लिए पहुंचे थे. इसी दौरान जोरदार धमाका हुआ और तीन महिलाएं इसकी चपेट में आ गईं. प्रशासन ने अभी मृतका की पहचान आधिकारिक रूप से जारी नहीं की है.</p>
<p>पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेणु ने बताया कि कोलभोंगा और बिंदिकिरी जंगल क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के लिए जगह-जगह आईईडी बिछाए गए थे. शाम के समय ग्रामीण महिलाएं इसी क्षेत्र से गुजर रही थीं और विस्फोटक की चपेट में आ गईं.</p>
<p>उन्होंने कहा कि नक्सलियों की कायराना हरकत निर्दोष ग्रामीणों की जान ले रही है. सुरक्षा बलों द्वारा क्षेत्र में लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है. हाल के दिनों में सारंडा क्षेत्र में आईईडी से जुड़ी घटनाएं बढ़ी हैं. इससे पहले भी जंगल में आईईडी विस्फोट की कई घटनाओं में सुरक्षा बलों तथा ग्रामीणों को नुकसान पहुंचा है.</p>
<p>पुलिस ने बताया कि जंगल के संवेदनशील इलाकों में बारूदी सुरंगों की तलाश और निष्क्रिय करने की कार्रवाई तेज कर दी गई है. जिला प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल के गहरे इलाकों में सतर्कता के साथ जाएं और किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की तत्काल सूचना पुलिस को दें.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<title>West Singhbhum : सारंडा वासियों के विस्थापन के विरोध में बैठक, कहा – जल-जंगल-जमीन की रक्षा करेंगे</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/west-singhbhum/saranda-forest-tribal-villages-protection-demand-sushil-barla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Oct 2025 14:25:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पश्चिमी सिंहभूम]]></category>
		<category><![CDATA[Forest]]></category>
		<category><![CDATA[Meeting]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, गुवा : शनिवार को सागजुड़ी में सारंडा वासियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें अध्यक्षता भारत आदिवासी पार्टी पश्चिम सिंहभूम के जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने की. बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार स्व. देवेन्द्र माझी द्वारा 1980 से 2005 के बीच जीविकोपार्जन के लिए बसाए गए 40 से अधिक [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, गुवा :</span></strong> शनिवार को सागजुड़ी में सारंडा वासियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें अध्यक्षता भारत आदिवासी पार्टी पश्चिम सिंहभूम के जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने की. बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार स्व. देवेन्द्र माझी द्वारा 1980 से 2005 के बीच जीविकोपार्जन के लिए बसाए गए 40 से अधिक वनग्रामों को अभ्यारण्य क्षेत्र से अलग रखने में विफल रही है.</p>
<p>भारत आदिवासी पार्टी ने यह मांग की है कि 1980–2005 के बीच बसे वनग्रामों के लोगों को किसी भी हाल में विस्थापित न किया जाए. सारंडा वन क्षेत्र के 14 वनग्रामों के 394 परिवारों को वनाधिकार अधिनियम 2005 के तहत पहले ही पट्टा दिया गया है और कई अन्य गांवों की प्रक्रिया जारी है. बारला ने कहा कि अभ्यारण्य की अधिसूचना जारी करने से पूर्व राज्य सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी हमेशा सारंडा वासियों की लड़ाई में साथ रही है और आगे भी उनके लिए संघर्ष करेगी. विस्थापन रहित विकास ही पार्टी का प्रमुख उद्देश्य है. साथ ही, उन्होंने कहा कि सेल की खदानों में स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिलना चिंता का विषय है और बाहरी लोगों को काम देना अन्यायपूर्ण है. ग्रामीण लाल धूल व दूषित जल से प्रभावित हैं, मगर रोजगार उनसे दूर है.</p>
<p>बारला ने सारंडा वासियों से एकजुट होकर जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए बौद्धिक संघर्ष करने की अपील की. बैठक में शान्तिएल काड़यबुरू, नरेंद्र केरकेट्टा, पावल तोपनो, बिरसा जोजो, विल्सन बहँदा, सुलेमान जोजो, दिलबर गुड़िया, सामु जोजो, जीवन गोडसोरा, बेनेडिक्ट लुगुन और सुरज होनहगा समेत कई ग्रामीणों ने भी अपने विचार रखे.</p>
