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	<title>ECI Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>ECI Archives - Udit Vani</title>
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		<title>West Bengal SIR: झारखंड व ओडिशा के 200 अधिकारी बंगाल में चल रही न्यायिक प्रक्रिया में होंगे शामिल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 08:41:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[kolkata]]></category>
		<category><![CDATA[ECI]]></category>
		<category><![CDATA[Election comission]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, कोलकाता : झारखंड और ओडिशा के 200 न्यायिक अधिकारी शनिवार तक पश्चिम बंगाल पहुंच जाएंगे. यह अधिकारी 9 मार्च से भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा &#8220;तार्किक विसंगति&#8221; श्रेणी के तहत पहचाने गए मतदाताओं के दस्तावेजों के न्यायिक निर्णय की चल रही प्रक्रिया में शामिल होंगे. पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, कोलकाता :</span></strong> झारखंड और ओडिशा के 200 न्यायिक अधिकारी शनिवार तक पश्चिम बंगाल पहुंच जाएंगे. यह अधिकारी 9 मार्च से भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा &#8220;तार्किक विसंगति&#8221; श्रेणी के तहत पहचाने गए मतदाताओं के दस्तावेजों के न्यायिक निर्णय की चल रही प्रक्रिया में शामिल होंगे.</p>
<p>पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि वे शनिवार व रविवार को न्यायिक निर्णय प्रक्रिया पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में रहेंगे. इसके बाद सोमवार से वे राज्य के मौजूदा न्यायिक अधिकारियों की टीम में शामिल हो जाएंगे जो पहले से ही चल रही न्यायिक निर्णय प्रक्रिया में लगे हुए हैं.</p>
<p>मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कार्यालय के एक सूत्र ने बताया, &#8220;झारखंड और ओडिशा से 200 न्यायिक अधिकारियों के शामिल होने से न्याय प्रक्रिया में शामिल न्यायिक अधिकारियों की कुल संख्या बढ़कर 732 हो जाएगी.</p>
<p>झारखंड व ओडिशा से आने वाले इन 200 न्यायिक अधिकारियों में से अधिकांश को कोलकाता में तैनात किया जाएगा, जबकि कुछ को पूर्वी मिदनापुर जिले के बर्धमान, पश्चिमी बर्दमान जिले के आसनसोल, पश्चिमी मिदनापुर जिले के खड़गपुर और दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी जैसे अन्य प्रमुख शहरों में भी तैनात किया जाएगा.&#8221;</p>
<p>उनके रहने की व्यवस्था मुख्य रूप से कोलकाता हवाई अड्डे और कोलकाता के साथ ही संबंधित जिले के शहरों में स्थित महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों के नजदीक की गई है.</p>
<p>विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में न्यायिक निर्णय से संबंधित दो अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम और राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए तैयारियों से संबंधित घटनाक्रम अगले सप्ताह, विशेष रूप से सोमवार और मंगलवार को होने वाले हैं.</p>
<p>मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ 8 मार्च की रात को कोलकाता पहुंचेगी और अगले दो दिनों के व्यस्त कार्यक्रम के साथ चल रही न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा करेगी.</p>
<p>10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर और संबंधित न्यायिक निर्णय पर एक महत्वपूर्ण सुनवाई निर्धारित है.</p>
<p>पश्चिम बंगाल में न्यायिक निर्णय के लिए भेजे गए मामलों को छोड़कर अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की गई थी. सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुसार पूरक सूची उचित समय पर प्रकाशित की जाएगी.</p>
<p>सीईओ कार्यालय से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार न्यायिक निर्णय के लिए 60 लाख से अधिक मामले भेजे गए थे और गुरुवार रात तक लगभग पांच लाख मामलों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<title>National : बंगाल में SIR का पहला चरण शुरू, 2002 के केवल 32.06 प्रतिशत नाम ही वर्तमान सूची में</title>
		<link>https://uditvani.in/politics/eci-launches-special-intensive-revision-west-bengal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 06:59:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[ECI]]></category>
		<category><![CDATA[Election commission]]></category>
