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	<title>Climate Change Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>Climate Change Archives - Udit Vani</title>
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		<title>YI Jamshedpur Members Visit GreenSole Skill Center In Noamundi</title>
		<link>https://uditvani.in/english-news/yi-jamshedpur-greensole-shoe-donation-climate-initiative/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Jan 2025 17:44:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[English News]]></category>
		<category><![CDATA[Campaign]]></category>
		<category><![CDATA[Climate Change]]></category>
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		<category><![CDATA[YI]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>UditVani, Jamshedpur : A team of Young Indians (Yi) Jamshedpur chapter visited the GreenSole Skill Center in Noamundi, as part of climate change initiatives. The Yi members donated 10 boxes of used shoes to support GreenSole&#8217;s exceptional mission of refurbishing discarded footwear into comfortable slippers for those in need. The initiative strongly resonates with the [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">UditVani, Jamshedpur :</span></strong> A team of Young Indians (Yi) Jamshedpur chapter visited the GreenSole Skill Center in Noamundi, as part of climate change initiatives.</p>
<p>The Yi members donated 10 boxes of used shoes to support GreenSole&#8217;s exceptional mission of refurbishing discarded footwear into comfortable slippers for those in need.</p>
<p>The initiative strongly resonates with the principles of 3R&#8217;s</p>
<p>&#8211; Reduce: Minimizing waste by diverting used shoes from landfills.</p>
<p>&#8211; Reuse: Extending the life of footwear by repurposing them.</p>
<p>&#8211; Recycle: Transforming old shoes into new products that benefit underprivileged communities.</p>
<p>&#8221; By collaborating with GreenSole, we are contributing to a sustainable future while empowering marginalized groups with skills and employment opportunities, &#8221; said a YI member who was part of the team adding that together they take meaningful steps toward environmental conservation and community welfare.</p>
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		<title>जलवायु बचाने के लिए आज से माइनस 40 डिग्री सेल्सियस में अनशन करेंगे सोनम वांगचुक</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/sonam-wangchuk-will-fast-in-40-degree-celsius-to-save-the-climate/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Jan 2023 14:41:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Climate]]></category>
		<category><![CDATA[Climate Change]]></category>
		<category><![CDATA[NarendraModi]]></category>