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		<item>
		<title>Jharkhand News : सारण्डा वन्यजीव अभ्यारण्य: सर्वोच्च न्यायालय का कड़ा आदेश, झारखण्ड सरकार पर दबाव</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/saranda-wildlife-sanctuary-supreme-court-order/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 12:00:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[BJP]]></category>
		<category><![CDATA[Forest]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Political]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, राँची : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने आज प्रेस क्लब सभागार, राँची में सारण्डा सघन वन क्षेत्र को वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित करने के मुद्दे पर प्रेस वक्तव्य जारी किया. उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश और झारखण्ड सरकार की कार्रवाइयों पर विस्तार से प्रकाश डाला. सर्वोच्च न्यायालय का कड़ा रुख सर्वोच्च [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, राँची :</span> </strong>जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने आज प्रेस क्लब सभागार, राँची में सारण्डा सघन वन क्षेत्र को वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित करने के मुद्दे पर प्रेस वक्तव्य जारी किया. उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश और झारखण्ड सरकार की कार्रवाइयों पर विस्तार से प्रकाश डाला.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">सर्वोच्च न्यायालय का कड़ा रुख</span></strong><br />
सर्वोच्च न्यायालय ने 17 सितम्बर, 2025 को एक सख्त आदेश जारी करते हुए झारखण्ड सरकार को 7 अक्टूबर, 2025 तक सारण्डा वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर राज्य के मुख्य सचिव को जेल जाने के लिए तैयार रहना होगा. इससे पहले, 29 अप्रैल, 2025 को झारखण्ड सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग के सचिव ने कोर्ट में देरी के लिए क्षमा माँगी थी और 57,519.41 हेक्टेयर क्षेत्र को अभ्यारण्य और 13,603.80 हेक्टेयर को ससंगदा बुरू संरक्षण रिजर्व के रूप में अधिसूचित करने का वादा किया था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">ऐतिहासिक पृष्ठभूमि</span></strong><br />
बिहार सरकार ने 6 फरवरी, 1969 को सारण्डा के 314.68 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को गेम सेंक्चुअरी घोषित किया था, जिसका उल्लेख 1976 के वर्किंग प्लान में है. श्री सरयू राय ने 2 मार्च, 2021 को विधानसभा में इस मुद्दे पर सवाल उठाया था, लेकिन सरकार ने अधिसूचना के उपलब्ध न होने की बात कही थी.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">खनन का पुराना इतिहास</span></strong><br />
सारण्डा में खनन का इतिहास 1909 से शुरू होता है, जब बोनाई आयरन कंपनी को घाटकुरी में खनन लीज दी गई थी. स्वतंत्रता से पहले 11,886 एकड़ और बाद में सार्वजनिक व निजी क्षेत्र की कंपनियों को कुल 9,765.48 हेक्टेयर में लीज दी गई. 2006 के बाद मधु कोड़ा सरकार के दौरान 65,679.40 हेक्टेयर में खनन लीज के आवेदन आए, जिससे सारण्डा के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">सरयू राय का संरक्षण अभियान</span></strong><br />
राय ने &#8220;सारण्डा संरक्षण अभियान&#8221; शुरू किया और 2012 में झारखण्ड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की. उन्होंने बताया कि भारत सरकार के निर्देश पर झारखण्ड ने 63,199.89 हेक्टेयर को अभग्न (नो माइनिंग) क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन खान विभाग ने उसी क्षेत्र में लीज आवेदन स्वीकार किए.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">एम.बी. शाह आयोग और एनजीटी की सिफारिशें</span></strong><br />
2010 में गठित एम.बी. शाह आयोग ने अवैध खनन पर रोक और पर्यावरण संरक्षण की सिफारिश की. 2011 में पलामू के प्रोफेसर डी.एन. ने वन्यजीव प्रबंधन योजना बनाई, जिसमें संरक्षण पर जोर दिया गया. 2020 में डॉ. आर.के. सिंह ने एनजीटी में याचिका दायर की, जिसके बाद 12 जुलाई, 2022 को अभ्यारण्य बनाने का आदेश दिया गया.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">खनन बनाम पर्यावरण</span></strong><br />
