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	<title>Diseases Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>Diseases Archives - Udit Vani</title>
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		<title>Jharkhand: सर्पदंश के मामले व मृत्यु अब अधिसूचित बीमारी</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/snakebite-notified-disease-health-department/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Mar 2026 18:26:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची: झारखंड सरकार द्वारा एक अहम फैसले के तहत सर्पदंश के मामलों एवं मृत्यु को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित बीमारी घोषित कर दिया गया है. इस संबंध में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है. यह कदम भारत सरकार के नेशनल एक्शन प्लान फॉर प्रिवेंशन एंड [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची:</span></strong> झारखंड सरकार द्वारा एक अहम फैसले के तहत सर्पदंश के मामलों एवं मृत्यु को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित बीमारी घोषित कर दिया गया है. इस संबंध में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है. यह कदम भारत सरकार के नेशनल एक्शन प्लान फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ स्नेकबाइट एनवेनोमिंग 2030 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से उठाया गया है.</p>
<p>जिसके तहत वर्ष 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों और विकलांगता में 50 प्रतिशत तक की कमी लाने का लक्ष्य है. गौरतलब है कि भारत में दुनिया के किसी भी देश की तुलना में सर्पदंश से होनेवाली मृत्यु की संख्या सर्वाधिक है. जहां प्रति वर्ष लगभग 3-4 मिलियन मामले सामने आते हैं और लगभग 58 हजार मौतें होती है.</p>
<p>झारखंड में मानसून और उमस भरी गर्मी के दौरान ग्रामीण, जनजातीय और कृषि क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाएं अचानक बढ़ जाती है और चिंता का विषय यह है कि लोग आधुनिक इलाज के बजाय झाड़ फूंक, ओझा-गुणी के कुचक्र में फंस जाते हैं. जो मृत्यु दर में वृद्धि का एक प्रमुख कारण है. यद्यपि इसे देखते हुए राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 से ही स्नेक बाइट प्रिवेंशन एंड कंट्रोल प्रोग्राम की शुरुआत की गई है. जिसके तहत मेडिकल कॉलेजों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन की उपलब्धता अनिवार्य की गई है.</p>
<p>क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट और स्टेट पब्लिक हेल्थ एक्ट के प्रावधानों के तहत अब सर्पदंश से संबंधित डेटा का संधारण आईडीएसपी-आईएचआईपी पोर्टल पर अनिवार्य रूप से किया जाना है. सभी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां एक विशेष पंजी संधारित करें और प्रत्येक माह की 5 व 20 तारीख तक पाक्षिक प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से सिविल सर्जन को सौंपें. इसके पश्चात जिले के सिविल सर्जन हर महीने की 10 तारीख तक समेकित रिपोर्ट विभाग को प्रेषित करेंगे.</p>
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		<title>राज्य के सभी जिला अस्पताल मॉडल एंटी रेबीज क्लिनिक के रूप में होंगे विकसित</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-nhm-anti-rabies-clinic-rabies-elimination/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 17:19:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Diseases]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : बर्ष 2030 तक राज्य को रेबीज मुक्त बनाने को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने दिशा निर्देश जारी किया है. जिसके तहत राज्य के सभी जिला अस्पतालों को मॉडल एंटी रेबीज क्लिनिक के रूप में विकसित किया जाएगा. उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सामुदायिक [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>बर्ष 2030 तक राज्य को रेबीज मुक्त बनाने को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने दिशा निर्देश जारी किया है. जिसके तहत राज्य के सभी जिला अस्पतालों को मॉडल एंटी रेबीज क्लिनिक के रूप में विकसित किया जाएगा. उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक एंटी रेबीज वैक्सीन और एंटी रेबीज सीरम की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है.</p>