		<category><![CDATA[WestBengal]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, कोलकाता : पश्चिम बंगाल में भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने तीन चरणों वाले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का पहला चरण मंगलवार से शुरू कर दिया है. दोनों सूचियों के बीच अब तक हुए &#8220;मैपिंग और मैचिंग&#8221; के निष्कर्षों के अनुसार, वर्तमान मतदाता सूची में केवल 32.06 प्रतिशत नाम ही 2002 की मतदाता सूची [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, कोलकाता :</span></strong> पश्चिम बंगाल में भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने तीन चरणों वाले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का पहला चरण मंगलवार से शुरू कर दिया है. दोनों सूचियों के बीच अब तक हुए &#8220;मैपिंग और मैचिंग&#8221; के निष्कर्षों के अनुसार, वर्तमान मतदाता सूची में केवल 32.06 प्रतिशत नाम ही 2002 की मतदाता सूची में मौजूद हैं.</p>
<p>राज्य में पिछली बार एसआईआर 2002 में आयोजित की गई थी और वर्तमान एसआईआर के लिए इसे आधार माना गया है. नामों की &#8220;मैपिंग और मैचिंग&#8221; जारी है.</p>
<p>मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के एक सूत्र ने बताया, &#8220;पश्चिम बंगाल में मौजूदा मतदाता सूची में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ है. अब तक किए गए &#8216;मैपिंग और मैचिंग&#8217; के अनुसार, 2.46 करोड़ से भी कम ऐसे मतदाताओं के नाम मिले हैं, जिनके नाम या उनके माता-पिता के नाम 2002 की मतदाता सूची में थे.&#8221;</p>
<p>हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि &#8220;मैपिंग और मैचिंग&#8221; का काम पूरी तरह पूरा होने के बाद अंतिम संख्या अलग हो सकती है.</p>
<p>नियमों के अनुसार, मौजूदा सूची में शामिल जिन मतदाताओं के नाम या उनके माता-पिता के नाम 2002 की सूची में हैं, उन्हें स्वतः ही असली मतदाता माना जाएगा और उन्हें नई मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए विधिवत भरे हुए गणना फॉर्म के अलावा कोई अन्य सहायक दस्तावेज जमा नहीं करना होगा.</p>
<p>हालांकि, जिन मतदाताओं के नाम 2002 की सूची में नहीं हैं, उन्हें चुनाव आयोग की ओर से अनिवार्य किए गए किसी भी दस्तावेज को प्रस्तुत करना होगा. हालांकि आधार कार्ड को ऐसे दस्तावेजों की सूची में शामिल किया गया है, लेकिन चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल आधार कार्ड ही पर्याप्त नहीं होगा और संबंधित मतदाता को चुनाव आयोग द्वारा निर्दिष्ट 11 अन्य दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना होगा.</p>
<p>आधार को न तो नागरिकता प्रमाण माना जाएगा और न ही आयु प्रमाण.</p>
<p>एसआईआर तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा. पहले चरण में, बीएलओ गणना प्रपत्र लेकर हर घर पहुंचेंगे और संबंधित मतदाताओं का विवरण एकत्र करेंगे. पहले चरण के अंत में, राज्य की मसौदा मतदाता सूची की घोषणा की जाएगी.</p>
<p>इसके बाद दूसरे चरण में, कोई भी राजनीतिक दल या व्यक्तिगत मतदाता मसौदा सूची पर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेगा, जिसका निपटारा चुनाव आयोग की ओर से किया जाएगा.</p>
<p>इसके बाद, तीसरे और अंतिम चरण में, ईआरओ व्यक्तिगत राजनीतिक दलों या व्यक्तिगत मतदाताओं से प्राप्त शिकायतों का निपटारा करेंगे, जिसके बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी.</p>
<p>पूरी प्रक्रिया अधिकतम मार्च 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है. पश्चिम बंगाल में अगले साल तीन अन्य राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के साथ महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव होने हैं.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<item>
		<title>Bihar Election : एक्जिट पोल पर रोक, निर्वाचन आयोग ने जारी की अधिसूचना</title>
		<link>https://uditvani.in/politics/eci-bans-exit-polls-during-bihar-assembly-election/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Nov 2025 15:23:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[Banned]]></category>