खनन कंपनियाँ दावा करती हैं कि सारण्डा में 40 लाख टन लौह अयस्क है, जो विकास के लिए आवश्यक है. लेकिन श्री राय का कहना है कि खनन से जल, जंगल, और जन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. 2014 में गठित समितियों ने सतत खनन योजना की सिफारिश की, जिसमें पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">सरकार से अपील</span></strong><br />
राय ने सरकार से माँग की है कि वह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन कर 8 अक्टूबर, 2025 से पहले 57,551 हेक्टेयर को अभ्यारण्य और 13,603 हेक्टेयर को संरक्षित रिजर्व घोषित करे. उन्होंने कहा कि अभ्यारण्य बनने से पर्यटन और वन उत्पादों से स्थायी आजीविका के साधन विकसित होंगे, जो खनन से मिलने वाले लाभों से कहीं बेहतर हैं.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">भाजपा ने हेमंत सरकार पर लगाया गंभीर आरोप</span></strong><br />
झारखण्ड भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार ने जानबूझकर खनन माफियाओं और कंपनियों को फायदा पहुँचाने के लिए पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी की. एक आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, झारखण्ड में ₹22,000 करोड़ से अधिक का अनधिकृत खनन हुआ. इसके अलावा, हेमंत सरकार के कार्यकाल में हजारों हेक्टेयर वनभूमि को गैर-वन उपयोग के लिए हस्तांतरित किया गया.</p>
<p>प्रतुल शाहदेव ने माँग की कि सारण्डा में हुए अवैध खनन की उच्चस्तरीय जाँच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि सारण्डा को वास्तविक रूप से ‘नो-गो जोन’ घोषित किया जाए ताकि भविष्य में कोई भी कंपनी बिना मानकों के खनन न कर सके.</p>
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		<item>
		<title>Jamshedpur News : उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला वन अधिकार समिति की बैठक, 85 वन पट्टा दावा अभिलेखों पर चर्चा और दिशा-निर्देश दिए गए</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/jamshedpur-district-forest-rights-committee-meeting/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Sep 2025 13:40:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[DC]]></category>
		<category><![CDATA[Forest]]></category>
		<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[Meeting]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर : समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में उपायुक्त सह-अध्यक्ष जिलास्तरीय वन अधिकार समिति श्री कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में जिला वन अधिकार समिति की बैठक आयोजित की गई. बैठक में उप विकास आयुक्त श्री नागेन्द्र पासवान, जिला कल्याण पदाधिकारी श्री शंकराचार्य समद, कार्यपालक अभियंता पथ प्रमंडल श्री दीपक सहाय, जिला परिषद सदस्यगण, एनएचएआई [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर :</span></strong> समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में उपायुक्त सह-अध्यक्ष जिलास्तरीय वन अधिकार समिति श्री कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में जिला वन अधिकार समिति की बैठक आयोजित की गई. बैठक में उप विकास आयुक्त श्री नागेन्द्र पासवान, जिला कल्याण पदाधिकारी श्री शंकराचार्य समद, कार्यपालक अभियंता पथ प्रमंडल श्री दीपक सहाय, जिला परिषद सदस्यगण, एनएचएआई एवं वन विभाग के प्रतिनिधि तथा अन्य संबंधित सदस्य उपस्थित रहे.</p>
<p>बैठक में अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के नियम 2008 और संशोधित नियम 2012 के अंतर्गत प्राप्त कुल 85 वन पट्टा दावा अभिलेखों पर गहन चर्चा की गई. इनमें 11 सामुदायिक, 72 व्यक्तिगत और 2 दावा अभिलेख एनएचएआई से संबंधित थे. सभी दावों की सत्यापन प्रक्रिया, भू-सीमा निर्धारण और दस्तावेजों की जांच कर संबंधित प्रस्तावों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर बल दिया गया.</p>