<p>रेबीज के खतरों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाने का भी निर्णय लिया है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने इस संबंध में सभी जिलों के सिविल सर्जन को पत्र लिखकर एनिमल बाइट मैनेजमेंट और पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस को लेकर सख्त दिशा निर्देश जारी किया है. क्लिनिकों में बिशेष रूप से डेडिकेटेड वुंड वाशिंग एरिया बनाने का भी निर्देश दिया है. <span style="font-size: 14px; color: var(--c-contrast-800);">जहां कुत्ता या अन्य जानवर के काटने पर मरीज के घाव को कम से कम 15 मिनट तक बहते पानी और साबुन से धोने की व्यवस्था होगी.</span></p>
<p><span style="font-size: 14px; color: var(--c-contrast-800);"> स्वास्थ्य विभाग की ओर से अधिसूचना जारी कर राज्य में रेबीज को एक नोटिफायबल डिजीज के रूप में अधिसूचित भी किया गया है. अब राज्य में डॉग बाइट के हर मामले की रिपोर्टिंग अनिवार्य रूप से आईएचआईपी-आईडीएसपी पोर्टल पर की किया जाना है. टीकाकरण के नए प्रोटोकॉल के तहत अब इंट्रा-डर्मल रूट से 0.1 मिली की खुराक निर्धारित दिनों 0, 3, 7 और 28वें दिन पर दी जाएगी. गंभीर मामलों में डॉक्टरों की सलाह पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन का प्रयोग सुनिश्चित करने को कहा गया है. इस अभियान को जन आंदोलन बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता रथ भी रवाना की किया है. </span></p>
<p><span style="font-size: 14px; color: var(--c-contrast-800);">जो आगामी दो महीनों तक जिलों में घूम-घूम कर लोगों को जागरूक करेंगी. इसके अलावा नगर निकायों, पंचायती राज संस्थाओं और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से स्कूलों और ग्रामीण क्षेत्रों में बिशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे. सभी सिविल सर्जन को यह भी निर्देश दिया गया है कि अस्पतालों में तैनात मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ को एनिमल बाइट मैनेजमेंट के लिए बिशेष प्रशिक्षण दिया जाए ताकि मरीजों को त्वरित और सही उपचार मिल सके.</span></p>
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		<title>MTMH की ओर से पोटका में कैंसर जागरूकता शिविर का आयोजन</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/mtmh-cervical-breast-cancer-awareness/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 14:28:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[Campaign]]></category>
		<category><![CDATA[Diseases]]></category>
		<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[MTMH]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर : मेहरबाई टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल (एमटीएमएच) की ओर से शनिवार 31 जनवरी को पोटका के भाटिन पंचायत भवन में सर्वाइकल कैंसर के बारे में एक जागरूकता अभियान आयोजित किया गया, जिसमें आसपास के गांवों की 60 महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम के बारे में बताया गया. मेहरबाई टाटा हॉस्पिटल [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर :</span></strong> मेहरबाई टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल (एमटीएमएच) की ओर से शनिवार 31 जनवरी को पोटका के भाटिन पंचायत भवन में सर्वाइकल कैंसर के बारे में एक जागरूकता अभियान आयोजित किया गया, जिसमें आसपास के गांवों की 60 महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम के बारे में बताया गया. मेहरबाई टाटा हॉस्पिटल की कन्सलटेंट (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी) डॉ.स्नेहा झा ने महिलाओं को इस कैंसर के लक्षण और इसकी रोकथाम के बारे में बताया.</p>