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		<category><![CDATA[ECI]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, पटना : बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 के मद्देनजर भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है. इसमें एक्जिट पोल से जुड़ी नियमावली स्पष्ट की गई है. इसका मकसद मतदान के दौरान जनता की सोच और मतदान के परिणामों को प्रभावित किए बिना निष्पक्ष तरीके से चुनाव संपन्न कराना है. [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, पटना :</span></strong> बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 के मद्देनजर भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है. इसमें एक्जिट पोल से जुड़ी नियमावली स्पष्ट की गई है. इसका मकसद मतदान के दौरान जनता की सोच और मतदान के परिणामों को प्रभावित किए बिना निष्पक्ष तरीके से चुनाव संपन्न कराना है.</p>
<p>निर्वाचन आयोग ने कहा है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत 6 नवंबर को सुबह 7 बजे से लेकर 11 नवंबर की शाम 6:30 बजे तक किसी भी तरह के एक्जिट पोल आयोजित करना या उसके नतीजे मीडिया में प्रकाशित करना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा.</p>
<p>इसका मतलब यह है कि इस दौरान कोई भी समाचार चैनल, अखबार या वेबसाइट मतदाताओं के मतदान के आधार पर भविष्यवाणी नहीं दिखा सकते. ये नियम सिर्फ बिहार विधान सभा के चुनावों तक ही नहीं, बल्कि अन्य 7 राज्यों में होने वाले 8 उपनिर्वाचनों पर भी लागू होंगे.</p>
<p>इसके अलावा, अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि मतदान की समाप्ति के समय से 48 घंटे की अवधि के दौरान किसी भी ओपिनियन पोल या अन्य मतदान सर्वेक्षण के परिणामों को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिखाना निषेध है. यह नियम सभी मीडिया हाउस और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लागू है.</p>
<p>आसान भाषा में कहें तो चुनाव के दौरान और मतदान खत्म होने के बाद 48 घंटे तक कोई भी चैनल, अखबार या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मतदाताओं के मतदान के आधार पर नतीजे दिखाने या फैलाने का काम नहीं कर सकता.</p>
<p>आयोग का कहना है कि चुनाव से पहले या दौरान किसी भी तरह की भविष्यवाणी या परिणाम का प्रचार मतदाताओं की राय को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इस तरह का सख्त नियम बनाया गया है.</p>
<p>निर्वाचन आयोग के इस अधिसूचना का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से अपने मत का प्रयोग कर सके. इसे ध्यान में रखते हुए सभी मीडिया चैनलों के लिए इन नियमों का पालन करना अनिवार्य है.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<item>
		<title>Jharkhand News : मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने 7 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को जारी किए कारण बताओ नोटिस</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/eci-issues-show-cause-notice-unrecognized-jharkhand-political-parties/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:42:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[ECI]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[notice]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 7 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. ये दल हैं– रांची के, झारखंड की क्रांतिकारी पार्टी, झारखंड पार्टी (सेक्युलर), लोक जन विकास मोर्चा, राष्ट्रीय देशज पार्टी, राष्ट्रीय संगाइल पार्टी, पूर्वी सिंहभूम [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 7 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. ये दल हैं– रांची के, झारखंड की क्रांतिकारी पार्टी, झारखंड पार्टी (सेक्युलर), लोक जन विकास मोर्चा, राष्ट्रीय देशज पार्टी, राष्ट्रीय संगाइल पार्टी, पूर्वी सिंहभूम की झारखंड पीपल्स पार्टी और चतरा की राष्ट्रीय जनक्रांति मोर्चा.</p>
<p>इन दलों को सूचित किया गया है कि वे अपने अस्तित्व और कामकाज का पक्ष शपथ पत्र और आवश्यक साक्ष्यों के साथ मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें. यदि समय पर पक्ष नहीं प्रस्तुत किया गया तो माना जाएगा कि पार्टी का अस्तित्व समाप्त हो गया है और इसकी सूचना भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली को भेजी जाएगी.</p>
<p>कारण बताओ नोटिस इसलिए जारी किया गया है क्योंकि ये दल विगत तीन वित्तीय वर्षों (2021-22, 2022-23, 2023-24) का वार्षिक अंकेक्षित खाता आयोग को समय पर नहीं सौंप सके हैं. साथ ही विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बाद निर्धारित अवधि में चुनाव व्यय विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया, जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों का उल्लंघन है.</p>