		<category><![CDATA[RepublicDay]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली:  लद्दाख के समाज सुधारक सोनम वांगचुक 26 जनवरी से माइनस 40 डिग्री सेल्सियस में जलवायु के लिए अनशन करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से लद्दाख के ग्लेशयिरों को विलुप्त होने से बचाने का आग्रह किया है। ऑल इज नॉट वेल, 3 इडयिट्स वाले सोनम वांगचुक ने हिमालयी क्षेत्र खासकर लद्दाख के ग्लेशियरों [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://uditvani.in/"><strong>उदित वाणी, नई दिल्ली:</strong></a>  लद्दाख के समाज सुधारक सोनम वांगचुक 26 जनवरी से माइनस 40 डिग्री सेल्सियस में जलवायु के लिए अनशन करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से लद्दाख के ग्लेशयिरों को विलुप्त होने से बचाने का आग्रह किया है। ऑल इज नॉट वेल, 3 इडयिट्स वाले सोनम वांगचुक ने हिमालयी क्षेत्र खासकर लद्दाख के ग्लेशियरों के लिए गहरी चिंता जताई है। वांगचुक ने अपने यूट्यूब चैनल के जरिए 13 मिनट का वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने देश व दुनिया के लोगों से पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील लद्दाख का मदद करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही उन्होंने ट्वीटर के माध्यम से उस वीडियो को शेयर किया और प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा है कि लद्दाख में सब कुछ ठीक नहीं है! अपने नए वीडियो में मैं अपील करता हूं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हस्तक्षेप करें और पारिस्थितिकी-नाजुक लद्दाख को सुरक्षा प्रदान करें। सरकार और दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए मैं 26 जनवरी से खारदुंगला दर्रे पर 18000 फीट -40 डिग्री सेल्सियस पर 5 दिन अनशन पर बैठने की योजना बना रहा हूं।</p>
<p>सोनम वांगचुक का कहना है कि वह चाहते हैं कि गणतंत्र दिवस पर उनका मैसेज प्रधानमंत्री मोदी और लोगों तक पहुंचे, जिसके लिए खारदुंगला दर्रे पर पांच दिन के उपवास (सांकेतिक अनशन) पर बैठुंगा।</p>
<p>वांगचुक ने बताया कि अपने अनशन के दौरान वह 18,000 फीट की ऊंचाई पर खारदुंगला की चोटी पर कैंप करेंगे, जहां तापमान माइनस 40 डिग्री सेल्सियस रहेगा। कार्बन-तटस्थ तेजी से वह गर्म पानी और सौर पैनलों का यूज करके उत्पन्न बिजली और एक सौर बिस्तर का यूज करेंगे। वांगचुक ने एक वीडियो में कहा कि सौर दुनिया के लिए रास्ता है और यही वह है जिसे मैं शायद दुनिया के पहले जलवायु-तटस्थ उपवास पर दिखाने की कोशिश करूंगा।</p>
<p><span style="color: #800080;"><strong>जानें कौन हैं सोनम वांगचुक</strong></span><br />
बता दें कि सोनम वांगचुक का जन्म 1966 में हुआ था। वह एक मैकेनिकल इंजीनियर और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख के निदेशक भी हैं। उन्हें 2018 में मैगसेसे अवॉर्ड मिला था। 2009 की फिल्म थ्री इडियट्स में आमिर खान का रोल पुनसुख वांगडू, वांगचुक के व्यक्तित्व से प्रभावित था। वांगचुक लद्दाख में स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख बनाने के लिए जाने जाते हैं। इसका कैम्प सौर ऊर्जा पर चलता है।</p>
<p><span style="color: #800080;"><strong>आनंद महिद्रा ने वांगचुक को बताया क्लाइमेट हीरो</strong></span><br />
सूर्य की शक्ति का प्रदर्शन करते हुए वांगचुक ने लद्दाख में एक मिट्टी के घर के अंदर से एक वीडियो साझा किया, जहां झोपड़ी के अंदर का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस था, जबकि बाहर का तापमान माइनस 20 डिग्री सेल्सियस था।</p>
<p>अनशन की तैयारी के लिए वांगचुक ने माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तापमान में 11,500 फीट की ऊंचाई पर फयांग पर टेस्ट-रन किया। टेस्ट रन के बारे में बताते हुए वांगचुक ने कहा कि एक टेस्ट रन सफल! माइनस 20 डिग्री सेल्सियस पर सब ठीक है।</p>
<p>26 जनवरी से शुरू होकर खारदुंगला में 18,000 फीट माइनस 40 डिग्री सेल्सियस पर मेरी जलवायु के करीब पहुंच रहा है&#8230;यह परीक्षण मेरी छत पर 11,500 फीट पर था। इसी ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए बिजनेस मैन आनंद महिद्रा ने कहा &#8216;यह आदमी क्लाइमेट हीरो है।</p>