<p>उन्होंने बताया कि कैंसर को जितना जल्द इलाज कराया जाय, उतना अच्छा है. मौके पर हॉस्पिटल के सीनियर एडमिनिस्ट्रेटर अमिताभ चटर्जी ने गांव की महिलाओं को बताया कि कैंसर का इलाज आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना के तहत होता है. उन्होंने बताया कि वे कैसे इन योजनाओं का लाभ लेकर अपना इलाज करा सकती है.</p>
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		<title>राज्य में 13 फरवरी तक चलेगा स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/leprosy-curable-jharkhand-awareness-campaign/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 17:31:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[awareness]]></category>
		<category><![CDATA[Campaign]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : कुष्ठ रोग अब लाइलाज नहीं है. यदि समय पर इसकी पहचान हो जाए तो इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है और सही समय पर ईलाज आरंभ हो जाने से दिव्यांगता से भी बचा जा सकता है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कुष्ठ [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span></strong> कुष्ठ रोग अब लाइलाज नहीं है. यदि समय पर इसकी पहचान हो जाए तो इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है और सही समय पर ईलाज आरंभ हो जाने से दिव्यांगता से भी बचा जा सकता है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम को लेकर गुरूवार को मीडिया कर्मियों के लिए आयोजित राज्यस्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में कही. उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोगियों को छूने या उनके साथ रहने से यह बीमारी नहीं फैलती है. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर 30 जनवरी से राज्य भर में स्पर्श कुष्ठ जागरूकता पखवाड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा.</p>
<p>13 फरवरी तक चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान गांव-गांव में व्यापक जागरूकता अभियान के माध्यम से आमजनों को कुष्ठ की रोकथाम और भ्रांतियों के बारे में बताया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस बर्ष का थीम भेदभाव का अंत और आत्मसम्मान को सुनिश्चित करना है. उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग खोज अभियान का द्वितीय चरण 9 मार्च से 23 मार्च तक चलेगा. पिछले बर्ष के अप्रैल महीने तक राज्यभर में 5267 कुष्ठ के नए मरीज मिले हैं. जबकि राज्यभर में 6587 कुष्ठ रोगियों का इलाज चल रहा है. अभियान निदेशक ने कहा कि कुष्ठ रोग का संपूर्ण इलाज, जांच एवं दवा राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है.</p>
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		<item>
		<title>राज्य में ही होगा अब 21 गंभीर बीमारियों का इलाज, बाहर जाने की नहीं पड़ेगी जरूरत</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-health-department-critical-diseases-treatment/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 17:11:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Diseases]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची: स्वास्थ्य विभाग द्वारा रिम्स व एमजीएम मेडिकल कॉलेज जमशेदपुर समेत राज्य के चार प्रमुख सरकारी अस्पतालों में ही 21 गंभीर बीमारियों का उपचार सुलभ कराने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है. स्वास्थ्य विभाग के अपरमुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने अपने कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान उक्त मेडिकल कॉलेजों [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची:</span> </strong>स्वास्थ्य विभाग द्वारा रिम्स व एमजीएम मेडिकल कॉलेज जमशेदपुर समेत राज्य के चार प्रमुख सरकारी अस्पतालों में ही 21 गंभीर बीमारियों का उपचार सुलभ कराने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है. स्वास्थ्य विभाग के अपरमुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने अपने कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान उक्त मेडिकल कॉलेजों के अलावा शहीद निर्मल महतो मेमोरियल कॉलेज एवं अस्पताल धनबाद व सदर अस्पताल रांची यह चिकित्सा व्यवस्था सुलभ कराने पर निर्णय लिया गया.</p>