<p>उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने बैठक में वन क्षेत्र में निवासरत नागरिकों के सामुदायिक हित की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए ग्राम सभा आयोजित कर अधिक से अधिक वन पट्टा आवेदन सृजित करने के निर्देश दिए. इसके साथ ही उन्होंने प्रत्येक अंचल में 500 एकड़ जमीन को समुदाय आधारित वन प्रबंध (CFR) के तहत चिन्हित करने के लिए सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को पूर्व में दिए गए आदेशों को पुनः पर जोर दिया.</p>
<p>यह बैठक वन अधिकारों के संरक्षण एवं पंजीकरण को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.</p>
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		<item>
		<title>JHARKHAND : सारंडा में बनेगा राज्य का 10वां Wild Life Sanctuary</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/saranda-forest-proposed-as-10th-wildlife-sanctuary/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Jul 2025 17:49:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Forest]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Proposal]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : राज्य सरकार द्वारा सारंडा में दसवां वन अभयारण्य बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. जिसमें बताया गया कि इस वन्य प्राणियों के संरक्षण और वनस्पतियों के संवर्धन योजना में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय का भी सहयोग मिलेगा. वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के लिए देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट को अधियाचना [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span></strong> राज्य सरकार द्वारा सारंडा में दसवां वन अभयारण्य बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. जिसमें बताया गया कि इस वन्य प्राणियों के संरक्षण और वनस्पतियों के संवर्धन योजना में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय का भी सहयोग मिलेगा. वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के लिए देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट को अधियाचना भेजी गई है और केंद्र सरकार के इस प्रतिष्ठान में सारंडा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के लिए बिशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है. केंद्र सरकार नए बनने वाले सेंचुरी के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराएगी.</p>
<p>राज्य सरकार ने सारंडा में लौह अयस्क समेत अन्य खनन गतिविधियों के लिए वनक्षेत्र की सीमा तय कर दी है और 57519.41 हेक्टेयर वनभूमि में वाइल्ड लाइफ सेंचुरी बनाने की योजना बनाई है. ज्ञात हो कि राज्य में पहले से नौ अभयारण्य मौजूद है. इनमें दलमा, पलामू टाइगर रिजर्व, हजारीबाग और कोडरमा प्रमुख है. सारंडा में दसवें अभयारण्य बनाने के लिए 13 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि जोड़ी गई है. इस वन क्षेत्र में हाथियों का सदियों से अधिवास रहा है. हाल ही में पलामू टाइगर रिजर्व में आए बाघ ने लंबे समय तक सारंडा क्षेत्र में प्रवास किया है. ऐसे में यहां टाइगर रूट रहने की संभावना भी तलाशी जा रही है.</p>
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		<title>JHARKHAND : 265 करोड़ की लागत से ऐतिहासिक पलामू किलों का संरक्षण व बेतला में 300 एकड़ भूमि में बनेगा टाइगर सफारी</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/palamu-fort-conservation-betla-tiger-safari/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Jul 2025 17:26:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Forest]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Palamau]]></category>