<p>संयुक्त निदेश के अनुसार, संबंधित दलों को 9 अक्टूबर 2025 तक लिखित पक्ष मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखंड, रांची भेजना होगा तथा 16 अक्टूबर 2025 को सुबह 11 बजे सुनवाई होगी. उक्त सूचना दलों को पंजीकृत पत्राचार से और अखबारों में आम सूचना के रूप में भी भेजी गई है.</p>
<p>इस कार्रवाई से राजनीतिक दलों की पारदर्शिता और नियमितता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है.</p>
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		<item>
		<title>Bihar Election : ECI ने बिहार चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों को दी जानकारी, दिए ये निर्देश</title>
		<link>https://uditvani.in/politics/bihar-assembly-elections-eci-central-observers-briefing/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:03:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[ECI]]></category>
		<category><![CDATA[election]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली : बिहार में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसे लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारी तेज कर दी है. इस बीच भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बिहार विधानसभा चुनाव और उपचुनावों के लिए तैनात किए जाने वाले केंद्रीय पर्यवेक्षकों को जानकारी दी. चुनाव आयोग ने शुक्रवार को [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नई दिल्ली :</span> </strong>बिहार में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसे लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारी तेज कर दी है. इस बीच भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बिहार विधानसभा चुनाव और उपचुनावों के लिए तैनात किए जाने वाले केंद्रीय पर्यवेक्षकों को जानकारी दी.</p>
<p>चुनाव आयोग ने शुक्रवार को बिहार विधानसभा के आगामी आम चुनाव और कुछ राज्यों के उपचुनावों के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों के रूप में तैनात किए जाने वाले सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों के लिए एक ब्रीफिंग का आयोजन किया. बैठक में 287 आईएएस अधिकारी, 58 आईपीएस अधिकारी और आईआरएस, आईआरएएस, आईसीएएस तथा अन्य सेवाओं के 80 अधिकारियों सहित 425 अधिकारियों ने भाग लिया. यह ब्रीफिंग बैठक आईआईआईडीईएम, नई दिल्ली में आयोजित की गई थी.</p>
<p>मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ केंद्रीय पर्यवेक्षकों को जानकारी दी. ज्ञानेश कुमार ने पर्यवेक्षकों को संबोधित करते हुए उन्हें लोकतंत्र का प्रकाश स्तंभ बताया. आयोग की आंख और कान के रूप में केंद्रीय पर्यवेक्षकों को सभी चुनाव कानूनों, नियमों और दिशानिर्देशों से परिचित होने, प्रत्यक्ष क्षेत्रीय जानकारी प्रदान करने और उनका कड़ाई से एवं निष्पक्ष अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया.</p>
<p>पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया गया कि वे राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और मतदाताओं की शिकायतों के निवारण के लिए उनके लिए पूरी तरह से उपलब्ध रहें. पर्यवेक्षकों को मतदान केंद्रों का दौरा करने और मतदाताओं की सुविधा के लिए आयोग द्वारा हाल ही में की गई पहलों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए.</p>
<p>आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20बी द्वारा प्रदत्त पूर्ण शक्तियों के अंतर्गत स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने में आयोग की सहायता के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करता है. वे क्षेत्रीय स्तर पर चुनाव प्रक्रिया के कुशल एवं प्रभावी प्रबंधन की भी देखरेख करते हैं.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<item>
		<title>Election Comission of India ने जारी की विश्व की सबसे बड़ी चुनावी रिपोर्ट &#8211; घटा Nota का प्रतिशत, जानें कहाँ हुआ सबसे अधिक मतदान, कहाँ से पहली बार हुआ निर्विरोध निर्वाचन इसके अलावा और भी बहुत कुछ</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/election-comission-of-india/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UditVaniDigital]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Dec 2024 13:25:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[ECI]]></category>