<p>अपरमुख्य सचिव ने बैठक के दौरान कहा कि सभी 21 गंभीर बीमारियों का उपचार राज्य में ही हो और मरीजों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए राज्य से बाहर जाने की जरूरत न पड़े. उन्होंने कहा कि इसके लिए उक्त चारों सरकारी अस्पतालों में सारी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य के इन चार सरकारी अस्पतालों के साथ ही राज्य के चार बड़े निजी अस्पतालों में भी गंभीर बीमारियों का उपचार हो सकेगा तथा इन बीमारियों के इलाज के लिए आगे आने वाले अन्य अस्पतालों को भी सारी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.</p>
<p>अजय कुमार सिंह ने बताया कि इन सभी गंभीर बीमारियों का उपचार मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत ही हो सकेगा. इस योजना के तहत रोगों के उपचार के लिए निश्चित पैकेज का निर्धारण किया जा रहा है ताकि लोगों को इलाज के लिए परेशान नहीं होना पड़े. इसके साथ ही उन्होंने सिकल सेल एनीमिया के ट्रीटमेंट के लिए सदर अस्पताल रांची में व्यापक सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल का सीएमसी वेल्लोर से एमओयू होगा ताकि बोन मैरो ट्रांसप्लांट रांची में ही हो सके.</p>
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		<item>
		<title>National : &#8216;TB मुक्त भारत&#8217; का सपना साकार होने के करीब, PM Modi ने दी खास बधाई</title>
		<link>https://uditvani.in/politics/india-records-percent-decline-in-tb-cases-pm-modi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 15:29:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[Diseases]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[Pm modi]]></category>
		<category><![CDATA[TB]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली : भारत में टीबी के मामले 2015 में प्रति लाख जनसंख्या पर 237 से 2024 में 21 प्रतिशत घटकर 187 प्रति लाख हो गए हैं, जो वैश्विक स्तर पर देखी गई गिरावट की दर से लगभग दोगुना है. टीबी के खिलाफ लड़ाई में भारत को मिली इस उल्लेखनीय सफलता पर प्रधानमंत्री [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नई दिल्ली :</span> </strong>भारत में टीबी के मामले 2015 में प्रति लाख जनसंख्या पर 237 से 2024 में 21 प्रतिशत घटकर 187 प्रति लाख हो गए हैं, जो वैश्विक स्तर पर देखी गई गिरावट की दर से लगभग दोगुना है. टीबी के खिलाफ लड़ाई में भारत को मिली इस उल्लेखनीय सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी है.</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#8216;एक्स&#8217; पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि टीबी के खिलाफ भारत की लड़ाई उल्लेखनीय गति पकड़ रही है.</p>
<p>उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की नवीनतम वैश्विक क्षय रोग रिपोर्ट 2025 में बताया गया है कि भारत में 2015 से टीबी के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है और यह वैश्विक गिरावट दर से लगभग दोगुनी है. यह दुनिया में कहीं भी देखी गई सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है. उपचार कवरेज का विस्तार, मिसिंग केसों में कमी, और उपचार की सफलता में निरंतर वृद्धि भी उतनी ही उत्साहजनक है. मैं उन सभी को बधाई देता हूं जिन्होंने इस सफलता को प्राप्त करने के लिए काम किया है. हम एक स्वस्थ और स्वस्थ भारत सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.</p>
