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	<title>Chief Justice MS Sonak Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>Chief Justice MS Sonak Archives - Udit Vani</title>
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		<title>Jharkhand : जेलों में आधी या एक तिहाई सजा काटनेवाले कैदियों के मामले में दायर PIL पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/high-court-hearing-release-prisoners-half-sentence-jail-list/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:50:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Chief Justice MS Sonak]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand Prisoners Release]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में राज्य के विभिन्न जेलों में निर्धारित सजा का आधा या एक तिहाई सजा काटने वाले कैदियों की रिहाई के मामले में दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में राज्य [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span></strong> झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में राज्य के विभिन्न जेलों में निर्धारित सजा का आधा या एक तिहाई सजा काटने वाले कैदियों की रिहाई के मामले में दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में राज्य सकार को प्रार्थी के सुझावों पर पक्ष रखने का निर्देश दिया.</p>
<p>मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी. वहीं सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई करीब 1000 कैदियों की सूची पर लिखित जबाब और सुझाव अदालत में पेश किया गया. जबकि राज्य सरकार द्वारा अदालत के पूर्व आदेश के अनुपालन में शपथपत्र दाखिल कर ऐसे कैदियों का ब्योरा पेश किया गया है, जिन कैदियों ने अपनी सजा का आधा या एक-तिहाई हिस्सा पूरा कर लिया है. जिसमें बताया गया है कि घाघीडीह जमशेदपुर जेल में 26, चाईबासा में 202, साकची यजेएसईद्ध जेल में दो, सरायकेला में 25 व घाटशिला में 27 समेत विभिन्न जेलों में 1000 ऐसे कैदी हैं, जिन्होंने आधी या एक तिहाई सजा काट लिया है.</p>
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		<title>झारखंड में ई-वेस्ट निपटारे पर हाईकोर्ट सख्त, SOP पर राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांगा जवाब</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-high-court-e-waste-management-sop-state/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 16:04:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Chief Justice MS Sonak]]></category>
		<category><![CDATA[E-Waste Management]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand Pollution Control Board]]></category>
		<category><![CDATA[Shashi Sagar Verma PIL]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : झारखंड में इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के वैज्ञानिक और सुरक्षित निपटान की उचित व्यवस्था न होने तथा इसके लिए किसी ठोस मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. इस गंभीर विषय पर दायर एक जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>झारखंड में इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के वैज्ञानिक और सुरक्षित निपटान की उचित व्यवस्था न होने तथा इसके लिए किसी ठोस मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. इस गंभीर विषय पर दायर एक जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब तलब किया है.</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश कुमार की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य की कचरा प्रबंधन प्रणाली पर चिंता जाहिर की. अदालत ने आधिकारिक तौर पर पूछा कि क्या राज्य में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के वैज्ञानिक निपटान के लिए अब तक कोई गाइडलाइन या एसओपी तैयार की गई है? यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं?</p>
<p>खंडपीठ ने राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस संवेदनशील विषय पर अपना विस्तृत पक्ष प्रस्तुत करने का स्पष्ट निर्देश दिया है. यह जनहित याचिका प्रार्थी शशि सागर वर्मा की ओर से दायर की गई है.</p>
<p>अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शैलेश पोद्दार ने दलील पेश करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित प्रबंधन और निपटान को लेकर पहले ही गाइडलाइंस और नियमावली अधिसूचित कर रखी है. इस राष्ट्रीय नियमावली के अनुरूप सभी राज्यों को अपने-अपने क्षेत्रों में ई-वेस्ट के संग्रह, पृथक्करण. सुरक्षित परिवहन और रिसाइक्लिंग के लिए एक स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करनी होती है, लेकिन झारखंड में इस दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं.</p>
<p>याचिका में इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है कि झारखंड में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के प्रबंधन के लिए कोई अलग और प्रभावी व्यवस्था नहीं है. नतीजा यह है कि कंप्यूटर, मोबाइल, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का यह खतरनाक कचरा सीधे तौर पर सामान्य घरेलू और नगर निगम के ठोस कचरे के साथ मिला दिया जाता है.</p>
<p>अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि तेजी से बढ़ते डिजिटलाइजेशन के कारण राज्य में ई-वेस्ट की मात्रा हर दिन रिकॉर्ड गति से बढ़ रही है. वैज्ञानिक तरीके से रिसायकल न होने के कारण इसमें मौजूद तत्व मिट्टी और भूमिगत जल को जहरीला बना रही हैं. इससे पर्यावरण प्रदूषण का खतरा तो बढ़ ही रहा है, साथ ही मानव स्वास्थ्य और मवेशियों पर भी इसके जानलेवा और प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहे हैं.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<title>Jharkhand : अधिसूचित पेसा नियमावली मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी जबाब</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-high-court-pesa-rules-hearing-state-government-reply/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 17:31:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Chief Justice MS Sonak]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Justice Rajesh Shankar]]></category>