		<category><![CDATA[PROJECT]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : राज्य सरकार द्वारा ऐतिहासिक पलामू किले के संरक्षण, जीर्णोद्धार तथा बेतला क्षेत्र में 300 एकड़ भूमि में टाइगर सफारी का निर्माण कराया जाएगा. दोनों परियोजनाओं में लगभग 265 करोड रूपये खर्च किये जायेंगे और बर्ष 2027 तक दोनों परियोजनाओं को चालू करने का लक्ष्य निधाग्रित किया गया है. दोनों परियोजनाओ को [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>राज्य सरकार द्वारा ऐतिहासिक पलामू किले के संरक्षण, जीर्णोद्धार तथा बेतला क्षेत्र में 300 एकड़ भूमि में टाइगर सफारी का निर्माण कराया जाएगा. दोनों परियोजनाओं में लगभग 265 करोड रूपये खर्च किये जायेंगे और बर्ष 2027 तक दोनों परियोजनाओं को चालू करने का लक्ष्य निधाग्रित किया गया है. दोनों परियोजनाओ को धरातल पर उतारने के लिए शनिवार को पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर की उपस्थिति में अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक में दोनों मंत्रियों के अतिरिक्त वन एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी, पर्यटन सचिव मनोज कुमार, निदेशक संस्कृति आसिफ एकराम, झारखंड राज्य वन निगम के प्रबंध निदेशक वाई के दास एवं निदेशक पलामू व्याघ्र परियोजना एस आर नाटेश उपस्थित थे.</p>
<p>मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के सरकारी आवास में आयोजित बैठक में ऐतिहासिक स्थल पलामू के नये एवं पुराने किले को पुरातात्विक धरोहर के रूप में संरक्षण देने के लिए जीर्णोद्धार करने पर व्यापक विचार विमर्श किया गया. जिसमें बेतला के समीप 300 एकड़ जमीन में टाइगर सफारी योजना के निर्माण पर गंभीर चर्चा की गई. वहीं बैठक के दौरान अधिकारियों द्वारा बताया गया कि राजा मेदिनीराय द्वारा निर्मित पलामू के नये व पुराने किले को पुरातात्विक धरोहर की मान्यता देते हुए उसका संरक्षण एवं विकास कार्यों से संबंधित किसी अनुभवी एवं दक्षताधारी कंसलटेंट से विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार कराया जाएगा. इसके बाद सक्षम प्राधिकार से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करते हुए उसका पुनरीक्षण कराया जायेगा. दोनों पलामू किलों के संरक्षण व जीर्णोद्धार पर अनुमानित 40-50 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना बतायी गई.</p>
<p>विभागीय मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया की पलामू के दोनों किलों के संरक्षण व जीर्णोद्धार कराने की घोषणा उन्होंने चालू वित्तीय बर्ष के बजट भाषण में भी किया है. वहीं दोनों मंत्रियों ने अधिकारियों से बेतला के समीप टाइगर सफारी के निर्माण कराने के मामले में अद्यतन प्रगति की जानकारी मांगी. इसपर मंत्री सोनू ने बताया कि बेतला के समीप टाइगर सफारी के निर्माण पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सहमति प्राप्त कर ली गई है. विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि पलामू टाइगर प्रोजेक्ट के अंतर्गत बेतला के समीप टाइगर सफारी योजना के लिए 300 एकड़ जमीन भी चिह्नित कर ली गई है. इसके निर्माण पर करीब 215 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है.</p>
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		<item>
		<title>Jamshedpur : उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिलास्तरीय वन अधिकार समिति की अध्यक्षता में हुई बैठक, व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन पट्टा दावों पर हुई चर्चा</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/forest-rights-claims-reviewed-dc-meeting/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Jul 2025 16:44:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[DC]]></category>
		<category><![CDATA[Forest]]></category>
		<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[Meeting]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर : समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिलास्तरीय वन अधिकार समिति कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में वन प्रमंडल पदाधिकारी सबा आलम अंसारी, जिला कल्याण पदाधिकारी शंकराचार्य समद, जिला परिषद सदस्य सोनामनी सरदार (पोटका), देबयानी मुर्मू (घाटशिला) और लखी मार्डी (मुसाबनी) भी मौजूद रहीं. 192 [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर : </span></strong>समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिलास्तरीय वन अधिकार समिति कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में वन प्रमंडल पदाधिकारी सबा आलम अंसारी, जिला कल्याण पदाधिकारी शंकराचार्य समद, जिला परिषद सदस्य सोनामनी सरदार (पोटका), देबयानी मुर्मू (घाटशिला) और लखी मार्डी (मुसाबनी) भी मौजूद रहीं.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">192 वन पट्टा दावों पर की गई समीक्षा</span></strong></p>