		<category><![CDATA[report]]></category>
		<category><![CDATA[Votes]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 2024 के लोकसभा चुनावों के संबंध में महत्वपूर्ण सांख्यिकीय रिपोर्टों का एक विस्तृत सेट जारी किया है. इस रिपोर्ट में 42 प्रमुख रिपोर्टों के साथ चार राज्यों—आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम में हुए विधानसभा चुनावों की 14 रिपोर्टें भी शामिल हैं. उद्देश्य और महत्व इस [...]</p>
<p>The post <a href="https://uditvani.in/jharkhand/election-comission-of-india/">Election Comission of India ने जारी की विश्व की सबसे बड़ी चुनावी रिपोर्ट &#8211; घटा Nota का प्रतिशत, जानें कहाँ हुआ सबसे अधिक मतदान, कहाँ से पहली बार हुआ निर्विरोध निर्वाचन इसके अलावा और भी बहुत कुछ</a> appeared first on <a href="https://uditvani.in">Udit Vani</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>उदित वाणी, जमशेदपुर:</strong> भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 2024 के लोकसभा चुनावों के संबंध में महत्वपूर्ण सांख्यिकीय रिपोर्टों का एक विस्तृत सेट जारी किया है. इस रिपोर्ट में 42 प्रमुख रिपोर्टों के साथ चार राज्यों—आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम में हुए विधानसभा चुनावों की 14 रिपोर्टें भी शामिल हैं.</p>
<p><strong>उद्देश्य और महत्व</strong><br />
इस पहल का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रणाली में पारदर्शिता और जनता के विश्वास को बढ़ाना है. इससे आयोग को चुनावी डेटा की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है, जिससे आम नागरिक, शोधकर्ता और शिक्षाविद चुनावी आंकड़ों तक आसानी से पहुंच सकते हैं.</p>
<p><strong>डेटा सेट की प्रमुख विशेषताएँ</strong><br />
रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण आंकड़े शामिल हैं, जैसे:<br />
<strong>• संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के अनुसार मतदाताओं का विवरण</strong><br />
<strong>• मतदान केंद्रों की संख्या और मतदान व्यवहार</strong><br />
<strong>• राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त वोट शेयर और लिंग आधारित मतदान पैटर्न</strong><br />
<strong>• महिला मतदाताओं की भागीदारी</strong><br />
<strong>• राष्ट्रीय और राज्य दलों के चुनाव परिणाम</strong></p>
<p><strong>2024 लोकसभा चुनाव में मतदाता संख्या में वृद्धि</strong><br />
इस बार लोकसभा चुनाव में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 97,97,51,847 रही, जो 2019 के मुकाबले 7.43 प्रतिशत अधिक है. 2019 में यह आंकड़ा 91,19,50,734 था. इसके साथ ही इस बार कुल 64.64 करोड़ वोट पड़े, जिसमें ईवीएम और पोस्टल बैलेट मिलाकर 64,64,20,869 वोट डाले गए.</p>
<p><strong>नोटा (NOTA) का प्रदर्शन</strong><br />
2024 में नोटा को 63,71,839 वोट मिले, जो कि कुल मतदान का 0.99 प्रतिशत है. यह आंकड़ा 2019 में मिले 1.06 प्रतिशत वोटों के मुकाबले थोड़ा कम है.</p>
<p><strong>पुनर्मतदान का प्रतिशत</strong><br />
2019 में 540 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हुआ था, जबकि 2024 में केवल 40 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हुआ, जो कि कुल मतदान केंद्रों का केवल 0.0038 प्रतिशत है. यह दर्शाता है कि चुनावी प्रक्रिया में सुधार हुआ है और ईवीएम की विश्वसनीयता बढ़ी है.</p>
<p><strong>लिंग आधारित मतदान</strong><br />
2024 में महिला मतदाताओं की संख्या 31,27,64,269 रही, जबकि पुरुष मतदाताओं की संख्या 32,93,61,948 रही. ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या 13,058 रही, जिनका मतदान प्रतिशत 27.09 प्रतिशत था.</p>
<p><strong>सर्वाधिक और न्यूनतम मतदान प्रतिशत</strong><br />
धुबरी (असम) में सबसे अधिक 92.3 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) में केवल 38.7 प्रतिशत मतदान हुआ.</p>
<p><strong>मतदान केंद्रों की स्थिति</strong><br />