<p>भारत ने टीबी के कारण होने वाली मृत्यु दर में वैश्विक कमी (एचआईवी निगेटिव लोगों में टीबी से होने वाली मौतें) की तुलना में अधिक कमी हासिल की है.</p>
<p>इलाज कवरेज बढ़कर 92 प्रतिशत हो गया है, जिससे भारत अन्य उच्च-भार वाले देशों और वैश्विक सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज से आगे है. यह उपलब्धि न्यू केस-फाइंडिंग पॉलिसी और देखभाल तक विस्तारित पहुंच की सफलता को दर्शाती है. 2024 में 26.18 लाख से अधिक टीबी रोगियों की पहचान की गई.</p>
<p>टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत उपचार की सफलता दर बढ़कर 90 प्रतिशत हो गई है, जो वैश्विक उपचार सफलता दर 88 प्रतिशत से आगे है.</p>
<p>दिसंबर 2024 में शुरू हुए टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत, एआई-सक्षम रिपोर्टिंग वाले हाथ में पकड़े जाने वाले एक्स-रे उपकरण, विस्तारित एनएएटी बुनियादी ढांचा और जनभागीदारी जैसी नई तकनीकों के जरिए 24.5 लाख रोगियों का निदान किया गया है, जिनमें 8.61 लाख लक्षणहीन टीबी के मामले शामिल हैं.</p>
<p>पिछले 9 वर्षों में टीबी कार्यक्रम का वार्षिक बजट दस गुना बढ़ा है. निक्षय पोषण योजना के तहत अप्रैल 2018 से 1.37 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 4,406 करोड़ रुपए से अधिक की राशि वितरित की गई है.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<item>
		<title>विश्व मधुमेह दिवस: क्या है डायबिटीज, क्यों युवाओं में बढ़ रहे इसके मामले</title>
		<link>https://uditvani.in/lifestyle/world-diabetes-day-importance-awareness-and-global-diabetes/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 07:00:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Lifestyle]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली : मधुमेह यानी डायबिटीज ऐसी समस्या है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक को प्रभावित कर रही है और साल दर साल डायबिटीज के मामले बढ़ते जाते रहे हैं. मधुमेह के प्रसार को रोकने और उसके निदान के लिए हर साल 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाता [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नई दिल्ली :</span></strong> मधुमेह यानी डायबिटीज ऐसी समस्या है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक को प्रभावित कर रही है और साल दर साल डायबिटीज के मामले बढ़ते जाते रहे हैं.</p>
<p>मधुमेह के प्रसार को रोकने और उसके निदान के लिए हर साल 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाता है. मधुमेह को लेकर जागरूकता शहरी से लेकर ग्रामीण इलाकों में दी जाती है क्योंकि कुछ लोग इस समस्या को बीमारी नहीं मानते और कुछ लोगों को पता ही नहीं है कि वे इस बीमारी से पीड़ित हैं.</p>
<p>सबसे पहले विश्व मधुमेह दिवस साल 1991 में मनाया गया था. इसे अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह महासंघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मिलकर लोगों में मधुमेह के प्रति जागरूकता और निदान के लिए शुरू किया था. हर साल देश में मधुमेह के आंकड़े बढ़ रहे हैं, और साल 2025 तक विश्व भर में हर 3 में से 1 व्यक्ति को मधुमेह है और 4 में से 1 व्यक्ति को पता ही नहीं है कि वो प्रीडायबिटीज का शिकार है.</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह महासंघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन के डेटा की मानें तो वयस्क आबादी इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित हो रही है. ज्यादा तनाव और खराब जीवनशैली की वजह से दुनिया भर में हर 9 में से 1 वयस्क इस बीमारी का शिकार है और 40 फीसदी युवाओं को पता ही नहीं कि वे इस बीमारी से जूझ रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो 2025 तक दुनिया भर में लगभग 830 मिलियन लोगों को मधुमेह है और आगे भी ये आंकड़ा बढ़ने वाला है.</p>