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		<title>भीषण गर्मी की चपेट में उत्तरी भारत, जानिए इसके पीछे का विज्ञान</title>
		<link>https://uditvani.in/manthan/northern-india-in-the-grip-of-severe-heat-know-the-science-behind-it/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 May 2022 19:43:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मंथन]]></category>
		<category><![CDATA[Climate Change]]></category>
		<category><![CDATA[Heat]]></category>
		<category><![CDATA[Summer]]></category>
		<category><![CDATA[temperature]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मानव गतिविधियों की वजह से हो रहे ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हो या अन्यथा, फिलहाल मुद्दा यह है कि उत्तरी भारत औसतन 45 डिग्री सेल्सियस के दैनिक तापमान के साथ भीषण गर्मी की चपेट में है. ऐसा माना जा रहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के वैश्विक पैटर्न में परिवर्तन आएगा और [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मानव गतिविधियों की वजह से हो रहे ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हो या अन्यथा, फिलहाल मुद्दा यह है कि उत्तरी भारत औसतन 45 डिग्री सेल्सियस के दैनिक तापमान के साथ भीषण गर्मी की चपेट में है. ऐसा माना जा रहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के वैश्विक पैटर्न में परिवर्तन आएगा और भारत को और अधिक भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार ग्रीष्म लहर (लू) उस स्थिति को कहते हैं जब किसी दिन का तापमान लंबे समय के औसत तापमान से 4.5 से 6.4 डिग्री अधिक होता है (या मैदानी क्षेत्रों में 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक और तटीय क्षेत्रों में 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो). उदाहरण के लिए, दिल्ली में 1981 से 2010 के दौरान मई का औसत उच्च तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस रहा करता था लेकिन वर्तमान में 28 अप्रैल से प्रतिदिन का तापमान 44 डिग्री सेल्सियस है (औसत अधिकतम तापमान से 4.5 डिग्री सेल्सियस अधिक). ये महज आंकड़ नहीं हैं बल्कि इनका सम्बंध मानव शरीर, जन स्वास्थ्य और जलवायु संकट के इस दौर में शासन व्यवस्था से जुड़ा है.</p>
<h3>वेट-बल्ब तापमान भूमध्य रेखा की ओर जाने पर तेजी बढ़ रहा:</h3>
<p>इस संदर्भ में वेट-बल्ब तापमान महत्वपूर्ण है. वेट-बल्ब तापमान वह न्यूनतम तापमान है जो कोई वस्तु गर्म वातावरण में हासिल कर सकती है जब साथ-साथ उसे पानी के वाष्पन से ठंडा किया जा रहा हो. जब आसपास का वातावरण गर्म हो और वस्तु की सतह से पानी वाष्पित हो रहा हो तो उनके बीच एक साम्य स्थापित होता है और वस्तु के तापमान में कमी आती है. अपनी त्वचा का उदाहरण लीजिए. किसी गर्म दिन में जब आपकी त्वचा की सतह से पसीना वाष्पीकृत होता है तब आपकी त्वचा कम-से-कम जितने तापमान तक ठंडी हो सकती है उसे वेट-बल्ब तापमान कहा जाता है. यह तापमान सिर्फ साधारण तापमापी से नापा गया तापमान नहीं बल्कि वाष्पन की वजह से आई या आ सकने वाली गिरावट को दर्शाता है.<br />