इस बार मतदान केंद्रों की संख्या में वृद्धि देखी गई है. 2024 में 10,52,664 मतदान केंद्र बनाए गए, जो 2019 के मुकाबले 1.42 प्रतिशत अधिक हैं. सर्वाधिक मतदान केंद्र उत्तर प्रदेश रहा जहां 1,62,069 मतदान केंद्र स्थापित किए गए. सबसे कम मतदान केंद्र वाला राज्य/केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप, जहां केवल 55 मतदान केंद्र थे. 2024 में मतदान केंद्रों की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि बिहार में हुई, जहां 4739 नए मतदान केंद्र जोड़े गए. इसके बाद पश्चिम बंगाल में 1731 मतदान केंद्रों का इज़ाफा हुआ.</p>
<p><strong>नामांकन प्रक्रिया</strong><br />
2024 में कुल 12,459 नामांकनों में से 8,360 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा. मलकाजगिरी (तेलंगाना) में सबसे अधिक 114 नामांकनों के साथ सबसे बड़ा आंकड़ा दर्ज हुआ, जबकि डिब्रूगढ़ (असम) में केवल 3 नामांकनों के साथ सबसे कम हुआ. हालांकि, सूरत को छोड़कर यह आंकड़ा था.</p>
<p><strong>महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी</strong><br />
2024 में महिला मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई. महिला मतदाताओं का प्रतिशत 48.62% था, जो 2019 के मुकाबले थोड़ा अधिक था. महिला मतदाताओं की सर्वाधिक भागीदारी धुबरी (असम) में रही, जहां 92.17 प्रतिशत महिला मतदान हुआ. 2024 में चुनाव लड़ने वाली महिला उम्मीदवारों की संख्या 800 थी, जो 2019 में 726 थी. चुनाव लड़ने वाली महिला उम्मीदवारों की सबसे अधिक संख्या वाले राज्य: महाराष्ट्र (111), इसके बाद उत्तर प्रदेश (80) और तमिलनाडु (77) थे.</p>
<p><strong>समावेशी चुनाव</strong><br />
2024 में ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या 48,272 थी, जो 2019 के मुकाबले 23.5 प्रतिशत अधिक है. दिव्यांग मतदाताओं की संख्या भी 90,28,696 रही, जो 2019 के मुकाबले काफी बढ़ी है.</p>
<p><strong>2024 लोकसभा चुनाव परिणाम: एक नजर</strong><br />
इस चुनाव में छह राष्ट्रीय दलों ने भाग लिया और इनका कुल वोट शेयर 63.35 प्रतिशत रहा. 2024 में कुल 3,921 स्वतंत्र उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, जिनमें से केवल 7 उम्मीदवार ही चुनाव जीतने में सफल रहे, बाकी 3,905 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई.</p>
<p><strong>निर्विरोध निर्वाचन</strong><br />
इस बार सूरत (गुजरात) संसदीय क्षेत्र निर्विरोध रहा, जहां कोई भी प्रत्याशी चुनौती नहीं दे सका. यह घटनाक्रम भारतीय चुनावों के इतिहास में एक दिलचस्प उदाहरण है, जो राजनीतिक स्थिति और उम्मीदवारों के बीच मजबूत समझौते को दर्शाता है.</p>
<p><strong>क्या है चुनावी प्रक्रिया में बदलाव?</strong><br />
आंकड़े दिखाते हैं कि 2024 में चुनावी प्रक्रिया में कई सकारात्मक बदलाव हुए हैं, जैसे कि महिला और समावेशी मतदाताओं की भागीदारी में वृद्धि, मतदान केंद्रों में सुधार और पारदर्शिता की दिशा में उठाए गए कदम.</p>
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		<title>29 को बसंत सोरेन के मामले में ईसीआई में होगी अगली सुनवाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Jun 2022 19:09:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[रांची]]></category>
		<category><![CDATA[BasantSoren]]></category>
		<category><![CDATA[ECI]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची: दुमका के झामुमो विधायक सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के छोटे भई बसंत सोरेन के मामले में बुधवार को भारत निर्वाचन आयोग ईसीआई में सुनवाई हुई और सुनवाई के दौरान बसंत सोरेन के जबाब के आलोक में भाजपा द्वारा रिज्वाइंडर दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने पर ईसीआई द्वारा मामले की सुनवाई [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800080;"><strong>उदित वाणी, रांची:</strong> </span>दुमका के झामुमो विधायक सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के छोटे भई बसंत सोरेन के मामले में बुधवार को भारत निर्वाचन आयोग ईसीआई में सुनवाई हुई और सुनवाई के दौरान बसंत सोरेन के जबाब के आलोक में भाजपा द्वारा रिज्वाइंडर दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने पर ईसीआई द्वारा मामले की सुनवाई के लिए अगली तिथि 29 जून निर्धारित कर दी.</p>
<p>भाजपा की ओर अधिवक्ता शैलेश मोदियाल व कुमार जारश और बसंत सोरेन की ओर से अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा. ज्ञात हो कि ईसीआई में पिछली सुनवाई के दौरान बसंत सोरेन ने संशोधित जबाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था.</p>
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