<p>विश्व मधुमेह दिवस पर सबसे पहले ये जानते हैं कि मधुमेह क्या है. खाना खाने के बाद हमारा शरीर ग्लूकोज बनाता है, जो शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है, लेकिन ग्लूकोज को ऊर्जा के लिए रक्त और कोशिकाओं तक पहुंचाने के लिए इंसुलिन हार्मोन की जरूरत पड़ती है. पैंक्रियाज इंसुलिन बनाने का काम करता है, और अगर ये ठीक तरीके से इंसुलिन नहीं बनाता है, तो ग्लूकोज की खपत कोशिकाओं तक अच्छे से नहीं पहुंच पाती है और रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है. इस स्थिति को मधुमेह कहते हैं.</p>
<p>मधुमेह में टाइप 1 डायबिटीज और दूसरी टाइप 2 डायबिटीज सबसे ज्यादा देखी जाती है. गर्भावस्था के समय भी मधुमेह की समस्या हो सकती है. टाइप 2 डायबिटीज और गर्भवती होने के समय होने वाले मधुमेह को समय रहते काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन टाइप 1 डायबिटीज एक खतरनाक स्टेज है, जिसमें पैंक्रियाज इंसुलिन बनाना बिल्कुल बंद कर देता है. इस स्थिति में किडनी, आंखों और दिल पर दबाव बना रहता है.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<title>Jamshedpur-Rural : हाता में मानवता शर्मसार, विक्षिप्त का सुधि लेने वाला कोई नहीं</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/potka/mentally-ill-man-struggling-for-life-at-potka/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Oct 2025 10:43:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पोटका]]></category>
		<category><![CDATA[Diseases]]></category>
		<category><![CDATA[old]]></category>
		<category><![CDATA[Potka]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, पोटका : पोटका थाना क्षेत्र के हाता स्थित दुर्गा मंदिर तथा काली मंदिर परिसर में पिछले चौबीस घंटे से एक विक्षिप्त जीवन और मौत से जूझ रहा है. लेकिन उसकी सुधी लेने वाला अभी तक कोई नहीं आया है. प्रतीत होता है कि वह किसी बीमारी से ग्रसित है. मानवता यहां शर्मशार हो [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, पोटका :</span> </strong>पोटका थाना क्षेत्र के हाता स्थित दुर्गा मंदिर तथा काली मंदिर परिसर में पिछले चौबीस घंटे से एक विक्षिप्त जीवन और मौत से जूझ रहा है. लेकिन उसकी सुधी लेने वाला अभी तक कोई नहीं आया है. प्रतीत होता है कि वह किसी बीमारी से ग्रसित है. मानवता यहां शर्मशार हो रहा है. न ही प्रशासन के लोग न ही किसी स्वयं सेवी संस्था के प्रतिनिधि तथा न ही कोई समाजसेवी उस विक्षिप्त का हाल लेने के लिए आगे आए है.</p>
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		<title>महाराष्ट्र में मंकीपॉक्स की एंट्री, धुले में मिला पहला मरीज, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/first-monkeypox-case-reported-in-dhule-maharashtra/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Oct 2025 17:06:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[Diseases]]></category>
		<category><![CDATA[Health]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, धुले :  दुनियाभर में कहर बरपा रहे मंकीपॉक्स ने अब महाराष्ट्र में भी दस्तक दे दी है. राज्य में इस संक्रमण का पहला मामला धुले जिले में सामने आया है, जिससे जिले में हड़कंप मच गया है. स्वास्थ्य विभाग तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया है. 2 अक्टूबर को सऊदी अरब से लौटे [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, धुले :</span> </strong> दुनियाभर में कहर बरपा रहे मंकीपॉक्स ने अब महाराष्ट्र में भी दस्तक दे दी है. राज्य में इस संक्रमण का पहला मामला धुले जिले में सामने आया है, जिससे जिले में हड़कंप मच गया है. स्वास्थ्य विभाग तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया है.</p>
<p>2 अक्टूबर को सऊदी अरब से लौटे 45 वर्षीय एक व्यक्ति में मंकीपॉक्स संक्रमण की पुष्टि हुई. इस मरीज को धुले के सरकारी हिरे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां दोनों जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आए हैं.</p>