<p><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-78242" src="https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/07/DC-2-1.jpg?resize=300%2C175&#038;ssl=1" alt="" width="300" height="175" srcset="https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/07/DC-2-1.jpg?resize=300%2C175&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/07/DC-2-1.jpg?resize=1024%2C597&amp;ssl=1 1024w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/07/DC-2-1.jpg?resize=768%2C448&amp;ssl=1 768w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/07/DC-2-1.jpg?resize=150%2C87&amp;ssl=1 150w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/07/DC-2-1.jpg?resize=450%2C262&amp;ssl=1 450w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2025/07/DC-2-1.jpg?w=1137&amp;ssl=1 1137w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />बैठक में अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासियों के अधिकारों को मान्यता देने वाले वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत प्राप्त 186 व्यक्तिगत और 6 सामुदायिक दावों की गहन समीक्षा की गई. सभी मामलों में सत्यापन, भू-सीमा निर्धारण और दस्तावेजों की जांच के बाद प्रस्तावों पर नियमानुसार निर्णय लिया गया.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">विकास योजनाओं के लिए वन भूमि अपयोजन को मंजूरी</span></strong><br />
<strong>बैठक में दो बड़ी योजनाओं के लिए वन भूमि के अपयोजन की भी मंजूरी दी गई –</strong></p>
<p>132KV D/C Baharagora to Dhalbhumgarh (Chakulia LILO 1 &amp; 2 Line)<br />
BSNL 4G SATURATION टावर की स्थापना</p>
<p>इन दोनों प्रस्तावों पर सर्वसम्मति से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सहायता योजना के 324 आवेदन स्वीकृत</span></strong><br />
जिला स्तरीय समिति की एक अन्य बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत प्राप्त 324 चिकित्सा अनुदान आवेदनों की जांच की गई. इनमें से 123 अनुसूचित जनजाति, 40 अनुसूचित जाति, और 161 पिछड़ी जाति के लाभुकों के आवेदन सही पाए गए. सभी को सहायता राशि प्रदान करने की अनुशंसा की गई.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">छात्रवृत्ति भुगतान को भी मिली हरी झंडी</span></strong><br />
इसके अतिरिक्त, 13245 छात्रों को छात्रवृत्ति भुगतान के निर्देश दिए गए, जिनके आवेदन जिला स्तरीय अनुमोदन एवं अनुश्रवण समिति द्वारा स्वीकृत किए गए थे.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">क्या कहती है यह बैठक?</span></strong><br />
यह बैठक दर्शाती है कि शासन द्वारा पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर योजनाओं और दावों की गहन जांच और त्वरित कार्रवाई की जा रही है. वन अधिकारों से लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा सहायता तक, हर स्तर पर हितग्राहियों के लिए लाभ सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है.</p>
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		<item>
		<title>Jamshedpur : गगलूबनी जंगल में पेड़ से लटका मिला अधेड़ का सड़ा-गला शव, आत्महत्या की आशंका</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/ranchi/decomposed-body-found-bodam-forest/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Jun 2025 15:44:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[रांची]]></category>
		<category><![CDATA[Crime]]></category>
		<category><![CDATA[Dead body]]></category>
		<category><![CDATA[Forest]]></category>