		<category><![CDATA[PESA Rules Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Tribal Rights Jharkhand]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित पेसा नियमावली को सही ढंग से लागू नहीं करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुईं. सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में राज्य सरकार से प्रार्थियों की ओर से उठाए [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित पेसा नियमावली को सही ढंग से लागू नहीं करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुईं. सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में राज्य सरकार से प्रार्थियों की ओर से उठाए गए सवालों पर बिंदुवार जबाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.</p>
<p>अदालत ने सरकार से पूछा कि प्रार्थियों द्वारा उठाए गए बिंदु सही हैं या नहीं. क्या संविधान के अनुरूप नियमावली में संशोधन किया गया है. मामले की अगली सुनवाई जून के अंतिम सप्ताह में होगी. वहीं इस मामले में दाखिल याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने पेसा नियमावली की मूल भावना के विपरीत संशोधन कर उसे लागू किया है. पेसा नियमावली में आदिवासियों एवं मूलवासियों को बिशेष अधिकार प्राप्त है. लेकिन संशोधनों के कारण उन्हें वे अधिकार नहीं मिल पा रहा है. जिनके वे हकदार हैं.</p>
<p>याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार ने अपने अनुरूप नियमावली लागू की है और सरकार द्वारा पूरे तंत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के के लिए नियमावली को प्रभावी तरीके से लागू नहीं की जा रही है और इसे महज आईवाश बनाकर छोड़ दिया गया है.</p>
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		<title>JHARKHAND: पुलिस कस्टडी में पिटाई पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख: मेडिकल रिपोर्ट देने वाले डॉक्टर पर गिरेगी गाज</title>
		<link>https://uditvani.in/crime/jamshedpur-crime/jharkhand-high-court-tarun-mahto-custodial-torture-seraikela-sp-medical-officer/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 May 2026 10:54:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[रांची]]></category>
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		<category><![CDATA[Tarun Mahto Case]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता तरुण महतो की पुलिस हिरासत में बुरी तरह पिटाई के मामले में सख्त रुख अपनाया है. मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य [...]</p>
<p>The post <a href="https://uditvani.in/crime/jamshedpur-crime/jharkhand-high-court-tarun-mahto-custodial-torture-seraikela-sp-medical-officer/">JHARKHAND: पुलिस कस्टडी में पिटाई पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख: मेडिकल रिपोर्ट देने वाले डॉक्टर पर गिरेगी गाज</a> appeared first on <a href="https://uditvani.in">Udit Vani</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800080;"><strong>उदित वाणी, रांची:</strong></span> झारखंड हाईकोर्ट ने सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता तरुण महतो की पुलिस हिरासत में बुरी तरह पिटाई के मामले में सख्त रुख अपनाया है.</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के प्रधान स्वास्थ्य सचिव और सरायकेला एसपी से जवाब तलब किया है. अदालत ने प्रधान स्वास्थ्य सचिव से पूछा है कि उस मेडिकल ऑफिसर के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है, जिसने तरुण महतो को अदालत में पेश करने से पहले &#8216;फिट फॉर कस्टडी&#8217; का सर्टिफिकेट दिया था.</p>
<h3 data-path-to-node="7"><span style="color: #800080;"><b data-path-to-node="7" data-index-in-node="0">झूठी मेडिकल रिपोर्ट पर अदालत का प्रहार</b></span></h3>
<p>अदालत ने टिप्पणी की कि जब तरुण महतो को बुरी तरह पीटा गया था और उनके शरीर पर जख्म के निशान मौजूद थे, तब स्वास्थ्य अधिकारी ने किस आधार पर उन्हें फिट बताया और झूठी रिपोर्ट तैयार की. इसके साथ ही, अदालत ने सरायकेला एसपी को जिले के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रगति पर 18 जून तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.</p>
<h3 data-path-to-node="9"><span style="color: #800080;"><b data-path-to-node="9" data-index-in-node="0">सरायकेला एसपी को CCTV पर स्टेटस रिपोर्ट देने का निर्देश</b></span></h3>
<p>सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को सूचित किया गया कि पीड़ित तरुण महतो को अंतरिम राहत के रूप में 1 लाख 50 हजार रुपये का मुआवजा प्रदान किया गया है. मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता रितेश कुमार महतो ने पक्ष रखा. तरुण महतो वर्ष 2024 के चुनाव में ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र से जेएलकेएम के प्रत्याशी रह चुके हैं.</p>
<h3 data-path-to-node="11"><span style="color: #800080;"><b data-path-to-node="11" data-index-in-node="0">1.50 लाख रुपये का मुआवजा और घटना का पृष्ठभूमि</b></span></h3>
<p>आरोप है कि 19 नवंबर 2025 की रात ईचागढ़ पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था, जहां उन्हें &#8216;थर्ड डिग्री टॉर्चर&#8217; दिया गया. इस घटना को लेकर तरुण महतो की पत्नी ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई थी, जिसे अदालत ने जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए स्वतः संज्ञान लिया.</p>
<p>पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने सरायकेला एसपी को व्यक्तिगत रूप से दस्तावेजों के साथ पेश होने का आदेश भी दिया था. अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित की गई है.</p>
<p>The post <a href="https://uditvani.in/crime/jamshedpur-crime/jharkhand-high-court-tarun-mahto-custodial-torture-seraikela-sp-medical-officer/">JHARKHAND: पुलिस कस्टडी में पिटाई पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख: मेडिकल रिपोर्ट देने वाले डॉक्टर पर गिरेगी गाज</a> appeared first on <a href="https://uditvani.in">Udit Vani</a>.</p>
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