<p>चिकित्सा अधिकारियों ने मरीज को अलग आइसोलेशन वॉर्ड में स्थानांतरित कर तुरंत इलाज शुरू किया. राहत की बात यह है कि मरीज के परिवार के सदस्यों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई, जिससे स्वास्थ्य विभाग ने थोड़ी राहत की सांस ली.</p>
<p>बता दें कि मंकीपॉक्स एक बेहद संक्रामक वायरल बीमारी है, जो इंसानों और जानवरों दोनों को प्रभावित कर सकती है. संक्रमित व्यक्ति की त्वचा, कपड़े, बिस्तर या तौलिया के संपर्क में आने से संक्रमण फैल सकता है. इसके अलावा संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से भी यह वायरस फैल सकता है.</p>
<p>मंकीपॉक्स के लक्षण चेचक से मिलते-जुलते होते हैं, लेकिन इसके असर की गंभीरता चेचक से कम होती है. आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति में सिरदर्द, बुखार, मांसपेशियों में दर्द, थकान, कमजोरी और लिम्फ नोड्स में सूजन जैसे लक्षण नजर आते हैं.</p>
<p>इसके साथ ही शरीर पर दाने या चकत्ते दिखाई देते हैं, जो धीरे-धीरे फफोले में बदल जाते हैं. मंकीपॉक्स तेजी से फैलने वाला वायरस है और कई देशों में इसका कहर देखा गया है.</p>
<p>भारत में अब तक स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए सावधानी बेहद जरूरी है. भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और विदेश यात्रा से लौटने के बाद स्वास्थ्य की निगरानी करें. साथ ही संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, बार-बार हाथ धोएं और अपना व्यक्तिगत सामान साझा करने से बचें.</p>
<p>यदि किसी व्यक्ति में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और जांच कराना जरूरी है. विदेश यात्रा के बाद यदि कोई लक्षण महसूस हों तो स्वयं को आइसोलेट करना चाहिए. इसके अलावा डॉक्टर की सलाह के अनुसार मंकीपॉक्स से बचाव के लिए वैक्सीन भी लगवाई जा सकती है.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<title>केरल में 19 लोगों की जान लेने वाला ब्रेन-ईटिंग अमीबा आखिर है क्या?</title>
		<link>https://uditvani.in/kam-ki-baat/kerala-brain-eating-amoeba-outbreak/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Sep 2025 13:02:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[काम की बात]]></category>
		<category><![CDATA[Diseases]]></category>
		<category><![CDATA[Health]]></category>
		<category><![CDATA[Kerala]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली : डॉक्टरों का कहना है कि दूषित पानी के संपर्क में आने से ब्रेन-ईटिंग अमीबा शरीर में प्रवेश करता है, फिर इससे व्यक्ति संक्रमित हो जाता है. केरल में इस अमीबा के कारण तीन साल की उम्र के बच्चे सहित 19 लोगों की मौत हो गई है. चिकित्सकों ने लोगों से [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नई दिल्ली :</span></strong> डॉक्टरों का कहना है कि दूषित पानी के संपर्क में आने से ब्रेन-ईटिंग अमीबा शरीर में प्रवेश करता है, फिर इससे व्यक्ति संक्रमित हो जाता है. केरल में इस अमीबा के कारण तीन साल की उम्र के बच्चे सहित 19 लोगों की मौत हो गई है. चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि वे तालाबों और जलाशयों में तैरने से बचें.</p>
<p>अमीबिक मेनिन्जाइटिस एक दुर्लभ लेकिन घातक सेंट्रल नर्वस सिस्टम इंफेक्शन है जो मीठे पानी, तालाबों और नदियों में पाए जाने वाले फ्री-लिविंग अमीबा, नेगलेरिया फाउलेरी, जिसे दिमाग खाने वाला अमीबा भी कहा जाता है, के कारण होता है.</p>
<p>केरल में इस मस्तिष्क संक्रमण के 61 पुष्ट मामले और 19 मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें तीन महीने के शिशु से लेकर 91 वर्षीय वृद्ध तक शामिल हैं.</p>
<p>कोझिकोड सरकारी मेडिकल कॉलेज में निपाह अनुसंधान के लिए बने केरल स्थित हेल्थ सेंटर के प्रोफेसर और नोडल अधिकारी डॉ. टीएस अनीश ने आईएएनएस को बताया, &#8220;अमीबायोसिस या अमीबिक मेनिन्जाइटिस एक दुर्लभ बीमारी है, जिसको डायग्नोस करना बहुत मुश्किल है. यह एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) में से एक है, जिसका पता लगाना बहुत मुश्किल है. इस स्थिति का पता लगाने के लिए लगभग पूरी दुनिया में कोई समर्पित डायग्नोस्टिक तकनीक इस्तेमाल नहीं की जाती है.&#8221;</p>