		<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[seized]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर : बोड़ाम थाना क्षेत्र के गगलूबनी गांव के पास स्थित जंगल में रविवार को एक अधेड़ व्यक्ति का सड़ा-गला शव पेड़ से लटका हुआ बरामद किया गया. मृतक की पहचान गांव निवासी पांडू साहिष (55) के रूप में हुई है, जो 25 जून की शाम से लापता थे. ग्रामीणों ने जब शव [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर :</span></strong> बोड़ाम थाना क्षेत्र के गगलूबनी गांव के पास स्थित जंगल में रविवार को एक अधेड़ व्यक्ति का सड़ा-गला शव पेड़ से लटका हुआ बरामद किया गया. मृतक की पहचान गांव निवासी पांडू साहिष (55) के रूप में हुई है, जो 25 जून की शाम से लापता थे. ग्रामीणों ने जब शव को देखा तो तत्काल पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने मौके पर पहुंच कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.</p>
<p>बताया जा रहा है कि पांडू खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था. मृतक के मामा मंगल साहिष ने बताया कि वह कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार चल रहा था और बीमारी से मानसिक रूप से परेशान था. आशंका जताई जा रही है कि इसी वजह से उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया.</p>
<p>पांडू का शव उसके घर से लगभग दो किलोमीटर दूर जंगल में पेड़ से लटका हुआ पाया गया. शव की स्थिति अत्यंत खराब थी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि मृत्यु कुछ दिन पूर्व हो चुकी थी.</p>
<p>पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद शव को पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है. मृतक अपने पीछे आठ बच्चों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गया है. मामले की जांच जारी है.</p>
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		<item>
		<title>Ghatshila : जंगल में पेड़ से लटका मिला अंबुज भगत का शव: हत्या या आत्महत्या?</title>
		<link>https://uditvani.in/crime/body-found-hanging-potash-forest-ghatsila/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jun 2025 17:55:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Crime]]></category>
		<category><![CDATA[Ghatshila]]></category>
		<category><![CDATA[Dead body]]></category>
		<category><![CDATA[Forest]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, घाटशिला : घाटशिला थाना क्षेत्र के बड़ाजुड़ी गांव निवासी 48 वर्षीय अंबुज भगत का शव बुधवार सुबह बगसोल गांव के पास पोटाश जंगल में एक पेड़ से गमछे के सहारे लटका हुआ मिला. शव मिलने की खबर फैलते ही इलाके में सनसनी मच गई और देखने वालों की भारी भीड़ जुट गई. पत्नी [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, घाटशिला :</span></strong> घाटशिला थाना क्षेत्र के बड़ाजुड़ी गांव निवासी 48 वर्षीय अंबुज भगत का शव बुधवार सुबह बगसोल गांव के पास पोटाश जंगल में एक पेड़ से गमछे के सहारे लटका हुआ मिला. शव मिलने की खबर फैलते ही इलाके में सनसनी मच गई और देखने वालों की भारी भीड़ जुट गई.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">पत्नी मायके में, 10 तारीख को घर से निकला था</span></strong><br />
घटना की सूचना ग्रामीणों ने घाटशिला थाना को दी, जिसके बाद एएसआई रजनीश कुमार और देव साह भगत मौके पर पहुंचे. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडल अस्पताल भेज दिया है.</p>
<p>मृतक की पत्नी कविता भगत इन दिनों मायके गई हुई थीं. गांव के लोगों ने ही उन्हें घटना की जानकारी दी. परिजनों के अनुसार अंबुज भगत 10 जून को दोपहर 12 बजे घर से निकले थे और फिर वापस नहीं लौटे.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">पीछे छोड़ गए दो संतान, मौत पर उठ रहे सवाल</span></strong><br />
अंबुज भगत अपने पीछे एक बेटा और एक बेटी को छोड़ गए हैं. ग्रामीणों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया है कि यह आत्महत्या है या सुनियोजित हत्या.</p>
<p>जंगल जैसी सुनसान जगह में गमछे से लटका शव मिलने के कारण आशंका और बढ़ गई है. पुलिस अब हर पहलू से जांच में जुट गई है.</p>
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