यहां एक बात ध्यान देने योग्य है. किसी सतह से पानी का वाष्पन सिर्फ तापमान पर निर्भर नहीं करता बल्कि आसपास की हवा में मौजूद नमी की मात्रा पर भी निर्भर करता है. यदि आसपास की हवा बहुत अधिक नम है, तो सतह से पानी का वाष्पन कम होगा और उस वस्तु के तापमान में उतनी कमी नहीं आ पाएगी जितनी शुष्क हवा में आती. मौसम का अध्ययन करने वाले एक संस्थान मेटियोलॉजिक्स के अनुसार 26 अप्रैल 2022 को सुबह साढ़े आठ बजे दक्षिण दिल्ली का वेट-बल्ब तापमान लगभग 19.5 डिग्री सेल्सियस था जो 29 अप्रैल को ब?कर 22 डिग्री सेल्सियस हो गया. ये दोनों ही तापमान फिलहाल सुरक्षित सीमा में हैं. लेकिन 32 डिग्री सेल्सियस के वेट-बल्ब तापमान में थोड़ी देर भी बाहर रहना हानिकारक हो सकता है. वेट-बल्ब तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो, तो पर्याप्त पानी पीने और कोई शारीरिक कार्य किए बगैर भी कुछ घंटे बाहर छाया में गुजारना तक जानलेवा हो सकता है. एशिया के मौसम मानचित्र में दिखेगा कि वेट-बल्ब तापमान भूमध्य रेखा की ओर जाने पर काफी तेजी से बढ़ता है और साथ ही भारत के पश्चिमी तट की तुलना में पूर्वी तट पर अधिक होता है. यह मुख्य रूप से नमी के कारण होता है. वातावरण में जितनी अधिक नमी होगी, उतना ही कम पसीना वाष्पित हो पाएगा और शरीर भी उतना ही कम ठंडा हो पाएगा. इसलिए किसी क्षेत्र में मात्र हवा का तापमान जानना पर्याप्त नहीं होता बल्कि आर्द्रता और वेट-बल्ब की रीडिंग भी महत्वपूर्ण है. 2020 में कोलंबिया युनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दावा किया था कि पृथ्वी की सतह के कई हिस्सों में गर्मी और आर्द्रता के कारण स्थिति जानलेवा बन चुकी है जबकि पहले ऐसा माना जा रहा था कि यह स्थिति सदी के अंत में आएगी. शोधकर्ताओं द्वारा 1979 से 2017 तक एकत्र किए गए आंकड़ के अनुसार पूर्वी तटवर्ती और उत्तर-पश्चिमी भारत पर सबसे अधिक वेट-बल्ब तापमान होने की संभावना है. ज़्यादा व्यापक स्तर पर देखें तो मध्य अमेरिका, उत्तरी अफ्रीका, मध्य-पूर्व, उत्तर-पश्चिमी और दक्षिण-पूर्वी भारत तथा दक्षिण पूर्वी एशिया के कुछ हिस्सों में अधिकतम वेट-बल्ब तापमान 35 डिग्री सेल्सियस की सीमा तक 2010 में ही पहुंच चुका है.</p>
<h3>रहने योग्य नही रह जाएंगे भारत के कई क्षेत्र:</h3>
<p>ग्लोबल वार्मिंग से न सिर्फ तापमान में बढ़ोतरी हो रही है बल्कि समुद्र स्तर में भी वृद्धि हो रही है. इन दोनों समस्याओं के चलते भारत के कई क्षेत्र रहने योग्य नही रह जाएंगे. कब और कौन-से क्षेत्र निर्जन होंगे यह कई कारकों पर निर्भर करता है. गौरतलब है कि भारत के प्रभावित क्षेत्र में कई ऐसे राज्य शामिल हैं जहां जन स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर और अपर्याप्त है, तथा चिकित्सा कर्मियों की कमी है. इन राज्यों की आय भी बहुत कम है और अधिकांश निवासी बाहरी काम करने वाले दिहाड़ी मज़दूर हैं और बहुत कम सुविधाओं के साथ जीवन यापन कर रहे हैं. इन गर्म हवाओं के दौरान बाहर काम करना उनके लिए काफी जोखिम भरा होगा. इसे विडंबना ही कहेंगे कि जलवायु परिवर्तन में जिस समूह का समसे कम योगदान हैं उसे इसका सबसे अधिक खामियाजा भुगतना पड़ रहा है.</p>
<h3>हीट एक्शन प्लान:</h3>
<p>इस समस्या के समाधान के लिए &#8216;हीट एक्शन प्लान तैयार किया गया है जिसको सबसे पहले 2013 में अहमदाबाद में अपनाया गया था. तब से लेकर अब तक 30-40 शहर इस योजना को अपना चुके हैं जिसमें जागरूकता अभियान, चेतावनी प्रणाली और शीतलन व्यवस्था की स्थापना तथा कमजोर वर्गों में गर्मी के जोखिम को कम करने के प्रयास किए गए हैं. देखा जाए तो गर्मी के शहरी टापू जैसे प्रभाव के कारण शहरी क्षेत्रों की गर्म हवाएं और भी घातक हो गई हैं. ये प्रयास सराहनीय हैं लेकिन पर्याप्त नहीं हैं. गर्म हवाओं की बात करते हुए आर्द्रता को शामिल करना अनिवार्य है क्योंकि वह वेट-बल्ब तापमान में वृद्धि करती है. फिलहाल, आईपीसीसी के अनुसार भारत में वेट-बल्ब तापमान शायद ही 30 डिग्री सेल्सियस को पार कर रहा है लेकिन इसमें जल्द ही परिवर्तन की संभावना है. (स्रोत फीचर्स)</p>
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