<p>हालांकि, निपाह प्रकोप के कारण एक समर्पित प्रणाली विकसित हुई है जो अधिक से अधिक एईएस मामलों का निदान कर सकती है. विशेषज्ञ ने कहा कि इससे अमीबिक मैनिंजाइटिस के मामलों में वृद्धि देखी गई.</p>
<p>उन्होंने संक्रमणों की बढ़ती संख्या के लिए ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया.</p>
<p>अनीश ने कहा, &#8220;जलाशयों या तालाब के पानी का तापमान बढ़ने पर थर्मोफिलिक जीव निश्चित रूप से बढ़ते हैं, और हमारी वॉटर बॉडीज में प्रदूषण की समस्या भी काफी है.&#8221;</p>
<p>विशेषज्ञ ने यह भी बताया कि &#8220;केरल में इस बीमारी से होने वाली मृत्यु दर कम है; यह दुनिया भर में दर्ज अमीबिक मैनिंजाइटिस की सबसे कम दरों में से एक है.&#8221;</p>
<p>अनीश ने कहा, &#8220;नेग्लेरिया फाउलेरी अमीबा के कारण होने वाले अमीबिक मैनिंजाइटिस की वैश्विक मृत्यु दर लगभग 97 से 98 प्रतिशत है. किसी भी प्रकार के अमीबिक मैनिंजाइटिस की मृत्यु दर ऊंची होती है, शायद 60 से 70 प्रतिशत तक, लेकिन केरल में यह लगभग केवल 20 प्रतिशत है. ऐसा शायद समय पर पता लगने के कारण है.&#8221;</p>
<p>शहर के एक प्रमुख अस्पताल की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अंशु रोहतगी ने इस बीमारी के प्रकोप को &#8216;तेजी से बढ़ते शहरीकरण, क्लोरिनरहित और कीटाणुयुक्त पानी में तैरने&#8217; से जोड़ा.</p>
<p>उन्होंने कहा, &#8220;यह नेग्लेरिया फाउलेरी अमीबा नाक के छिद्रों, नाक के वायुमार्गों से प्रवेश करता है और मस्तिष्क में जाकर अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस का कारण बनता है.&#8221;</p>
<p>स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अगर समय रहते पता चल जाए तो यह पूरी तरह से इलाज योग्य है.</p>
<p>रोहतगी ने आगे कहा, &#8220;अगर इस मेनिंगोएन्सेफलाइटिस का इलाज नहीं किया जाता है, तो यह 100 प्रतिशत घातक है. लेकिन, केरल में, क्योंकि संदेह का स्तर बहुत ऊंचा है, इसलिए ज्यादातर मामलों का जल्दी निदान हो रहा है.&#8221;</p>
<p>रोहतगी ने बताया कि संक्रमण की पहचान करने के लिए सबसे जरूरी है लम्बर पंक्चर या सीएसएफ (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड) जांच—एक ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया जिसमें रीढ़ की हड्डी की नली में सुई डाली जाती है.</p>
<p>इसके अलावा, अनीश ने कहा कि &#8220;यह बीमारी इतनी दुर्लभ नहीं है, लेकिन भारत के अधिकांश हिस्सों में इसका निदान बहुत कम ही होता है.&#8221;</p>
<p>उन्होंने चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) में 2014 और 2022 के बीच किए गए एक अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें संदिग्ध मेनिंगोएन्सेफलाइटिस वाले 156 रोगियों के नमूने में अमीबिक मेनिन्जाइटिस की जांच की गई थी.</p>
<p>पीसीआर ने 156 रोगियों के नमूनों में से 11 में फ्री लिविंग अमीबा (एफएलए) का पता लगाया था.</p>
<p>अनीश ने बताया कि ऐसे मरीज जिन्हें पहले सीएसएफ राइनोरिया (जिसमें सामान्यतः मस्तिष्क के आसपास का द्रव नाक से रिसता है) हो चुका है, वे इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं. जिन लोगों ने मस्तिष्क या खोपड़ी में कोई शल्य चिकित्सा करवाई है, उन पर भी खतरा मंडराता है.</p>
<p>विशेषज्ञों ने बताया कि यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता. अमीबा युक्त पानी निगलने से भी यह नहीं होता. उन्होंने लोगों से उन तालाबों या नदियों में तैरने से बचने का आग्रह किया जिनके प्रदूषित होने की आशंका है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बिना उबले पानी से नथुने धोने से भी बचें.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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